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सादगी और शुचिता से जीवन को उदाहरण बनाने में ताउम्र जुटी रहीं हीरा बा

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अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की माता हीरा बा ने शुक्रवार सुबह 3.30 बजे अंतिम श्वांस ली। श्वांस लेने में तकलीफ के कारण उन्हें मंगलवार शाम अहमदाबाद के यूएन मेहता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गुरुवार से उनकी तबीयत में सुधार देखा गया और अस्पताल प्रशासन ने भी इसकी पुष्टि की थी।

चिकित्सकों के लाख प्रयास, विशेषज्ञ टीम के बावजूद 18 जून, 2022 को अपने सौंवे वर्ष में प्रवेश कर चुकी हीरा बा को रोका नहीं जा सका, वे 30 दिसंबर को सुबह 3.30 बजे अनंत यात्रा के लिए रवाना हो गईं। उनके पीछे भरा-पूरा परिवार उनकी यादों को संजोने के लिए रह गया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी माता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी माता की सीख थी कि काम करो बुदि्ध से और जीवन जियो शुद्धि से।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की माता हीरा बा का जन्म 18 जून 1923 को मेहसाणा जिले की विसनगर तहसील में हुआ था। बचपन में ही हीरा बा की माता चल बसी थीं। बिन माता की हीरा बा का बचपन बहुत गरीबी में बिता। संघर्षों के कारण कम उम्र में ही उनके पास अनुभव का खजाना था। घर में बड़ी होने के कारण पूरे परिवार की जिम्मेदारी भी उठाती रहीं।

बाद में छोटी उम्र में ही वडनगर के मोदी परिवार में उनकी शादी हो गई। वहां भी वे परिवार की सबसे बड़ी बहु थीं। यहां भी उनपर जिम्मेदारी बड़ी थी, लेकिन उन्होंने तनिक भी विचलित हुए बिना इसे उठाते हुए परिवार को एकजुट रखा। वडनगर के एक छोटे से घर में वे रहती थीं, जहां एक भी खिड़की नहीं थी। पति दामोदारदास मोदी ने जो थोड़ी बहुत सहूलियत दी थी, उसी से वे संतोष रखकर घर-गृहस्थी चलाती रहीं।

छोटे पुत्र पंकज के साथ जीया सादगी का जीवन

घर पर आर्थिक संकट के दौर में हीरा बा ने दूसरे घरों में जूठे बर्तन भी मांजे। चरखा चलाने का भी उन्होंने काम किया। वे रुई कातने का भी काम करती रहीं। संतान में उनके पांच पुत्र और एक पुत्री है। सबसे बड़े पुत्र सोमा मोदी, इसके बाद अमृत, नरेन्द्र, प्रहलाद और पंकज मोदी हैं। एक पुत्री का नाम वासंती है।

बाद में जब बेटे अच्छी स्थिति में पहुंच गए तो भी वे छोटे पुत्र पंकज मोदी के साथ ही रहती। पंकज मोदी सूचना विभाग में सामान्य कर्मचारी थे। उम्र अधिक होने के बाद भी वे अपनी दिनचर्या खुद ही करने की आग्रह रखती। वे अपने घर में बने भोजन को ही ग्रहण करती।

ज्यादा समय वे खिचड़ी, दाल-भात, लापसी खाती, यह सभी उन्हें बहुत अच्छी लगती थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब भी उनसे मिलने आते तो वे गुड़ और लापसी से उनका मुंह मीठा कराती। वे हीरा बा के साथ भोजन करते तो रोटी-सब्जी, दाल-भात और सलाद के साथ सादा भोजन करते।

पीएम आवास पर गईं

वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी वर्ष 2016 में अपनी माता हीरा बा को अपने साथ दिल्ली लेकर गए थे। यहां वे माता को व्हीलचेयर में बिठा कर पीएम हाउस के उद्यान में ले गए और उन्हें वहां के उद्यान के बारे में जानकारी दी।

सौंवे वर्ष में प्रवेश पर कई कार्यक्रम हुए

18 जून 2022 को हीरा बा ने 100वें वर्ष में प्रवेश किया तो वडनगर व गांधीनगर में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी माता से आशीर्वाद लेने उनके पास आए।

हीरा बा के गांव वडनगर के हाटकेश्वर महादेव मंदर में 100 दीये की आरती की गई। वडनगर के सभी स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक आहार दिए गए। वहीं, वडनगर में उनके शतायु होने को लेकर नवचंडी यज्ञ भी आयोजित किए गए थे।

क्रिकेटर ऋषभ पंत सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल, रुड़की के पास डिवाइडर से टकराई पंत की कार

रुड़की। मंगलौर कोतवाली क्षेत्र के नारसन में शुक्रवार सुबह करीब 5:30 बजे भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत की कार अचानक डिवाइडर से टकरा गई, जिस कारण कार पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई और ऋषभ पंत गंभीर रूप से घायल हो गए।

मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों व पुलिसकर्मियों ने ऋषभ पंत को कार से बाहर निकाल कर अस्पताल में भर्ती कराया।

ऋषभ पंत शुक्रवार सुबह दिल्ली से रुड़की के डेरा स्थित अपने घर लौट रहे थे। जैसे ही उनकी कार नारसन पहुंची तो अचानक डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में पंत की कार में आग लग गई और काफी हद तक कार जल गई।

गंभीर रूप से घायल पंत को गाड़ी से किसी तरह निकाला गया। पहले एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन प्राथमिक चिकित्सा के बाद उन्हें दूसरी जगह रेफर किया गया है।

मुख्यमंत्री ने घायल ऋषभ पंत की ली जानकारी, उपचार का खर्च उठाएगी सरकार

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को सड़क दुर्घटना में घायल क्रिकेटर ऋषभ पंत के बारे में अधिकारियों से जानकारी लेते हुए उनके समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषभ पंत के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि उनके इलाज का खर्च राज्य सरकार की ओर से वहन किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो एयर एम्बुलेंस की भी व्यवस्था की जाए।

शुक्रवार सुबह लगभग 5:30 बजे कोतवाली मंगलोर क्षेत्रांतर्गत मोहम्मदपुर जट के पास क्रिकेटर ऋषभ पंत की कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हुए है। मौके पर 108 व हरिद्वार पुलिस द्वारा घायल पंत को सबसे पहले रुड़की अस्पताल में शिफ्ट किया, जहां से उन्हें देहरादून रेफर किया गया है।

हीराबा का निधनः पीएम मोदी ने माता को दिया कंधा, अंतिम रथ से श्मशाम के लिए रवाना

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अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की माता हीराबा का 100 वर्ष की आयु में निधन के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार सुबह गांधीनगर स्थित रायसण में छोटे भाई पंकज मोदी के घर पहुंचे।

प्रधानमंत्री ने माता का अंतिम दर्शन किया। यहां से हीराबा के पार्थिव शरीर को गांधीनगर के सेक्टर 30 के श्मशान ले जाया गया।

अहमदाबाद के यूएन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर में शुक्रवार तड़के 3.30 बजे हीराबा का निधन हो गया। अस्पताल के मेडिकल बुलेटिन में इसकी जानकारी दी गई।

हीराबा की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें मंगलवार को यूएन मेहता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां 6 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य पर निगरानी रख रही थी।

अस्पताल के मेडिकल बुलेटिन में गुरुवार को उनके स्वास्थ्य में सुधार की बात कही गई थी। मंगलवार को पीएम मोदी को समाचार मिला तो वे लगातार डॉक्टरों के सम्पर्क में थे। माता की खबर पर वे लगातार नजर रख रहे थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां हीराबा का निधन

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अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां हीराबा का निधन हो गया। इसी वर्ष उन्होंने जीवन के सौ वर्ष पूरे किए थे।

बुधवार तड़के अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अहमदाबाद के यूएन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बीमार मां से मिलने के लिए अस्पताल पहुंचे थे।

मां के निधन पर नरेन्द्र मोदी ने भावुक संदेश ट्वीट किया है- शानदार शताब्दी का ईश्वर चरणों में विराम.. मां में मैंने हमेशा उस त्रिमूर्ति की अनुभूति की है, जिसमें एक तपस्वी की यात्रा, निष्काम कर्मयोगी का प्रतीक और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध जीवन समाहित रहा है।

Happy New Year 2023: गाड़ी तो तेरा भाई चलाएगा डायलॉग चिपकाने वाले रहें सावधान, इतनी शराब पीकर चला सकते हैं Car, Bike और Scooter, जान लें नियम

Drink And Drive Rules: यातायात नियमों के अनुसार बात करें तो देश में शराब पीकर मोटर वाहन चलाना अपराध की श्रेणी में आता है, यदि आप ड्रिंक करके ड्राइविंग करते है तो इसके लिए पुलिस आप पर चालानी कार्यवाही तो कर ही सकती है साथ ही जेल भी भेज सकती है.

यदि आप पहली बार शराब के नशे में कोई भी मोटर वाहन ड्राइव करते हुए पकड़े जाते है तो पुलिस द्वारा चालानी कार्यवाही करते हुए आपसे 10,000 रुपये वसूल सकती है और मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत अदालत वहान चालक को 6 महीनो के लिए जेल की हवा खाने के लिए भेज सकती है. अरे हाँ सिर्फ चालन या जेल ही नहीं अदालत चाहे तो आपको चालान के साथ जेल दोनों एक साथ दे सकती है.

ये तो थी पहली बार शराब के नसे में मोटर वहां ड्राइव करते पकडे जाने पर अब बात करते है दूसरी बार यदि आप ऐसा करते पुलिस के शिकंजे में आते है तो इस बार आपको 2 साल की जेल और/या 15000 रुपये का चालान होना तय है. ऐसे में अगर आप नए साल पर पार्टी (New Year 2023 Celebration) करने का प्लान बना रहे हैं तो ड्रिंक एंड ड्राइव (Drink And Drive) से बचें. यानी, शराब पीकर वाहन न चलाएं.

नियमों के अनुसार: कितनी शराब पीकर वाहन चला सकते हैं?

अगर ट्रैफिक पुलिस को ड्राइव करने वाले व्यक्ति पर नशे में ड्राइव करने का संदेह होता है तो पुलिस द्वारा चालक का बीएसी टेस्ट (BAC Test) किया जा सकता है. और आप नशे में ड्राइव करते मिले तो पुलिस आपके साथ चलानी कार्यवाही और वहां की जप्ती की कार्यवाही कर सकती है. हालांकि, यदि आपने एक लिमिट में ही शराब पी है तो आप पर पुलिस द्वारा नशे में मोटर वहां चलाने वाली कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी. नियमों के अनुसार यदि आपके ब्लड में अल्कोहल (शराब) की मात्रा 30 मिलीग्राम प्रति 100 मिलीलीटर ब्लड पाई जाती है तो आप वाहन चला सकते हैं और ऐसा होने पर कार्रवाई नहीं होगी. लेकिन, अगर अल्कोहल की मात्रा इससे ज्यादा हुई तो फिर पुलिस द्वारा कार्यवाही होना तय है.

नए साल की पार्टी के दौरान रखें इसका ध्यान

सबसे पहली चीज तो शराब पीना ही नहीं चाहिए और वैसे तो नए साल पर बहुत से लोग पार्टी करते हैं और जश्न मनाते हैं. कई लोग शराब का सेवन भी करते ही है. अगर आप भी नए साल की पार्टी में शराब पीने वाले हैं तो फिर ड्रिंक एंड ड्राइव से जुड़े नियम को जरूर ध्यान में रखें. अगर पार्टी के दौरान या पार्टी के बाद आप ही वाहन चलाना वाले हैं, तो लिमिट में ही शराब पिएं या कोशिश करें कि शराब का सेवन ना ही करें.

नए वर्ष में अक्सर देखा जाता है कि शराब के नशे में होने की वजह से बहुत सी दुर्घटनाए होती है कई लोग बुरी तरह घायल होते है तो कई लोग अपनी जान से हाथ धो बैठते है, पानी वाले स्थानों पर यदि आप जातेह ई तो आपको पानी से दूरी जरूर बनानी चाहिए क्योंकि न्यू ईयर पर भीड़ भाद अत्यधिक होती है जिससे धक्का मुक्की की संभावना भी बढ़ जाती है जिससे कोई अनहोनी भी हो सकती है.

Web Title: Happy New Year 2023: Those who paste the dialogue, be careful, you can drive Car, Bike and Scooter after drinking so much alcohol, know the rules

New Year 2023 Celebration Plan: कश्मीर और लद्दाख की नैचुरल ब्यूटी के साथ इन जगहों पर बना सकते है जाने का प्लान

New Year 2023 Celebration Plan: कश्मीर और लद्दाख ये दोनों ऐसी ख़ास जगह है जहाँ हर कोई एक ना एक बार जरूर जाना चाहता है, कश्मीर और लद्दाख दोनों जगहों पर कई सारे आकर्षण के कारण हैं. यहां कई खूबसूरत जगहें हैं जहां आप न्यू ईयर सेलिब्रेशन (New Year 2023 Celebration) कर सकते हैं.

New Year 2023 Celebration: कश्मीर और लद्दाख की नैचुरल ब्यूटी के साथ

आज हम आपको कश्मीर और लद्दाख की कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं जो ना सिर्फ खूबसूरत हैं बल्कि आप वहां खूब एन्जॉय भी कर सकते हैं. 

तो चलिए लद्दाख और कश्मीर की 7 ऐसी जगहों के बारे में जानिए जहाँ आप नव वर्ष 2023 (New Year 2023 Celebration) का सेलिब्रेशन कर सकते है

श्रीनगर (Srinagar)

यह सबसे लोकप्रिय वैकेशन प्लेस है और इसे यूं ही धरती का स्वर्ग नहीं कहा जाता. 2000 से अधिक सालों से यहां का इतिहास ना सिर्फ जानने के लिए रोचक हैं बल्कि यहां कई टेस्टी फूड्स और खूबसूरत जगहें हैं.

पहलगाम (Pehalgam)

लिड्डर नदी और खूबसूरत घाटियों से घिरा हुआ पहलगाम किसी को भी आकर्षित कर सकता है. यहां आप रिवर राफ्टिंग को एन्जॉंय कर सकते हैं. शहर को कवर करने वाले ऊंचे देवदार के पेड़ सुबह के समय एक अद्भुत दृश्य बनाते हैं.

सोनमर्ग (Sonmarg)

सोनमर्ग को सोने का मैदान भी कहा जाता है. ये जगह कश्मीर की सिनिक ब्यूटी के लिए फेमस है. बर्फ से ढके पहाड़ों, हरी घास के मैदानों और नैचुरल ब्यूटी के साथ सोनमर्ग को स्वर्ग का राजा कहते हैं. यहां आप रिवर राफ्टिंग, जोरबिंग और ट्रेकिंग को एन्जॉय कर सकते हैं.

गुलमर्ग (Gulmarg)

गुलमर्ग में दुनिया के सबसे बड़े रोपवे के लिए फेमस है. समुद्र तल से जगह लगभग 3979 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. इस समय मौसम में बर्फबारी को एन्जॉय कर सकते हैं.

पैंगोंग लेक (Pangong Lake)

जनवरी के महीने में पैंगोंग लेक जादुई लेक से कम नहीं. दिसंबर के अंत में लेक पूरी तरह से बर्फ से जम जाती है. आप यहां कई स्पोर्ट्स एक्टिविटी कर सकते हैं. आप यहां होमस्टेज चुन सकते हैं.

नुब्रा वैली (Nubra Valley)

सर्दियों में लेह और नुब्रा वैली बर्फ से ढकी होती है. हालांकि इस मौसम में यहां जाना किसी चुनौती से कम नहीं है. यहां जाना आपके लिए किसी एडवेंचर से कम नहीं होता. आप यहां होमस्टे और गेस्टहाउस मिल जाएंगे जहां आप न्यू ईयर अच्छी तरह से एन्जॉय कर सकते हैं.

लामायुरु (Lamayuru)

लामायुरु लद्दाख का एक छोटा सा गांव है. ये कारगिल से लेह के बीच ट्रैवल के बीच ब्रेक लेने की जगह है. यहां पुराने मठ है जो कि आपके लिए आकर्षक हो सकते हैं. ऐसे मानते हैं यहां एक झील थी जो कि सूख चुकी है.

Web Title: New Year 2023 Celebration Plan: You can plan to visit these places with the natural beauty of Kashmir and Ladakh

हथियारों में घिरी प्रज्ञा! साध्वी के समर्थन में आई उषा कहा हमारे देवी देवता भी हथियार रखते थे

भोपाल: (संजना प्रियानी) – मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर अपने बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में आती रहती हैं. एक बार फिर वह अपने विवादित बयानों को लेकर मुसीबत में फंसती जा रही हैं दरअसल, कर्नाटक पुलिस ने शिवमोगा में उनके खिलाफ FIR दर्ज कि गई है वहां की पुलिस ने उनपर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया है.

हालांकि, विवादित बयानों के लिए लोगों की नजरों में आना उनके लिए कोई नहीं बात नहीं है कई बार साध्वी ने विवादित बयान दिए साध्वी ने मालेगांव ब्लास्ट के शहीद हेमंत करकरे का दिया था श्राप इस बयान पर तूल पकड़ता देख बाद में साध्वी ने माफ़ी भी मांगी थी.

असल में साल 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस की आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने बीजेपी से टिकट नहीं मिलने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से जो बयान दिया, वह विवादित हो गया. साध्वी ने मुंबई में 26/11 के आतंकवादी हमले में शहीद पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे को लेकर ये बयान दिया था.

साध्वी ने कहा था कि उन्होंने करकरे को श्राप दिया था, जिसके कारण करकरे की आतंकवादी हमले में मौत हो गई.अपने इस बयान पर साध्वी ने बाद में माफी मांग ली थी.

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने करकरे के खिलाफ बयान देने के बाद बाबरी ढांचे को ढहाने में शामिल होने का बयान देकर सबको चौंका दिया. प्रज्ञा ने प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा था कि बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराने का अफसोस नहीं है, ढांचा गिराने पर तो हम गर्व करते हैं. उनके बयान पर मचे शोर के बाद बीजेपी ने प्रज्ञा को चुप रहने तक की सलाह दी थी. पार्टी ने साध्वी को अनुशासित रहने को कहा और चुनाव आयोग ने 72 घंटे के लिए प्रचार पर प्रतिबंध लगा दिया था.

प्रज्ञा सिंह ठाकुर यहीं नहीं रुकी वह लगातार अपने विवादित बयान देती रही साध्वी ने लोकसभा चुनाव 2019 के अंतिम चरण से पहले प्रचार के दौरान अभिनेता से नेता बने मक्कल नीधि मय्यम के संस्थापक कमल हासन के ‘देश का पहला आतंकी हिंदू था’ वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए साध्वी प्रज्ञा ने नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था.

उन्होंने कहा था – गोडसे देशभक्त थे, हैं और रहेंगे. गोडसे को आतंकवादी कहने वाले स्वयं के गिरेबां में झांककर देखें…चुनाव में ऐसे लोगों को जवाब दे दिया जाएगा. उनके इस बयान पर कुछ ही देर बाद पार्टी ने किनारा कर लिया और कड़ी निंदा करते हुए उन्हें सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने की हिदायत दे डाली थी.

इसी तरह साध्वी प्रज्ञा ने मध्‍य प्रदेश के सीहोर में एक कार्यक्रम के दौरान धर्मशास्त्र का हवाला देते हुए कहा कि जब हम किसी क्षत्रिय को क्षत्रिय कहते हैं तो उसे बुरा नहीं लगता है. यदि हम किसी ब्राह्मण को ब्राह्मण कहते हैं तो उसे बुरा नहीं लगता है. यदि हम किसी वैश्य को वैश्य कहते हैं तो उसे बुरा नहीं लगता है, लेकिन यदि हम किसी शुद्र को शुद्र कहते हैं तो वह बुरा मान जाता है. कारण क्या है? क्योंकि वे बात को समझते नहीं हैं.

बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली, सुषमा स्वराज और बाबूलाल गौर के निधन के बाद साध्वी प्रज्ञा ने ऐसा बयान दिया था, जिसकी ख़ूब चर्चा हुई थी। प्रज्ञा ने कहा था कि बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की एक के बाद एक हो रही मौतों के पीछे विपक्ष का हाथ है और वह कोई ‘मारक शक्ति’ का उपयोग कर रहा है।

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने कांग्रेस के उम्मीदवार और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को आतंकवादी बताने वाला बयान दिया था. उन्होंने यह बयान सीहोर में चुनाव प्रचार कार्यालय का उद्घाटन करते हुए दिया था , हाल ही में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कर्नाटक के शिमोगा में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था – “अपने घरों में हथियार रखो और कुछ नहीं तो सब्जी काटने वाला चाकू जरा तेज रखो, स्पष्ट बोल रही हूं कि हमारे घरों में भी सब्जी काटने के लिए हथियार तेज होना चाहिए. …..ता नहीं कब कैसा मौका आए. धारदार… पता नहीं क्या स्थिति पैदा हो जाए. अगर हमारी सब्जी अच्छे से कटेगी तो हमारे दुश्मनों के सिर भी अच्छे से कटेंगे.” इस मामले में शिवमोगा पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर उनके सामने मुश्किलें खड़ी कर दी है.

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के विवादित बयान का शिवराज सरकार की मंत्री उषा ठाकुर ने किया समर्थन उषा ठाकुर ठाकुर ने कहा की देवी देवता भी हथियार रखते थे और जनता को आत्मरक्षा के लिए हथियार रखाना में कोई बुराई नहीं है ऐसे विवादित बयानों पर शिवराज सरकार किस तरह अपना दमन बचाती है या प्रज्ञा को फिर अनुशाषित रहने की सलाह दी जाएगी

कारण, जो भारतीय युवाओं में पैदा कर रहे तलाक का ट्रेंड – अतुल मलिकराम (समाजसेवी)

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यूँ तो भारत में तलाक की दर दो फीसदी से भी कम है, लेकिन भारतीय युवाओं में तलाक का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। पिछले कुछ सालों में युवा शादी-शुदा जोड़ों के अलग होने की प्रवृत्ति में तेजी से उछाल आया है। ज्यादातर मामलों में शादी को एक महीना भी पूरा नहीं होता और तलाक की अर्जी अदालत के दरवाजे पहुँच जाती है।

लेकिन सवाल है कि ऐसा क्यों? वो कौन-से कारण हैं, जो युवाओं को इंपेशन्ट बना रहे हैं, और शादी जैसे अमूल्य रिश्ते को मजाक बनने पर मजबूर कर रहे हैं। मैं इस विषय में बहुत अधिक गर्त तक नहीं जाना चाहता। लेकिन जो मौजूदा सामाजिक संरचना के हिसाब से कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे देखने को मिलते हैं।

युवाओं में तेजी से बढ़ती रिश्तों को खत्म करने के प्रथा में प्रतिबद्धता के मुद्दे, पारिवारिक दबाव और अपरिपक्वता एक अहम् योगदान निभाता है। इसे आसान भाषा में समझने की कोशिश करें, तो पाएँगे कि अधिकतर मामलों में लड़के का परिवार, जॉब वाली लड़की की चाहत में एक महत्वाकांक्षी पढ़ी-लिखी लड़की लाने की इच्छा रखता है, ले भी आता है, और फिर रोक-टोक शुरू कर देता है।

अरेंज होने वाली ज्यादातर शादियों से पूर्व लड़की को मिलने वाली आजादी के बारे में लड़का-लड़की तो आपस में बात करते हैं, कई मामलों में लड़के के माता-पिता भी करते हैं, लेकिन बाद में वहीं सास-ससुर बन जाते हैं, और शादी के कुछ दिन महीने बाद ही लड़की के बाहर जाने-आने पर पाबंदियाँ लगाने लगते हैं या समय परिस्थिति के हिसाब से उन्हें ये लगने लगता है कि बहु बाहर नहीं जाए और उसे समाज का हवाला देने लगते हैं।

तलाक के मामले युवाओं में बढ़ रहे हैं, तो बेशक एक बड़ा पढ़ा-लिखा वर्ग इसका हिस्सा बन रहा है। वजह बड़े शहरों में रहने वाली लड़की को शादी के बाद दबाने की कोशिश देखने को मिलती है। परिवार शायद यह समझने में चूक जाते हैं कि आज के ज़माने में, पति-पत्नी दोनों की इन्कम बढ़ गई है, यानि लड़की भी उतनी ही इंडिपेंडेंट है।

फिर परिवार और खुद लड़का भी घर अच्छे से चलाने और मॉडर्न सुख-सुविधाओं से लैस लाइफस्टाइल अपनाने के लिए जॉब वाली लड़की ही चुनता है। लेकिन बाद में आप उससे उम्मीद करते हैं कि वह घर के कामों में भी शिरकत करे, जैसे- खाना बनाना, साफ सफाई आदि, लेकिन वह तो अपनी पिछली लाइफस्टाइल के मुताबिक जोमाटो और बाइयों के भरोसे घरेलु काम निपटाने में यकीन रखती है। ऐसे में यह झगड़ों और दूरियों का दूसरा सबसे बड़ा कारण, ‘स्वतंत्रता’ में खलल बनती है।

खासकर लड़कियों के ऊपर और भी कई तरह के दवाब डाले जाते हैं। इसमें लड़की के ऊपर एक दवाब परिवार को जल्दी आगे बढ़ाने का भी होता है, जो आम तौर पर पति-पत्नी के बीच मैच्योरिटी से लिया गया फैसला होना चाहिए, लेकिन कई बार, माता-पिता या सास-ससुर इस विषय के मालिक बन जाते हैं।

वहीं हर रिश्ते की डोर को मजबूती देने में समय का बहुत बड़ा योगदान होता है। ऐसे में जब आप एक इंडिपेंडेंट लड़की जो अपने हिसाब से, अपनी शर्तों पर, अब तक का जीवन जीती आई है, परिवार उसे अपने पौराणिक ख्यालों में उलझाने की कोशिश करते हैं, तो रिश्तों को कमजोर करने में इनका भी एक बड़ा योगदान होता है।

ये ऐसे कुछ जायज कारण हैं, जो आमतौर पर नजर आते हैं, और ज्यादातर मामले इसी से पीड़ित दिखते हैं। ऐसे में इसका समाधान भी है, जो हमें अपने भीतर से ही निकालना होता है। माता-पिता की ओर से देखें, तो जब आप रिश्ता फिक्स करने जा रहे हैं, उसी समय आप भविष्य की बातों, और सभी संभावित परिदृश्यों पर चर्चा कर सकते हैं।

मूलरूप से लड़के के परिवार से कहना चाहूँगा कि जब लड़की पसंद कर रहे हैं, इस बात का ख्याल रखें कि यदि आप जॉब वाली लड़की की मंशा रखते हैं, तो उसे अब तक जितनी आजादी मिली होगी, उसके अनुसार स्वीकार कर सकते हैं, तो करिए, नहीं तो मत करिए। यदि आपको घरेलु लड़की चाहिए, तो शुरू से घरेलु कामों में आगे रही लड़की ही ढूँढ़िए या पसंद करिए।

कुछ लड़कियाँ दोनों में निपुण होती हैं, लेकिन आप बाद में कोई भी बात थोपने की कोशिश न करें। शादी से पूर्व आपके पास पर्याप्त समय होता है, कम से कम लड़की की लाइफस्टाइल समझने के लिए।

दूसरा एक समाधान लड़की के ऊपर परिवार को आगे बढ़ाने का दवाब नहीं होना चाहिए। हमें यह फैसला लेने की आजादी लड़के और लड़की के ऊपर ही छोड़ देना चाहिए।

शादी के अगले साल ही बच्चे की या दादा-दादी या नाना-नानी बनने की उम्मीद न करें, यह दवाब पहले लड़के पर आता है, वह उसे लड़की पर ट्रांसफर करता है, और फिर दवाब में रिश्तों का दम घुटने लगता है।

तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण, लड़के को अपने विचारों को खुला रखना चहिए। आप या आपकी पत्नी को आप एकदम से आपके प्रति समर्पित होने की उम्मीद नहीं कर सकते। कई मामले में लड़के भी ऐसा नहीं कर पाते हैं, इसलिए अंडरस्टैंडिंग और थोड़ा समय, सामने वाले और अपने रिश्ते को जरूर दें।

Happy New Year 2023: 14 महीनों का होगा वर्ष 2023, हर दिन कुछ लम्हें चुराकर इस साल की गुल्लक में भरते चलें

Happy New Year 2023: हर दिन कुछ लम्हें चुराकर इस साल की गुल्लक में भरते चलें….. इस ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति कब और कैसे हुई, इसका सटीक उत्तर समय के पन्नों में दफ्न है। वही समय, जो सतत रूप से दिन और रात की ओट में लुका-छिपी खेलकर प्रकृति और हमारे जीवन को गति दे रहा है।

वही समय, जिसकी पारी में कभी-भी दिन के बाद रात और रात के बाद दिन होने की प्रक्रिया रूकती नहीं है। कालचक्र के ये दिन और रात अरसों से बिना अनुपस्थित हुए अपनी हाजिरी लगाते आ रहे हैं। कहने का अर्थ यह है कि निरंतर चलने वाला समय का पहिया कभी नहीं रुकता है।

इतिहास गवाह है कि एक दिन के 24 घंटों और एक वर्ष के 12 महीनों में कभी फेर-बदल नहीं हुआ है। इसी के अनुसार सारी दुनिया अपनी दिनचर्या तय करती है। काम-काज, परिवार, समाजसेवा और अन्य तमाम जिम्मेदारियों की आड़ में ये दिन के 24 घंटे और साल के 12 महीने कब बीत जाते हैं, कहाँ पता चलता है? अपनी खुशियों और स्वास्थ्य के लिए इस भागते-दौड़ते जीवन में समय कहाँ बचता है?

सेकंड, मिनट, घंटे, दिन, सप्ताह और महीनों के आगे बढ़ने के साथ ही समय हमें नए वर्ष- 2023 की चौखट पर ले आया है। लेकिन, इतिहास के पन्नों पर स्वर्ण अक्षरों से लिखी एक वर्ष में 12 महीने की गाथा को बदलने का अब समय आ गया है। वर्ष 2023, 12 महीनों का नहीं, बल्कि 14 महीनों का होगा। इन दोनों नए महीनों में से पहला महीना वसूली है उन खुशियों की, जो पिछले साल हमने जिम्मेदारियों के ऊपर न्यौंछावर कर दीं, और दूसरा महीना वसूली है स्वास्थ्य की, जिस पर वर्षभर हमारा ध्यान ही नहीं गया।

अब यह वर्ष 14 महीने का कैसे होगा, यह भी सुन लीजिए। आम आदमी को सोने के लिए मानक समय कम से कम 8 घंटों का चाहिए होता है। यदि हम अपनी खुशियों का मोल जानकर खुद के साथ समय बिताने के लिए अपनी नींद में से 2 घंटे प्रतिदिन कम कर दें, तो हम अपने 30 दिनों के महीने से सीधे तौर पर 60 घंटे बचा लेंगे। अब यदि हम 12 महीनों तक ऐसा करने में समर्थ हो पाए, तो समझो कि हमने पूरे वर्ष में से 720 घंटों पर जीत हासिल कर ली है।

एक दिन के 24 घंटे से इसे विभाजित करने पर हम सीधे-सीधे 30 दिन यानि 1 महीना अपने नाम कर लेंगे, जिसका नाम है ‘हैप्पीनेस’। खुद के साथ समय बिताने के लिए इस महीने को अपने 2023 के कैलेंडर में जरूर जोड़ें।

हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में अपने गंतव्य पर आने-जाने, तैयार होने में लगा समय प्रतिदिन लगभग 2 घंटे व्यर्थ करता है। यदि हम महामारी की वजह से मिले वर्क फ्रॉम होम को कल्चर की तरह फॉलो करें, तो अपनी निजी जिंदगी से प्रतिदिन के 2 घंटे अपने नाम कर लेंगे और उपरोक्त सूत्रों के अनुसार 1 और महीना सिर्फ हमारा होगा, जिसका नाम है ‘हेल्थ’। काम-काज से परे अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए इस एक महीने को अपने नए वर्ष के कैलेंडर में जरूर जोड़ें।

इस प्रकार वर्ष 2023, 12+2=14 महीनों का होगा। तो सूत्र कंठस्थ कर लें: 2×30=60×12=720/24=30 दिन। इन दो महीनों में वो काम करें, जिन्हें करने के लिए आपको 12 महीने कम पड़ जाते हैं, क्योंकि इन पर सिर्फ और सिर्फ आपका अधिकार है।

अपनी खुशियों और स्वास्थ्य की परवाह किए बिना जिन पैसों को कमाने की होड़ में हम अपनी युवा अवस्था दाँव पर लगा रहे हैं, यकीन मानिए, उम्र के अगले पड़ाव पर इन पैसों से मोह खत्म हो चुका होगा, तब जरुरत होगी खुशियों की, बेहतर स्वास्थ्य की और किसी के साथ की….. इसलिए मेरी सलाह है कि हर दिन कुछ लम्हें चुराकर इस साल की गुल्लक में भरते चलें…..

Web Title: Happy New Year 2023: Year 2023 will be of 14 months, steal some moments every day and keep filling this year’s piggy bank

“धीरूभाई अंबानी मेरी प्रेरणा हैं”, गौतम अडानी ने खुलासा किया, “एक विनम्र व्यक्ति …”

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एशिया के सबसे अमीरों की लिस्ट में टॉप पर आने वाले बिजनेसमैन गौतम अडानी देश के कई एंटरप्रेन्योर्स के लिए प्रेरणा हैं। लेकिन गौतम अडानी की प्रेरणा कौन है? इसका जवाब उन्होंने खुद दिया है। गौतम अडानी ने ‘इंडिया टुडे’ को दिए एक इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया और कहा कि वह धीरूभाई अंबानी से बहुत प्रेरित थे।

“धीरूभाई अंबानी देश के करोड़ों उद्यमियों के लिए एक प्रेरणा हैं। उन्होंने दिखाया है कि कैसे एक विनम्र व्यक्ति बिना किसी समर्थन या संसाधनों के एक विश्व स्तरीय व्यवसाय का निर्माण कर सकता है और सभी बाधाओं को दूर कर सकता है और एक महान विरासत को पीछे छोड़ सकता है, ”गौतम अदानी ने कहा।.

गौतम अडानी कहते हैं, “मैं धीरूभाई अंबानी से बहुत प्रेरित हूं, जो पहली पीढ़ी के उद्यमी हैं, जिन्होंने बहुत विनम्रता से शुरुआत की।” गौतम अडानी ने इस मौके पर कई अन्य मुद्दों पर भी टिप्पणी की.

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मुकेश अंबानी को पछाड़कर गौतम अडानी की संपत्ति 2022 में दोगुनी हो गई। अडानी दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में तीसरे स्थान पर हैं।

जब उनसे पूछा गया कि इतनी संपत्ति होने और भारत में पहले और दुनिया में तीसरे स्थान पर होने के बारे में वह क्या सोचते हैं, तो उन्होंने कहा, “मीडिया ने यह सब बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है। मैं पहली पीढ़ी का उद्यमी हूं जिसने शून्य से शुरुआत की। मुझे चुनौतियों का सामना करना पसंद है। जितनी बड़ी चुनौती, मैं उतना ही खुश हूं। मेरे लिए, लोगों के जीवन में बदलाव लाने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का अवसर किसी वेल्थ रैंकिंग या किसी अन्य मूल्यांकन सूची में होने से कहीं अधिक संतोषजनक और महत्वपूर्ण है।

गौतम अडानी ने यह भी कहा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर उन्हें देश की सेवा करने का मौका देने के लिए वे भगवान के शुक्रगुजार हैं.

तुम्हें किससे खुशी मिलती है? इस बारे में पूछे जाने पर अडानी ने कहा, ‘यह मेरी जिंदगी का सबसे अहम साल था। इस साल मैंने अपना 60वां जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर, मेरे परिवार ने मेरे दिल के करीब तीन सामाजिक कारणों के लिए अडानी फाउंडेशन को 60 हजार करोड़ रुपये दान करने का फैसला किया है। यह पैसा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और कौशल विकास पर खर्च किया जाएगा जो किसी भी राष्ट्र की नींव हैं।

Web Title: “Dhirubhai Ambani is my inspiration”, reveals Gautam Adani, “A humble man…”