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INDORE: इंदौर के ईमलीखेड़ा में ऊर्जीकृत हुआ देश का पहला बिजली ग्रिड

इंदौर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM MODI) द्वारा पिछले वर्ष जुलाई में ऊर्जा मंत्रालय के लिए प्रारंभ रिवेम्प्ड डिस्ट्रिब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत देश का पहला 33/11 केवी का बिजली ग्रिड इंदौर जिले के सांवेर तहसील के ईमलीखेड़ा में पूर्ण होकर ऊर्जीकृत हुआ है।

इस ग्रिड से पाँच गाँवों की पच्चीस हजार जनता को उच्च गुणवत्तायुक्त चौबीस घंटे बिजली मिलेगी। इस उपलब्धि पर ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट और इंदौर के सांसद श्री शंकर लालवानी ने बधाई दी है।

मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर के प्रबंध निदेशक श्री अमित तोमर ने बताया कि इस ग्रिड के लिए भूमि-पूजन फरवरी 2023 में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने किया था। इसके बाद जीआईएस सर्वे के आधार पर ग्रिड के लिए सारी तैयारी कर समय पर कार्य प्रारंभ किया गया।

करीब पांच माह में उक्त ग्रिड तैयार होकर ऊर्जीकृत हो गया है। पाँच एमवीए क्षमता का उक्त ग्रिड तीन करोड़ की लागत का है। इससे आठ हजार बिजली उपभोक्ता एवं पच्चीस हजार आबादी को फायदा मिलेगा।

ग्रिड के निर्माण की विद्युत उपकरण सामग्री, पावर ट्रांसफार्मर, वीसीबी, केबल, कंडक्टर आदि राष्ट्रीय स्तर की एनएबीएल में परीक्षण उपरांत ही उपयोग में लाए गए। पहली बार ग्रिड में पैंथर कंडक्टर का उपयोग किया गया है, जो परंपरागत कंडक्टर से करीब दोगुनी क्षमता का है।

कंपनी क्षेत्र में इस तरह के 97 ग्रिडों का कार्य विभिन्न चरणों में क्रियाशील है। आरडीएसएस के तहत बनाए जा रहे ग्रिडों एवं संबंधित लाइनों पर कुल 380 करोड़ रूपए व्यय हो रहे हैं। इससे कंपनी क्षेत्र की बिजली वितरण क्षमता करीब 500 एमवीए बढ़ जाएगी।

ग्रिडों के साथ ही कंडक्टरों की जगह केबल, इंदौर, उज्जैन आदि के चुनिंदा स्थानों पर अंडरग्राउंड केबल, पुराने ग्रिडों का नवीनीकरण एवं क्षमता में बढ़ोत्तरी, पुराने कंडक्टरों की जगह नए एवं ज्यादा क्षमता के कंडक्टर लगाने, केपेसिटर बैंकों की स्थापना आदि के कार्य भी क्रमबद्ध रूप से किए जा रहे हैं।

आरडीएसएस के तहत कार्यों की प्रति सप्ताह समीक्षा की जाती है, ताकि कार्य समय़ पर एवं गुणवत्ता के साथ हो। ग्रिडों के पास वाटर हार्वेस्टिंग के आदेश दिए गए है, ताकि ग्रिड के बोरिंग ग्रीष्मकाल में भी चलते रहें और ग्रिड में अर्थिंग के लिए पानी का संकट न आए।

Air Force Day 2023: भारतीय वायु सेना के 92वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में MP के BHOPAL में होगी फ्लाई पास्ट

Air Force Day 2023: भारतीय वायु सेना के 92वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में भोपाल में रोमांचक और आकर्षक फ्लाई पास्ट का आयोजन होने जा रहा है।

आयोजन की तैयारियों को लेकर आज मंत्रालय में अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा की अध्यक्षता में वायु सेना के अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक हुई।

एसीएस डॉ. राजौरा ने बताया कि 30 सितम्बर को भोपाल में भोज ताल के ऊपर रोमांचक और आकर्षक फ्लाई पास्ट होगी।

आयोजन के बेहतर प्रबंधन के लिये इंडियन एयरफोर्स की हेडक्वाटर्स मेंटेनेंस कमांड के अधिकारियों के साथ कार्यक्रम स्थल पर अतिथियों की बैठक, यातायात एवं सुरक्षा, चिकित्सा एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।

ग्रुप केप्टन (आईएएफ) श्री श्रीनाथ पिल्लई ने बताया कि 8 अक्टूबर 2023 को भारतीय वायु सेना के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में भोपाल में बेहद रोमांचक फ्लाई पास्ट होगी।

एयर वाइस मार्शल श्री वी.एस. चौधरी के साथ एयर फोर्स अधिकारियों ने प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों से आयोजन के बेहतर इंतजाम के लिये चर्चा की।

बैठक में प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति श्री शिवशेखर शुक्ला, सचिव खेल एवं युवा कल्याण श्री पी. नरहरि, पुलिस कमिश्नर श्री हरिनारायणचारी मिश्रा, सचिव गृह श्री संजय तिवारी, कलेक्टर श्री आशीष सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। 

MP NEWS: छठवें वेतनमान वाले शासकीय सेवकों को 9 % की वृद्धि के साथ मिलेगा DA, इसी माह से मिलेगा फायदा; राज्य सरकार द्वारा आदेश जारी

MP EMPLOYEES DA INCREMENT NEWS: राज्य शासन ने छटवें वेतनमान में वेतन प्राप्त कर रहे शासकीय सेवकों के मंहगाई भत्ते में 09 प्रतिशत की वृद्धि की है। इस आशय के आदेश जारी कर दिये गये हैं।

MP के शासकीय सेवकों को अगस्त में मिलेगी बढ़ी हुई सैलरी

आदेश के अनुसार अब दिनांक 01 जनवरी 2023 से से बढ़े हुए महंगाई भत्ते की दर लागू होगी। अब मंहगाई भत्ते की दर 212 प्रतिशत से बढकर 221 प्रतिशत हो जायेगी। शासकीय सेवकों को मंहगाई भत्ते का लाभ 1 जुलाई 2023 (भुगतान माह अगस्त 2023) से किया जायेगा।

राज्य शासन द्वारा 1 जनवरी 2023 से 30 जून 2023 तक की एरियर राशि का भुगतान तीन समान किश्तों में क्रमश: माह अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसम्बर 2023 में किया जायेगा।

एक जनवरी से 30 जून 2023 तक सेवानिवृत्ति और मृत शासकीय सेवकों के प्रकरण में उनको/नामांकित सदस्य को एरियर राशि का भुगतान एक मुश्त किया जायेगा। महंगाई भत्ता दर में 50 पैसे या उससे अधिक पैसे को अगले उच्चतर रुपए में पूर्णांकित और 50 पैसे से कम राशि को छोड़ दिया जाएगा।

मंहगाई भत्ते का कोई भी भाग किसी भी प्रयोजन हेतु वेतन के रूप में नहीं माना जाएगा। राज्य शासन ने यह भी निर्देश दिए हैं कि शासकीय सेवकों को महंगाई भत्ते के भुगतान पर किया गया व्यय संबंधित विभाग के चालू वर्ष के स्वीकृत बजट के प्रावधान से अधिक नहीं हो।

उपक्रमों, निगमों, मंडलों, अनुदान प्राप्त संस्थाओं के कर्मचारियों का मंहगाई भत्ता बढ़ा

राज्य शासन के उपक्रमों/निगमों/मंडलों तथा अनुदान प्राप्त संस्थाओं के राज्य शासन में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत कर्मचारियों के मंहगाई भत्तों में भी वृद्धि की गई है।

ऐसे कर्मचारियों को जो मध्यप्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम 1989 यानी चतुर्थ वेतनमान या मध्यप्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम 1998 यानी पांचवे वेतनमान में वेतन प्राप्त कर रहे हैं, उन्हें दिनांक एक जनवरी 2023 (भुगतान माह फरवरी 2023) से क्रमश: 1265 प्रतिशत एवं 269 प्रतिशत की दर से मंहगाई भत्ता मिल रहा था।

अब राज्य शासन के निर्णय से एक जनवरी 2023 से पांचवां वेतनमान प्राप्त कर रहे कर्मचारियों का मंहगाई भत्ता 11 प्रतिशत बढकर कुल 280 प्रतिशत हो गया है और चतुर्थ वेतनमान में मंहगाई दर में 40 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए कुल 1305 प्रतिशत की वृद्धि का लाभ मिलेगा।

इसी प्रकार राज्य शासन द्वारा 1 जनवरी 2023 से 30 जून 2023 तक की एरियर राशि का भुगतान तीन समान किश्तों में क्रमश: माह अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसम्बर 2023 में किया जायेगा। एक जनवरी से 30 जून 2023 तक सेवानिवृत्ति और मृत शासकीय सेवक के प्रकरण में उनको/नामांकित सदस्य को एरियर राशि का भुगतान एक मुश्त किया जायेगा।

भारत को समग्र विकास के उत्कर्ष तक ले जाएँ : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

  • मध्यप्रदेश में समृद्ध जनजातीय विरासत
  • मध्यप्रदेश में हुईं मेरी सर्वाधिक यात्राएँ
  • राष्ट्रप्रेम और विश्व बंधुत्व हमारे देश की चिंतन धारा
  • साहित्य का सत्य हमेशा इतिहास के सत्य से ऊपर
  • संस्कृतियों के समन्वय और आपसी समझ में साहित्य और कला का महत्वपूर्ण योगदान
  • जनजातीय समाज की उन्नति भारत को विकसित राष्ट्र बनाएगी
  • “उन्मेष” और “उत्कर्ष” भारत की विभिन्न परंपराओं को जोड़ने का प्रयास – राज्यपाल श्री पटेल
  • साहित्य, संगीत और कला ही, मन, बुद्धि और आत्मा का सुख प्रदान करते हैं – मुख्यमंत्री श्री चौहान
  • राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने रवीन्द्र भवन में “उत्कर्ष” और “उन्मेष” उत्सव का शुभारंभ किया

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि मध्यप्रदेश की जनजातीय विरासत अत्यंत समृद्ध है। यहां सर्वाधिक जनजातियाँ निवास करती है। हमारे सामूहिक प्रयास होने चाहिए कि हम अपनी संस्कृति, लोकाचार, रीति-रिवाज और प्राकृतिक परिवेश को सुरक्षित रखते हुए जनजातीय समुदाय के आधुनिक विकास में भागीदार बनें। नव उन्मेष से संयुक्त प्रतिभाएँ भारत को समग्र विकास के उत्कर्ष तक ले जायें। ‘उन्मेष’ और ‘उत्कर्ष’ जैसे आयोजन इस दिशा में तर्क संगत भी हैं और भाव संगत भी। ऐसा आयोजन एक सशक्त “कल्चरल ईको सिस्टम” का निर्माण करेगा। इसमें मध्यप्रदेश शासन का सक्रिय सहयोग सराहनीय है। श्रीमती मुर्मु ने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद मेरी सर्वाधिक यात्राएँ मध्यप्रदेश में हुर्ह हैं। मैं आज पाँचवीं बार मध्यप्रदेश की यात्रा पर आई हूँ। मैं मध्यप्रदेश के 8 करोड़ निवासियों को यहाँ मेरे आत्मीय स्वागत के लिए धन्यवाद देती हूँ।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु रवीन्द्र भवन में “उत्कर्ष और उन्मेष” उत्सव के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रही थीं। केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय अंतर्गत संगीत नाटक अकादमी और साहित्य अकादमी द्वारा संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से भोपाल में पहली बार 3 से 5 अगस्त तक भारत की लोक एवं जनजाति अभिव्यक्तियों के राष्ट्रीय उत्सव “उत्कर्ष” एवं “उन्मेष” का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने दीप प्रज्ज्वलन कर उत्सव का विधिवत शुभारंभ किया।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि राष्ट्रप्रेम और विश्व बंधुत्व हमारे देश की चिंतन धारा में सदैव रहे हैं। प्राचीन काल से हमारी परंपरा कहती है “यत्र विश्व भवति एकनीडम्”। पूरा विश्व एक परिवार है। इस बार भारत जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है और उसका आदर्श वाक्य “वन अर्थ, वन फेमिली एवं वन फ्यूचर” इसी भावना की अभिव्यक्ति है। यही भावना महाकवि जयशंकर प्रसाद की कविता में प्रतिबिंबित होती है: ” अरूण यह मधुमय देश हमारा, जहाँ पहुँच अंजान क्षितिज को मिलता एक सहारा”।

राष्ट्रपति ने कहा कि साहित्य का सत्य हमेशा इतिहास के सत्य से ऊपर होता है। कवि वर रविन्द्रनाथ टैगोर और महर्षि नारद की रचनाओं में यह स्पष्ट है। साहित्य मानवता का आइना है, इसे बचाता है और आगे भी बढ़ाता है। साहित्य और कला संवेदनशीलता, करूणा और मनुष्यता को बचाती है। साहित्य और कला को समर्पित यह आयोजन सार्थक और सराहनीय है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि विश्व आज गंभीर चुनौतियों से गुजर रहा है। विभिन्न संस्कृतियों में समन्वय और आपसी समझ विकसित करने में साहित्य और कला का महत्वपूर्ण योगदान है। साहित्य वैश्विक समुदाय को शक्ति प्रदान करता है। साहित्य की कालातीत श्रेष्ठता से हर व्यक्ति परिचित है। विलियम शेक्सपियर की अमर कृतियाँ आज भी इसका प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य आपस में जुड़ता भी और जोड़ता भी है। मैं और मेरा से ऊपर उठकर रचा गया साहित्य और कला सार्थक होते हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों की भाषाएँ और बोलियाँ मेरी है। विभिन्न भाषाओं में रचनाओं का अनुवाद भारतीय साहित्य को और समृद्ध करेगा। पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय श्री अटल विहारी वाजपेयी का संथाली भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने का प्रयास अत्यंत सराहनीय था।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि उन्मेष का अर्थ आँखों का खुलना और फूल का खिलना है। यह प्रज्ञा का प्रकाश और जागरण है। 19वीं शताब्दी में नव-जागरण की धाराएँ 20वीं सदीं के पूर्वार्द्ध तक प्रवहमान रहीं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वधीनता और पुनर्जागरण के आदर्शों को साहित्यकारों ने बखूबी अभिव्यक्त किया। उस समय का साहित्य देशभक्ति की भावना की अमर अभिव्यक्ति है। उस समय के साहित्य ने मातृभूमि को देवत्व प्रदान किया। भारत का हर पत्थर शालिग्राम बना। बंकिमचन्द्र चटर्जी, सुब्रमण्यम् जैसे महान साहित्यकारों की रचनाओं का जन-मानस पर गहरा प्रभाव रहा।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि “उत्कर्ष” जनजातीय समाज की उन्नति का उत्सव है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जिस दिन भारत का जनजातीय समाज उन्नत हो जाएगा, उस दिन भारत विश्व में विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित हो जाएगा। भारत में 700 से अधिक जनजातीय समुदाय हैं और इससे लगभग दो गुना उनकी भाषाएँ हैं। आज जब भारत का अमृत काल चल रहा है, तो हमारा यह दायित्व है कि जनजातीय भाषा और संस्कृति जीवित और विकसित होकर रहे।

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के भोपाल आगमन पर उनका स्वागत और अभिनंदन किया और कहा कि भारत की हृदय स्थली मध्यप्रदेश में विभिन्न संस्कृतियाँ, 21 प्रतिशत जनजातीय आबादी के साथ अनेकता में एकता के सूत्र से बनी माला के मनकों के समान एक साथ, एकजुट होकर रह रही हैं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु के आगमन से उन्मेष और उत्कर्ष के आयोजन की गरिमा बढ़ी है, समस्त प्रदेशवासी गौरवान्वित अनुभव कर रहे हैं। सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध भोपाल में दोनों कार्यक्रम का आयोजन, साहित्य एवं कला-प्रेमियों के लिए निश्चित रूप से परम आनंद का विषय है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि 15 देशों के 550 से अधिक विभिन्न भाषाओं के रचनाकारों की 75 से अधिक कार्यक्रमों में सहभागिता का यह उत्सव, कला और संस्कृति की सभी परंपराओं के सामंजस्य का उत्सव बनेगा।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि उन्मेष के दौरान जनजातीय कवि-लेखक सम्मेलन, ‘भारत एट सेवन्टी’ पर कविता पाठ और मध्यप्रदेश के गीत के सत्रों का आयोजन किया जा रहा है। उन्मेष और उत्कर्ष भारत की विभिन्न परंपराओं को जोड़ने का प्रयास है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” के विचार को सफल बनाने की सार्थक और सराहनीय पहल है। भारत दुनिया का ऐसा अद्भुत देश है, जहाँ से विश्व के समस्त ज्ञान-विज्ञान और दर्शन की विभिन्न धाराएँ विश्व में प्रवाहमान हुई हैं। हमारे प्राचीन ऋषि-मुनि और संत-परंपरा ने अपने अनुभव-अनुभूति साधना के ज्ञान को मानवता के कल्याण पथ के आलोकन में समर्पित किया है। इसीलिए उनकी रचनाएँ देश-काल की सीमाओं से परे आज भी प्रासंगिक है। कलात्मकता की शक्ति अद्भुत होती है।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि विचार-भावना और आत्म-शक्ति के समन्वय से ही रचना का सृजन होता है। इसके लिए किसी साधन-संसाधन की आवश्यकता नहीं होती। इसका जीवंत प्रतिरूप जनजातीय समुदाय की कलात्मकता है, जिसकी कला, रचना-कौशल, संगीत और नृत्य, काल की सीमाओं से परे अमिट मूल्यों, मौलिक सादगी और गहन अनुभूति का अद्भुत आभास कराते हैं। भारत की भाषाई, भौगोलिक विविधताओं के उदार मिश्रण ने श्रेष्ठतम साहित्य का निर्माण किया, जिसकी बानगी, अनूठी और अप्रतिम विविधता है। डिजिटल क्रांति के दौर में उत्कर्ष का आयोजन संस्कृति, कला, साहित्य और भाषा के सृजनकारों के बीच वैश्विक विमर्श और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में सहयोगी होगा। भारत की प्राचीन सूक्ति “वसुधैव कुटुंबकम” की प्रामाणिकता के साथ भारत की एकता और श्रेष्ठता को विश्व में स्था‍पि‍त करने में यह आयोजन सफल होगा। राज्यपाल श्री पटेल ने आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय साहित्य, लोक एवं जनजातीय अभिव्यक्तियों के सफल अनूठे आयोजन के लिए संस्कृति मंत्रालय, साहित्य अकादमी तथा संगीत नाटक अकादमी को बधाई दी।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश का सौभाग्य है कि हमें अंतर्राष्ट्रीय साहित्य उत्सव ‘उन्मेष’ और लोक एवं जनजातीय अभिव्यक्तियों के उत्सव ‘उत्कर्ष’ जैसे भव्य और गरिमामय आयोजन की मेजबानी का सौभाग्य प्राप्त हुआ। भारत अत्यंत प्राचीन और महान राष्ट्र है। भारत वह भूमि है, जिसने वसुधैव कुटुम्बकम, सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे भवन्तु निरामय: अर्थात सभी सुखी हों और सबके निरोग रहने का संदेश दिया। रोटी, कपड़ा और मकान के साथ-साथ व्यक्ति के सुख के लिए मन, बुद्धि और आत्मा का सुख भी आवश्यक है। मनुष्य को यह सुख अगर कोई देता है, तो वह साहित्य, संगीत और कला ही है। आज बड़ी संख्या में गणमान्य साहित्यकार, कलाकार और संगीतकारों ने यहाँ अपनी उपस्थिति से शोभा बढ़ाई है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एक तरफ वैभवशाली, गौरवशाली, सम्पन्न और शक्तिशाली भारत का निर्माण कर रहे हैं और दूसरी तरफ हमारी कला, संस्कृति, परम्पराओं, साहित्य, जीवन मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी निरंतर प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि “मुझे विश्वास है कि साहित्य, कला और संगीत में दुनिया को एक बनाए रखने का सामर्थ्य है। भौतिकता की अग्नि में दग्ध मानवता को शाश्वत शांति का दिग्दर्शन कला, संगीत और साहित्य ही कराएंगे।”

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु की स्वच्छता के लिए प्रतिबद्धता से देश उत्साह के साथ प्रेरणा प्राप्त करता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की परम्पराओं में आस्था से उनके प्रति आदर और सम्मान का भाव उत्पन्न होता है और देश अपने मूल्यों को याद करता है। श्री मोदी की पहल से ही ‘उन्मेष’ और ‘उत्कृष’ जैसे नवाचार सामने आते हैं। हमारे यहाँ बहुत सी भाषाएँ और बोलियों के होते हुए भी देश में मूलभूत एकता है। हमारे साहित्यकार, कलाकार, संगीतज्ञों को ऐसे आयोजनों से अपने-अपने क्षेत्र में बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है। ऐसे आयोजन विश्व को एकसूत्र में बांधने में समर्थ और सक्षम हैं।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश प्राचीनकाल से कला और संस्कृति की संगम-स्थली रहा है। यहाँ कला, संस्कृति और वैभवपूर्ण अतीत तथा समृद्धशाली वर्तमान है। यह साहित्यकारों की कर्मभूमि और कलाकारों की तीर्थ भूमि रही है। भीमबैठका, बाघ, नचनाकुठार, खजुराहो इसके सजीव और साक्षात प्रमाण हैं। प्रदेश में कला और संस्कृति के राजाश्रय की प्राचीन परम्परा रही है। राजा भोज हों या माता देवी अहिल्याबाई हों, उन्होंने साहित्य और संगीत के संरक्षण में अपना जीवन समर्पित किया। इस धरती पर बाणभट्ट, कालिदास, राजशेखर, पतंजलि, भतृहरि, पदमाकर और केशवदास जैसे रत्न हुए हैं। इनका स्मरण कर हम आनंद और गर्व का अनुभव करते हैं। सुश्री लता मंगेशकर, किशोर कुमार, पंडित कुमार गंधर्व, उस्ताद अलाउद्दीन खां जैसे कलाकारों को इसी प्रदेश ने जन्म दिया, यह सौभाग्य हमारे प्रदेश को प्राप्त है। गोपाल शरण सिंह, दादा माखनलाल चतुर्वेदी, हरिशंकर परसाई, वृंदावनलाल वर्मा, नरेश मेहता, अमृतलाल वेगड़, भवानी प्रसाद मिश्र जैसे साहित्यकार इस माटी से उपजे। अनेकों पत्रकार वेदप्रताप वैदिक, अवनीश जैन, सुशील दोषी यहाँ के थे। श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जैसे कवि हृदय राजनेता भी इस प्रदेश से रहे, यह उनकी कर्म-स्थली रही। ऐसे प्रदेश में उन्मेष और उत्कर्ष के आयोजन के लिए मैं हृदय से आभारी हूँ।

प्रदेश की संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री सुश्री उषा ठाकुर, संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष श्रीमती संध्या पुरेचा, साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री माधव कौशिक, केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती उमा नंदूरी उपस्थित थीं। समारोह में संगीत नाटक अकादमी, साहित्य अकादमी, आजादी के अमृत महोत्सव तथा हर घर हेल्दी मिशन पर केन्द्रित लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने हर घर हेल्दी मिशन के अंतर्गत विश्व रिकार्ड बनाने के लिए केन्द्रीय संयुक्त सचिव संस्कृति श्रीमती उमा नंदूरी तथा माय एफएम रेडियो के पदाधिकारी को प्रमाण पत्र प्रदान किया।

विभिन्न राज्यों और अंचलों के नृत्य प्रस्तुत

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु के सम्मुख विभिन्न नृत्यों की झलकियां प्रस्तुत की गईं। इस विंहगम, मनोहारी और आकर्षक प्रस्तुति में कलाकारों ने विभिन्न राज्यों और अंचलों के नृत्य प्रस्तुत किए। तीन से 6 अगस्त तक हो रहे इस भव्य समारोह में 100 से अधिक भाषाओं में 14 देशों के 575 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की भावना को दर्शाती 1000 से अधिक कलाकारों की सांस्कृतिक प्रदर्शनी भी आयोजित है। समारोह में साहित्य अकादमी द्वारा पुस्तक प्रदर्शनी, जनजातीय समुदायों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और भक्ति, सिनेमा तथा आदिवासी साहित्य पर सामूहिक परिचर्चा होगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का भोपाल आगमन, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने अगवानी कर हार्दिक स्वागत किया

भोपाल: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गुरुवार को भोपाल आगमन हुआ। विमानतल पर राष्ट्रपति का गर्मजोशी से हार्दिक स्वागत किया गया।

मध्यप्रदेश के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने गुलदस्ता भेंट कर राष्ट्रपति जी का स्वागत किया।

गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, नगरीय प्रशासन और विकास तथा भोपाल जिले के प्रभारी मंत्री श्री भूपेंद्र सिंह, चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास सारंग, महापौर श्रीमती मालती राय, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, पुलिस महानिदेशक श्री सुधीर सक्सेना सहित सेना, प्रशासन तथा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी विमानतल पर राष्ट्रपति का भोपाल पहुँचने पर स्वागत किया गया।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु भोपाल में उन्मेष और उत्कर्ष कार्यक्रम में सम्मिलित हुई थी।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु के राजभवन आगमन पर राज्यपाल श्री पटेल ने किया स्वागत

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का राजभवन आगमन पर गरिमामय स्वागत किया गया। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैस, राज्यपाल के प्रमुख सचिव श्री डी. पी. आहूजा, पुलिस महानिदेशक श्री सुधीर कुमार सक्सेना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु को राज्यपाल श्री पटेल और मुख्यमंत्री श्री चौहान ने दी विदाई

राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु को नई दिल्ली वापसी पर राजा भोज विमान तल पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भावभीनी विदाई दी। श्रीमती मुर्मु गुरूवार को एक दिवसीय प्रवास पर भोपाल आई थीं।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु को विमानतल पर राज्यपाल श्री पटेल और मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भगवान श्री कृष्ण और राधा की अष्टधातु की प्रतिमा स्मृति-चिन्ह के रूप में भेंट की। महापौर श्रीमती मालती राय, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, पुलिस महानिदेशक श्री सुधीर सक्सेना, पुलिस कमिश्नर श्री हरिनारायण चारी मिश्रा भी उपस्थित थे। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने भारतीय सेना के विमान से लगभग साढ़े 4 बजे दिल्ली के लिए प्रस्थान किया।

सिवनी रेलवे स्टेशन से 26 अगस्त तक नहीं गुजरेंगी ये ट्रेन, आज से 23 दिनों तक ट्रेन कैंसिल

सिवनी: सिवनी रेलवे स्टेशन होकर जाने वाली रीवा इतवारी (Rewa Itwari Express) और इतवारी रीवा एक्सप्रेस (Itwari Rewa Express) अब आगामी 23 दिनों तक नहीं चलेगी. रेलवे ने 3 अगस्त से लेकर 26 अगस्त तक कई ट्रेनों को कैंसिल किया है.

कैंसिल हुई ट्रेनों की बात करें तो इनमे 11753 ITR- Rewa Express शामिल है जो 6/08/2023 से 24/08/2023 तक कैंसिल रहेगी. इसके साथ ही 11754 Rewa – ITR Express भी 5/08/2023 से 25/08/2023 तक कैंसिल रहेगी. इसके साथ ही 11755 ITR- Rewa Express जो कि 4/08/2023 – 26/08/2023 तक कैंसिल रहेगी और 11756 Rewa – ITR Express शामिल है जो 3/08/2023 से 25/08/2023 तक कैंसिल रहेगी.

ट्रेनों के रद्द होने से रीवा से नागपुर या नागपुर से रीवा जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा. यही समस्या 3 अगस्त 2023 से 25 अगस्त 2023 तक बनी रहेगी. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत इन ट्रेनों के रद्द होने की मुख्य वजह रेलवे ट्रैक का काम है।

उन ट्रेनों के नंबर और नाम निम्नलिखित हैं जिन्हें कार्य प्रगति पर होने के कारण रद्द कर दिया गया है।

ट्रेन का नामगाड़ी संख्यारद्दीकरण की तिथियां
11753आईटीआर- रीवा एक्सप्रेस6/08/2023 – 24/08/2023
11754रीवा – आईटीआर एक्सप्रेस5/08/2023 – 25/08/2023
11755आईटीआर- रीवा एक्सप्रेस4/08/2023 – 26/08/2023
11756रीवा – आईटीआर एक्सप्रेस3/08/2023 – 25/08/2023
Rewa ITR And ITR Rewa Train Cancelled From 3 August To 26 August 2023

Cheetah Project: चीता प्रोजेक्ट को एक और बड़ा झटका, MP के कूनो नेशनल पार्क में नौवें चीते की मौत

Cheetah Project: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में एक और चीते की मौत हो गई है. इसके चलते अब मृत चीतों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। अब तक छह चीतों और तीन बछड़ों की मौत हो चुकी है। मार्च के बाद से मरने वाला यह छठा चीता है। इस संबंध में मध्य प्रदेश वन विभाग ने एक बयान जारी किया है.

मध्य प्रदेश वन विभाग के मुताबिक, आज सुबह एक मादा चीता मृत पाई गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद चीता की मौत का कारण स्पष्ट होगा। अब छह मादा चीतों में से एक को पिंजरे में बंद कर दिया गया है। 

उसे जंगल में छोड़ दिया गया है और वन विभाग उसकी निगरानी कर रहा है. जंगल में मादा चीता को स्वास्थ्य जांच के लिए फिर से पिंजरे में रखे जाने की संभावना है। 

एक माह में तीन चीतों की मौत

कूनो नेशनल पार्क में 26 जून को आठवें चीते की मौत हो गई। इस चीते का नाम ‘सन’ था। फिर 11 जुलाई को ‘तेजस’ नाम के चीते की मौत हो गई. तेजस चीता की गर्दन पर एक निशान पाया गया. 

वन विभाग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, कुछ दिन पहले तेजस और सूरज के बीच हिंसक लड़ाई हुई थी. इस लड़ाई में तेसाज की गर्दन पर चोट लग गई और मंगलवार को उसकी मौत हो गई. इस लड़ाई में सूरज भी गंभीर रूप से घायल हो गया. बाद में उसका शव भी मिला.

20 चीते लाए गए

कुनो नेशनल पार्क में 20 चीते दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से लाए गए थे। लेकिन अब तक विभिन्न कारणों से 9 चीतों की मौत हो चुकी है. 

क्यों मरते हैं चीते

नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला ने 4 बच्चों को जन्म दिया। उनमें से 3 की मौत हो गई. फिर 26 मार्च 2023 को नामीबिया से लाई गई मादा चीता ‘साशा’ की किडनी में संक्रमण से मौत हो गई. 23 अप्रैल, 2023 को ‘उदय’ नाम के चीते की अंग विफलता के कारण मृत्यु हो गई। 

9 मई 2023 को ‘दक्षा’ नामक मादा चीता की मृत्यु हो गई। नर चीतों से लड़ाई में दक्ष की जान चली गई। फिर 11 जुलाई 2023 को दक्षिण अफ्रीका से लाए गए ‘तेजस’ की भी हिंसक लड़ाई में जान चली गई. 

विरोधियों का आरोप है कि विदेशों से लाए गए चीते एक के बाद एक मर रहे हैं, लेकिन सरकार ने इस संबंध में कोई ठोस योजना लागू नहीं की है.

सोने का अधिकार: अगर कोई आपकी नींद में डालता है खलल, तो आप सीधे दर्ज करा सकते हैं केस

Right to Sleep:  सोने का अधिकार: अच्छे स्वास्थ्य के लिए अच्छी नींद जरूरी है। डॉक्टर भी 8 घंटे सोने की सलाह देते हैं। नींद की कमी या नींद की कमी से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। लेकिन कभी-कभी चीनी आपको सोते समय जगा देती है। उस वक्त बहुत चिड़चिड़ाहट होती है. 

लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के हर नागरिक को चैन की नींद लेने का अधिकार है। क्योंकि यह बुनियादी मानव अधिकार है. हर किसी को अच्छी रात की नींद का अधिकार है। वह है। अगर कोई आपको सोने से मना करता है तो आप उसका केस दर्ज करा सकते हैं। 

भारत के संविधान के अलावा सुप्रीम कोर्ट ने भी सोने के अधिकार को मान्यता दी है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक नागरिक को बिना किसी परेशानी के शांति से सोने का अधिकार है। 

नींद के अधिकार को अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के तहत मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है। कानून कहता है कि किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जाएगा। 

जून 2011 में दिल्ली में बाबा रामदेव की रैली के दौरान सोई भीड़ पर पुलिस कार्रवाई पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया. उस वक्त सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पुलिस कार्रवाई से लोगों के बुनियादी अधिकारों का हनन हो रहा है. 

साथ ही पर्याप्त नींद व्यक्ति के मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत जरूरी है। ऐसे में नींद एक बुनियादी और बुनियादी जरूरत है। जिसके बिना जीवन के अस्तित्व को खतरा हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नींद एक बुनियादी मानवीय हमला है। 

इसलिए कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया कि भीड़ शांति भंग करने की साजिश कर रही थी. इस बात पर यकीन करना मुश्किल है कि एक शख्स सोते हुए सार्वजनिक शांति भंग करने की साजिश रच रहा था. कोर्ट ने यह भी कहा कि नींद इंसान की बुनियादी जरूरत है, विलासिता नहीं. 

संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान और कानूनों के तहत, नागरिकों को न केवल शांत बैठने, सोने, बल्कि चुप रहने का भी अधिकार है। 

वहीं, किसी मामले की जांच के दौरान संबंधित व्यक्ति का दरवाजा खटखटाना (चाहे दिन हो या रात) यानी बिना कोर्ट के आदेश के तलाशी के लिए पहुंचना, साथ ही व्यक्ति की निजता पर हमला करना भी उल्लंघन माना जाता है. नागरिक के मौलिक अधिकार का.

Cyber Crime: ऑनलाइन दुल्हन के जाल में शादीशुदा युवक, पहली कॉल पर दुल्हन निर्वस्त्र; गए 1 करोड़ नकद…

Cyber Crime: इंटरनेट के कई फायदे हैं, लेकिन इसके नुकसान भी हैं। इंटरनेट की इस आभासी दुनिया में हम एक-दूसरे के करीब तो आ जाते हैं लेकिन हमें पता नहीं होता कि हम असल में किससे बात कर रहे हैं। साइबर अपराधी इसी बात का फायदा उठाकर लाखों का चूना लगाते हैं. ऐसी ही एक घटना में एक शादीशुदा युवक को करोड़ों की चपत लगी है. यह घोटाला डेटिंग को लेकर हुआ है.

हाल ही में एक महिला ने डेटिंग साइट का फायदा उठाकर एक शख्स को ब्लैकमेल किया और उससे 1.1 करोड़ रुपये लूट लिए. युवक और युवती की मुलाकात एक वैवाहिक वेबसाइट के जरिए हुई थी. युवक उससे शादी के फैसले पर पहुंचने के लिए बातचीत करने लगा। पीड़िता एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और यूके की रहने वाली है। वह सरकारी काम से बेंगलुरु आये थे.

1500 रुपये का पहला ऋण

शिकायतकर्ता युवक शादी करने की सोच रहा था. इसलिए उन्होंने एक वैवाहिक वेबसाइट पर पंजीकरण कराया। वहां उसकी मुलाकात एक महिला से हुई और दोनों ने नंबर एक्सचेंज किए। दोनों बातें करने लगे. दोनों एक दूसरे को नहीं जानते थे. उन्होंने कहा, मैं अपनी मां के साथ रहती हूं। महिला ने उससे शादी करने की इच्छा भी जताई।

फिर शुरू हुआ असली खेल. दो जुलाई को महिला ने अपनी मां की तबीयत का हवाला देकर 1500 रुपये उधार मांगे। फिर आया 4 जुलाई का दिन. महिला ने उसे वीडियो कॉल किया और अपने सारे कपड़े उतार दिए। महिला ने पूरी वीडियो कॉल रिकॉर्ड कर ली. 

कॉल के बाद महिला ने उस शख्स को स्क्रीन शॉट भेजे और उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। वह धमकी देने लगी कि पैसे दो नहीं तो यह क्लिप तुम्हारे माता-पिता के साथ शेयर कर दूंगी। इसके बाद युवक ने महिला के बताए दो अलग-अलग बैंक खातों और चार फोन नंबरों पर 1 करोड़ 14 लाख रुपये भेज दिए।

पैसे भेजते वक्त शख्स को महिला का असली नाम पता चला. इसके बाद भी संबंधित महिला ने ब्लैकमेलिंग जारी रखी। आखिरकार युवक ने पुलिस से संपर्क किया है और इस संबंध में मामला दर्ज किया गया है. पुलिस आरोपी महिला की तलाश कर रही है. 

पुलिस ने कहा कि आरोपी ने लोगों से पैसे ऐंठने के इरादे से फर्जी नाम से प्रोफाइल बनाई। पुलिस ने कहा कि पुलिस लाभार्थी के खाते से लगभग 84 लाख रुपये जब्त करने में कामयाब रही है और महिला पहले ही 30 लाख रुपये का उपयोग कर चुकी है।

इतिहास में पहली बार मध्य प्रदेश में हुआ सांकेतिक भाषा में राष्ट्रगान, भाषण के साथ कविता गायन प्रतियोगिता

आयुक्त निशक्तजन कल्याण श्री संदीप रजक के मुख्य आतिथ्य में भोपाल के बिला बांग हाई इंटरनेशनल स्कूल के बच्चों द्वारा सांकेतिक भाषा में राष्ट्रगान प्रस्तुति के साथ भाषण एवं कविता गायन प्रतियोगिताएँ हुई।

मध्यप्रदेश में पहली बार होने वाले इस तरह के पहले आयोजन के लिये निशक्तजन कल्याण आयुक्त ने स्कूल और बच्चों की सराहना की। स्कूल द्वारा सौंपे गये काम के रूप में बच्चों ने ग्रीष्म कालीन अवकाश में साइन लेंग्विज न केवल सीखी बल्कि उसमें योग्यता भी हासिल की।

श्री रजक ने कहा कि मध्यप्रदेश में पहली बार साइन लेंग्विज में भाषण और कविता गायन की प्रतियोगिता हुई है, जो अन्य लोगों और स्कूलों के लिये आदर्श बनेगी। सांकेतिक भाषा का प्रसारण होने से श्रवण बाधित दिव्यांगजनों को समाज की मुख्य धारा में शामिल होने में मदद मिलेगी।

प्रतिभागियों द्वारा स्वर रहित अभिव्यक्ति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मध्यप्रदेश में पहली बार हो रहे स्वर रहित राष्ट्रगान ने भी विद्यार्थियों में जोश और उत्साह का संचार किया। श्री रजक ने सांकेतिक भाषा को पाठ्यक्रम में शामिल करने का शासन से अनुरोध करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन अन्य स्कूलों में भी किये जा सकते हैं।

प्रतीकात्मक शैली में हुए कार्यक्रम में हुई प्रतियोगिताओं के निर्णायक मंडल में डेफ केन फाउंडेशन की सचिव श्रीमती प्रीति शाह सोनी, भाषा अनुवादक श्री प्रदीप लूथरा और सहायक संचालक आयुक्त निशक्तजन श्री सुनील शर्मा थे।

विद्यालय के प्राचार्य श्री आशीष अग्रवाल ने बच्चों की सशक्त भाव-भंगिमा और अभिव्यक्ति की भूरी-भूरी प्रशंसा की एवं कार्यक्रम के अंत में आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन श्रीमती तनुजा दधीचि, श्रीमती मेघा भट्ट और श्री श्वेता जैन द्वारा किया गया।