श्रीलंका के ऑलराउंडर और पूर्व कप्तान एंजेलो मैथ्यूज मांसपेशियों की खिंचाव से उबर चुके है और रविवार को यहां सीरीज के तीसरे और निर्णायक मुकाबले में चयन के लिए मौजूद रहेंगे.
विशाखापत्तनम: श्रीलंका के ऑलराउंडर और पूर्व कप्तान एंजेलो मैथ्यूज मांसपेशियों की खिंचाव से उबर चुके है और रविवार को यहां सीरीज के तीसरे और निर्णायक मुकाबले में चयन के लिए मौजूद रहेंगे.
मैथ्यूज मोहाली में 13 दिसंबर को खेले गए दूसरे वनडे मैच में शतकीय पारी के दौरान मांसपेशियों में खिंचाव की परेशानी से जूझ रहे थे. वह शुक्रवार को टीम के प्रैक्टिस सेशन के दौरान गेंदबाजी और बल्लेबाजी करते दिखे.
टीम के मैनेजर अशांका गुरूसिन्हा ने कहा कि मैथ्यूज फिट हैं और निर्णायक मैच में चयन के लिये उपलब्ध रहेंगे.
गुरूसिन्हा ने कहा, ‘‘मैथ्यूज फिट है. पिछले मैच के आखिरी ओवरों में उनकी मांसपेशियों में खिंचाव आ गया. लेकिन, वह उससे उबर चुके हैं. उन्होंने आज नेट पर गेंदबाजी और बल्लेबाजी अभ्यास में भाग लिया. टीम के सभी 15 खिलाड़ी फिट हैं और चयन के लिए उपलब्ध हैं.’’
कोच निक पोथास और दूसरे कोचिंग स्टाफ की देख-रेख में तीन घंटे से ज्यादा समय तक चले प्रैक्टिस सेशन में खिलाड़ियों ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी अभ्यास किया.
वहीं दूसरी तरफ भारतीय टीम ने अपने प्रैक्टिस सेशन को रद्द कर दिया.
भारतीय टीम ने कप्तान रोहित शर्मा के दोहरे शतक के दम पर मोहाली में जीत दर्जकर सीरीज 1-1 से बराबर की. इससे पहले धर्मशाला में खेले गये पहले मैच में श्रीलंका ने भारतीय टीम को हराकर चौंकाया था.
INDvsSL: निर्णायक मुकाबले से पहले श्रीलंका को राहत, फिट हुए मैथ्यूज
रोजाना सिर्फ 10 मिनट करें ये काम, बढ़ेगी आंखों की रोशनी
बढ़ते फोन, टैबलेट, टीवी और कम्प्यूटर के इस्तेमाल के चलते आजकल लोगों की आंखों का कमजोर होना कोई हैरानी की बात नहीं है।
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आंखों की रोशनी
बढ़ते फोन, टैबलेट, टीवी और कम्प्यूटर के इस्तेमाल के चलते आजकल लोगों की आंखों का कमजोर होना कोई हैरानी की बात नहीं है। डॉक्टर्स और एक्सरपर्ट्स कई बार इलेक्ट्रॉनिक्स चीजों के सीमित उपयोग पर जोर दे चुके हैं। लेकिन हर कोई इन गाइडलाइंस को नजरअंदाज करता हुआ दिखता है। जिसके चलते आंखें कमजोर होती हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे काम बता रहे हैं जिन्हें आप रोजाना सिर्फ 10 मिनट भी करेंगे तो आपकी आंखों की रोशनी को बढ़ने और उसे बरकरार रखने में मदद मिलेगी।
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खानपान होना चाहिए अच्छा
भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी के चलते आजकल लोगों का खानपान सिर्फ जिंदा रखने का साधन मात्र हो गया है। खाने से सभी तरह के पोषक तत्व और प्रोटीन मानों कहीं गायब हो गए हैं। जिसका सीधा असर स्वास्थ्य पर पड़ने के साथ ही हमारी आंखों पर भी पड़ता है। इसलिए अपने खाने में मछली, पालक, फल और हरी सब्जियों को शामिल करें इसके सेवन से आंखों में ड्राई-आई सिंड्रोम की समस्या दूर होती है।
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करवाते रहें जांच
जिन लोगों की आंखे कमजोर होती हैं उन्हें बीच बीच में अपनी आंखों की जांच करवाती रहनी चाहिए। अगर आपकी आंखों की रोशनी बिल्कुल ठीक है और आपको पढ़ने में भी किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं होती है फिर भी साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच अवश्य करवाएं।
तांबे की अंगूठी पहनने के लाभ | Copper Ring Benefits In Hindi
Copper Ring Benefits In Hindi | ज्योतिष में नौ ग्रह बताए गए हैं और सभी ग्रहों की अलग-अलग धातु है। ग्रहों का राजा सूर्य है और सूर्य की धातु है तांबा। हिन्दू धर्म में सोना, चांदी और तांबा, ये तीनों धातुएं पवित्र मानी गई हैं। इसीलिए पूजा-पाठ में इन धातुओं का उपयोग सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा इनकी अंगूठी भी काफी लोग पहनते हैं। यहां जानिए तांबे की अंगूठी पहनने से कौन-कौन से लाभ मिलते हैं…
1. तांबे की अंगूठी सूर्य की उंगली यानी रिंग फिंगर में पहननी चाहिए। इससे कुंडली में सूर्य के दोषों का असर कम हो सकता है।
2. सूर्य के साथ ही तांबे की अंगूठी से मंगल के अशुभ असर भी कम हो सकते हैं।
3. तांबे की अंगूठी के प्रभाव से सूर्य का बल बढ़ता है, जिससे हमें सूर्य देव की कृपा से घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान मिलता है।
4. तांबे की अंगूठी लगातार हमारे शरीर के संपर्क में रहती है। जिससे तांबे के औषधीय गुण शरीर को मिलते हैं। इससे खून साफ होता है।
5. जिस प्रकार तांबे के बर्तन में रखा पानी स्वास्थ्य को लाभ पहुंचात है, ठीक उसी प्रकार तांबे की अंगूठी से भी फायदा मिलता है।
6. तांबे की अंगूठी के असर से पेट से जुड़ी बीमारियों में भी राहत मिल सकती है।
7. तांबा लगातार त्वचा के संपर्क में रहता है, जिससे त्वचा की चमक बढ़ती है।
8. आयुर्वेद के अनुसार तांबे के बर्तनों का उपयोग करने से हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यही लाभ तांबे की अंगूठी पहनने से भी मिलता है।
9. तांबे की अंगूठी पेट से संबंधित सभी समस्याओं में काफी फायदेमंद है यह पेट दर्द, पाचन में गड़बड़ी और एसिडिटी की समस्याओं में फायदा पहुंचाती है। इसके अलावा अगर आप पेचिश की समस्या से परेशान हैं तो तांबे की अंगूठी इस समस्या में आपकी काफी मदद कर सकती है।
10. तांबे की अंगूठी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है। ये हाई ब्लड प्रेशर या लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों के लिए बहुत फायदेमंद होती है। इसके अलावा इस अंगूठी को पहनकर आप शरीर के सूजन को भी कम कर सकते हैं।
11. तांबे की अंगूठी शरीर की गर्मी को कम करने में मदद करता है। इसे पहनने से शारीरिक और मानसिक तनाव कम होता है। इसके साथ ही गुस्से पर नियंत्रण होता है. ये अंगूठी तन और मन दोनों को शांत रखने में मदद करता है।
अक्षय की फैन हो गई है उनकी ये हीरोइन
मौनी रॉय ने कहा है कि वह फिल्म ‘गोल्ड’ में अक्षय कुमार के साथ काम करके उनकी फैन हो गई हैं। इस खास मौके पर फिल्म अभिनेत्री मौनी रॉय ने उनकी पहली फिल्म ‘गोल्ड’ के पूरे होने पर ख़ुशी जताई और अक्षय कुमार के साथ काम करने का अपना अनुभव भी साझा किया।
इस बारे में बताते हुए मौनी रॉय कहती हैं, ‘मैंने अभी हाल ही में फिल्म पूरी की है। इसलिए मेरे बालों का रंग बदला हुआ है। अक्षय कुमार के साथ काम करने का अनुभव अद्भुत था। वह अपने काम को लेकर इतने ईमानदार होते हैं कि आप हर शॉट के पहले उनकी मेहनत देख लेते हैं। इसके अलावा मैं अपने आपको बहुत भाग्यशाली मानती हूं कि मैं उनके साथ एक ही फ्रेम में रही। मैंने हर दिन कुछ न कुछ सीखा है। मेरे दिल में उनके लिए बहुत अधिक सम्मान और प्रेम है। मैं इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनकर बहुत भाग्यशाली मानती हूं।’
गौरतलब है कि अक्षय कुमार की फिल्म ‘गोल्ड’ भारत द्वारा ओलम्पिक में पहले गोल्ड जीतने की कहानी है, जिसे भारत ने 1948 में जीता था। इस फिल्म में अक्षय कुमार हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह की भूमिका निभाते नज़र आएंगे। इस गोल्ड मैडल की विशेषता इसलिए भी अधिक थी क्योंकि भारत ने एक स्वतंत्र देश के तौर पर यह पहला गोल्ड जीता था।
फिल्म ‘गोल्ड’ का निर्देशन रीमा कागती ने किया है। फिल्म 2018 में 15 अगस्त को रिलीज़ हो सकती है। बताते चलें कि, अक्षय कुमार की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘पैडमैन’ अगले साल 26 जनवरी को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है।
नये साल की पूर्व संध्या पर सनी लियोनी के कार्यक्रम को मंजूरी नहीं : कर्नाटक सरकार
बेंगलुरु: बेंगलुरु में नये साल की पूर्व संध्या पर अभिनेत्री सनी लियोनी के एक कार्यक्रम को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. कन्नड़ संगठन के विरोध के बाद कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को फैसला किया कि बॉलीवुड अदाकारा सनी लियोनी को यहां और राज्य में कहीं भी नर्व वर्ष की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी. बता दें कि कन्नड़ संगठनों के विरोध के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है.
बेंगलुरु: बेंगलुरु में नये साल की पूर्व संध्या पर अभिनेत्री सनी लियोनी के एक कार्यक्रम को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. कन्नड़ संगठन के विरोध के बाद कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को फैसला किया कि बॉलीवुड अदाकारा सनी लियोनी को यहां और राज्य में कहीं भी नर्व वर्ष की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी. बता दें कि कन्नड़ संगठनों के विरोध के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है.
कर्नाटक के गृह मंत्री रामलिंग रेड्डी ने बताया, ‘मैंने ऐसे कार्यक्रम की इजाजत नहीं देने का निर्देश दिया है (अधिकारियों को). उन्हें (सनी को) यहां मत लाइए. लोग कार्यक्रम का विरोध कर रहे हैं. उन्हें (आयोजकों को) कन्नड़ संस्कृति और साहित्य से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने दीजिए, जो हमारी धरोहर हैं. केआरवी पदाधिकारी हरीश ने सरकार के फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा, ‘यह हमारे लिए एक जीत है. सरकार ने कार्यक्रम रद्द कर दिया.’
गुजरात चुनाव 2017 : जानिए चुनाव की तारीख, नतीजे, कार्यक्रम और कुछ सवालों के जवाब
नई दिल्ली: गुजरात विधानसभा चुनाव के सभी चरणों का मतदान संपन्न हो चुका है. अब बस इंतजार है नतीजे की जिसकी तारीख 18 दिसंबर निर्धारित है. गुजरात चुनाव का प्रचार अभियान 12 दिसंबर को खत्म हुआ. पीएम मोदी के गृह राज्य में बीजेपी और कांग्रेस के बीच में जबरदस्त राजनीतिक टक्कर देखने को मिली. हालांकि, अब संभावनाएं जताई जा रही हैं कि राज्य में बीजेपी फिर से सरकार बनाने में कामयाब हो जाएगी. कांग्रेस जहां राज्य में बीजेपी के विजय रथ को रोकना चाहती है, वहीं बीजेपी विजय अभियान जारी रखना चाहती है. बता दें कि गुजरात में पिछले 22 सालों से बीजेपी की सरकार है. इस चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने जातिय समीकरण को साधने की कोशिश की है. गुजरात चुनाव के मैदान में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने काफी सोच-समझ कर अपने उम्मीदवारों को उतारा था. 2002 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 40 फीसदी वोट मिले थे, वहीं 2007 और 2012 के गुजरात चुनाव में 49 फीसदी वोट मिले थे. राजनीतज्ञों की मानें तो इस चुनाव में कांग्रेस के लिए महज 4-5 फीसदी का इधर-उधर गेम चेंजर साबित हो सकता है.
इधर गुजरात चुनाव में आखिरी चरण के मतदान के बाद न्यूज चैनलों के एग्जिट पोल में बीजेपी को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है. जो एग्जिट पोल सामने आए हैं, उसमें हिमाचल प्रदेश और गुजरात दोनों जगह बीजेपी की जीत बताई जा रही है. पोल्स ऑफ एग्जिट पोल की मानें तो गुजरात में भाजपा को 182 में से 116 सीटें मिलती हुई दिखाई दे रही हैं. वहीं, कांग्रेस सिर्फ 65 सीटों पर सिमटती हुई दिख रही है. खैर, ये सिर्फ अनुमान ही है. असली नतीजे तो सोमवार यानी 18 दिसंबर को ही पता चलेंगे.
तो चलिए जानते हैं गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले कुछ सवालों के जवाब
गुजरात विधानसभा चुनावों की तारीख क्या है?
चुनाव आयोग ने गुजरात विधानसभा चुनाव को दो चरणों में बांटा. पहले चरण का मतदान 9 दिसंबर को, वहीं दूसरे चरण का मतदान 14 दिसंबर को.
गुजरात चुनाव कितने चरण में आयोजित किए गये?
गुजरात विधानसभा चुनाव दो चरण में आयोजित किये गये. 89 सीटों के लिए पहले चरण की वोटिंग 9 दिसंबर को हुई और 93 सीटों के लिए दूसरे चरण की वोटिंग 14 दिसंबर को हुई.
पहले चरण में उम्मीदवारों की कुल संख्या कितनी थी?
गुजरात चुनाव के पहले चरण में 977 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे.
पहले चरण में महिला उम्मीदवारों की कुल संख्या कितनी थी?
पहले चरण में कुल 977 उम्मीदवारों में से महिला उम्मीदवारों की संख्या महज 57 थी.
पहले चरण में कितने मतदान केंद्र बनाए गये थे?
गुजरात चुनाव के पहले चरण की वोटिंग के लिए कुल 24,689 मतदान केंद्र बनाए गये थे.
गुजरात चुनाव के दूसरे यानी आखिरी चरण में उम्मीदवारों की कुल संख्या क्या थी?
14 दिसंबर को हुए आखिरी चरण के मतदान में 851 उम्मीदवार मैदान में थे.
गुजरात चुनाव के आखिरी चरण में महिला उम्मीदवारों की कुल संख्या क्या थी?
गुजरात चुनाव के आखिरी चरण में महिला उम्मीदवारों की कुल संख्या 69 थी.
गुजरात चुनाव के आखिरी चरण में कितने मतदान केंद्र बनाए गये थे?
गुजरात चुनाव के आखिरी चरण की वोटिंग के लिए 25,558 मतदान केंद्र बनाए गये थे.
गुजरात में निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या कितनी है?
गुजरात में 26 लोकसभा क्षेत्र और 182 विधानसभा क्षेत्र हैं.
गुजरात में सत्तारूढ़ और विपक्षी पार्टी कौन सी है?
गुजरात में भारतीय जनता पार्टी सत्ता में है और विपक्ष में कांग्रेस है.
गुजरात विधानसभा चुनाव के परिणाम की घोषणा कब होगी?
गुजरात चुनाव के वोटों की गिनती 18 दिसंबर को होगी और उसी दिन नतीजे सामने आएंगे.
अनोखा स्कूल : न फीस लगती है न हाजिरी, पढ़ते हैं ज्ञान का पाठ
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इंदौर। खुले आसमान के नीचे मैदान में गूंजते गिनती-पहाड़े… अनुशासन में बैठे बच्चे… पांचवीं का विद्यार्थी हो या कॉलेज का, सभी को 25 तक पहाड़े कंठस्थ। कोई अजनबी भी पहुंच जाए तो बच्चे उनका अभिवादन करना नहीं भूलते। उनके घर में भले ही कोई पढ़ा-लिखा नहीं है, लेकिन परीक्षा में उनके नंबर कभी 70-80 फीसदी से कम नहीं आते। खास बात है यहां न फीस देना पड़ती है, न अटेंडेंस (हाजिरी) लगती है।
पढ़ाई, अनुशासन और सम्मान की सीख देने वाले स्कीम नंबर 78 के ओपन स्काय स्कूल में कमजोर वर्ग के करीब 500 विद्यार्थी सफलता की नई इबारत गढ़ रहे हैं। डॉ. ललिता शर्मा द्वारा आठ साल पहले रोपा गया खुले स्कूल का पौधा आज बड़ा वृक्ष बन चुका है। यह एक ऐसा स्कूल है जहां न कोई दीवार है, न कक्षाएं, न रजिस्टर लेकिन बच्चों को समर्पण भाव से पढ़ाने वाले शिक्षक जरूर हैं। दोपहर 3 बजते ही खुले आसमान में लगने वाले स्कूल में बच्चों का आना शुरू हो जाता है। शाम तक मैदान में बच्चों की चहल-पहल रहती है।
बच्चे की उम्र और कक्षा के हिसाब से सभी के समूह बने हुए हैं। बिना बोले सभी अपने-अपने समूह में बैठते हैं। इसमें नर्सरी से लेकर कॉलेज तक के बच्चे पढ़ रहे हैं। डॉ. ललिता हर बच्चे के ग्रुप में जाकर उन्हें पढ़ाती हैं। आठ साल से पढ़ रहे कई विद्यार्थी अब उच्च शिक्षा ले चुके हैं। बच्चों के स्कूल-कॉलेज से फॉर्म भरवाने से लेकर परीक्षा दिलवाने तक श्रीमती शर्मा ही मदद करती हैं।
अब छात्राएं बन गई ‘टीचर दीदी”
साना, पूजा, प्रियंका को ओपन स्काय स्कूल में पढ़ते हुए आठ साल हो गए। ये छात्राएं अब बारहवीं कक्षा में पहुंच चुकी हैं। ये डॉ. ललिता से पढ़ती हैं और अपनी पढ़ाई कर छोटी कक्षा के बच्चों को पढ़ाती हैं। इनकी तरह करीब दस छात्राएं छोटे बच्चों की टीचर दीदी बन गई हैं।
घर से शुरू हुआ स्कूल मैदान तक पहुंचा
डॉ. शर्मा को बीते साल अपनी सामाजिक सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिल चुका है। वे बताती हैं घर के बरामदे से बच्चों को पढ़ाने की शुरुआत की थी। बच्चों की संख्या बढ़ी तो सड़क पर पढ़ाने लगी। फिर सड़क पर ज्यादा भीड़ होने से लोगों को आवाजाही में परेशानी हुई तो मैदान में पढ़ाना शुरू किया। मैदान में चार घंटे में करीब 500 बच्चे अलग-अलग बैच में पढ़ते हैं।
सासू मां करती हैं मदद
डॉ. शर्मा बताती हैं बच्चे को सबसे पहले पहाड़े कंठस्थ कराते हैं। पहाड़े याद करवाने में सास मना अनंत मदद करती हैं। नए बच्चों को रोज आा घंटा पहाड़े याद करवाए जाते हैं। साथ ही उन्हें साफ-सुथरा रहने, सम्मान, अनुशासन में रहने की बातें सिखाते हैं। बारिश के दिनों में मैडम के घर में कक्षाएं लगती हैं। डॉ. शर्मा कहती हैं इन बच्चों की जिंदगी बनाने के लिए प्राइवेट कॉलेज में प्रोफेसर की नौकरी भी छोड़ दी। अब पूरा ध्यान सिर्फ बच्चों पर है।
