सिवनी-पराक्रम जन सेवा समिति बरघाट स्व. शहीद बिन्दु कुमरे स्मृति में आज जिला हॉस्पिटल सिवनी में रक्तदान शिविर आयोजित किया गया।
रक्तदान शिविर का आयोजन
सुप्रीम कोर्ट के जजो के खिलाफ परिवाद दायर
गुना -सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों के खिलाफ गुना न्यायालय में परिवाद पेश jmfc कोर्ट में किया परिवाद पेश फरियादी लॉयर राकेश पटेल के वकील मनोज श्रीवास्तव ने किया परि वाद पेश धारा 166 ए 499 .500 505 और न्यायालय अवमानना अधिनियम की धारा 12 के तहत परिवाद कल कोर्ट में होगी सुनवाई।
नहीं बिकेंगे प्लास्टिक के तिरंगे पाया जाने पर होगी सख़्त कार्यवाही : कलेक्टर सिवनी
प्लास्टिक के तिरंगे झंडे नहीं बिकेंगें- जो कोई भी व्यक्ति प्लास्टिक के झंडे बेचता हुआ पाया जायेगा उसके विरूद्व सख्त कार्यवाही की जायेगी।
सिवनी 18 जनवरी // आगामी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्लास्टिक के राष्ट्रीय झंडे नहीं बिकेंगें। जो कोई भी व्यक्ति प्लास्टिक के झंडे बेचता हुआ पाया जायेगा उसके विरूद्व सख्त कार्यवाही की जायेगी। इस संबंध में अधिकारियों को दिये गये निर्देशों में कहा है कि 26 जनवरी को विक्रय किये जाने वाले राष्ट्रीय ध्वज सही आकार के होना चाहिए। झंडे की लंबाई व चौड़ाई निर्धारित अनुपात होना चाहिए। जो कोई भी व्यक्ति इन निर्देशों का उल्लंघन कर गलत आकार व प्लास्टिक के झंडे बेचता हुआ पाया जायेगा तो उसके विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की जायेगी।
बोधसिंह भगत ने की सिवनी की उपेक्षा
सिवनी– बालाघाट-सिवनी सांसद बोधसिंह भगत द्वारा एक बार फिर सिवनी जिले की विधानसभा बरघाट एवं सिवनी के लाखो मतदाताओं को निराश किया है,
दरअसल मामला बालाघाट लोकसभा में शामिल 8 विस् में सड़कों के निर्माण की स्वीकृति का है जहां कुल 54 सड़क स्वीकृत हुई जिनमे से सिवनी जिले की बरघाट विधानसभा में 3 एवं सिवनी विधानसभा में सिर्फ 1 सड़क बनना है
वही बालाघाट जिले की 6 विधानसभा में 50 सड़क बालाघाट ,वारासिवनी,परसवाड़ा,लाजी,बेहर एवं कटंगी विधानसभा में बनना है ।
जबकि लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी जी के द्वारा दिये सबका साथ, सबका विकास नारो पर विश्वास कर सीवनी व बरघाट विस् के मतदाताओं ने करीब 50 हजार वोट की बढ़त बोधसिंह भगत को दिलावाई थी,ऐसे में सडक निर्माण कार्य मे
सिवनी के 2 विस् में मात्र 4 कार्य स्वीकत करवाना स्पस्ट कर रहा है कि सांसद को सिवनी के विकास का कितना खयाल है।
प्रथम जिला स्तरीय सपाक्स सम्मेलन 21 जनवरी को…
सामान्य,पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था सपाक्स का “प्रथम जिला स्तरीय सपाक्स सम्मेलन” प्रदेश संरक्षक सपाक्स सम्मान्य श्री राजीव शर्मा जी आई.ए.एस.अपर सचिव नगरीय प्रशासन के मुख्य आतिथ्य एवं प्रदेश अध्यक्ष सपाक्स सम्मान्य श्री डॉ के.एस.तोमर जी,प्रदेश अध्यक्ष सपाक्स समाज सम्मान्य श्री इंजी.पी.एस.परिहार जी,प्रदेश उपाध्यक्ष सपाक्स युवा संगठन सम्मान्य श्री प्रसंग परिहार जी एवं प्रांतीय पदाधिकारियों के विशिष्ट आतिथ्य तथा गरिमामयी उपस्थिति में होगा सम्पन्न
सामान्य,पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था सपाक्स का “प्रथम जिला स्तरीय सपाक्स सम्मेलन” प्रदेश संरक्षक सपाक्स सम्मान्य श्री राजीव शर्मा जी आई.ए.एस.अपर सचिव नगरीय प्रशासन के मुख्य आतिथ्य एवं प्रदेश अध्यक्ष सपाक्स सम्मान्य श्री डॉ के.एस.तोमर जी,प्रदेश अध्यक्ष सपाक्स समाज सम्मान्य श्री इंजी.पी.एस.परिहार जी,प्रदेश उपाध्यक्ष सपाक्स युवा संगठन सम्मान्य श्री प्रसंग परिहार जी एवं प्रांतीय पदाधिकारियों के विशिष्ट आतिथ्य तथा गरिमामयी उपस्थिति में दिनाँक 21 जनवरी 2018,दिन रविवार को, प्रातः10.30 बजे, स्मृति लॉन,बारापत्थर,सिवनी में आयोजित किया जा रहा है।
जिला नोडल अधिकारी एवं जिला अध्यक्ष सपाक्स श्री प्रद्युम्न चतुर्वेदी,जिला नोडल अधिकारी एवं कार्यकारी अध्यक्ष सपाक्स श्री एन.एस.बैश,जिला सचिव श्री अजय शर्मा,जिला उपाध्यक्ष श्री के.के.दुबे,श्री चुनेन्द्र बिसेन,
संयोजक श्री अरुण राय,संरक्षक श्री डी.एल.तिवारी,श्री एम.के.गौतम एवं सपाक्स समाज संस्था के जिलाध्यक्ष श्री मुरलीधर पांडे ने बताया कि 10 फरवरी 2016 को पदोन्नति में आरक्षण समाप्त किये जाने के उद्देश्य से सपाक्स का गठन हुआ।30 अप्रैल 2016 को माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा पदोन्नति में आरक्षण समाप्त किये जाने का ऐतिहासिक फैसला पारित किया गया। पदोन्नति में आरक्षण को लेकर म.प्र सरकार द्वारा माननीय उच्चन्यायालय का निर्णय लागू नहीं किया गया।जिससे प्रदेश का सपाक्स वर्ग आहत है।12 जून 2016 को टीटीनगर दशहरा मैदान भोपाल में विशेष वर्ग के अधिकारी कर्मचारी सम्मेलन में अचानक पहुंचे माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा कहा गया था कि ‘कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता।”
जिससे सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में राज्य सरकार के प्रति जमकर आक्रोश है। माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर ने प्रदेश में आरक्षित समुदाय के प्रमोशन से जुड़े सिविल सर्विसेस प्रमोशन नियम 2002 को असंवैधानिक घोषित करार दिया है।माननीय उच्च न्यायालय ने 2002 में सरकार द्वारा बनाये गये नियम को रद्ध कर 2002 से 2016 तक जिन्हें नये नियम के अनुसार पदोन्नति दी गयी है उन्हें रिवर्ट करने के आदेश दिये थे।म.प्र सरकार ने इस आदेश के खिलाफ माननीय सर्वोच्च न्यायालय में स्पेशल लीव पिटीशन(LIP) दायर की है।
फैसले के इंतजार में हमें सिर्फ बढ़ी हुई सुनवाई की तारीखें मिल रही हैं। राज्य सरकार की कूटनीति के चलते उक्त प्रकरण माननीय सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ को सौंप दिया गया है।राज्य सरकार ‘‘सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के अधिकारी कर्मचारी’’ के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। सपाक्स कर्मचारियों/अधिकारियों में राज्य सरकार के प्रति जमकर आक्रोश है।क्या?सामान्य पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के अधिकारी कर्मचारियों के प्रति राज्य सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं है…? राज्य सरकार संविधान के प्रावधान अनुरूप सभी वर्गो से समानता का व्यवहार न करते हुए सौतेला व्यवहार कर रही है।म.प्र सरकार के रवैये से सामान्य पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के सिर्फ अधिकारियों कर्मचारियों में रोष ही नहीं बल्कि समाज के आमजनों में भी असंतोष व्याप्त है।जिला नोडल अधिकारी एवं जिला अध्यक्ष सपाक्स श्री प्रद्युम्न चतुर्वेदी,जिला नोडल अधिकारी एवं कार्यकारी अध्यक्ष सपाक्स श्री एन.एस.बैश,जिलाध्यक्ष सपाक्स समाज संस्था श्री मुरलीधर पांडे ने 21 जनवरी को सामान्य,पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारियों,
सपाक्स समाज,प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से प्रथम जिला स्तरीय सपाक्स सम्मेलन में उपस्थिति की अपील की है ।।
उक्ताशय की जानकारी जिला मीडिया प्रभारी विपिन शर्मा ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में दी।
उक्त शासकीय कर्मचारियों की स्थानांतरण नीति ,प्रदेश सरकार द्वारा आज 2018-19 के लिय तबादले नीति जारी कर दी है।
भोपाल। मध्यप्रदेश IPS मीट 2018 का आयोजन आगामी 19 जनवरी से राजधानी भोपाल में शुरु होगा। IPS मीट 20 जनवरी को समाप्त होगी। यह जानकारी भोपाल डीआईजी धर्मेन्द्र चौधरी ने आज बुधवार को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में दी है।
डीआईजी चौधरी ने प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि एमपी पुलिस द्वारा आयोजित एक दिवसीय पुलिस संगोष्ठी का शुभारंभ 19 जनवरी की सुबह सीएम शिवराज सिंह चौहान द्वारा विधानसभा सभागार में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रदेश गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह और विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा, विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
डीआईजी चौधरी ने आगे बताया कि संगोष्ठी के प्रथम सत्र में ‘कट्टरता का सुधारवाद’ विषय पर इंटरनेशनल रिसर्चर जेरिन जिराल्ड वक्तव्य देंगी। द्वितीय सत्र में ‘सोशल मीडिया के नए आयाम एवं कानून प्रवर्तन संस्थाओं के लिए चुनौतियां’ विषय पर व्याख्यान होगा।
डीआईजी चौधरी का कहना है कि 19 जनवरी को सुबह साढ़े दस बजे अधिकारियों के परिवार वालों के लिए बड़ी झील में बोटिंग, क्रूज, वन विहार की गतिविधियां रखी जाएंगे। शाम 7 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्यालय आॅफिसर्स मेस में होगा, जिसमें लोक नृत्य, लोक गान एवं अन्य कार्यक्रम शामिल होंगे।
20 जनवरी को सुबह मोतिलाल स्टेडियम में डीजीपी इलेवन एवं डीजीपी पुलिस हाउसिंग इलेवन के बीच मैत्र क्रिकेट मैच, रस्सा कसी एवं अन्य खेलकूद की प्रतियोगित आयोजित होगी। इसमें सभी अधिकारी अपने परिवार के साथ हिस्सा लेंगे। इसी सत्र में पुलिस परिवार की विभिन्न रुचि जैसे क्वाइंस कलेक्शन एवं स्टेम्स कलेक्शन का प्रदर्शन होगा। 20 जनवरी की शाम पुलिस परिवार के सदस्यों द्वारा विभिन्न प्रकार की व्यक्तिगत योग्यताओं का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें नृत्य, गायन, वाद्ध यंत्र एवं अन्य कलाएं प्रस्तुत की जाएंगी।
डीआईजी चौध
कभी सोचा है कि गर्भपात के दौरान उस बच्चे का क्या होता है जिसे अबॉर्ट करवाया जाता है?
एक औरत के लिए मां बनना उसकी ज़िन्दगी का सबसे खूबसूरत पल होता है. लेकिन ज़रा सोचिये उस वक़्त उस औरत के दिल पर क्या बीतती होगी जब उससे बोला जाता है कि बच्चा गिरा दो, गर्भपात करा लो, ये बच्चा अभी नहीं चाहिए, ऐसे में उसके दर्द का अंदाजा लगाना नामुमकिन है. मगर हमारे देश में गर्भपात को एक बहुत ही आसान शब्द जानकर बोल दिया जाता है. ख़ास तौर पर उस वक़्त महिला का गर्भपात कराने की बात बोली जाती है, जबकि उसके गर्भ में कन्या भ्रूण हो. कई बार लोगों को बच्चा नहीं चाहिए होता है, तो गर्भपात करा देते हैं. मगर क्या आपको पता है कि आसान सी लगने वाली गर्भपात की ये प्रक्रिया कितनी दर्दनाक और भयानक होती है. शायद नहीं सोचा होगा. गर्भपात को लेकर तो लोगों को कई बार चर्चा करते सुना होगा, लेकिन उस बच्चे के बारे में कोई बात नहीं करता कि आखिर उन अजन्मे बच्चों का क्या होता है…
आज हम आपको गर्भपात के दौरान होने वाली भयानक प्रक्रिया से रू-ब-रू कराएंगे. ये भी बताएंगे कि कैसे किया जाता है गर्भपात? पिछले साल Felicia Cash नाम की एक महिला ने फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर की थी, जिसमें उन्होंने बताया कि गर्भपात के दौरान उन बच्चों के साथ क्या होता है?
Felicia Cash ने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘जुलाई 2014 में मेरा मिसकैरेज हो गया था, जिसके कारण मेरा 14 हफ़्तों और 6 दिन का प्यारा बेटा Japeth Peace मर गया था. उस वक़्त वो आश्चर्यजनक रूप से काफ़ी विकसित हो चुका था, उसके पैरों की उंगलियां और अंगूठा भी बन चुका था. यहां तक कि उसके नाख़ून भी निकलने शुरू हो गए थे और दिखने लगे थे. उसकी छोटी-छोटी और महीन नसों को उसकी पतली स्किन के ज़रिये देखा जा सकता था, जो उसके नाज़ुक शरीर में रक़्त प्रवाहित कर रही थीं. यहां तक कि उसकी मांसपेशियां भी दिखाई दे रही थीं. उसके लिए मैं ये कहती हूं कि गर्भावस्था की आधी अवधि में वो कोशिकाओं का एक समूह या केवल एक मांस का टुकड़ा मात्र नहीं था, बल्कि उसकी बॉडी ह्यूमन जैसी दिखने लगी थी. वो एक सुन्दर और स्वस्थ बच्चा था जिसकी रचना भगवान ने की थी और अब वो उन्हीं के साथ रहेगा.इसके साथ ही Felicia ये लिखा, ‘मैं ये पोस्ट उन लोगों को सही जानकारी देने के लिए लिख रही हूं, जिनको ये नहीं पता होता कि 3 महीने की गर्भावस्था में भी भ्रूण पूरी तरह से विकसित हो जाता है. और इसलिए 3 महीने में गर्भपात को हल्के में नहीं लेना चाहिए. दरअसल, मैं ये बताना चाहती हूं कि साढ़े तीन महीने की अवधि में भी बच्चा कोई मांस का टुकड़ा या निर्जीव वस्तु नहीं होता. इतने कम समय में भी बच्चा विकसित हो जाता है.
गर्भधारण के 16 दिनों बाद ही उसका छोटा सा दिल धड़कने लगता है, और अपने खून को पंप करने लगता है. मतलब कि बच्चे का दिल महिला के गर्भवती होने की जानकारी होने से पहले ही अपना काम शुरू कर देता है. जबकि लोगों में एक गलत धारणा है कि जब तक वो बच्चे की धड़कन सुन नहीं सकते हैं या नहीं देख सकते हैं, उसका दिल विकसित नहीं हुआ है ऐसा नहीं होता है. जबकि सबसे पहले दिल ही बनता है और अपना काम शुरू करता है. गर्भधारण के 6 हफ़्तों के बाद बच्चे के श्रवण अंगों यानि कि कान बनने लगते हैं और उनका तंत्रिका तंत्र 7वें हफ्ते में काम करना शुरू कर देता है.
इसके साथ ही उन्होंने लिखा, ‘ये सारी जानकारी आपको इंटरनेट पर और मेडिकल जर्नल्स या फिर प्रेग्नेंसी गाइड्स में आसानी से मिल जायेगी. हालांकि, कुछ कारणों से लोगों को लगता है कि यह सब गर्भावस्था में बहुत बाद में होता है. हो सकता है ऐसा इसलिए हो कि वो उन लोगों द्वारा बेवकूफ़ बनाये जा रहे हों, जो उनका शोषण करना चाहते हैं. या ऐसा भी हो सकता है कि वो सब कुछ जानकर भी अपनी आंखों पर पट्टी और कानों में रुई डाल लेते हैं, क्योंकि ये सच बहुत ही कड़वा है और ये सच्चाई उनके कुछ अहम निर्णयों में बाधा ना बन जाए इसलिए वो सब कुछ जानते हुए भी अपनी इच्छा से गर्भपात कराते हैं.’
एक औरत के लिए मां बनना उसकी ज़िन्दगी का सबसे खूबसूरत पल होता है. लेकिन ज़रा सोचिये उस वक़्त उस औरत के दिल पर क्या बीतती होगी जब उससे बोला जाता है कि बच्चा गिरा दो, गर्भपात करा लो, ये बच्चा अभी नहीं चाहिए, ऐसे में उसके दर्द का अंदाजा लगाना नामुमकिन है. मगर हमारे देश में गर्भपात को एक बहुत ही आसान शब्द जानकर बोल दिया जाता है. ख़ास तौर पर उस वक़्त महिला का गर्भपात कराने की बात बोली जाती है, जबकि उसके गर्भ में कन्या भ्रूण हो. कई बार लोगों को बच्चा नहीं चाहिए होता है, तो गर्भपात करा देते हैं. मगर क्या आपको पता है कि आसान सी लगने वाली गर्भपात की ये प्रक्रिया कितनी दर्दनाक और भयानक होती है. शायद नहीं सोचा होगा. गर्भपात को लेकर तो लोगों को कई बार चर्चा करते सुना होगा, लेकिन उस बच्चे के बारे में कोई बात नहीं करता कि आखिर उन अजन्मे बच्चों का क्या होता है…
आज हम आपको गर्भपात के दौरान होने वाली भयानक प्रक्रिया से रू-ब-रू कराएंगे. ये भी बताएंगे कि कैसे किया जाता है गर्भपात?
पिछले साल Felicia Cash नाम की एक महिला ने फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर की थी, जिसमें उन्होंने बताया कि गर्भपात के दौरान उन बच्चों के साथ क्या होता है?
FelicaCash ने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘जुलाई 2014 में मेरा मिसकैरेज हो गया था, जिसके कारण मेरा 14 हफ़्तों और 6 दिन का प्यारा बेटा Japeth Peace मर गया था. उस वक़्त वो आश्चर्यजनक रूप से काफ़ी विकसित हो चुका था, उसके पैरों की उंगलियां और अंगूठा भी बन चुका था. यहां तक कि उसके नाख़ून भी निकलने शुरू हो गए थे और दिखने लगे थे. उसकी छोटी-छोटी और महीन नसों को उसकी पतली स्किन के ज़रिये देखा जा सकता था, जो उसके नाज़ुक शरीर में रक़्त प्रवाहित कर रही थीं. यहां तक कि उसकी मांसपेशियां भी दिखाई दे रही थीं. उसके लिए मैं ये कहती हूं कि गर्भावस्था की आधी अवधि में वो कोशिकाओं का एक समूह या केवल एक मांस का टुकड़ा मात्र नहीं था, बल्कि उसकी बॉडी ह्यूमन जैसी दिखने लगी थी. वो एक सुन्दर और स्वस्थ बच्चा था जिसकी रचना भगवान ने की थी और अब वो उन्हीं के साथ रहेगा.
इसके साथ ही Felicia ये लिखा, ‘मैं ये पोस्ट उन लोगों को सही जानकारी देने के लिए लिख रही हूं, जिनको ये नहीं पता होता कि 3 महीने की गर्भावस्था में भी भ्रूण पूरी तरह से विकसित हो जाता है. और इसलिए 3 महीने में गर्भपात को हल्के में नहीं लेना चाहिए. दरअसल, मैं ये बताना चाहती हूं कि साढ़े तीन महीने की अवधि में भी बच्चा कोई मांस का टुकड़ा या निर्जीव वस्तु नहीं होता. इतने कम समय में भी बच्चा विकसित हो जाता है.
गर्भधारण के 16 दिनों बाद ही उसका छोटा सा दिल धड़कने लगता है, और अपने खून को पंप करने लगता है. मतलब कि बच्चे का दिल महिला के गर्भवती होने की जानकारी होने से पहले ही अपना काम शुरू कर देता है. जबकि लोगों में एक गलत धारणा है कि जब तक वो बच्चे की धड़कन सुन नहीं सकते हैं या नहीं देख सकते हैं, उसका दिल विकसित नहीं हुआ है ऐसा नहीं होता है. जबकि सबसे पहले दिल ही बनता है और अपना काम शुरू करता है. गर्भधारण के 6 हफ़्तों के बाद बच्चे के श्रवण अंगों यानि कि कान बनने लगते हैं और उनका तंत्रिका तंत्र 7वें हफ्ते में काम करना शुरू कर देता है.
इसके साथ ही उन्होंने लिखा, ‘ये सारी जानकारी आपको इंटरनेट पर और मेडिकल जर्नल्स या फिर प्रेग्नेंसी गाइड्स में आसानी से मिल जायेगी. हालांकि, कुछ कारणों से लोगों को लगता है कि यह सब गर्भावस्था में बहुत बाद में होता है. हो सकता है ऐसा इसलिए हो कि वो उन लोगों द्वारा बेवकूफ़ बनाये जा रहे हों, जो उनका शोषण करना चाहते हैं. या ऐसा भी हो सकता है कि वो सब कुछ जानकर भी अपनी आंखों पर पट्टी और कानों में रुई डाल लेते हैं, क्योंकि ये सच बहुत ही कड़वा है और ये सच्चाई उनके कुछ अहम निर्णयों में बाधा ना बन जाए इसलिए वो सब कुछ जानते हुए भी अपनी इच्छा से गर्भपात कराते हैं.’
मैं आशा करती हूं कि ये जानकारी और मेरे प्यारे बेटे की दिल-दहला देने वाली ये फ़ोटोज़ गर्भावस्था, गर्भस्थ शिशु और गर्भपात से जुड़ी जानकारी को समझने में थोड़ी और ज़्यादा मदद करेंगी. सच में बच्चे की इन मार्मिक तस्वीरों को देखकर ये लगता है कि अबॉर्ट हुए बच्चों को कितनी तकलीफ होती होगी
अंत में मैं बस ये कहना चाहती हूं कि अगर आप गर्भपात कराने का विचार कर रहे हैं, तो एक बार इस सच्चाई को जानने के बाद पुनः विचार करें कि क्या ये सही है. ये किसी भी तरह से शर्मनाक, कमज़ोर, या किसी की निंदा करने का प्रयास नहीं है. ये उस मां की आपसे अपील है, जिसने मिसकैरेज के कारण अपना प्यारा बच्चा खो दिया कि जो भी कदम उठायें सोच-समझ कर उठायें. गर्भपात के अलावा भी कई विकल्प मौजूद हैं.
Felicia Cash की ये पोस्ट उनके दिलों तक ज़रूर पहुंचेगी जिनका किन्हीं कारणों से मिसकैरेज हो गया और उन्होंने अपना बच्चा खो दिया हो.
मगर मैं एक सवाल उनसे करना चाहती हूं जो अपनी मर्जी से गर्भपात करवाते हैं क्या उनको इस बात का एहसास नहीं होता कि वो दुनिया में आने से पहले ही गर्भ के अंदर बच्चे को मार देते हैं. क्या आपको पता है कि गर्भपात के दौरान बच्चे को कितनी तकलीफ़ होती है? शायद नहीं, तभी तो अजन्में बच्चे के साथ इतनी क्रूरता करने की हिम्मत कर पाते हैं.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब हॉस्पिटल में किसी महिला का अबॉर्शन किया जाता है तो उसे सैलाइन अबॉर्शन (Saline Abortion) कहा जाता है. ये प्रक्रिया बेहद दर्दनाक होती है. इसमें इंजेक्शन की मदद से महिला के गर्भ में एक ऐसा लिक्वीड डाला जाता है, जिसके असर से बच्चा मर जाता है. इस लिक्वीड का असर इतना खतरनाक होता है कि बच्चे के फ़ेंफड़े और स्किन पूरी तरह जल जाती है और वो मर जाता है. उसके बाद महिला का प्रसव कराया जाता है, जिसके बाद मरा हुआ बच्चा कोख से बाहर आता है. मगर ज़रा सोचिये अगर इसके बाद भी बच्चा ज़िंदा बच जाए (कई केसेज़ में ऐसा हो जाता है) तो उस जले और अविकसित बच्चे का न हीं कोई इलाज किया जाता है और न ही कोई देख भाल, बल्कि उसको मरने के लिए छोड़ दिया जाता है.

आज भी हमारे देश में गर्भ में लड़की होने की बात पता चलते ही गर्भवती महिला का जबरन घरों में ही अबॉर्शन करा दिया जाता है, जिसके कारण कई बार महिला की भी मौत हो जाती है. वहीं कई बार बलात्कार के परिणाम स्वरूप गर्भवती महिला का डॉक्टर्स की मदद से अबॉर्शन कराया जाता है. क्योंकि हमारा समाज उसको अपनाता नहीं है. क्योंकि हम आज भी दकियानूसी नियमों और क़ानूनों को मानते हैं ना…
यहां मैं एक बात यही कहना चाहूंगी कि अगर आपको बच्चा नहीं चाहिए तो प्रोटेक्शन का इस्तेमाल क्यों नहीं करते? अगर फिर भी गर्भधारण हो जाता है, तो भी क्या उसे मारना सही है, क्या उसके लिए दूसरे विकल्प नहीं है, उस बच्चे को आप उन लोगों को दे सकते हैं, जो बेऔलाद हैं, जो बच्चे के लिए तरस रहे हैं. क्योंकि आप परेशानी नहीं उठाना चाहते हैं और आपको वो अपनी आंखों के सामने दिख नहीं रहा है, तो आप उसको मार देते हैं. अगर मारना ही है तो उसको आने ही क्यों देते हो? प्रोटेक्शन खरीदने में शर्म आती है, लेकिन नन्हीं सी जान को मारने में शर्म नहीं आती…
ये बहुत बड़ा सवाल है सोचियेगा ज़रूर इसके बारे में. अगर आप सोचेंगे तो आपको उस जान का दर्द समझ आएगा जो दुनिया में आना चाहता है, पर आ नहीं पाता है.
IPS मीट का आयोजन 19 जनवरी से
भोपाल। मध्यप्रदेश IPS मीट 2018 का आयोजन आगामी 19 जनवरी से राजधानी भोपाल में शुरु होगा। IPS मीट 20 जनवरी को समाप्त होगी। यह जानकारी भोपाल डीआईजी धर्मेन्द्र चौधरी ने आज बुधवार को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में दी है।
डीआईजी चौधरी ने प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि एमपी पुलिस द्वारा आयोजित एक दिवसीय पुलिस संगोष्ठी का शुभारंभ 19 जनवरी की सुबह सीएम शिवराज सिंह चौहान द्वारा विधानसभा सभागार में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रदेश गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह और विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा, विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
डीआईजी चौधरी ने आगे बताया कि संगोष्ठी के प्रथम सत्र में ‘कट्टरता का सुधारवाद’ विषय पर इंटरनेशनल रिसर्चर जेरिन जिराल्ड वक्तव्य देंगी। द्वितीय सत्र में ‘सोशल मीडिया के नए आयाम एवं कानून प्रवर्तन संस्थाओं के लिए चुनौतियां’ विषय पर व्याख्यान होगा।
डीआईजी चौधरी का कहना है कि 19 जनवरी को सुबह साढ़े दस बजे अधिकारियों के परिवार वालों के लिए बड़ी झील में बोटिंग, क्रूज, वन विहार की गतिविधियां रखी जाएंगे। शाम 7 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्यालय आॅफिसर्स मेस में होगा, जिसमें लोक नृत्य, लोक गान एवं अन्य कार्यक्रम शामिल होंगे।
20 जनवरीको सुबह मोतिलाल स्टेडियम में डीजीपी इलेवन एवं डीजीपी पुलिस हाउसिंग इलेवन के बीच मैत्र क्रिकेट मैच, रस्सा कसी एवं अन्य खेलकूद की प्रतियोगित आयोजित होगी। इसमें सभी अधिकारी अपने परिवार के साथ हिस्सा लेंगे। इसी सत्र में पुलिस परिवार की विभिन्न रुचि जैसे क्वाइंस कलेक्शन एवं स्टेम्स कलेक्शन का प्रदर्शन होगा। 20 जनवरी की शाम पुलिस परिवार के सदस्यों द्वारा विभिन्न प्रकार की व्यक्तिगत योग्यताओं का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें नृत्य, गायन, वाद्ध यंत्र एवं अन्य कलाएं प्रस्तुत की जाएंगी।
