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सिवनी: नागरिक आपूर्ति निगम और मार्कफेड का गजब कारनामा, 16 करोड़ का मंडी शुल्क और 3 करोड़ का…

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सिवनी (Seoni News): प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए के मूल्यवर्धन के बावजूद, पूरा मंडी शुल्क नहीं दिया गया है। वाकई, आज भी नागरिक आपूर्ति निगम और मार्कफेड ने 16 करोड़ से अधिक के मंडी शुल्क का देय नहीं किया है।

इसके बावजूद कि सरकार की नीति है कि मंडी शुल्क के बिना कोई भी व्यापार नहीं हो सकता, लेकिन इस के बावजूद, अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

यह सबसे आश्चर्यजनक बात है कि इन दोनों विभागों ने किसानों के सिवाए अन्य व्ययों में पैसे दिए हैं, लेकिन मंडी शुल्क नहीं दिया गया है। मंडी प्रशासन ने इस संबंध में पत्र लिखा है, लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।

इसके अलावा, तीन करोड़ रुपए का निराश्रित शुल्क भी दिया नहीं गया है। यह बात यहां स्पष्ट कर रही है कि मनमानी की प्रक्रिया चल रही है।

नियमानुसार, अनाज खरीदी के बाद उसके परिवहन और भंडारण के बाद मंडी शुल्क रिलीज ऑर्डर के अनुसार देना चाहिए, लेकिन जितना मंडी शुल्क बनता है, उतना नहीं दिया जा रहा है। 2023-24 में, 11 लाख क्विंटल गेहूं खरीदे गए हैं।

इसके आधार पर, 3.65 करोड़ रुपए का मंडी शुल्क देना चाहिए था, लेकिन इसमें से एक भी रुपए नहीं दिए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप, बैलेंस बढ़ गया है, जबकि विभाग ने अपने परिवहनकर्ताओं और किसानों का भुगतान कर दिया है।

नागरिक आपूर्ति निगम और मार्कफेड द्वारा जमा शुल्क के विवरण को रसीदों में स्पष्ट रूप से नहीं प्रस्तुत किया गया है, जिसके कारण मिलान करने में समस्याएं आ रही हैं, जबकि सभी विवरण स्पष्ट होने चाहिए।

यदि रिलीज ऑर्डर की कॉपियां और दस्तावेज प्राप्त करने के लिए मंडी विभाग ने कदम उठाया है, तो यह काम दोनों विभागों के बीच मिलकर किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। इस प्रक्रिया में भी कागजी कार्रवाई को काफी समय लग रहा है।

निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है

सूचना के अनुसार, 28 दिसंबर 2012 के गजट नोटिफिकेशन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उपार्जन एजेंसियों द्वारा रिलीज ऑर्डर में मंडी शुल्क और निराश्रित शुल्क प्राप्त होने के बाद ही सत्यापन किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। यदि आरओ पोर्टल पर सत्यापन होता है, तो ई-अनुज्ञा उत्पन्न होती है, जिससे यह प्रमाणित होता है कि मंडी शुल्क और निराश्रित शुल्क जमा हो चुका है। यह स्पष्ट है कि वे आरओ ऑर्डर्स में से कई के सत्यापन को नजरअंदाज कर रहे हैं।

निराश्रित शुल्क क्या है

निराश्रित शुल्क, वह शुल्क है जिसे सरकार निराश्रित लोगों से लेती है। इसके माध्यम से वृद्धावस्था, दिव्यांगता, और अन्य प्रकार की पेंशन प्रदान की जाती है। हालांकि सरकार इसके लिए अपने से भी धनराशि देती है। यदि निराश्रित शुल्क नियमित रूप से जमा होते रहेंगे, तो निराश्रित लोग समय पर पेंशन प्राप्त करते रहेंगे।

इस स्थिति में इंतजार है कि शासन से फंड रिलीज हों

धान के मंडी शुल्क को काफी हद तक दिया जा चुका है। अब शासन से फंड रिलीज होने पर बाकी का मंडी शुल्क देय किया जाएगा। -विख्यात हिंडोलिया, जिला प्रबंधक, नागरिक आपूर्ति निगम

नागरिक आपूर्ति निगम और मार्कफेड से 16 करोड़ से अधिक का मंडी शुल्क वसूलना है, जिसे कम दिया गया है। इसके साथ ही, बकाया निराश्रित शुल्क भी है। -अरविंद परिहार, सचिव, कृषि मंडी सिवनी

MP NEWS: जनजातीय कार्य विभाग भोपाल और मैजिक बस इंडिया फाउंडेशन के बीच MoU पर हस्ताक्षर

भोपाल: जनजातीय कार्य विभाग , भोपाल मध्य प्रदेश और मैजिक बस इंडिया फाउंडेशन के बीच प्रदेश के शासकीय आवासीय एवं गैर-आवासीय विद्यालयों में जीवन कौशल शिक्षा आधारित ‘सक्षम’ कार्यक्रम प्रारंभ करने हेतु MoU पर हस्ताक्षर किए

यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश के शासकीय विद्यालयों के लगभग दस लाख किशोरों को लाइफ स्किल्स प्रदान करेगा
इस साझेदारी के तहत , मैजिक बस इंडिया फाउंडेशन मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित करेगा, मास्टर ट्रेनर्स राज्य के 9000 शासकीय विद्यालयों के लगभग 18,000 शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे

भोपाल, 25 सितंबर, 2023: मध्य प्रदेश के जनजातीय विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य को आकार देने के लिए एक दूरदर्शी पहल के रूप में, जनजातीय कार्य विभाग , मध्य प्रदेश ने शिक्षा और कौशल क्षेत्र में अग्रणी संस्था, मैजिक बस इंडिया फाउंडेशन के साथ साझेदारी की है।

जनजातीय कार्य विभाग , मध्य प्रदेश 89 जनजातीय विकास खंडों में शिक्षा क्षेत्र मे तत्परता से काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

इसके साथ ही, उनका लक्ष्य प्रदेश के 20 जनजातीय जिलों और 89 विकास खंडों में किशोरों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देते हुए, मास्टर ट्रेनर्स और शासकीय विद्यालयों के शिक्षकों को सशक्त बनाना है, ताकि वे किशोरों को लाइफ स्किल्स प्रदान करने में सक्षम हो सकें।

सम्मानित गणमान्य अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें डॉ. पल्लवी जैन गोविल, आईएएस, प्रमुख सचिव, जनजातीय कार्य विभाग, मध्य प्रदेश सरकार; श्री सतेन्द्र सिंह, अपर आयुक्त , जनजातीय कार्य विभाग , और मैजिक बस इंडिया फाउंडेशन के प्रतिनिधि; जयंत रस्तोगी, ग्लोबल सीईओ; के नाम शामिल हैं।

मैजिक बस मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षण प्रदान करेगा, जो इसके पूर्ण होने के बाद 9,000 शासकीय विद्यालयों में लगभग दस लाख किशोरों को लाइफ स्किल्स प्रदान करने के लिए 18,000 शासकीय शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।

इन स्कूलों के नामों में सीएम राइज़ स्कूल, मिडिल स्कूल, एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल (ईएमआरएस), कन्या शिक्षा परिसर (केएसपी), मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल (एमआरएस) छात्रावास और आश्रम सहित विशेष रेसिडेंशियल स्कूल शामिल हैं। ये स्कूल विशेष रूप से कक्षा 6 से 10 तक के किशोरों को लक्षित करते हैं।

इस साझेदारी की समयसीमा चार साल के लिए तय की गई है, जिसमें शुरुआती चरण में 20 जिलों और 53 विकासखंडो को शामिल किया जाएगा।

कार्यक्रम के आगे बढ़ने के साथ अंततः दूसरे वर्ष तक 89 जनजातीय विकासखंडो के समस्त स्कूलों को भी इस पहल के अंतर्गत शामिल कर लिया जाएगा। इस पहल को मैजिक बस के द्वारा इकिडना गिविंग का समर्थन प्राप्त है।

जनजातीय कार्य विभाग , मध्य प्रदेश शासन का 21 वी सदी के कौशलों पर आधारित जीवन कौशल शिक्षा प्रदान करने के प्रति अटूट समर्पण भाव बेहद सराहनीय है। यह न सिर्फ छात्रों के विविध स्किल सेट्स पर ध्यान केंद्रित करता

MP NEWS: शूटर एश्वर्य प्रताप सिंह तोमर ने एशियन गेम्स के टीम इवेंट में बनाया विश्व रिकार्ड, जीता एक स्वर्ण और एक कांस्य पदक

Aishwary Pratap Singh Tomar: मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी ऑफ एक्सीलेंस के स्टार शूटर एश्वर्य प्रताप सिंह तोमर (Aishwary Pratap Singh Tomar) ने चीन के हांज्जाऊ में चल रहे 19वीं एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया है।

टीम इंडिया के दिव्यांश पवार, ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर और रूद्राश पाटिल की तिकड़ी ने 1893.7 अंक हासिल कर विश्व रिकार्ड बनाया है। पहले यह रिकार्ड चीन के पास था।

अकादमी के एश्वर्य ने 10 मीटर एयर राइफल टीम इवेंट में 631.6 अंको का योगदान कर भारतीय टीम को स्वर्ण पदक दिलाया। एशियन गेम्स मे हो 10 मीटर रायफल एकल इवेंट मे एश्वर्य प्रताप सिंह ने 228.8 अंको के साथ तीसरा स्थान पर कांस्य पदक हासिल किया।

Aishwary Pratap Singh Tomar को खेल मंत्री-श्रीमती सिंधिया ने दी बधाई

खेल और युवा कल्याण मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ने एश्वर्य को इस शानदार उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा है कि हमारी अकादमी के एश्वर्य प्रताप सिंह ने भारतीय टीम को स्वर्ण पदक दिया और विश्व रिकार्ड हासिल करने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

भारतीय टीम ने 1893.7 अंक हासिल कर रिपबलिक ऑफ कोरिया और चीन को हराया है। श्रीमती सिंधिया ने कहा कि मुझे गर्व है कि हमने अपने खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधा प्रदान की है और इसके नतीजे पूरी दुनिया के सामने है। एश्वर्य प्रताप सिंह ने आने वाले नए प्रतिभावान शूटर्स के लिये एक आदर्श खिलाड़ी बन कर उभरें है।

Ladli Behna Gas Cylinder Scheme: गैस कनेक्शनधारी महिलाओं को मिलेगी छूट, सिवनी में 25 हजार से अधिक हुए पंजीयन

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सिवनी (Seoni News): Ladli Behna Gas Cylinder Scheme: अब लाड़ली बहना योजना की पात्र महिलाएं गैस सिलेंडर 450 रुपए में प्राप्त करेंगी। उन महिलाओं ने पंचायतों में जाकर पंजीयन करवाई हैं, जिनके पास गैस कनेक्शन है, ताकि वे इस छूट का उपयोग कर सकें।

हर पंचायत में रोजाना 25 से 30 पंजीयन हो रहे हैं। शनिवार तक सिवनी जिले में कुल 25734 पंजीयन हो चुके हैं। पंजीयन के दौरान कुछ महिलाओं के गैस कनेक्शन में नाम सही नहीं होने के कारण कुछ समस्याएं आई हैं, हालांकि सुधार के लिए गैस एजेंसियों से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है।

यह जान लिया जाता है कि केवल वे महिलाएं छूट का उपयोग कर सकेंगी जिनके पास पहले से ही लाड़ली बहना योजना में पात्रता है और उनके नाम से गैस कनेक्शन है। उन्हें हर महीने 450 रुपए में एक गैस सिलेंडर मिलेगा।

अब नाम ट्रांसफर की होड़

इस योजना के बाद, अब कई लोग परिवार के दूसरे महिला सदस्य के नाम पर गैस कनेक्शन की पंजीयन करवाने के लिए उतारू गैस कनेक्शन की सोच रहे हैं। यह तबादला हुआ है क्योंकि गैस एजेंसियों में भीड़ बढ़ गई है। उन्होंने दिखाया कि नए कनेक्शन भी महिलाओं के नाम से ही कराए जा रहे हैं। जिला आपूर्ति अधिकारी ने बताया कि इस योजना में केवल वे महिलाएं मानी जाएंगी जिनके पास पहले से ही गैस कनेक्शन है।

Ladli Behna Gas Cylinder Scheme: पात्रता

1. इस योजना के लाभ प्राप्त करने के लिए, महिलाएं मध्य प्रदेश के निवासियों को होनी चाहिए।
2. इसके अतिरिक्त, जो महिला “लाड़ली बहन एलपीजी गैस सिलेंडर योजना” के लिए पात्र हैं, वे इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकती हैं, अगर वे “प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना” के तहत गैस कनेक्शन नहीं रखतीं हैं।

“लाड़ली बहन गैस सिलेंडर योजना” ऑनलाइन आवेदन:

मुख्यमंत्री लाड़ली बहन एलपीजीआई गैस सिलेंडर योजना” के लिए आप ऑनलाइन पंजीकरण भी कर सकते हैं। यह पंजीकरण उन केंद्रों पर होता है, जो “लाड़ली बहन योजना” के लिए पंजीकरण किया जाता है।

जब आप उस केंद्र पर जाते हैं, तो आपसे केवल एलपीजी गैस कनेक्शन आईडी और समग्र आईडी की मांग की जाएगी। अगर आपके पास इन दोनों विवरणों के रूप में आवश्यक दस्तावेज हैं, तो आप इस योजना के लिए आसानी से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं।

Kulhad Pizza Couple Private Video Leaked: कुल्हड़ पिज्जा कपल का प्राइवेट वीडियो लीक? सहज अरोड़ा ने बताया, ‘मेरी गलती…’

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Kulhad Pizza Couple Private Video Leaked: कुल्हड़ पिज्जा कपल का प्राइवेट वीडियो लीक? सहज अरोड़ा ने बताया, ‘मेरी गलती…’ अब तक आपने मिट्टी के बर्तनों में बनी ‘कुल्हड़ चाय’ के बारे में तो सुना होगा लेकिन क्या आपने कभी ‘कुल्हड़ पिज़्ज़ा’ के बारे में सुना है? 

एक साल पहले गुजरात के सूरत की एक दुकान में बिकने वाले इस ‘कुल्हड़ पिज्जा’ ने खूब चर्चा बटोरी थी. लेकिन अब उनका एक कथित वीडियो वायरल हो रहा है और यह जोड़ी फिर से खबरों में है. मामला इतना गंभीर हो गया है कि पुलिस तक पहुंच गया है. इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है.

इस बीच कुल्हड़ पिज्जा कपल का एक प्राइवेट वीडियो वायरल हो गया है. इस निजी वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस जोड़े को ट्रोल किया गया. 

Kulhad Pizza Couple Private Video Leaked

कुल्हड़ पिज्जा कपल सहज अरोड़ा और गुरप्रीत कौर का प्राइवेट वीडियो किसी ने इंटरनेट पर शेयर कर दिया. कुछ ही देर में ये वीडियो वायरल हो गया. इस बीच नेटिजन्स ने इस पर अश्लील कमेंट्स भी किए. इस मामले के बाद दोनों ने एक वीडियो जारी कर इस पर सफाई दी है.

सहज अरोड़ा ने समझाया

अब इस विवाद पर सहज अरोड़ा ने टिप्पणी की है और इंस्टाग्राम पर एक व्याख्यात्मक वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में उन्होंने दावा किया है कि वायरल वीडियो फर्जी है और AI की मदद से बनाया गया है. थाने के बाहर खड़े सहज अरोड़ा ने रिकॉर्ड किया.

इस बीच मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस ने इस मामले में एक शख्स को गिरफ्तार किया है. लेकिन इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.

Kulhad Pizza Couple Viral Video Download

जालंधर के मशहूर कुल्हड़ पिज्जा कपल सहज अरोड़ा और गुरप्रीत कौर एक विवादित स्थिति में फंस गए हैं। कथित तौर पर उनका एक निजी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे उनके प्रशंसकों के बीच हलचल मच गई है।

हाल ही के एक इंस्टाग्राम वीडियो में, सहज अरोड़ा ने कुल्हड़ पिज्जा कपल वायरल वीडियो की प्रामाणिकता से इनकार करते हुए दावा किया कि यह पूरी तरह से नकली है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके तैयार किया गया है। 

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि जोड़े को कई हफ्ते पहले इंस्टाग्राम पर एक सीधे संदेश के माध्यम से वीडियो प्राप्त हुआ था, साथ ही ब्लैकमेल की धमकी के साथ वीडियो को ऑनलाइन साझा न करने के बदले में बड़ी रकम की मांग की गई थी।

इस घटना ने सोशल मीडिया पर गोपनीयता और सुरक्षा के साथ-साथ भ्रामक सामग्री उत्पन्न करने में एआई तकनीक के संभावित दुरुपयोग के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं।

Kulhad Pizza Couple Viral Video – Real or Fake?

सहज अरोड़ा ने लीक हुए वीडियो और इससे पैदा हुई चिंताजनक स्थिति के बारे में बात की है। उन्होंने कहा कि इंस्टाग्राम पर एक अज्ञात व्यक्ति ने पैसे न देने पर वीडियो जारी करने की धमकी देकर उन्हें और उनकी पत्नी को ब्लैकमेल करने का प्रयास किया।

अरोड़ा ने ब्लैकमेलर की मांगों को मानने से इनकार कर दिया और पुलिस को घटना की सूचना दी। हालाँकि, वीडियो अंततः सोशल मीडिया पर लीक हो गया। यह पता चला है कि कुल्हड़ पिज्जा युगल वायरल वीडियो में चेहरों की अदला-बदली के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता सॉफ्टवेयर का उपयोग करके भारी हेरफेर किया गया था।

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अरोड़ा और उनके परिवार ने लोगों से आग्रह किया है कि जब वे ऑनलाइन ऐसी परेशान करने वाली सामग्री देखें तो तुरंत कार्रवाई करें। उनका कहना है कि ऐसी किसी भी सामग्री को तुरंत हटाएं और रिपोर्ट करें। उनका मानना ​​है कि एक सुरक्षित और स्वस्थ ऑनलाइन समुदाय बनाने के लिए एकता और सामूहिक कार्रवाई आवश्यक है।

Sehaj Arora and Gurpreet Kaur Viral Video

कुल्हड़ पिज्जा कपल सहज अरोड़ा और गुरप्रीत कौर की उद्यमशीलता यात्रा अविश्वसनीय रूप से सफल रही है, जिसने हाल के वर्षों में काफी लोकप्रियता हासिल की है। हालाँकि, कुख्यात “कुल्हड़ पिज़्ज़ा कपल वायरल वीडियो” से जुड़े हालिया घटनाक्रम ने उनके फलते-फूलते व्यवसाय पर ग्रहण लगा दिया है।

इस दुखद घटना के मद्देनजर, दंपति ने वीडियो की प्रामाणिकता से इनकार करते हुए और इसे कपटपूर्ण निर्माण के रूप में वर्णित करते हुए, दृढ़ता से अपना बचाव किया है। उनका आरोप है कि यह उद्योग में एक प्रतिद्वंद्वी द्वारा रची गई एक भयावह साजिश का हिस्सा है, कोई ऐसा व्यक्ति जो उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने और उनके वफादार प्रशंसकों को धोखा देने के लिए कृतसंकल्प है। इन आरोपों की गंभीरता ने स्वाभाविक रूप से जोड़े को आशंकित और असहज महसूस कराया है।

सहज अरोड़ा और गुरप्रीत कौर, जो अपने अभिनव कुल्हड़ पिज्जा उद्यम के लिए प्रसिद्ध हैं, ने बुधवार को एक स्पष्ट वीडियो सामने आने के बाद खुद को विवाद के केंद्र में पाया। उनका दावा है कि कुल्हड़ पिज्जा कपल का वायरल वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उत्पाद है, जो उनके फॉलोअर्स को गुमराह करने के लिए बनाया गया है। 

उनकी परेशानी को और बढ़ाने के लिए, उन्हें अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के माध्यम से एक परेशान करने वाला ब्लैकमेल संदेश प्राप्त हुआ, जिसने उन्हें आगे की कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया। हमारा लक्ष्य कुल्हड़ पिज्जा कपल वायरल वीडियो के संबंध में स्पष्टता प्रदान करना है और पूरी जानकारी के लिए कृपया मीडिया से जुड़ें क्योंकि वास्तविकता को झूठ से अलग करना महत्वपूर्ण है।

World Cup: क्रिकेट वर्ल्ड कप में एक बार जब लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर की पारी हुई थी आलोचना का शिकार

क्रिकेट की दुनिया में लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है, जिन्होंने बिना हेलमेट और अन्य उपकरणों की मदद के आक्रामक तेज गेंदबाजों का सफलतापूर्वक सामना किया और रनों का खाता खोला। 

मुंबई की क्रिकेट नर्सरी में जन्मे सुनील ने दिग्गज गेंदबाजों के सामने तकनीकी बल्लेबाजी का नमूना पेश किया. सुनील के बल्ले ने भारत को विदेश में जीत का भरोसा दिया. 

टेस्ट प्रारूप में 10,000 रन और 34 शतकों के साथ, सुनील को सर्वकालिक महान बल्लेबाजों में गिना जाता है। सभी बल्लेबाजों का सम्मान करने वाले लिटिल मास्टर को विश्व कप में अपनी धीमी गति के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था।

1975 में पहला विश्व कप इंग्लैंड में 7 जून को लॉर्ड्स के पंढरी क्रिकेट ग्राउंड में आयोजित किया गया था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सुनील गावस्कर की प्रसिद्धि किसी से कम नहीं थी।

विश्व कप का पहला मैच मेजबान इंग्लैंड और भारतीय टीम के बीच खेला गया। इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 334 रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया था. डेनिस एमिस ने 137 रनों की मैराथन पारी खेली. कीथ फ्लेचर ने 68 और क्रिस ओल्ड ने 51 रन बनाए. कप्तान माइक डेनेस ने 37 रनों की उपयोगी पारी खेली.

जवाब में भारत ने तीन विकेट पर 123 रन बनाये. भारत की पारी का मुख्य आकर्षण सुनील गावस्कर की धीमी गेंदबाजी रही. गावस्कर ने 174 गेंदों पर केवल 36 रन बनाए. इस तेज़-तर्रार पारी में केवल एक चौका लगा. गावस्कर ने पूरे 60 ओवर डाले लेकिन उनका स्ट्राइक रेट (20.68) चौंकाने वाला था। 

कुछ घंटे पहले इंग्लैंड ने साढ़े तीन से चार घंटे में तीन सौ का आंकड़ा पार किया. भारत ने आंसुओं में सौ का आंकड़ा पार किया. ये सच है कि लक्ष्य पहाड़ जितना बड़ा था, लेकिन फैन्स को गावस्कर से दमदार प्रदर्शन की उम्मीद थी. गावस्कर का बल्ला गोले जैसा था. उन्होंने वैसी पारी खेली जैसी टेस्ट क्रिकेट में मैच टाई कराने के लिए खेली जाती है.

फैंस को शायद यकीन नहीं होगा कि आज के दौर में जब 30-40 गेंदों में शतक बनते हैं तो कोई इतनी धीमी पारी भी खेल सकता है. टीम के साथियों ने बाद में कहा कि गावस्करकर के बल्ले से कोई रन नहीं निकला तो दर्शक खुशी से झूम उठे। उन्होंने कहा कि उन्होंने गावस्कर को रन बनाने का संदेश भी दिया.

कप्तान वेंकटराघवन ने कहा कि टीम मीटिंग में धीरे खेलने का फैसला नहीं किया गया. गावस्कर ने अपनी आत्मकथा ‘सनी डेज’ में इस पारी के बारे में खुलासा किया है. वह लिखते हैं, ‘वह स्ट्रोक एक दर्दनाक तंत्रिका है। गावस्कर ने लिखा, ”मैंने सोचा कि मुझे स्टंप्स से दूर जाना चाहिए ताकि मैं आउट हो जाऊं.”

टीम मैनेजमेंट को गावस्कर की ताकत का अंदाजा था. यह गावस्कर ही थे जिन्होंने विश्व कप में पूर्वी अफ्रीका के खिलाफ भारत के अगले मैच में ओपनिंग की थी। गावस्कर ने लौकिला में 86 गेंदों में 9 चौकों की मदद से 65 रन बनाए. फैंस को जल्द ही एहसास हो गया कि उनका बल्ला सिर्फ एक मैच के लिए है.

गावस्कर ने 1975, 1979, 1983, 1987 जैसे चार विश्व कप टूर्नामेंटों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 19 मैचों में 561 रन बनाए। इसमें 1 शतक और चार अर्धशतक शामिल हैं. 1987 विश्व कप में गावस्कर ने न्यूजीलैंड के खिलाफ नागपुर में शतक लगाया था.

कांग्रेस पार्टी को कुछ शहरी नक्सली चलाते हैं, नारों से लेकर नीतियों तक; BHOPAL में PM MODI ने की CONGRESS की आलोचना

MP ELECTION 2023: कांग्रेस पार्टी को कुछ शहरी नक्सली चलाते हैं, नारों से लेकर नीतियों तक; BHOPAL में PM MODI ने की CONGRESS की आलोचना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी कार्यकर्ताओं के महाकुंभ समारोह में बोलते हुए कांग्रेस की आलोचना की। इस समारोह के माध्यम से उन्होंने कांग्रेस के नक्सली संबंधों और नारों को गंभीरता से उठाया।

भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश में कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज इस कार्यक्रम में शामिल हुए. बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला. 

नरेंद्र मोदी ने कहा, जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी तो यह बीमारू राज्य था. कांग्रेस सरकार गंदी राजनीति, कुशासन और करोड़ों के भ्रष्टाचार के लिए जानी जाती थी। लेकिन, अब मध्य प्रदेश ने लंबी छलांग लगाई है. वहीं दूसरी ओर कांग्रेस खोखली हो गई है.

मध्य प्रदेश के कांग्रेस काल

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तो यह बीमारू राज्य था।” उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार ने गंदी राजनीति, कुशासन, और भ्रष्टाचार के लिए जानी जाती थी।

मध्य प्रदेश का परिवर्तन

मोदी ने मध्य प्रदेश के विकास को बड़ा महत्वपूर्ण माना और कहा, “लेकिन अब मध्य प्रदेश ने लंबी छलांग लगाई है।” उन्होंने इसका मुख्य कारण कांग्रेस की अनुपस्थिति में देखा।

कांग्रेस की स्थिति

कांग्रेस के जमीनी नेता पिछले कुछ समय से शांत बैठे हैं, और मोदी ने इसके बारे में बताया, “कांग्रेस पहले बर्बाद हुई, फिर कंगाल हो गई।” उन्होंने कांग्रेस को एक कंपनी की तरह चलाने की बात की।

कांग्रेस के नक्सली संबंध

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के नक्सली संबंधों पर भी बोला और कहा, “कांग्रेस का ठेका अब कुछ अर्बन नक्सलवादियों के साथ है।” उन्होंने इसे गंभीरता से लिया और कांग्रेस के नक्सलवादी अधिकारियों के बारे में चर्चा की।

कांग्रेस की नीतियां

मोदी ने कांग्रेस की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या आप जानते हैं कांग्रेस का ठेका किससे आयात करती है? कांग्रेस के जमीनी नेताओं को अब एहसास हो रहा है कि उनकी पार्टी जमीन पर खोखली है।”

प्रधानमंत्री मोदी के इस भाषण से स्पष्ट होता है कि वह कांग्रेस पार्टी के नक्सली संबंधों और नीतियों को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कांग्रेस के जमीनी नेताओं की निष्कृष्टता को भी उजागर किया और कांग्रेस के नारों से लेकर नीतियों तक की आयात को लेकर सवाल उठाए।

क्या आप जानते है अंग्रेजों के समय में गणेशोत्सव मनाने के पीछे लोकमान्य तिलक का क्या उद्देश्य था? अनकहे किस्से…

महाराष्ट्र समेत विभिन्न देशों में इस समय गणेशोत्सव की धूम है। महाराष्ट्र समेत कई पश्चिमी राज्यों में यह त्योहार 19 सितंबर से शुरू हो चुका है और यह 10 दिनों तक चलेगा. 

इसी बीच जब उनसे पूछा गया कि गणेशोत्सव की शुरुआत किसने की तो लोकमान्य तिलक का नाम लिया गया।

उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को मजबूत करने के लिए लोगों को एक साथ लाने के लिए इस उत्सव की शुरुआत की। लोकमान्य तिलक का प्रयोग क्या था? इसके पीछे असली मकसद क्या था? चलो पता करते हैं…

गणेशोत्सव की प्रथा लोकमान्य तिलक द्वारा स्थापित की गई थी

साल 1893 से पहले भी गणेश चतुर्थी मनाई जाती थी. लेकिन यह पर्व पारिवारिक स्तर पर मनाया गया. तब यह त्यौहार मुख्य रूप से ब्राह्मण और उच्च जाति के लोग मनाते थे। दिलचस्प बात यह है कि यह त्यौहार केवल एक दिन का होता था। लेकिन समय के साथ-साथ इस त्यौहार में बदलाव आते गये। वर्तमान में यह त्यौहार दस दिनों तक बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लोकमान्य तिलक ने सामूहिक स्तर पर गणेशोत्सव मनाने की प्रथा स्थापित की

19वीं शताब्दी के अंतिम दशक में अनेक राष्ट्रवादियों का उदय हुआ

19वीं सदी के आखिरी दशक में भारत भर में कई राष्ट्रवादी नेता उभरे। इनमें से कुछ देशभक्त ब्रिटेन में रहे और स्वतंत्रता प्राप्त करने का प्रयास किया। इनमें से कई नेताओं ने आधुनिक नागरिक और राजनीतिक अधिकारों का बीड़ा उठाया। इसके साथ ही नेता कह रहे थे कि कैसे ब्रिटिश राज द्वारा भारतीयों पर अत्याचार किया जा रहा था, कि ब्रिटिश राज एक पाखंडी राज था।

1857 का विद्रोह असफल रहा। इस काल में ब्रिटिश सेना में कार्यरत भारतीय सैनिकों ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया था। लेकिन अंग्रेजों ने इस विद्रोह को कुचल दिया। इस विद्रोह के बाद कुछ नेताओं ने अंग्रेजों का पूर्णतः विरोध न करते हुए भारतीयों को कुछ सुविधाएँ एवं रियायतें दिलवाने का रुख अपनाना शुरू कर दिया।

तिलक पत्रकार, शिक्षक एवं राजनीतिज्ञ

हालाँकि, उस समय लोकमान्य तिलक (1857 से 1920) के विचार भिन्न थे। वे स्वराज की अवधारणा प्रस्तुत करते थे। वह एक पत्रकार, शिक्षक, राजनीतिज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता थे। 

1981 में उन्होंने बी. सी। आगरकर के साथ मिलकर दो समाचार पत्रों मराठा और केशरी की स्थापना की। केशरी अखबार मराठी में और मराठा अखबार अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित होता था। वह निडर और निडर थे. इसी स्वभाव को विकसित करते हुए वे इन दोनों पत्रिकाओं में लेख लिखा करते थे।

हिंदू प्रतीकवाद पर आधारित राजनीतिक अभियान चलाए

राष्ट्रीय स्तर पर महात्मा गांधी के उद्भव से पहले, लोकमान्य तिलक को अंग्रेजों की औपनिवेशिक नीति का विरोध करने वाले सबसे महान और कट्टरपंथी नेता माना जाता था। जिस समय स्वराज्य, पूर्ण स्वतंत्रता की कल्पना करना कठिन था, तब तिलक ने नारा दिया था ‘स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, मैं इसे लेकर रहूंगा।’ उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई तेज करने के लिए युवाओं में नई चेतना पैदा की। उन्होंने लोगों को एकजुट करने के लिए हिंदू प्रतीकवाद पर आधारित राजनीतिक अभियान भी चलाए।

वर्ष 1893 से गणेशोत्सव सामुदायिक स्तर पर मनाया जाने लगा

इसके एक भाग के रूप में, तिलक ने गणेशोत्सव मनाने की प्रथा शुरू की। वर्ष 1893 से गणेशोत्सव सामुदायिक स्तर पर मनाया जाने लगा। इस उत्सव के दौरान देशभक्ति के गीत गाए गए। राष्ट्रवादी विचारों का भी प्रचार किया गया।

दूसरी ओर, लोकमान्य तिलक ने कहा कि गणेशोत्सव उत्सव को समाचार पत्रों के लेखों, भाषणों और संगठनों के माध्यम से सार्वजनिक स्तर पर मनाया जाना चाहिए। इसी का परिणाम है कि आज पूरे भारत में गणेशोत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

गणेशोत्सव के माध्यम से युवाओं को एकजुट करने का प्रयास

धनंजय कीर द्वारा लिखित तिलक की आत्मकथात्मक पुस्तक में गणेशोत्सव के पीछे के दृष्टिकोण के बारे में लिखा गया है। “गणेशोत्सव समितियाँ पूरे महाराष्ट्र में स्थापित की गईं। युवा लोग एकजुट हुए और गायन पार्टियाँ बनाईं। कीर ने अपनी पुस्तक ‘लोकमान्य तिलक: फादर ऑफ इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल’, 1959 में लिखा है, ‘लोकमान्य तिलक ने कहा कि गणेशोत्सव के दौरान, पुजारी और नेता युवाओं को देशभक्ति और स्वतंत्रता का पाठ पढ़ा रहे थे।

इसके अलावा, तिलक ने महाराष्ट्र के युवाओं में देशभक्ति की भावना जगाने के लिए 1986 में शिवाजी महाराज की जयंती मनाने का फैसला किया। उसी वर्ष, तिलक ने कपड़े पर उत्पाद शुल्क लगाए जाने के कारण महाराष्ट्र में विदेशी कपड़ों के बहिष्कार का आह्वान किया।

तिलक पर जाति उन्मूलन और महिला मुक्ति पर रूढ़िवादी विचार रखने का आरोप है

तिलक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण नेता थे। लेकिन उन पर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को जातीय रंग देने का आरोप है. यह भी कहा जाता है कि जाति उन्मूलन और महिला मुक्ति पर तिलक के रूढ़िवादी विचार थे।

वर्ष 1893 में, हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच सांप्रदायिक संघर्ष हुआ। 11 अगस्त 1893 को इस संघर्ष का परिणाम बम्बई शहर में महसूस किया गया । तिलक ने आरोप लगाया था कि अंग्रेजों ने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच संघर्ष पैदा करने की कोशिश की थी।

समय के साथ गणेशोत्सव में कई बदलाव

इस बीच लोकमान्य तिलक ने शायद उस गणेशोत्सव की कल्पना नहीं की होगी जो आज हम देखते हैं। समय के साथ गणेशोत्सव में काफी बदलाव आया है। गणेशोत्सव में अब राजनीति भी घुस गई है. फिर भी, वर्तमान में महाराष्ट्र और कुछ अन्य राज्यों में मनाया जाने वाला गणोशोत्सव, तिलक की अवधारणा पर आधारित है।

CM नवीन पटनायक ने विदेश नीति पर मोदी सरकार को दी 8/10 रेटिंग, ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ का भी किया समर्थन

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ओडिशा के मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल सुप्रीमो नवीन पटनायक ने रविवार को अपनी सरकार की विदेश नीति और “भ्रष्टाचार उन्मूलन के कदमों” के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की। 

भुवनेश्वर में एक कार्यक्रम में बोलते हुए, पटनायक ने केंद्र की विदेश नीति और भ्रष्टाचार उन्मूलन की दिशा में काम की सराहना करते हुए मोदी सरकार को “10 में से 8″ रेटिंग दी। नीति और कई अन्य मामलों में भी…इस (भाजपा) सरकार में भ्रष्टाचार कम हुआ है,” पटनायक ने कहा।

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, महिला आरक्षण विधेयक पर एक सवाल का जवाब देते हुए, ओडिशा के सीएम ने इसे एक “महत्वपूर्ण कदम” बताया और कहा कि उनकी पार्टी ने हमेशा महिला सशक्तिकरण का समर्थन किया है। 

”मेरे पिता (पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक) ने स्थानीय चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की थीं और मैंने इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया।” पटनायक ने कहा कि उनकी पार्टी ने लोकसभा में 33 प्रतिशत सीटों पर महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। 2019 के चुनावों में ओडिशा में सीटें, ”उन्होंने कहा। 

पटनायक ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का भी समर्थन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने हमेशा इसका स्वागत किया है और वे इसके लिए तैयार हैं। 

केंद्र के साथ अपनी पार्टी के संबंधों पर बोलते हुए, बीजद अध्यक्ष ने कहा, “केंद्र के साथ हमारे सौहार्दपूर्ण संबंध हैं। स्वाभाविक रूप से, हम अपने राज्य का विकास चाहते हैं और विकास में केंद्र सरकार की भागीदारी होना महत्वपूर्ण है।”

पटनायक ने कहा कि राजनीति को ”गंदा होने की जरूरत नहीं है” क्योंकि यह लोगों की सेवा करने का एक बड़ा मंच हो सकता है।

उन्होंने कहा, ओडिशा सरकार गरीबी उन्मूलन और राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित रूप से काम कर रही है। 

पटनायक ने यह भी दावा किया कि उनका राज्य शांति, अहिंसा और सामाजिक एकता के शाश्वत मूल्यों को बनाए रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। 

Ayodhya to Rameshwaram: अयोध्या से रामेश्वरम तक वन गमन मार्ग पर 290 ‘श्री राम स्तंभ’ बनाए जाएंगे

Ayodhya to Rameshwaram Van Gaman Marg: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में निर्माणाधीन ऐतिहासिक राम मंदिर की शोभा बढ़ाने के लिए हिंदू संगठन हर संभव प्रयास कर रहे हैं। कारसेवकपुरम में अशोक सिंघल फाउंडेशन के अनुसार, भगवान राम के वन गमन मार्ग पर 290 ‘श्री राम स्तंभ’ बनाए जाएंगे।

ये स्तंभ अयोध्या से लेकर रामेश्वरम तक बनाए जाएंगे. अशोक सिंघल फाउंडेशन 30 सितंबर को निर्माण परियोजना शुरू करेगा।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सचिव और अयोध्या के कारसेवकपुरम में अशोक सिंघल फाउंडेशन के सदस्य चंपत राय ने गुरुवार को कहा कि राम अवतार शर्मा ने 40 के लिए शोध करने के बाद 290 स्थान चिह्नित किए हैं। पवित्र पथ पर वर्षों इन सभी चिह्नित स्थानों पर श्रीराम स्तंभ स्थापित किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि इन खंभों के निर्माण का खर्च केंद्र या राज्य सरकार को नहीं उठाना होगा. राय ने कहा कि फाउंडेशन इसका पूरा खर्च उठाएगा। 

पहला स्तंभ 27 सितंबर को अयोध्या पहुंचेगा और फिर उन्हें संत महात्माओं और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में प्राचीन मणि पर्वत पर चिह्नित स्थानों पर स्थापित किया जाएगा।

इस बीच लंबी लड़ाई के बाद अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है. इस मंदिर के लिए दशकों तक अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ी गई। सुप्रीम कोर्ट से फैसला मंदिर बनाने के पक्ष में आया और 2020 से मंदिर बन रहा है. उम्मीद है कि 2024 की शुरुआत में रामलला की मूर्ति गर्भगृह में स्थापित कर दी जाएगी.