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अच्छी यादों का मज़ा लें, देखें क्या होता है

डिप्रेशन के कारण भी होता है बच्चों के मूड में बदलाव, इस प्रकार समझें इसे

कहते हैं बच्चे मन के सच्चे और भगवान का रूप होते है। लेकिन कई बार वे ऐसा कुछ कर जाते हैं जिसे माता-पिता स्वीकारने को तैयार नहीं होते। हर बच्चे का स्वभाव अलग होता है। कभी उसके व्यवहार में अप्रत्याशित परिवर्तन दिखाई देता है जो स्वीकार्य नहीं होता। कुछ बच्चों में ये बदलाव सामान्य होता है लेकिन ज्यादातर इस तरह का बदलाव परेशानियों को लाता है। कुछ बच्चों में बदलाव अधिक तीव्र और नकारात्मक होता है जिससे उनका व्यवहार अचानक बदल जाता है। बच्चे में मूड स्विंग और अचानक व्यवहार में बदलाव आने के कई कारण होते हैं।

शारीरिक बदलाव

बढ़ते बच्चों की उम्र के सबसे अहम बदलाव होता है शारीरिक बदलाव। कई बार बच्चे अचानक होने वाले बदलावों को स्वीकार नहीं कर पाते। ऐसा होने पर उनके मन में उलझन बढ़ जाती है और वो किसी से शेयर करने में हिचकते हैं। लड़के-लड़कियों में अलग-अलग तरह के बदलाव होते हैं। मानसिक-भावनात्मक और बौद्धिक बदलावों से उनका मूड और मन किसी एक बात पर ठहर नहीं पाता और दिमाग सवालों से भरा रहता है।




कुछ अन्य कारक मूड को ट्रिगर कर सकते हैं जैसे:

•तनाव

•जीवन में कोई महत्वपूर्ण बदलाव

•आपका आहार

•नींद की आदतें

•दवाएं

मूड में बदलाव के होते हैं ये लक्षण

•90 फीसदी किशोर (उम्र 10 -16) स्कूल से भागते हैं।

•70 प्रतिशत में तनाव, मूड स्विंग, व्यर्थता बोध जैसे लक्षण पनप रहे हैं।

•40 से 50 फीसदी को सिर दर्द, वजन संबंधी समस्याएं पैदा हो रही हैं।

•43 प्रतिशत को परीक्षा भय सताता है।

•40 फीसदी किशोर सिब्लिंग राइवलरी से त्रस्त हैं।

•36 फीसदी छात्र स्कूल से परेशान हैं।

•20 प्रतिशत सजा से घबराते हैं।

•17 फीसदी माता-पिता की टोकने की आदत से परेशान हैं।

क्या कहती है रिपोर्ट

“डिप्रेशन एंड अदर कॉमन मेंटल डिसऑर्डर ग्लोबल हेल्थ एस्टीमेट” द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में सुसाइड से मरने वालों में सबसे ज्यादा प्रभावित टीनएज ग्रुप के लड़के-लड़कियां होते हैं।

अभिभावक हैं बच्चों के तनाव का कारण

घरेलू विवाद है डिप्रेशन का कारण: 90 फीसदी अवसादग्रस्त किशोर (12 -18) घरेलू विवादों के चलते परेशान होते हैं। हालांकि उन्हें झगड़े का कारण नहीं पता होता।

अभिभावकों का दबाव: 46 फीसदी अवसादग्रस्त टीनएजर अच्छे से अच्छा परिणाम लाने के माता-पिता के दबाव से परेशान हैं।

अभिभावक भी हैं जिम्मेदार: 50 फीसदी इसलिए अवसाद में हैं, क्योंकि उनके अभिभावक उनकी जिंदगी के हर पहलू को नियंत्रित करना चाहते हैं।

क्या कहते हैं एक्सरपर्ट

मुंबई स्थित हेल्थ एंड वेलनेस क्लिनिक की डॉ. भावी मोदी का कहना है कि भारत में इन दिनों टीनएज डिप्रेशन से मरने वालों की संख्या काफी बढ़ गयी है।

डब्लूएचओ की रिपोर्ट

साल 2015 में डब्लूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में टीनएज डिप्रेशन के मरीजों की संख्या पांच करोड़ से ज्यादा है और पूरी दुनिया में डिप्रेशन के कारण सुसाइड करने वालों लोगों में अधिकांश टीनएज ही हैं।

बच्चों के व्ययवहार में आए बदलाव को यूं करें ठीक

यदि आप लगातार और गंभीर मूड स्विंग का अनुभव करते हैं, तो आइये आपको बताते हैं कैसे अपने बच्चे के मूड स्विंग्स और व्यवहार में आये अचानक बदलाव को सही करें।

•बच्चों के संघर्ष को समझें: बच्चे घर के कार्य, स्कूल और सामाजिक समस्याओं से हर दिन के जूझते हैं, इसलिए उनका जीवन भी काफी तनावपूर्ण है। उन्हें समझकर उन्हें समर्थन प्रदान करने का प्रयास करें।

•घर वालो का सपोर्ट: शोध बताते हैं कि ऐसे बच्चे भी दोस्तों के प्रभाव में जल्दी आते हैं, जिन्हें घर में कम सपोर्ट मिलता है। घर में प्यार न मिलने पर बच्चे उसे बाहर तलाशने लगते हैं। उनकी भावनात्मक असुरक्षा का फायदा चालाक छात्र उठा लेते हैं।

•स्वस्थ आहार लें: एक संतुलित, स्वस्थ आहार आपकी मनोदशा को सुधार सकता है और आपको स्वस्थ रख सकता है।

अमावस्या की सुबह करें झाड़ू से ये उपाय, पितृ करेंगे मालामाल

मंगलवार को ज्येष्ठ मास की अमावस्या पड़ रही है। मंगलवार को होने की वजह से ये भौमवती अमावस्या भी कहलाई जाती है। इस दिन पितृ दोष कम करने के लिए और उन्हें प्रसन्न करने के लिए कई उपाय किए जाते हैं। अगर किसी की कुंडली में शनि की साढ़े साती है तो इस दिन उपाय करने से उसका प्रभाव भी खत्म हो जाता है।

क्या करें

सुबह-सुबह जल्दी स्नान करिए, तांबे के लोटे में जल ले लें इसमें चावल और फूल डालकर

ॐ सर्वेभ्यो पितृरेभ्यो नमो नम: इस मंत्र को बोलते हुए सूर्य को जल अर्पण करें हो सके तो इस दिन गंगा में स्नान करिए।

अगर घर में स्नान कर रहे हैं तो थोड़े से तिल और आंवले को पीसकर अपने शरीर पर लगाने के बाद स्नान करिए।

इस दिन शिवलिंग की पूजा जरूर करनी चाहिए।

शिवलिंग पर जल,दूध और काले तिल जरूर अपर्ण करें इसके अलावा मछलियों को दाना डालें, चीटियों को दाना डालें और भगवान हनुमान के मंदिर में जाकर चमेली के तेल में दीपक जलाकर अपर्ण करें और 11 या 111 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमान जी को मिठाई का भोग लगाएं।

उपाय

धन प्राप्ति के लिए – अनाज और एक झाड़ू का दान अवश्य करें। जिसको भी आप झाड़ू का दान करेंगे उसे भोजन जरूर करवाएं। जिन लोगों के पास पैसा नहीं टिक रहा हो या फिर धन की समस्या लगातार बनी हो उन्हें इस दिन घर में उपस्थित कोई भी पुरानी झाड़ू को पूजन करने के बाद पीपल या बर्गद के पेड़ के नीचे रख दें। इस उपाय के बाद घर से दरिद्रता हमेशा के लिए गायब हो जाती है।

पितृ ऋण से मुक्ति- इस दिन पिंड दान करें इससे पितृ प्रसन्न होते हैं। सूर्य को अर्ग देते हुए दक्षिणमुखी होकर एक तांबे के लोटे में जल लेकर अपने पितरों के नाम का जल चढ़ाना चाहिए ।

ऋण से डूबे लोगों के लिए उपाय– जो लोग कर्ज में डूबे हैं उन्हें इस दिन राम भक्त हनुमान की पूजा अर्चना करनी चाहिए। इस दिन ऋण मोचक मंगल स्त्रोत का पाठ करें। यदि खुद नहीं कर पाएं तो पंडित जी से भी करवा सकते हैं। विष्णु पुराण के अनुसार अमावस्या का उपवास रखने से पितृगण के साथ-साथ सूर्य,अग्नि और वायु देवता प्रसन्न होते हैं और सुखी रहने का आर्शीवाद देते हैं।

रोगों के लिए- गुड़ और आटे का दान करना चाहिए। साथ ही ॐ पितृरेभ्यो नम: का पाठ करना चाहिए।

शनि के प्रकोप से मुक्ति – यदि आपकी कुंडली में शनि की साढ़े साती या किसी भी प्रकार की कुदृष्टि हो तो आपको इस दिन घोड़े की नाल की अंगूठी मध्यमा अंगुली में धारण करें। याद रहे कि अंगूठी पूरी गोल नहीं होनी चाहिए इसमें बीच में एक कट जरूर हो। महिलाएं इसे बायें हाथ में और पुरुष दायें हाथ में पहनें और ॐ शं शनैश्चराय नम: का 11 बार जाप करें।

यदि आप अधिक बिजली बिल से परेशान है तो ऐसे बचे

सिवनी- जिले में इन दिनों हजारों विधूयत उपभोक्ता मनमानी बिल से परेसान है के जिसका एक कारण मीटर रिडिंग में गफलत है, यदि आप नीची लिखी बातों का पालन करे तो कभी हद तक समस्या हल हो सकती है।

1.मीटर की रीडिंग लेने आये हुवे व्यक्ति का नाम,पहचान पत्र देखे और जिस दिन रीडिंग ली जाये उस दिन स्वक्षर (sign) ले।

2) ध्यान दे अगली बार यह रीडिंग 30 दिन बाद लिए जाते है या नहीं

3) 30 दिन के बाद रीडिंग लेने आनेवाले को रीडिंग लेने ना दे और तुरंत बिजली विभाग के अफसर से शिकायत करें।

4) बिल्डिंग/सोसाइटी हो तो सोसाइटी के सेक्रेटरी ने यह काम वॉचमैन से हर महीने करवाना चाहिए

100 रीडिंग तक 3.76 रु प्रति यूनिट लगता है। 30 दिन में रीडिंग ना लेने की वजह 100 के ऊपर रीडिंग जाती है और फिर आपको 7.21 रु प्रति यूनिट लगाया जाता है। 300 के ऊपर रेडिंग गयी तो तीन गुना शुल्क लगता है यानी 9.91 रु प्रति यूनिट। 500 के ऊपर रीडिंग गई तो चार गुना शुल्क 11.31 रु प्रति यूनिट ।

आप सब से अपील है के ऊपर लिखी बातों का पालन करें और अधिक से अधिक लोगो को इसकी सुचना करे

एटीएम से नहीं निकले पैसे, बैंक को लगा जुर्माना

रायपुर- यदि एटीएम से पैसे नहीं निकलते हैं तो अब इसे भी सेवा में कमी माना जाएगा। इस मामले में उपभोक्ता फोरम ने इसे बैंक की सेवा में कमी मानते हुए गुरुवार को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया पर ढाई हजार का जुर्माना लगाया। बैंक अफसरों का मानना है कि एटीएम से पैसे न निकलने पर बैंक पर जुर्माने का संभवत: यह पहला मामला है।

दरअसल, शहर के अधिवक्ता राजीव अग्रवाल 25, 26 और 30 अप्रैल 2017 को पैसे निकालने गए तो एसबीआई ने रुपए नहीं उगले। उन्होंने इस संबंध में 4 मई 2017 को उपभोक्ता फोरम में याचिका दायर कर दी। फोरम ने याचिका स्वीकार कर ली। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद फोरम ने आदेश दिया कि बैंक ने ग्राहक को एटीएम कार्ड से संबंधित त्रुटि रहित सेवाएं नहीं दी हैं, इसलिए इसे सेवा में कमी माना जाएगा। ऐसे में बैंक परिवादी को मानसिक पीड़ा की प्रतिपूर्ति के लिए 15 सौ रुपए और परिवाद व्यय के लिए एक हजार रुपए तीस दिन के भीतर अदा करे।

बैंक का तर्क- एटीएम यूजर्स हमारे ग्राहक नहीं

फोरम के सामने बैंक की ओर से एक अनोखा तर्क भी दिया गया। बैंक ने फोरम से कहा कि चूंकि एटीएम इंटरनेट कनेक्टिविटी से चलता है इसलिए एटीएम यूजर्स जिस समय एटीएम का उपयोग करता है, उस समय वह सीधे तौर पर हमारा ग्राहक नहीं है। इसलिए एटीएम से पैसे न निकलने पर इसे सेवा में कमी नहीं माना जा सकता।

जिस पर फोरम ने कहा कि बैंक एटीएम को लेकर ग्राहक से हर साल शुल्क वसूलते हैं तो फिर इस तर्क का कोई मतलब नहीं कि वो हमारे ग्राहक नहीं। फोरम ने बैंक का तर्क पूरी तरह से नकार दिया। इधर याचिकाकर्ता ने बतौर सबूत फोरम के सामने एटीएम से पैसे निकलाने के समय के फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग प्रस्तुत की। फोरम ने माना कि उपभोक्ता द्वारा अलग-अलग समय पर एटीएम जाना और हर बार कैश नॉट एवेलेबल का मैसेज स्क्रीन पर शो होना सेवा में कमी है।

एटीएम से पैसे न निकलना सेवा में कमी क्यों नहीं

यदि हम निर्धारित राशि खाते में न रखें तो पेनाल्टी, समय पर किश्त जमा न करें तो पेनाल्टी, सीमा से ज्यादा बार ट्रांजेक्शन करें तो पेनाल्टी, तीन से अधिक बार एटीएम से अपना पैसा निकाले तब भी पेनाल्टी। जब बैंक अलग-अलग पेनाल्टी और शुल्क वसूलते हैं तो एटीएम से राशि न निकलने पर बैंकों को जिम्मेदार क्यों नहीं मानना चाहिए? वैसे भी मैंने पहले इसकी शिकायत स्थानीय बैंक मैनेजर और कस्टमर केयर सहित अन्य जगह पर की थी, लेकिन जब संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो मुझे फोरम की शरण लेनी पड़ी।

फोरम ने जो आदेश दिया है, वह स्वागत योग्य है। –

राजीव अग्रवाल, याचिकाकर्ता।

मण्डल उपचार–क्रोध को नियंत्रित करने की प्रणाली

मण्डल उपचार: क्रोध को नियंत्रित करने की प्रणाली।लाल और दहाड़ते हुये क्रोध ऐसे एक आवेग को लीजिये।यह तुम को खा जाता है,यह हृदयाघात तक ले जा सकता है।क्या आप अपने क्रोध को पराभूत करने के लिये एक मज़ाकिया ओर सरल तरीक़ा सोच सकतेहैं या गुस्से को शांत भाव से व्यक्त कर सकतेहैं?एक है– इसे मण्डल कहा जाता है।

 

मण्डल चित्रित करने के लाभ

एक बार जब आप क्रोधित मण्डल को चित्रित करना समाप्त कर देते हो,तब स्वत:आपकी वृवत्ति एक प्रसन्न मण्दल को चित्रित करने की होती है,क्योंकि आपने अपना क्रोध पीछे छोड़ दिया है।वास्तव में आप खुश और निश्चिंत महसूस करते हैं।इसको आज़मा कर देखो: “ आप रंगो और अपने हाथों की गति में खो जाते हैं और इस तरह आप बिना इसे महसूस किये ही अपने को स्पष्ट रूप से व्यक्त करते हैं”, एक गृहिणी मंजु मोहिनी का कहना है।“ सबसे अच्छी बात यह है जब आप मण्डल कर रहे होते हैं तब आ सोचते नहीं हैं,आप चित्रण करने में खो जाते हैं।आप को महसूस नहीं होता है कि आषप अपने ऊपर काम कर रहे हैं,यह इतना आसान और इतना मज़ेदार है”, वह जोड़ती हैं।मंजु मण्दल का चित्रण वर्षों से कर रहीं हैं,विशेषकर गुस्से वाले।गुस्से से निपटने के बाद वह जानती हैं कि उन्हे क्या करना है।कागज़ और चित्रांकनी(क्रेआन) उठाओ और चालू हो जाओ ।जल्दी ही गुस्सा भाग जाता है ओर वह फिर शांत हो जाती हैं। किस चीज़ की ज़रूरत है? मण्डल को चित्रित करना बहुत आसान हैअप को सिर्फ कागज़ और चित्रांकनियों (क्रेआन) या रंगीन पेन्सिलो की ज़रूरत है,उसी तरह की जिनका इस्तेमाल बच्चे स्कूल में करते हैं।मण्डल कला नहीं है,इसलिये आप को यह सोचने कि ज़रूरत नहीं है कि वे देखने में कैसे लगेंगे या आप उन्हे सही ढ़ंग से कर रहे हैं या ग़लत ढ़ंग से।आप को कुछ नहीं करना है,केवल उन्हे महसूस करना है।उदाहरण के लिये, गुस्से के मण्डल कौ खींचने के लिये,सिर्फ बैठ जाइये और अपने गुस्से को महसूस करिये।जब आप महसूस करते हैं,वह उसी रंग को चुन लेता है जो सबसे अनुकूल होता है।



तब ap कागज़ पर एक गोला खींचिये और भावनाओं को अपने आप प्रकट होने दीजिये।जो भी रेखा या रंग ata है उसे घेरे के आदर व्यक्त होने दीजिये।अपने पर नियंत्रण मत लगाइये ओर सोचिये मत,बस चलते जाइये।एक मनोवानिन कशमीरा  शा कहतींहैं।“ यह सा कुछ था जो मैं ने इतनी आसानी से किया,मुझे नहीं पता था कि यह मेरे बारे में इतना कुछ पकट करेगा।इसने जो मुझे सिखाया वह यह था कि मुझे सीमायं तोड़नी होगिं ओर मुजे उन सीमाओं से मुक्त होना होगा जो मैं ने अपने ऊपर लागाईं हैं। मण्डल करते समय मैं ने अपने को इतना खुश महसूस किया, वह जोडक्ष़ती हैं।आधुनिक जीवन में हम में से अधिकांश लोगों को ग्र आवेगों का सामना करना होता है।मण्डल अपने को व्यक्त करने का का एक सुरक्षित स्थान प्रदान करते हैं जहां आप एक बच्चे की तरह खेल सकते है।जो रखायें और रंग आप कागज़ पर चित्रित करते हैं वे आश्चर्यजनक चीज़े आप के बारे में प्रकट कर सकते हैंसाधारण गुमाव और रंग के धब्बे बता सकते हैं कि आप सामान्यत् पने गुस्से  को प्रकट कते हैं या दबाते हैं।बाधा पड़ने पर आप पीछे हट जाते हैं या आगे बढ़ते रहते हैं,आप भावावेश से भरे हैं या खिन्न और उदासीन हैं।हालांकि बहुत से अनेक उचार हैं लेकिन मण्डल की तरह कोई इतना मज़ेदार नहीं है।कागज़ पर चित्रांकनी से घसटा मारना मात्र हमे अपने बचपन के उन बेपरवाह दिनो की ओर वापस ले जाता है।

इसी सत्र में लखनादौन में आंरभ होगा केंद्रीय विध्यालय

प्रतीकात्मक फोटो

सिवनी- जिले आदिवासी विकासखण्ड लखनादोन में वर्षो में केंद्रीय विध्यालय आरभ किये जाने के प्रयास सभी राजनीतिक दलो सहित जिले प्रशाशन द्वारा किये जा रहें थे

आज ऊक्त मांग पूर्ण हो गई है ,जिला कलेक्टर गोपालचन्र्द डाँड़ ने बताया कि केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा जिले के अनुविभाग मुख्यालय लखनादौन में केंद्रीय विद्यालय की स्वीकृति प्राप्त हो गयी है । शिक्षा सत्र 2018-19 अर्थात माह जून 2018 से केंद्रीय विद्यालय लखानादौन में कक्षा पहली से पांचवीं तक प्रवेश यथाशीघ्र प्रारंभ होंगे ।


संत भय्यूजी महाराज ने गोली मारकर जान दी, शिवराज ने ऑफर किया था मंत्री का दर्जा

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में भय्यू जी महाराज ने खुद को गोली मार ली. उन्हें फौरन अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. अभी तक घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया है.

मध्य प्रदेश में भय्यू जी महाराज को राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था. कुछ वक्त पहले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया था.

968 को जन्मे भय्यू महाराज का असली नाम उदयसिंह देखमुख है. वह कपड़ों के एक ब्रांड के लिए कभी मॉडलिंग भी कर चुके हैं.

भय्यू महाराज का देश के दिग्गज राजनेताओं से संपर्क है. हालांकि वह शुजालपुर के जमींदार परिवार से ताल्लुक रखते हैं.

भय्यू जी महाराज तब चर्चा में आए थे जब 2011 में अन्ना हजारे के अनशन को खत्म करवाने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने उन्हें अपना दूत बनाकर भेजा था. इसी के बाद  ही अन्ना ने उनके हाथ से जूस पीकर अनशन तोड़ा था

बच्‍चों की सोशल मीडिया गति‍विधियों पर रखें नजर

सिवनी-जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी द्वारा बताया गया कि कानूनों की जानकारी न होने के कारण सिवनी जिले के नवयुवक एवं किशोरों के द्वारा सोशल साइट जैसे फेसबुक में फेक आई.डी. बनाना फोटो एडिटिंग कर बालिकाओं/ महिलाओं के साथ अपनी फोटो शेयर करना या किसी नाबालिक बालिकाओं/ महिलाओं को बदनाम करने के आशय से फोटो की कापी कर उपयोग करना आदि कार्य कर रहे है, जिस पर बाद में उनके विरूद्व सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आई.टी.एक्ट) 2000 की धारा 67, 67 क, 67 ख के साथ-साथ पीड़िता नाबालिग होने पर लैगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2015 के विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मामला पंजीबद्ध हो रहे है, जिसमें कम से कम 3 साल से 5 साल का कठोर कारावास एवं 10 लाख रूपये तक का जुर्माना का प्रावधान है। कुछ मामले किशोर न्याय बोर्डमें भी पंजीबद्ध हुए है। जिसमें नाबालिग बच्चों द्वारा उक्त विधि विरूद्व कार्य जानकारी के अभाव में कर दिये है। उन्‍होंने सभी माता-पिता एवं पालकों से अनुरोध है कि वह अपने बच्चों को इस बारे में बताकर समझाईश दें एवं उनके सोशल नेटवर्क साइट पर भी नजर रखे ताकि वह अनजाने में भी किसी अपराध में शामिल न हो।

अग्रवाल समाज का सपाक्स के आंदोलन को खुला समर्थन 

सिवनी-सामान्य, पिछड़ा, अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था (सपाक्स) संगठन के जातिगत आरक्षण के विरोध में किए जा रहे आंदोलन को अग्रवाल समाज ने अपना खुला समर्थन दिया है।

अग्रसेन महासभा के अध्यक्ष श्री श्रवण अग्रवाल ने बताया कि आर्थिक आधार पर आरक्षण देने, एट्रोसिटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के सम्मान समेत अन्य मुद्दों पर सपाक्स संस्था के अभियान को अग्रवाल समाज ने अपना खुला समर्थन दिया है।

अग्रसेन महासभा के समस्त पदाधिकारियों ने 12 जून को बारापत्थर राशि लाॅन में सपाक्स के प्रांतीय पदाधिकारियों उपस्थिति में आयोजित सभा व रैली में सामाजिक जनों से उपस्थिति की अपील की है।