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ध्यान आकर्षित करने वाली एक ध्वनि

छत्तीस वर्षीय फिनियन मकैन ने दो प्रकार के जीवन चारित्रों को एक साथ संभाल कर रखा हुआ है, जैसे हार्वर्ड में एक सामवेद के विद्वान के रूप में और दूसरा एक अच्छे संगीतकार के रूप में

 उनकी प्रथम सीडी के प्रदर्शन को पुश किंग्स कहा जाता है और उनका बैंड सभी बीटल्स प्रभावित बैंडों में से सबसे अच्छे के रूप में उभरकर बाहर आए। अब तक उनके द्वारा तीन एलबम और १० एकल जारी की गई हैं। उनकी आध्यात्मिक रूची उन्हें लगातार भारत के वैदिक विद्वानों के संपर्क में लाई। वह बताते हैं कि- “एक माप में आवाज के उतार-चढ़ाव को, जिस समय मंत्रों का जाप किया जाता है, तो उस समय उसकी तुलना संगीत के सुरों के साथ कि जा सकती है। “रंजेनी ए सिंह, हाल ही में पंजाब, केरल में आयोजित वैदिक अग्नि अनुष्ठान के मौके पर  अथिराथरम की एक उप-वृत्ति पर चर्चा करते हैं।

क्या है, जिसनें वेदों में आपकी रुचि बनाई है?

मेरा वेदों के साथ अनुबंध सबसे ज्यादा संगीत के माध्यम से हुआ है। चार साल की उम्र से, मुझमें रॉक ‘एन’ रोल करने का जुनून सवार था। मेरा भाई और मैं हर बीटल्स गीत गाते थे। हार्वर्ड में, मुझें संस्कृत विभाग में वेदों और भारतीय अध्ययन के लिए परिचित किया गया था। वैदिक जप शैली ने मुझे मंत्र-मुग्ध कर दिया। यह वह है, जब मुझे पता चला कि- “भारतीय शास्त्रीय संगीत विशेष रूप से कर्नाटक के बारे में, जिसकी जड़े साम वेद में हैं, अतः यह रिंग वैदिक भजनों के अनुकूल है, जिन्हें संगीत जप करने के लिए अत्यधिक स्पष्ट रूप में स्थापित किया गया हैं।” “मंत्रों का जाप करते हुए, एक माप में आवाज में उतार-चढ़ाव करना संगीत की संकेत पद्धति के समान है।“



हालांकि, संगीत की वृद्धि में, यह वेदों के निर्बाध रहने की एक परंपरा है, जिसनें मुझे अधिक जानने के लिए प्रेरित किया। हार्वर्ड में, मैनें महसूस किया कि- वेदों को पुस्तकों के रूप में जानने का हमारा तरीका वास्तव में प्राचीन मौखिक प्रदर्शन परंपराओं को प्रतिबिंबित नहीं करता है। उदाहरण के लिए हम और बहुत सारे लोग यूनानी कवि होमर को एक संगीतकर के रूप में पसंद करते हैं, उन्होनें साधारण संगीत की एक माप में लम्बी कहानी गायी। और जो कहानी उनके दिमाग में थी, वे तत्कालिक उन्हीं की तरह आगे चली गई। जब मैं भारत आया, मैनें महसूस किया कि- वहाँ अत्यधिक प्रचीन ग्रंथ हैं, जिन्हें आपने ऐतिहासिक दुर्घटनाओं के बावजूद भी यूरोप की अपेक्षा में, सुरक्षित रखा है।

तो आप कहेंगे कि- “मौखिक परंपराओं के कारण, वेदों का अस्तित्व बना हुआ है?” 

समय के साथ, उच्चारण और धुन परिवर्तित हो सकती है, लेकिन वहाँ एक सार है, जो हमेशा अपरिवर्तित बना रहता है। जिसमें केरल के नंबूदिरीस एक महत्वपूर्व भूमिका निभाते है, क्योंकि इनका संबंध प्रचीन गायकों के गीतों से होता है, जो ‘मौखिक प्रदर्शन परंपरा’ के माध्यम से उन्हें एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के बीच, अभिभावकों के माध्यम से बच्चों में या अध्यापकों के माध्यम से शिष्यों में जीवित बनाए रखते हैं। इसी वजह से,वेद एक निश्चित मौखिक पाठ के रूप में और एक सिद्धांत के रूप में प्रतिष्ठापित हो गए। जब मैनें नंबूदिरी परंपरा की प्राचीन मौखिक परंपरा के निरंतर प्रसारण के बारे में सुना,तो यह वास्तव में बहुत अच्छी और खोज के लिए असंभव दिखाए देती थी।

इसके अलावा, उन्होनें पिछलें कई दिनों में, यज्ञों में जैसे- सोमयज्ञों और अथिराथरम में बिना रुके लगातार जप किया, यह मानव की सहनशीलता का एक परीक्षण है, जिसमें वे स्मृति से और अपनी उच्च पकड़ के साथ मंत्रों का जप करते हैं, उन्हें ये सब गाने के लिए , जबरदस्त फेफड़ों की शक्ति की आवश्यकता होती है। उन्होनें बहुत शानदार तरीके से, विस्तृत परंपराओं का प्रसारण किया, जिसे मैं दैहिक पाठ पुकारना पसंद करता हूँ- जिसमें “पण्डित किसी भी बिन्दु को निर्दिष्ट करने के लिए मुद्राओं का उपयोग करते हैं,ना की लिखित पाठ का।“ वह अपने शरीर का उपयोग पाठ को सांकेतिक शब्दों में बताने के किए करते हैं। परंपराओं के अस्तित्व के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है, कि- जब छात्रों को वेद पढ़ाया जाता है, तो शिक्षकों को उस समय उनकें मस्तिष्क को स्थिर रखना चाहिए और उन्हें एक विशिष्ट व्यवहार में रूपांतरित करना चाहिये। यदि उन्हें इस तरह से सिखाया जाता है, तो भजनों को उनके शरीर में सांकेतिक शब्दों के माध्यम से मिलाया जा सकता है।

क्या आप ऐसा कहना पसंद करेंगें कि- ध्वनि जीवंत भर निर्मित होती है? 

“ध्वनि अनन्त है।” मैं सोचता हूँ कि- “जब तक इस धरती पर मनुष्य रहें, तब तक वें बातें करते रहें और गाना गाते रहें। उस संबंध में, ध्वनि अनन्त हो सकती है। मैं इसे एक बड़े लौकिक दृष्टिकोण से नहीं देखता हूँ।“

क्या मंत्र ध्वनि का विज्ञान है? 

पारंपरिक अर्थों में, ऐतिहासिक भाषाई व्युत्पत्ति के लिए मंत्र, मन है, जिसका अर्थ आपके विचार है और जब आप त्रा को प्रत्यय के रूप में जोड़ते हैं, तो यह चिंतन के लिए एक साधन बन जाता है। मंत्र अपने दिमाग का उपयोग करने के लिए एक साधन है। हांलाकि यह एक व्यापक परिभाषा है, लेकिन कम से कम, यह भारत में मंत्रोच्चार के लंबे इतिहास के स्पष्टीकरण में हमारी सहायता करती है, जो बहुत ही विविध और विचित्र है,लेकिन वहाँ इसमें हमेशा एक निरंतरता है। आपके पास एक व्यक्ति है, जो ध्वनि का एक दृश्य उत्पन्न करता है और मंत्र के साथ-साथ श्रोता पर भी एक मानसिक प्रभाव उत्पन्न करता है। मंत्र का विचार किसी एक की, याचना के विचार के लिए एक साधन है।

भारत-विद फ्रिट्स स्टाल ने कहा है कि- मंत्रों का कोई अर्थ नहीं है। क्या आप इससे सहमत हैं? 

स्टाल ने काफी हद तक सामवेद और विशेष रूप से अनिरूकता गण या विशेष रूप से ऊऊऊ और आआआ की ध्वनि, अनाभिव्यक्त जप को आधार मानकर अपने तर्क दियें हैं। उस दृष्टिकोण से, आपको स्वीकार करना चाहिये कि- “वे वो शब्द नहीं हैं, जिनका कोई अर्थ निकलता हो, भाषा  अभिव्यक्ति का एक तरीका है। हम सभी जानते हैं कि- “जब हम ‘ओम नमः शिवाय’ कहते हैं, तो इसका एक अर्थ होता है।“ वास्तविकता किसी भी एक सिद्धांत या एक लेखांकन से अधिक जटिल है। आप मंत्र का वर्णन किसी भी एक संकीर्ण शब्द में नहीं कर सकते हैं। और यह हमेशा सच होता है। हमें यह हमेशा याद रखना चाहिये कि- “वह मुख्य रूप से वैदिक मंत्रों के इन दृष्टिकोण के संदर्भ में बहस कर रहे थे।“ और उस संदर्भ में, वे ऐसा सामान्य रूप से पहले संस्कृत विद्वानों द्वारा दिए गए तर्क जैसे कि- “मंत्रों का प्रयोग लोगों के बीच में भाषा की तरह, एक सामान्य संप्रेषण के लिए नहीं किया जा सकता है“ को याद दिलाने के लिए कर रहे हैं। एक संकीर्ण दृष्टिकोण में, वे किसी भी प्रकार का अर्थ नहीं प्रदान करते हैं। वहाँ तर्क करने के लिए कुछ हैं। मैं स्टाल से पूरी तरह से सहमत नहीं हो सकता हूँ, लेकिन मैं इस तर्क की तरफ एक सहानुभूति रखता हूँ, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण अवलोकन है और जो मौखिक कला की जटिलता पर प्रकाश डालती है।

क्या आपके वैदिक अनुसंधान ने आपके संगीत को प्रभावित किया है? 

ठीक है- कभी-भी, कभी नहीं कहते हैं! वेदों के अध्ययन ने मुझे अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया है, विशेष रूप से जब मैं गीत और गीत के बोल लिखता हूँ। इन प्राचीन परंपराओं के अध्ययन ने भी मुझे ब्लू आईज़ गाने को सीखने के लिए अत्यधिक प्रेरित किया और जिसे मैनें ‘रॉक एन रोल’ की विरासत में शामिल किया और इसकी उत्पत्ति के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त की। मैं भविष्य में जल्द ही साम वेद का एक रीमिक्स करने की योजना करता हूँ।यह आध्यात्मिकता और भारतीय दर्शन को मिश्रित करने का एक अच्छा तरीका है, जो पश्चिमी संगीत की मुख्यधारा में भरतीय दर्शन को लाती है।


फंगल इंफेक्शन, उल्टी जैसी मॉनसून की बीमारियों में फायदेमंद है ये हर्ब, ऐसे करें प्रयोग

बरिश का मौसम अपने साथ कई समस्याएं ले आता है। इस मौसम में फंगल इंफेक्शन, उल्टी-खांसी, जुकाम-बुखार और कब्ज की समस्या आम हो जाती है।

अक्सर इन समस्याओं के लिए लोग डॉक्टर के पास नहीं जाना चाहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ये सभी छोटी बीमारियां हैं। कुछ आसान घरेलू नुस्खों से आप घर पर ही इन छोटी-छोटी बीमारियो और परेशानियों से आसानी से राहत पा सकते हैं। हरड़ एक ऐसा हर्ब है, जो आपकी इन सभी समस्याओं को आसानी से ठीक कर देता है। आइए जानते हैं कि हरड़ किस तरह आपके लिए है फायदेमंद।

फंगल इंफेक्शन में हरड़ का प्रयोग

बारिश के मौसम में स्किन रैशेज और त्वचा पर फंगल इंफेक्शन की समस्या सामान्य है। फंगल एलर्जी या संक्रमण होने पर हरड़ के फल और हल्दी से तैयार लेप प्रभावित भाग पर दिन में दो बार लगाएं। त्वचा के पूरी तरह सामान्य होने तक इस लेप का इस्तेमाल जारी रखें। अगर आपको धूप में या किसी चीज के खाने के बाद एलर्जी हो गई है तो, शरीर के उस भाग की धुलाई भी हरड़ के काढ़े से की जा सकती है।

स्किन एलर्जी के लिए हरड़

हरड़ का काढ़ा बनाकर पीने से यह त्वचा संबंधी एलर्जी आदि में लाभ देती है। इसके सेवन के लिए हरड़ के फल को पानी में उबालकर इसका काढ़ा बनाएं और दिन में दो बार इसाका नियमित रूप से सेवन करें। फंगल एलर्जी होने पर उपचार के लिए हरड़ के फल और हल्दी को पीस कर बनाए लेप को प्रभावित अंग पर दिन में दो बार लगाएं, एलर्जी जल्द ठीक हो जाएगी। इसके इस्तेमाल से बाल काले, चमकीले बनते हैं। उपयोग के लिए हरड़ के फल को नारियल तेल में उबालकर लेप बनाएं और इसे अपने बालों पर लगाएं।

उल्टी की समस्या में हरड़

मॉनसून में अक्सर लोगों को फूड प्वायजनिंग जुकाम के कारण उल्टी की समस्या हो जाती है। छोटी हरड़ उल्टी की समस्या में भी फायेदमंद है। उल्टी होने पर हरड़ और शहद का सेवन करने से उल्टियां रुक जाती हैं।

कब्ज में हरड़ का ऐसे करें प्रयोग

कब्ज की समस्या से परेशान लोगों के लिए हरड़ का प्रयोग वरदान की तरह होता है। जर्नल केमिको बायोलॉजिकल इंटरेक्शन में प्रकाशित एक अध्‍ययन के मुताबिक, हरड़ में गल्लिक एसिड नाम का तत्‍व मौजूद होता है जो एचडीएल और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है और रक्त में प्लाज्मा इंसुलिन बढ़ जाता है। कब्ज़ दूर करने के लिए हरड़ के पल्प को चुटकीभर नमक के साथ खाएं या फिर 1/2 ग्राम लौंग अथवा दालचीनी के साथ लें।

बॉडी को डिटॉक्स करता है

माना जाता है कि हरड़ अधिकांश रोगों का हरण करने की क्षमता वाली होती है, इसलिए इसे हरीतकी कहा जाता है। हरड़ पेट को साफ करने और पाचन तंत्र को सुधार कर इसे मजबूत करने के लिए जानी जाती है। आयुर्वेद के अनुसार यह जड़ी-बूटी खाए गए पोषक तत्‍वों का अच्‍छे से समावेश कर शरीर को स्‍वस्‍थ बनाती है। इसके अलावा यह जड़ी बूटी शरीर को डिटॉक्‍स कर (विशेष रूप से पेट को), वजन कम करने में भी मददगार साबित होती है।

क्यों मृत्यु नहीं है जीवन का अंत

मृत्यु का अर्थ है भौतिक शरीर से आत्मा का जुदा होना है। मृत्यु नये और बेहतर जीवन का एक प्रारंभिक बिन्दु बन जाता है। यह जीवन के उच्च रूप का द्वार खोलता है। यह संपूर्ण जीवन का केवल एक प्रवेशद्वार है। जन्म और मृत्यु माया के मायाजाल हैं। जन्म लेते ही मरने की शुरुआत हो जाती है और मरते ही जीवन की शुरुआत हो जाती है। जन्म और मृत्यु इस संसार के मंच पर प्रवेश करने और बाहर जाने का द्वार मात्र है। वास्तव में ना तो कोई आता है और ना ही कोई जाता है। केवल ब्रह्म और अनंत का ही अस्तित्व होता है। जैसे आप घर से दूसरे घर में जाते हैं, वैसे ही आत्मा अनुभव प्राप्त करने के लिए एक शरीर से दूसरे शरीर में प्रवेश करती है। जैसे मनुष्य़ पुराने कपड़े छोड़कर नए कपड़े पहनता है, बिलकुल वैसे ही आत्मा पुराने शरीर को छोड़कर नया शरीर धारण करती है। मृत्यु जीवन का अंत नहीं है। जीवन एक कभी न खत्म होने वाली प्रक्रिया है। यह निरंतर चलती ही रहती है। मृत्यु एक जरूरी घटना है जिसका अनुभव हर आत्मा को भविष्य में विकास करने के लिए करना है। एक विवेकी और बुद्धिमान व्यक्ति कभी भी मौत से नहीं डरता है।



हर आत्मा एक चक्र है। इस चक्र की परिधि कहीं भी खत्म नहीं होती लेकिन इसका केन्द्र हमारा शरीर है। तो फिर, मौत से क्यों डरना चाहिए? परमात्मा या सर्वोच्च आत्मा मृत्युरहित, कालातीत, निराधार और असीम है। यह शरीर, मन और पूरे संसार के लिए एक केन्द्र है। मृत्यु केवल भौतिक शरीर को प्राप्त होती है, जो पांच तत्वों से बना है। मृत्यु शाश्वत आत्मा को कैसे मार सकती है जो समय, स्थान और कर्म से परे है? अगर आप जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति पाना चाहते हैं तो आपको शरीरविहीन होना होगा। शरीर हमारे कर्मों का परिणाम है। आपको कोई भी कार्य फल की उम्मीद किए बिना ही करना चाहिए। अगर आप खुद को रागद्वेष या पसंद और नापसंद से मुक्त कर लेते हैं, तो आप खुद को कर्म से भी मुक्त कर लेंगे। आप केवल अहंकार को ही खत्म कर खुद को ‘राग’ और ‘द्वेष’ से मुक्त कर सकते हैं। जब अविनाशी ज्ञान के द्वारा अज्ञानता का अंत हो सकता है तो आप अहंकार का भी विनाश कर सकते हैं। इसलिये इस शरीर के जड़ का कारण यह अज्ञानता है। जिसने भी उस अमर आत्मा का एहसास कर लिया जो सभी ध्वनि, दृश्य, स्वाद और स्पर्श से परे है, जो निराकार और निर्गुण है, जो प्रक़ृति से परे है, जो तीन शरीर और पांच तत्वों से परे है, जो अनंत और अपरिवर्तनीय है, उसने खुद को मौत के मुंह से आजाद कर लिया।

जीव या व्यक्तिगत आत्मा अपने कार्यों को प्रदर्शित करने के लिए और अनुभव प्राप्त करने के लिए अनेक शरीर धारण करती है। वो शरीर में प्रवेश करती है और फिर जब वह शरीर जीने लायक नहीं रहता, तो उसे त्याग देती है। वह फिर से एक नए शरीर का निर्माण करती और पुन: वही प्रक्रिया दोहराती है। यह प्रक्रिया स्थानांतरगमन कहलाती है। किसे नये शरीर में आत्मा का प्रवेश करना जन्म कहलाता है। शरीर से आत्मा का अलग हो जाना मृत्यु कहलाता है। अगर शरीर में आत्मा न हो तो वह शरीर मृत शरीर है और इसे प्राकृतिक मृत्यु कहते हैं। एककोशकीय जीवों के लिए प्राकृतिक मृत्यु अज्ञात है। जब पृथ्वी पर ऐसे जीवों को जीवन मिलता है तो उनकी मृत्यु अज्ञात होती है। यह घटना केवल बहुकोशकीय जीवों के साथ ही होती है। प्रयोगशालाओं के शोधों से पता चला है कि किसी के जीवन की समाप्ति के बाद भी उसके अंग काम कर सकते हैं। मृत्यु के बाद भी कई महीनों तक सफेद रक्तकण शरीर में जीवित रहते हैं। मृत्यु जीवन का अंत नहीं है। यह महज एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व की समाप्ति है। जीवन संसार पर विजय पाने के लिए चलती रहती है। यह तब तक चलती रहती है जबतक यह अनंत में विलीन नहीं हो जाती।

फर्जी चैक देकर धोखाधडी का आरोपी गिरफ्तार

सिवनी- कोतवाली थाना सिवनी के अंतर्गत गत दिनांक 7/6/18 को प्रार्थी तनवीर अहमद की काज़ी मोहल्ला, सिवनी स्थित दुकान आकर रवींद्र कुमार सिंह द्वारा धोखाधड़ी पूर्वक 38,000 रुपये का फर्जी हस्ताक्षर युक्त बैंक चेक देकर LED टी.व्ही. खरीदकर जाने तथा पते पर रवींद्र कुमार सिंह न मिलने पर थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई। उक्त अपराध क्रमांक 348/18 धारा 420, 467, 468, 471 IPC का दर्ज कर अनुसंधान दौरान दिनांक 29/6/18 को आरोपी रवींद्र कुमार सिंह को गिरफ्तार कर LED टी.व्ही. बरामद किया गया।

उक्त आरोपी रवींद्र कुमार सिंह के द्वारा इसी प्रकार दिनांक 27/6/18 को अन्य प्रार्थी नितिन गोयल की शुक्रवारी, सिवनी स्थित दुकान से भी 04 लैप टॉप भी खरीद कर इलाहाबाद बैंक का ही चेक फर्जी हस्ताक्षर युक्त 1,31,000 रुपये का दिया गया, जो बैंक से अनादृत होने पर आज दिनांक 30/6/18 को रिपोर्ट पर अपराध क्रमांक 353/18 धारा 420, 467, 468, 471 IPC का दर्ज कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

आरोपी रवींद्र कुमार पिता सुखदेव सिंह, उम्र 54 वर्ष, निवासी:- मजरूद्दीनपुर, तहसील- बीकापुर, जिला फैज़ाबाद (उत्तरप्रदेश) से अन्य घटनाओं के संबंध में भी पूछताछ की जा रही है।

सँघर्ष में घायल हुआ टाइगर अब स्वस्थ

सँघर्ष में घायल हुआ टाइगर अब स्वस्थ

सिवनी-विगत दिनों आपसी सघर्ष में पेंच टाइगर रिजर्व का एक बाघ घायल हो गया था ,टाइगर की आंख में चोट लगी थी जो काफी गंभीर हो सकती थी क्योंकि बाघ अपने घाव या चोटों को चाट कर ठीक कर लेता है पर आंख तक जीभ का पहुंचना संभव नही होता जिससे टाइगर की आंख में गंभीर संक्रमण होने की संभावनाएं थी ।

ऐसी चोटे टाइगर के लिए काफी खतरनाक हो सकती थी, 16 जून को डॉ. अखिलेश मिश्रा ने टाइगर को लॉकेट कर इलाज किया और उसकी गतिविधियों पर ध्यान देते रहे ।

28 जून टाइगर स्वस्थ हालात में घूमता दिखाई दिया ,जो कि इलाज के बाद अब पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है ।

डॉ.अखिलेश मिश्रा जी द्वारा अब तक 100 से भी अधिक टाइगर का सफल एवं सुरक्षित रेस्क्यू को अनजाम दे चुके है और साथ ही न केवल मध्यप्रदेश भारत के विभिन्न टाइगर रिजर्व में जाकर बाघों के इलाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे है ।

30 सितम्बर तक रेत खनन में रोक

प्रदेश में मानसून सत्र की अवधि निर्धारण के संबंध में संचालक भौमिकी तथा खनिकर्म भोपाल के अनुसार भारत सरकार पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा सस्टेबल सेन्ड मिंग मेनेजमेन्ट गाइडलाइन 2016 जारी की गई जिसमें मानसून अवधि 15 जून से 01 अक्टूबर निर्धारित की गई है एवं जिला स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (डिया) द्वारा जिला स्तरीय विशेषज्ञ आंकलन समिति डेक से परामर्श कर नदियों में रेत खनन पर रोक लगाने के संबंध में स्थानीय मौसमी परिवर्तनों के आधार पर उक्त निर्धारित वर्षाकाल अवधि में परिवर्तन भी किया जा सकता है।

जिले में मानसून सक्रिय हो रहा है। अत: जिला स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (डिया) द्वारा प्रतिबंधित मानसून अवधि 1 जुलाई से 30 सितंबर 18 निर्धारित की गई है अत: खनिज रेत खनन कार्य उक्त अवधि में बंद रहेगा।

उज्जवला योजना ने लाई, आरती बछलिया के चेहरे पर मुस्कान “सफलता की कहानी”

“सफलता की कहानी”

सिवनी जिले के ग्राम खामखरेली में रहने वाली श्रीमत आरती बछलिया व उसका परिवार प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना से मिले मुफ्त गैस कनेक्‍शन पाकर अब बेहद खुश हैं। श्रीमति आरती अपनी पूर्व की दिनचर्या व अपने चार सदस्‍यीय परिवार के बारे में बताते हुये कहती हैं कि बच्‍चे शिक्षा प्राप्‍त करने गांव से शहर जाते हैं। इस स्थिति में उनके लिये समय पर खाना बनाना बहुत ही जरूरी होता था। ग्रामीण परिवेश, कृषि पर निर्भरता व सीमित संसाधनों के चलते कभी-कभी दैनिक जीवन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिसमें समय पर परिवार के लिये खाना बना पाना।

श्रीमति आरती बछलिया बताती हैं कि चूल्हे में खाना बनाने के लिये घर से दूर जाकर लकड़ी-कंडे एकत्र करना पडता था फिर कहीं जाकर खाना बन पाता था। जिसमें बरसात के दिनों में गीले लकड़ी कंडे होने के कारण इनके जलने से पूरे घर में धुंआ ही धुंआ हो जाता था जिससे आँखों में जलन और खांसी होने लगती थी साथ कभी कभी खाना भी समय पर नहीं बन पाता था। किन्तु आज श्रीमति बछलिया खुशी-खुशी अपने रोजमर्रा के घरेलू काम के साथ शासन से मिले गैस कनेकशन से परिवार के लिये समय पर स्‍वादिष्‍ट भोजन बना लेती हैं। सरकार द्वारा मिले मुफ्त गैस कनेक्शन के लिए श्रीमति आरती बछलिया अत्यंत प्रसन्न हो कर सरकार का धन्यवाद करते हुए कहती हैं कि सरकार हम जैसे गरीब परिवारों के लिए बहुत अच्छा काम कर रही है। जिससे हम सब समाज की मुख्य धारा से जुड़ पा रहे हैं।

श्रमजीवी पत्रकार परिषद का सदस्यता अभियान जारी

श्रमजीवी पत्रकार परिषद का सदस्यता अभियान जारी

सिवनी। श्रमजीवी पत्रकार परिषद मध्यप्रदेश की प्रदेश इकाई से मिले निर्देशानुसार सिवनी जिले में सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। जिले में जिन पदाधिकारियों व सदस्यों का  सदस्यता नवीनीकरण होना है वे अपना सदस्यता फार्म भरकर ब्लाक अध्यक्षों को दे। ताकि समय पर परिचय पत्र जारी करवाये जाने संबंधी कार्यवाही जिला कार्यालय सिवनी से की जा सकें।

इस संबंध में श्रमजीवी पत्रकार परिषद जिला इकाई सिवनी के जिलाध्यक्ष सूर्यप्रकाश विश्वकर्मा व महासचिव प्रशांत शुक्ला ने जिले के सभी ब्लाक अध्यक्षों से भी आग्रह किया है कि ब्लाक स्तर पर बैठकों का भी आयोजन करें जिसमें सदस्यता नवीनीकरण व नवीन सदस्यता के फार्म भरवाए जा सकें। समस्त ब्लाक अध्यक्षों से आग्रह किया गया है कि श्रमजीवी पत्रकार परिषद में उन्हीं पत्रकारों को सदस्यता दे जो कि वास्तव में पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे है। ऐसे पत्रकारों पर भी चिंतन करें जो कि संगठन में रहते हुए निष्क्रियता के परिचायक बने है उनके संबंध में भी निर्णायक स्थिति में पहुंचे। सदस्ता उन्हें ही दी जाएगी जो कि पत्रकारिता जगत से जुडकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे है।

बैठक में पत्रकारों के स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की जाए तथा यदि स्थानीय किसी पत्रकार की कोई समस्या है उसका भी निराकरण भी किया जाए। जिले के पदाधिकारियों ने यह निर्णय लिया गया है कि ब्लाक स्तर पर होने वाली बैठकों में जिला स्तर के पदाधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। जिले के सभी ब्लाक अध्यक्ष सदस्यों व पदाधिकारियों की सुविधानुसार बैठकों की तिथियां घोषित कर जिला कार्यालय को सूचित करें। सदस्यता संबंधी कार्य में किसी भी पत्रकार साथी को कोई समस्या आती है तो  जिलाध्यक्ष व महासचिव से सीधे संपर्क कर सकते है। प्रदेश इकाई से मिले निर्देशानुसार सदस्यता नवीनीकरण का कार्य 1 जुलाई 2018 तक पूर्ण किया जाना है।  इसके पश्चात सदस्यता व पद स्वमेव ही समाप्त हो जाएगी।

ज्ञात हो कि जिन पत्रकारों ने सीधे प्रदेश कार्यालय को सदस्यता फार्म जमा किया है उनके परिचय पत्र जारी नहीं किए गए है। सभी सदस्य अवगत होवे कि जिला कार्यालय की अनुशंसा के बाद ही प्रदेश कार्यालय सदस्यता फार्म भेजें जायेंगे। जिले कार्यालय से अनुशंसा उपरांत ही परिचय पत्र बनने का कार्य प्रांरभ होगा।

जिलाध्यक्ष सूर्यप्रकाश विश्वकर्मा – 9425842997, महासचिव प्रशांत शुक्ला- 9425875891, आशीष श्रीवास्तव- 9425843403

मंगलसिंह होंगे यातयात प्रभारी

सिवनी- जिला मुख्यालय में आज से यातायात प्रभारी की कमान मंगल सिंह धुर्वे को सोपी गई है।

अतिरिक्त पुलिस अधीकछ गोपाल डांडेल ने बताया कि पुलिस अधिकछ विवेक राज सिंह द्वारा पूर्व में यातायात प्रभारी रहे कमलेश चोरिया के स्थाननंतर होने के बाद रिक्त पद पर नियुक्त किया है

सिवनी के हुक्का बार (चारकोल) व हनी ढाबे में छापा

चारकोल व हनी ढाबा में छापा

सिवनी- जिले के डुंडा सिवनी थाना के अंतर्गत ग्राम बिझावाड़ा में सचालित चारकोल रेस्टोरेंट में आज थाना प्रभारी दिलीप पचेवशर के मार्गदशन में छापा मारा गया जहा अंगेरजी शराब व् हुक्का परोसते हुए पाया गया,मौके पर सचालक उपस्थित नही था,वहां उपस्तिथ कर्मचारी विजय पिता हनुमत को गिरफ़तार कर वहा से अंगेरजी शराब व् हुक्का बरामद किया गया ।

वही हनी ढाबा में हुई कार्यवाही में अंग्रेज़ी शराब बेचते हुए सोनू उर्फ़ रोहन उइके को गिरफतार किया गया।

दोनी ही आरोपीयो के खिलाफ आबकारी एक्ट की धाराओं के तहत प्रकरण कायम किया गया।