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फरार वारंटी गिरफ्तार

सिवनी-जिले थाना लखनवाड़ा अंतर्गत आज दिनाँक 02-07-2018 को थाना लखनवाड़ा में अपराध क्रमांक 17/2007 में फरार वारण्टी श्यामलाल पिता झनकलाल रझड़ उम्र36 साल को ग्राम सिंहपुर थाना मोहखेड़ जिला छिंदवाड़ा से गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किया गया।

फरार आरोपी को पकड़ने में उनि-देवकरण डेहरिया, आर. मुकेश विश्वकर्मा, राकेश त्रिपाठी, अरुण पटेलने जानकारी प्राप्त कर गिरफ्तार किया। आरोपी 11 साल से फरार चल रहा था। जिसके गिरप्तारी हेतु न्यायालय से वारन्ट जारी किया गया है।

आकाशीय बिजली गिरने से एक मृत

सिवनी- जिले के कान्हीवाड़ा थाना अंतर्गत आज शाम आकाशीय बिजली गिरने से खेत मे काम कर मजदूर की घटना स्थल पर ही मौत हो गई है,

मृतक ग्राम कान्हीवाड़ा का संतोष जाति गोंड उम्र 35 वर्ष निवासी कुम्हारी मौहल्ला कान्हीवाड़ा है ।

सचिव एवं रोजगार संघ ने सौपा ज्ञापन

लखनादौन- जिले के सिवनी में लखनादौन जनपद पंचायत क्षेत्र के सभी 108 सचिव एवं रोजगार सहायकों ने खंड पंचायत अधिकारी पुनाराम चौकसे पर खराब समन्वय का आरोप लगाते हुए प्रशासन को पुनाराम चौकसे को शीघ्र हटाने की मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपा जिसमें 3 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की भी सूचना दी गई है सचिव एवं रोजगार सहायक संघ का कहना है कि पुनाराम चौकसे के खराब समन्वय और शासकीय कार्यों में अरुचि के चलते पंचायतों में कार्य प्रभावित हो रहा है उन्होंने पुनाराम चौकसे पर सचिवों एवं रोजगार सहायकों से वेतन आदि आहरण पर अनुचित राशि की मांग का भी आरोप लगाया है,

सचिव संघ ने लखनादौन के नायब तहसीलदार पूजा राय को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा ,साथ ही जिला पंचायत सीईओ के नाम विकास खंड विस्तार अधिकारी जे एल ठेपे को ज्ञापन सौंपा,

विकास खंड विस्तार अधिकारी ने बताया कि बे ज्ञापन को उच्च अधिकारियों को प्रेषित कर रहे हैं एवं शीघ्र मामले को सुलझाने का प्रयास करेंगे ताकि सचिव हड़ताल पर ना जाए, उनका कहना है कि सचिव हड़ताल पर जाते हैं तो निश्चित तौर पर ग्रामीण विकास कार्य प्रभावित होंगे,

कम्प्यूटर सेंटरों में प्रवेश के नाम पर जारी है लूट

सिवनी- इन दिनों कम्प्यूटर की कक्षाओं को लेकर मानो होड़ लगी है और सभी इंस्टट्यूट इस होड़ में लगे हुए है कि उनके यहां पर अधिक से अधिक लोग प्रवेश के लिये आये इस हेतु संस्थान द्वारा 4000 रूपए 2000 रूपए,3000 रूपए का शुल्क रखा गया है जो लोगों की समझ से परे है।

ज्ञातव्य है कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से समृद्ध यह सभी कम्प्यूटर सेंटर अपने विज्ञापनों में बड़ी-बड़ी बातें करते है और विद्यार्थियों को प्रलोभन दिखाते है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही होती है पूर्व वर्षो में देखा गया कि छात्र,छात्राओं को एक साथ प्रशिक्षण देने के नाम पर प्रेम प्रसंग के मामले किसी से छुपे नही है जो भविष्य में कोई बड़े अपराध का कारण बनते है अखबारों में विज्ञापन छपवाकर अपने खिलाफ इन बातों को प्रकाशित ना करने के लिये दबाव बनाने की कोशिश करते है और प्रशासन भी इन प्रायवेट कम्प्यूटर कॉलेजों पर नजर रखने के लिये कभी कोई प्रयास नही करता।

उल्लेखनीय है कि इन संस्थानों में अध्यापन कराने वाले वह लोग होते है जो इन्ही संस्थाओं से डिग्री हासिल करते है और बाद में इन्ही संस्थाओं में अध्यापन कराने लगते है लगभग 10 से 20 वर्षो से यह कम्प्यूटर कॉलेज कभी शुल्क के नाम पर 10 से 20 हजार रूपए तक वसूल करते रहे है लेकिन इस बार माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय विश्वविद्यालय भोपाल द्वारा जिले में लगभग 20 से अधिक सेंटर घोषित कर दिये गये है जिसके परिणामस्वरूप अब विद्यार्थी जो गिने,चुने सेंटरों में जाते थे वह विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार नये सेंटरों में जाने लगे उन्हें रोकने के लिये कम्प्यूटर कॉलेजों ने अपनी शुल्क को कम तो कर दिया है लेकिन भविष्य में इन छात्रों से पूर्व की तरह राशि वसूल की जा सकती.

प्रतिभाओ का हुआ सम्मान

सिवनी-पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी विमला वर्मा गठित न्यास का चौथा प्रतिभा स्मामन समारोह गत 1 जुलाई को गिरधर भवन में सम्पन हुआ।

इस दौरान 31 स्कूली विद्यार्थियों को 1 लाख 53 हजार की सम्मान निधि दी गई।

कार्यक्रम में कुमारी विमला वर्मा,सिवनी विधायक मुनमुन राय, पूर्व विधायक नरेश दिवाकर,पूर्व सांसद श्रीमती नीता पटेरिया ,जिला कांग्रेस अध्यछ पप्पूखुराना,आशुतोष वर्मा,नेहा सिंह ,आनंद पंजवानी,दिलीप बघेल,लल्लू बघेल,शैलेश सक्सेना,सहित नगर के समानित नागरिक गण व् बड़ी सख्या में महिला पूरुष शामिल हुए।

सफेद बालों को सिर्फ 5 दिन में काला करते हैं ये घरेलू नुस्खे

कई ऐसे घरेलू उपाय हैं, जो सफेद होते बालों की समस्‍या को दूर कर सकते हैं। आइये जानते हैं ऐसे ही कुछ हमारे घरेलू नुस्‍खों की पोटली से निकले कुछ बेहद असरदार उपाय।

1.सफेद बालों की समस्या

बालों का असमय सफेद होना एक बड़ी समस्‍या बन चुकी है। इसके लिए कई लोग कलर का इस्‍तेमाल करते हैं। हालांकि कलर बालों को जड़ से कमजोर बना सकता है। कई ऐसे घरेलू उपाय हैं, जो सफेद होते बालों की समस्‍या को दूर कर सकते हैं। आइये जानते हैं ऐसे ही कुछ हमारे घरेलू नुस्‍खों की पोटली से निकले कुछ बेहद असरदार उपाय।

2.आंवले का कमाल

छोटा सा दिखने वाला आंवला न केवल आपकी सेहत के लिए गुणकारी है बल्कि इससे नियमित उपयोग से सफेद होते बालों की समस्‍या से भी निजात मिलती हैं। आंवले को न सिर्फ डाइट में शामिल करें बल्कि मेंहदी में मिलाकर इसके घोल से बालों की कंडिशनिंग करते रहें। चाहे तो आंवले को बारीक काट लें और गर्म नारियल तेल में मिलाकर सिर पर लगाएं।

3.बड़े काम की छोटी सी मिर्च

काली मिर्च खाने का स्‍वाद तो बढ़ाती है, साथ ही इससे सफेद होते बाल भी काले होने लगते हैं। इसके लिए काली मिर्च के दानों को पानी में उबाल कर उस पानी को बाल धोने के बाद सिर में डालें। लंबे समय तक बालों में इस तरह करने से यह असर दिखाती है।

3.बड़े काम की छोटी सी मिर्च

काली मिर्च खाने का स्‍वाद तो बढ़ाती है, साथ ही इससे सफेद होते बाल भी काले होने लगते हैं। इसके लिए काली मिर्च के दानों को पानी में उबाल कर उस पानी को बाल धोने के बाद सिर में डालें। लंबे समय तक बालों में इस तरह करने से यह असर दिखाती है।

4.कॉफी और काली चाय, बालों को काला बनाये

अगर आप सफेद होते बालों से परेशान हैं तो ब्‍लैक टी और कॉफी का इस्‍तेमाल करें। सफेद हो चुके बालों को अगर आप ब्‍लैक टी या कॉफी के अर्क से धोएंगें तो आपके सफेद होते बाल दोबारा से काले होने लगेगें। ऐसा आप दो दिन में एक बार जरूर करें।

5.एलोवेरा में है गजब का जादू

बालों में एलोवेरा जेल लगाने से भी बालों का झडऩा और सफेद होना बंद हो जाता है। इसके लिए आप एलोवेरा जेल में नींबू का रस बना कर पेस्‍ट बना लें और इस पेस्‍ट को बालों में लगाएं।

6.दही से करें सफेदी पर वार

सफेद होते बालों का रंग प्राकृतिक रूप से बदलने के लिए दही का इस्‍तेमाल करें। इसके लिए हिना और दही को बराबर मात्रा में मिलाकर पेस्‍ट बना लें और इस पेस्‍ट को बालों में लगाइये। इस घरेलू उपचार को हफ्ते में एक बार लगाने से ही बाल काले होने लगते हैं।

7.प्‍याज करे बड़े-बड़े काज

प्याज आपके सफेद बालों को काला करने में मदद करता है। कुछ दिनों तक रोजाना नहाने से कुछ देर पहले अपने बालों में प्याज का पेस्ट लगायें। इससे आपके सफेद बाल काले होने शुरू हो ही जाएंगे, बालों में चमक आएगी और साथ ही बालों का गिरना भी रुक जाएगा।

8.भृंगराज और अश्वगंधा काम करें बड़ा चंगा

भृंगराज और अश्वगंधा की जड़ें बालों के लिए वरदान मानी जाती हैं। इनका पेस्‍ट बना कर नारियल तेल में मिलाकर बालों की जड़ों में एक घंटे के लिए लगाएं। फिर बालों को गुनगुने पानी से अच्‍छी तरह से धो लें। इससे बालों की कंडीशनिंग भी होगी और बाल काले भी होंगे।

9.दूध के अद्भुत लाभ

गाय के दूध के फायदों के बारे में कौन नहीं जानता, लेकिन क्‍या आपको यह भी पता है कि गाय का दूध सफेद बालों को भी काला बना सकता है। गाय का दूध बालों में लगाने से बाल कुदरती तौर पर काले होने लगते हैं। ऐसा हफ्ते में एक दिन करें और देखिये कैसे खिल जाते हैं आपके बाल।

10.कढ़ी पत्ता करे बड़े कमाल

सफेद हो रहे बालों के लिये कढ़ी पत्ता बहुत ही अच्‍छा होता है। नहाने से पहले कढ़ी पत्ते को नहाने के पानी में छोड़ दें और एक घंटे के बाद उस पानी से सिर धो लें। या फिर आंवले की तरह कढ़ी पत्ते को भी बारीक काटकर और गर्म नारियल तेल में मिलाकर सिर पर लगाएं। इससे भी लाभ होगा।

11.देसी घी से म‍ालिश्‍ा

बुजुर्गो को अकसर आपने सिर पर देसी घी से मालिश करते हुए देखा होगा। घी से म‍ालिश करने से त्‍वचा को पोषण मिलता है। प्रतिदिन शुद्ध घी से सिर की मालिश करके भी बालों के सफेद होने की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

 

यदि आपकी बच्चियां स्कूल में पढ़ती है तो ये वीडियो जरूर देखे। यह एक अच्छा सुरक्षात्मक कदम साबित हो सकता है

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साइंटिफिक तरीके से 3 स्टेप्स में कम करें वजन, शरीर को नहीं होगा नुकसान

वजन घटाने के तरह-तरह के नुस्खे आप रोज पढ़ते हैं। उनमें से कुछ नुस्खे आपने अपनाए भी होंगे और शायद असफल हुए होंगे। ऐसे में आपको लग सकता है कि वजन घटाना बहुत कठिन काम है। मगर आज जो टिप्स हम आपको बता रहे हैं उन्हें आजमा कर आप निराश नहीं होंगे क्योंकि ये सभी टिप्स साइंटिफिक हैं और दुनियाभर के न्यूट्रीशनिस्ट और वेलनेस एक्सपर्ट इन टिप्स पर अपनी मुहर लगा चुके हैं। तो आइये देखते हैं कि साइंटिफिक तरीके से आपका वजन घटाने के लिए आपको क्या करना होगा।

कैसे होगा वजन कम?

आपके मन में भी ये सवाल आ रहा होगा कि आखिर वजन कम करने के पीछे क्या साइंटिफिक बात हो सकती है। दरअसल हमारा शरीर भी विज्ञान के नियमों के अनुसार ही काम करता है। इन नियमों की हममें से ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं होती इसलिए हम अपने ही शरीर को नहीं समझ पाते हैं।
वजन घटाने के लिए आप अब तक जो भी नुस्खे ट्राई करते थे, उसका आपके शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है इसलिए वजन घटाने के दौरान आपको इन 3 बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

    • आपको कभी भी भूखे रहकर वजन नहीं घटाना है।
    • आपको धीरे-धीरे अपनी खुराक साइंटिफिक तरीके से कम करनी है।
    • इसी के साथ आपको अपना मेटाबॉलिज्म भी ठीक रखना है ताकि शरीर कमजोर न हो।



अगर आप इन 3 बातों का ध्यान रखेंगे, तो वजन घटाने के दौरान आपकी सेहत पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा। आइये अब आपको बताते हैं कि आपको वजन घटाने के लिए करना क्या होगा।

शुगर और स्टार्च का कम प्रयोग

हमारा वजन सबसे ज्यादा शुगर और कार्बोहाइड्रेट की वजह से बढ़ता है। इसलिए वजन घटाने की ट्रेनिंग के दौरान आपको इन चीजों का प्रयोग बहुत कम करना होगा। स्टार्च और शुगर वाले आहारों में चावल, आलू, मिठाई, कॉफी, चाय, ऑयली फूड्स, मैदे से बनी चीजें आदि शामिल हैं।

क्या है साइंटिफिक कारण- दरअसल जब आपका शरीर थोड़ा बहुत भूखा होता है और आपके दिमाग को भूख लगने के संकेत भेजता है, तब अक्सर आप उस समय अपनी भूख और अपने शरीर की जरूरत से ज्यादा चीजें खा लेते हैं। ऐसे में कुछ मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स एनर्जी में बदल जाते हैं और आपको अपना पेट भरा लगने लगता है और शरीर में एनर्जी आ जाती है। मगर जो कार्बोहाइड्रेट्स आपने अपने शरीर की जरूरत से ज्यादा खा लिया है, वो अतिरिक्त फैट के रूप में शरीर में जमा हो जाता है और वजन बढ़ने का कारण बनता है। इसलिए अपनी डाइट में लो कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें शामिल करें।


प्रोटीन युक्त आहार और सब्जियों का सेवन करें

अक्सर जब आप वजन घटाना चाहते हैं, तो बहुत सारी चीजें खाना-पीना बंद कर देते हैं जिससे आपके शरीर को सभी जरूरी तत्व और प्रोटीन नहीं मिल पाते हैं और आपका शरीर कमजोर हो जाता है। वजन घटाने के दौरान आपको कम कार्बोहाइड्रेट वाले आहार लेने चाहिए मगर ऐसे आहारों का चुनाव करें जिनमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा हो। प्रोटीन के लिए आप दोपहर के खाने में चिकन, मछली, अंडे और दालों का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा रात के खाने में आपको लो कार्बोहाइड्रेट वाली ढेर सारी रंगीन सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

लो-कार्बोहाइड्रेट वाली सब्जियां- फूल गोभी, पत्ता गोभी, पालक, टमाटर, केल, खीरा, शिमला मिर्च, हरी मिर्च आदि।

बदलें अपना कुकिंग ऑयल- आप जिस तेल से खाना बनाते हैं उसमें भी आपको बदलाव करना होगा। गुड फैट वाले ऑयल जैसे- ऑलिव ऑयल, कोकोनट ऑयल, बटर या एवोडैको ऑयल में बने खाने से आपको पूरा पोषण मिलेगा। फैट का नाम सुनकर डरें नहीं क्योंकि ये आपके शरीर के लिए जरूरी हैं। दरअसल आप एक ही समय में लो-कार्बोहाइड्रेट फूड्स और लो-फैट ऑयल का इस्तेमाल करेंगे तो आपका शरीर कमजोर हो जाएगा और शरीर में एनर्जी नहीं रहेगी। इसलिए इस दौरान आपको फैट वाले ऑयल में खाना पकाना चाहिए।

क्या है साइंटिफिक कारण- प्रोटीन हमारे शरीर के लिए जरूरी है क्योंकि ये शरीर में होने वाली कई तरह की क्रियाओं के लिए जरूरी है। इसके अलावा लो कार्बोहाइड्रेट वाली सब्जियों का सेवन शरीर में पर्याप्त एनर्जी के लिए जरूरी है। अगर आप हाई प्रोटीन चीजें खाते हैं, तो इससे आपका पेट देर तक भरा रहता है और आपका दिमाग बार-बार खाने के बारे में नहीं सोचता है। देर रात कुछ भी खाने से बचें।

सप्ताह में 3 बार थोड़ी एक्सरसाइज करें

अगर आप वजन घटाना चाहते हैं, तो इस तरह की डाइट से भी आपको फर्क दिखने लगेगा मगर अगर आप तेजी से वजन घटाना चाहते हैं, तो आपको खाने-पीने में बदलावों के साथ-साथ थोड़ी एक्सरसाइज करना भी जरूरी है। इसके लिए आपको ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। एक्सरसाइज के लिए एक सप्ताह में 3-4 दिन के लिए, 24 घंटे में से सिर्फ 30 मिनट निकालिए और आप देखेंगे कि आपका वजन तेजी से घटना शुरू हो गया है। इस दौरान आप थोड़ी वार्मअप एक्सरसाइज करें, वेट लिफ्टिंग करें, साइकिलिंग करें या धीमी गति में दौड़ें। आप चाहें तो जिम भी ज्वाइन कर सकते हैं।

क्या है साइंटिफिक कारण- दरअसल जब आप शारीरिक रूप से कोई मेहनत नहीं करते हैं, तो आपके शरीर का मेटाबॉलिज्म बहुत घट जाता है। दिन में थोड़ी बहुत एक्सरसाइज भी कर लेंगे, तो आपका मेटाबॉलिज्म ठीक रहेगा और शरीर में ब्लड फ्लो अच्छा रहेगा। इससे आप मेंटली भी अच्छा फील करेंगे।

इन बातों का भी जरूर रखें ध्यान

  • दिन में 3-4 बार से ज्यादा खाना न खाएं।
  • भूख से ज्यादा खाना न खाएं।
  • चाहें तो सप्ताह में एक दिन कुछ हाई कार्बोहाइड्रेट फूड्स जैसे ओट्स, राइस, आलू और फल भी शामिल कर सकते हैं।
  • कभी भी ब्रेकफास्ट करना न भूलें। ब्रेकफास्ट आपके दिन के खाने से भी ज्यादा जरूरी है।
  • ब्रेकफास्ट में हाई प्रोटीन चीजों को शामिल करें।
  • फ्रूट जूस और शुगर वाले ड्रिंक्स का सेवन बंद कर दें।
  • खाने से आधा घंटे पहले पानी पिएं।
  • अगर बहुत जरूरी लगे तो दिन में 2 से ज्यादा चाय और कॉफी न पिएं।
  • तले और पके आहारों से ज्यादा कच्चे आहारों जैसे फल, सब्जियों, ड्राई फ्रूट्स आदि को शामिल करें।
  • 2 दिन में कम से कम एक बार अपना वजन जरूर चेक करें।
  • रात में सोने से 2 घंटा पहले खाना खा लें।
  • देर रात तक न जगें और 6-7 घंटे से ज्यादा की नींद न लें।



ध्यान आकर्षित करने वाली एक ध्वनि

छत्तीस वर्षीय फिनियन मकैन ने दो प्रकार के जीवन चारित्रों को एक साथ संभाल कर रखा हुआ है, जैसे हार्वर्ड में एक सामवेद के विद्वान के रूप में और दूसरा एक अच्छे संगीतकार के रूप में

 उनकी प्रथम सीडी के प्रदर्शन को पुश किंग्स कहा जाता है और उनका बैंड सभी बीटल्स प्रभावित बैंडों में से सबसे अच्छे के रूप में उभरकर बाहर आए। अब तक उनके द्वारा तीन एलबम और १० एकल जारी की गई हैं। उनकी आध्यात्मिक रूची उन्हें लगातार भारत के वैदिक विद्वानों के संपर्क में लाई। वह बताते हैं कि- “एक माप में आवाज के उतार-चढ़ाव को, जिस समय मंत्रों का जाप किया जाता है, तो उस समय उसकी तुलना संगीत के सुरों के साथ कि जा सकती है। “रंजेनी ए सिंह, हाल ही में पंजाब, केरल में आयोजित वैदिक अग्नि अनुष्ठान के मौके पर  अथिराथरम की एक उप-वृत्ति पर चर्चा करते हैं।

क्या है, जिसनें वेदों में आपकी रुचि बनाई है?

मेरा वेदों के साथ अनुबंध सबसे ज्यादा संगीत के माध्यम से हुआ है। चार साल की उम्र से, मुझमें रॉक ‘एन’ रोल करने का जुनून सवार था। मेरा भाई और मैं हर बीटल्स गीत गाते थे। हार्वर्ड में, मुझें संस्कृत विभाग में वेदों और भारतीय अध्ययन के लिए परिचित किया गया था। वैदिक जप शैली ने मुझे मंत्र-मुग्ध कर दिया। यह वह है, जब मुझे पता चला कि- “भारतीय शास्त्रीय संगीत विशेष रूप से कर्नाटक के बारे में, जिसकी जड़े साम वेद में हैं, अतः यह रिंग वैदिक भजनों के अनुकूल है, जिन्हें संगीत जप करने के लिए अत्यधिक स्पष्ट रूप में स्थापित किया गया हैं।” “मंत्रों का जाप करते हुए, एक माप में आवाज में उतार-चढ़ाव करना संगीत की संकेत पद्धति के समान है।“



हालांकि, संगीत की वृद्धि में, यह वेदों के निर्बाध रहने की एक परंपरा है, जिसनें मुझे अधिक जानने के लिए प्रेरित किया। हार्वर्ड में, मैनें महसूस किया कि- वेदों को पुस्तकों के रूप में जानने का हमारा तरीका वास्तव में प्राचीन मौखिक प्रदर्शन परंपराओं को प्रतिबिंबित नहीं करता है। उदाहरण के लिए हम और बहुत सारे लोग यूनानी कवि होमर को एक संगीतकर के रूप में पसंद करते हैं, उन्होनें साधारण संगीत की एक माप में लम्बी कहानी गायी। और जो कहानी उनके दिमाग में थी, वे तत्कालिक उन्हीं की तरह आगे चली गई। जब मैं भारत आया, मैनें महसूस किया कि- वहाँ अत्यधिक प्रचीन ग्रंथ हैं, जिन्हें आपने ऐतिहासिक दुर्घटनाओं के बावजूद भी यूरोप की अपेक्षा में, सुरक्षित रखा है।

तो आप कहेंगे कि- “मौखिक परंपराओं के कारण, वेदों का अस्तित्व बना हुआ है?” 

समय के साथ, उच्चारण और धुन परिवर्तित हो सकती है, लेकिन वहाँ एक सार है, जो हमेशा अपरिवर्तित बना रहता है। जिसमें केरल के नंबूदिरीस एक महत्वपूर्व भूमिका निभाते है, क्योंकि इनका संबंध प्रचीन गायकों के गीतों से होता है, जो ‘मौखिक प्रदर्शन परंपरा’ के माध्यम से उन्हें एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के बीच, अभिभावकों के माध्यम से बच्चों में या अध्यापकों के माध्यम से शिष्यों में जीवित बनाए रखते हैं। इसी वजह से,वेद एक निश्चित मौखिक पाठ के रूप में और एक सिद्धांत के रूप में प्रतिष्ठापित हो गए। जब मैनें नंबूदिरी परंपरा की प्राचीन मौखिक परंपरा के निरंतर प्रसारण के बारे में सुना,तो यह वास्तव में बहुत अच्छी और खोज के लिए असंभव दिखाए देती थी।

इसके अलावा, उन्होनें पिछलें कई दिनों में, यज्ञों में जैसे- सोमयज्ञों और अथिराथरम में बिना रुके लगातार जप किया, यह मानव की सहनशीलता का एक परीक्षण है, जिसमें वे स्मृति से और अपनी उच्च पकड़ के साथ मंत्रों का जप करते हैं, उन्हें ये सब गाने के लिए , जबरदस्त फेफड़ों की शक्ति की आवश्यकता होती है। उन्होनें बहुत शानदार तरीके से, विस्तृत परंपराओं का प्रसारण किया, जिसे मैं दैहिक पाठ पुकारना पसंद करता हूँ- जिसमें “पण्डित किसी भी बिन्दु को निर्दिष्ट करने के लिए मुद्राओं का उपयोग करते हैं,ना की लिखित पाठ का।“ वह अपने शरीर का उपयोग पाठ को सांकेतिक शब्दों में बताने के किए करते हैं। परंपराओं के अस्तित्व के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है, कि- जब छात्रों को वेद पढ़ाया जाता है, तो शिक्षकों को उस समय उनकें मस्तिष्क को स्थिर रखना चाहिए और उन्हें एक विशिष्ट व्यवहार में रूपांतरित करना चाहिये। यदि उन्हें इस तरह से सिखाया जाता है, तो भजनों को उनके शरीर में सांकेतिक शब्दों के माध्यम से मिलाया जा सकता है।

क्या आप ऐसा कहना पसंद करेंगें कि- ध्वनि जीवंत भर निर्मित होती है? 

“ध्वनि अनन्त है।” मैं सोचता हूँ कि- “जब तक इस धरती पर मनुष्य रहें, तब तक वें बातें करते रहें और गाना गाते रहें। उस संबंध में, ध्वनि अनन्त हो सकती है। मैं इसे एक बड़े लौकिक दृष्टिकोण से नहीं देखता हूँ।“

क्या मंत्र ध्वनि का विज्ञान है? 

पारंपरिक अर्थों में, ऐतिहासिक भाषाई व्युत्पत्ति के लिए मंत्र, मन है, जिसका अर्थ आपके विचार है और जब आप त्रा को प्रत्यय के रूप में जोड़ते हैं, तो यह चिंतन के लिए एक साधन बन जाता है। मंत्र अपने दिमाग का उपयोग करने के लिए एक साधन है। हांलाकि यह एक व्यापक परिभाषा है, लेकिन कम से कम, यह भारत में मंत्रोच्चार के लंबे इतिहास के स्पष्टीकरण में हमारी सहायता करती है, जो बहुत ही विविध और विचित्र है,लेकिन वहाँ इसमें हमेशा एक निरंतरता है। आपके पास एक व्यक्ति है, जो ध्वनि का एक दृश्य उत्पन्न करता है और मंत्र के साथ-साथ श्रोता पर भी एक मानसिक प्रभाव उत्पन्न करता है। मंत्र का विचार किसी एक की, याचना के विचार के लिए एक साधन है।

भारत-विद फ्रिट्स स्टाल ने कहा है कि- मंत्रों का कोई अर्थ नहीं है। क्या आप इससे सहमत हैं? 

स्टाल ने काफी हद तक सामवेद और विशेष रूप से अनिरूकता गण या विशेष रूप से ऊऊऊ और आआआ की ध्वनि, अनाभिव्यक्त जप को आधार मानकर अपने तर्क दियें हैं। उस दृष्टिकोण से, आपको स्वीकार करना चाहिये कि- “वे वो शब्द नहीं हैं, जिनका कोई अर्थ निकलता हो, भाषा  अभिव्यक्ति का एक तरीका है। हम सभी जानते हैं कि- “जब हम ‘ओम नमः शिवाय’ कहते हैं, तो इसका एक अर्थ होता है।“ वास्तविकता किसी भी एक सिद्धांत या एक लेखांकन से अधिक जटिल है। आप मंत्र का वर्णन किसी भी एक संकीर्ण शब्द में नहीं कर सकते हैं। और यह हमेशा सच होता है। हमें यह हमेशा याद रखना चाहिये कि- “वह मुख्य रूप से वैदिक मंत्रों के इन दृष्टिकोण के संदर्भ में बहस कर रहे थे।“ और उस संदर्भ में, वे ऐसा सामान्य रूप से पहले संस्कृत विद्वानों द्वारा दिए गए तर्क जैसे कि- “मंत्रों का प्रयोग लोगों के बीच में भाषा की तरह, एक सामान्य संप्रेषण के लिए नहीं किया जा सकता है“ को याद दिलाने के लिए कर रहे हैं। एक संकीर्ण दृष्टिकोण में, वे किसी भी प्रकार का अर्थ नहीं प्रदान करते हैं। वहाँ तर्क करने के लिए कुछ हैं। मैं स्टाल से पूरी तरह से सहमत नहीं हो सकता हूँ, लेकिन मैं इस तर्क की तरफ एक सहानुभूति रखता हूँ, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण अवलोकन है और जो मौखिक कला की जटिलता पर प्रकाश डालती है।

क्या आपके वैदिक अनुसंधान ने आपके संगीत को प्रभावित किया है? 

ठीक है- कभी-भी, कभी नहीं कहते हैं! वेदों के अध्ययन ने मुझे अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया है, विशेष रूप से जब मैं गीत और गीत के बोल लिखता हूँ। इन प्राचीन परंपराओं के अध्ययन ने भी मुझे ब्लू आईज़ गाने को सीखने के लिए अत्यधिक प्रेरित किया और जिसे मैनें ‘रॉक एन रोल’ की विरासत में शामिल किया और इसकी उत्पत्ति के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त की। मैं भविष्य में जल्द ही साम वेद का एक रीमिक्स करने की योजना करता हूँ।यह आध्यात्मिकता और भारतीय दर्शन को मिश्रित करने का एक अच्छा तरीका है, जो पश्चिमी संगीत की मुख्यधारा में भरतीय दर्शन को लाती है।


फंगल इंफेक्शन, उल्टी जैसी मॉनसून की बीमारियों में फायदेमंद है ये हर्ब, ऐसे करें प्रयोग

बरिश का मौसम अपने साथ कई समस्याएं ले आता है। इस मौसम में फंगल इंफेक्शन, उल्टी-खांसी, जुकाम-बुखार और कब्ज की समस्या आम हो जाती है।

अक्सर इन समस्याओं के लिए लोग डॉक्टर के पास नहीं जाना चाहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ये सभी छोटी बीमारियां हैं। कुछ आसान घरेलू नुस्खों से आप घर पर ही इन छोटी-छोटी बीमारियो और परेशानियों से आसानी से राहत पा सकते हैं। हरड़ एक ऐसा हर्ब है, जो आपकी इन सभी समस्याओं को आसानी से ठीक कर देता है। आइए जानते हैं कि हरड़ किस तरह आपके लिए है फायदेमंद।

फंगल इंफेक्शन में हरड़ का प्रयोग

बारिश के मौसम में स्किन रैशेज और त्वचा पर फंगल इंफेक्शन की समस्या सामान्य है। फंगल एलर्जी या संक्रमण होने पर हरड़ के फल और हल्दी से तैयार लेप प्रभावित भाग पर दिन में दो बार लगाएं। त्वचा के पूरी तरह सामान्य होने तक इस लेप का इस्तेमाल जारी रखें। अगर आपको धूप में या किसी चीज के खाने के बाद एलर्जी हो गई है तो, शरीर के उस भाग की धुलाई भी हरड़ के काढ़े से की जा सकती है।

स्किन एलर्जी के लिए हरड़

हरड़ का काढ़ा बनाकर पीने से यह त्वचा संबंधी एलर्जी आदि में लाभ देती है। इसके सेवन के लिए हरड़ के फल को पानी में उबालकर इसका काढ़ा बनाएं और दिन में दो बार इसाका नियमित रूप से सेवन करें। फंगल एलर्जी होने पर उपचार के लिए हरड़ के फल और हल्दी को पीस कर बनाए लेप को प्रभावित अंग पर दिन में दो बार लगाएं, एलर्जी जल्द ठीक हो जाएगी। इसके इस्तेमाल से बाल काले, चमकीले बनते हैं। उपयोग के लिए हरड़ के फल को नारियल तेल में उबालकर लेप बनाएं और इसे अपने बालों पर लगाएं।

उल्टी की समस्या में हरड़

मॉनसून में अक्सर लोगों को फूड प्वायजनिंग जुकाम के कारण उल्टी की समस्या हो जाती है। छोटी हरड़ उल्टी की समस्या में भी फायेदमंद है। उल्टी होने पर हरड़ और शहद का सेवन करने से उल्टियां रुक जाती हैं।

कब्ज में हरड़ का ऐसे करें प्रयोग

कब्ज की समस्या से परेशान लोगों के लिए हरड़ का प्रयोग वरदान की तरह होता है। जर्नल केमिको बायोलॉजिकल इंटरेक्शन में प्रकाशित एक अध्‍ययन के मुताबिक, हरड़ में गल्लिक एसिड नाम का तत्‍व मौजूद होता है जो एचडीएल और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है और रक्त में प्लाज्मा इंसुलिन बढ़ जाता है। कब्ज़ दूर करने के लिए हरड़ के पल्प को चुटकीभर नमक के साथ खाएं या फिर 1/2 ग्राम लौंग अथवा दालचीनी के साथ लें।

बॉडी को डिटॉक्स करता है

माना जाता है कि हरड़ अधिकांश रोगों का हरण करने की क्षमता वाली होती है, इसलिए इसे हरीतकी कहा जाता है। हरड़ पेट को साफ करने और पाचन तंत्र को सुधार कर इसे मजबूत करने के लिए जानी जाती है। आयुर्वेद के अनुसार यह जड़ी-बूटी खाए गए पोषक तत्‍वों का अच्‍छे से समावेश कर शरीर को स्‍वस्‍थ बनाती है। इसके अलावा यह जड़ी बूटी शरीर को डिटॉक्‍स कर (विशेष रूप से पेट को), वजन कम करने में भी मददगार साबित होती है।