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CM मोहन यादव ने झाबुआ, ग्वालियर, धार में हुई घटनाओं पर कलेक्टर को दिए निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए, ग्वालियरधार और झाबुआ जिलों में घटित विभिन्न घटनाओं पर तत्काल संज्ञान लिया और संबंधित जिलों के कलेक्टर्स से दूरभाष पर चर्चा कर स्थिति की जानकारी प्राप्त की।

साथ ही, आम नागरिकों की राहत के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए। इस लेख में हम विस्तार से बताएंगे कि मुख्यमंत्री ने किन घटनाओं पर ध्यान दिया और किस प्रकार से उन्होंने राज्य के नागरिकों की सुरक्षा और राहत के लिए त्वरित कदम उठाए।

झाबुआ: दो बच्चियों के बहने पर सहायता निर्देश

झाबुआ जिले में दो मासूम बच्चियों के दुर्भाग्यपूर्ण रूप से बह जाने की घटना पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कलेक्टर को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाए।

इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इस पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने और अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने का निर्देश दिया गया।

ग्वालियर: ट्रॉमा सेंटर की घटना पर त्वरित कार्रवाई

ग्वालियर के ट्रॉमा सेंटर में घटी घटना को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से चिंताजनक स्थिति का संज्ञान लिया। उन्होंने कलेक्टर से विस्तृत जानकारी प्राप्त की और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्टाफ को सतर्क और जागरूक रहने की हिदायत दी।

ट्रॉमा सेंटर जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर हर एक स्टॉफ सदस्य को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभाने का निर्देश दिया गया ताकि किसी भी अप्रिय घटना की संभावना को रोका जा सके।

धार: जनजातीय बालक आश्रम में जलभराव की समस्या

धार जिले के डही विकासखंड के ग्राम बड़वानिया में स्थित जनजातीय बालक आश्रम परिसर में वर्षा के कारण जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई, जिससे विद्यार्थियों को कठिनाई का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर से चर्चा कर इस घटना की जानकारी प्राप्त की।

प्रशासन ने समय रहते सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था, जिसकी जानकारी कलेक्टर ने मुख्यमंत्री को दी। मुख्यमंत्री ने भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए सभी आवश्यक सावधानियों को अपनाने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि इस घटना में जिन सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने बच्चों की सुरक्षा में सक्रिय भागीदारी निभाई, उन्हें राज्य सरकार सम्मानित करेगी। इस तरह की घटनाओं में नागरिकों की सक्रियता और सजगता से बड़ा नुकसान टाला जा सकता है।

मुख्यमंत्री का राजधर्म और प्रशासनिक कुशलता

यह उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने पिता के निधन के बाद भी राजधर्म का पालन करते हुए प्रदेश की स्थिति पर अपनी गहन नजर बनाए रखी। उनके पिता का निधन 3 सितंबर को हुआ था, और 4 सितंबर को अंतिम संस्कार के बाद भी उन्होंने विभिन्न जिलों में हो रही घटनाओं पर सतर्कता बनाए रखते हुए त्वरित कार्रवाई की।

उज्जैन स्थित अपने निवास से दूरभाष के माध्यम से मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों के कलेक्टरों से संपर्क किया और आम नागरिकों के हित में जरूरी निर्देश जारी किए। यह दिखाता है कि मुख्यमंत्री अपने व्यक्तिगत दुख के समय भी प्रदेश के नागरिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे और अपनी प्रशासनिक कुशलता का परिचय दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर, झाबुआ और धार जिलों की घटनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया दी, जो उनकी संवेदनशीलता और प्रशासनिक क्षमता को दर्शाती है। उनके निर्देशों के अनुसार प्रशासन ने तत्काल कदम उठाए और प्रभावित नागरिकों को राहत प्रदान की। इस प्रकार की घटनाओं से निपटने में मुख्यमंत्री की त्वरित प्रतिक्रिया से स्पष्ट होता है कि वे नागरिकों की सुरक्षा और राहत के लिए हमेशा तैयार रहते हैं

MP: नीमच के शिक्षक निर्मल राठौर ने सरकारी स्कूल को बनाया चॉकलेस

Neemuch News: नीमच जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय ग्राम थड़ोली के शिक्षक श्री निर्मल राठौर ने स्कूल में अनेक नवाचार कर जिले में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में एक अनूठी पहचान बनाई है। यह एक ऐसा स्कूल है जो कि वर्तमान में चाकलेस हो गया है।

डिजिटल शिक्षा का भविष्य: नवाचार और शिक्षक श्री निर्मल राठौर की उपलब्धि

नीमच जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम थड़ोली का शासकीय माध्यमिक विद्यालय आज डिजिटल शिक्षा का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन चुका है। इसके पीछे प्रमुख भूमिका निभाई है विद्यालय के शिक्षक श्री निर्मल राठौर ने, जिन्होंने अनेक नवाचारों के माध्यम से न केवल विद्यालय को चाकलेस (चॉक मुक्त) बना दिया, बल्कि इसे पूरे प्रदेश में एक मिसाल के रूप में स्थापित किया है।

चाकलेस कक्षाओं का संचालन: स्मार्ट बोर्ड और ICT का उपयोग

आज के समय में जब शिक्षा का डिजिटलीकरण हो रहा है, श्री राठौर ने इसे अपने विद्यालय में सफलतापूर्वक लागू किया है। सभी कक्षाएँ स्मार्ट बोर्ड की सहायता से संचालित होती हैं, जहां शिक्षकों द्वारा यू-ट्यूबआईसीटी और अन्य डिजिटल टूल्स का भरपूर उपयोग किया जाता है। यह केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि बच्चों के लिए एक नई और आधुनिक शिक्षा पद्धति का हिस्सा है, जो उन्हें भविष्य के लिए तैयार कर रही है।

विद्यालय की गतिविधियों का डिजिटल प्रसारण

श्री राठौर की अनूठी सोच का परिणाम यह है कि विद्यालय में होने वाली सभी शैक्षिक गतिविधियाँ और नवाचारों को रिकॉर्ड कर यू-ट्यूब पर साझा किया जाता है। इससे अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा की प्रगति और विद्यालय के माहौल के बारे में सूचित किया जाता है। इसके अलावा, विद्यालय में किए गए प्रयासों को राज्य और जिला स्तर पर भी सराहा गया है।

विद्यालय का सौंदर्य और भयमुक्त वातावरण

विद्यालय के वातावरण को और भी अधिक आकर्षक और प्रेरणादायक बनाने के लिए इसे बेहतर पेंट से रंगा गया है और साथ ही एक सुंदर गार्डन भी बनाया गया है। इस गार्डन का उपयोग बच्चों को सामान्य ज्ञान सिखाने के लिए किया जाता है, जहां पौधों पर संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों और अधिकारियों के नाम लिखे गए हैं। बच्चे इन नामों को रोज पढ़ते हैं और स्वतः ही याद कर लेते हैं, जो उनकी स्मरण शक्ति और ज्ञान को बढ़ाता है।

उत्कृष्ट पुस्तकालय और स्कूल बैंड: नवाचार का एक और उदाहरण

शाला के नवाचारों में एक और महत्वपूर्ण योगदान है यहाँ का पुस्तकालय, जिसकी प्रशंसा न केवल जिले के अधिकारियों ने की, बल्कि भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इसकी सराहना की है। इसके अलावा, विद्यालय का अपना स्कूल बैंड है, जिसे श्री राठौर ने स्वयं प्रशिक्षित किया और अब बच्चे इसे सफलतापूर्वक संचालित कर रहे हैं। यह एक ऐसा प्रयास है जो बच्चों के संगीत कौशल को बढ़ाने के साथ-साथ उनमें नेतृत्व क्षमता का भी विकास कर रहा है।

डिजिटल आई-कार्ड और होमवर्क डायरी की व्यवस्था

विद्यालय में बच्चों के लिए डिजिटल आई-कार्ड की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जो उनके अभिभावकों के संपर्क में रहने का एक और डिजिटल कदम है। इसके साथ ही विद्यालय में होमवर्क डायरी का पैटर्न भी जन-सहयोग से शुरू किया गया है, जिससे बच्चों को अपने होमवर्क को व्यवस्थित करने में मदद मिलती है।

हाउस कांसेप्ट और ड्रेस कोड: अनुशासन और सौंदर्य का संगम

श्री राठौर ने विद्यालय में हाउस कांसेप्ट भी लागू किया है, जिसके तहत बच्चों को हाउस ड्रेस और हाउस एक्टिविटी में शामिल किया जाता है। यह न केवल बच्चों में अनुशासन को प्रोत्साहित करता है, बल्कि उनमें प्रतिस्पर्धात्मक भावना और टीम वर्क का विकास भी करता है। साथ ही विद्यालय की ड्रेस कोड भी बहुत आकर्षक और सुंदर है, जो विद्यालय की पहचान को और भी विशिष्ट बनाता है।

शिक्षक श्री निर्मल राठौर का योगदान और सम्मान

शिक्षक श्री निर्मल राठौर के इन अद्वितीय प्रयासों और नवाचारों को राज्य सरकार द्वारा भी मान्यता मिली है। शिक्षण सत्र 2021 में उन्हें उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्यपाल अवार्ड से सम्मानित किया गया। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों का परिणाम है, बल्कि यह शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा देने का प्रयास भी है।

शिक्षा के क्षेत्र में थड़ोली की शाला: अन्य विद्यालयों के लिए प्रेरणा

थड़ोली की शाला द्वारा किए गए नवाचार और श्री राठौर के नेतृत्व में विद्यालय की अद्वितीय प्रगति ने संकुल और विकासखंड के कई अन्य विद्यालयों को प्रेरित किया है। कई स्कूलों ने थड़ोली विद्यालय के नवाचारों को अपनाया है और अपने विद्यालयों में भी डिजिटल शिक्षा और चाकलेस कक्षाओं का संचालन शुरू किया है।

सिवनी में बजरंग दल ने पकड़ा 16 टन गौमांस, हैदराबाद जा रहा था ट्रक

Seoni News, मध्यप्रदेश – सिवनी जिले में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 टन गौमांस से भरे ट्रक को पकड़ा। यह घटना आज गुरुवार सुबह लगभग 7 बजे की है, जब बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कोतवाली पुलिस के साथ छिंदवाड़ा रोड बाइपास पर संदिग्ध ट्रक को रोका और उसकी जांच की।

सूत्रों के अनुसार, यह ट्रक पश्चिम बंगाल से हैदराबाद की ओर जा रहा था, जिसमें अवैध रूप से गौमांस ले जाया जा रहा था। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इस पर नजर रखी हुई थी और सही समय पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं और सिवनी पुलिस ट्रक को पकड़ने में सफल रहे। कार्यकर्ताओं का दावा है कि उन्हें इस संदिग्ध गतिविधि की सूचना पहले से मिली थी, जिसके बाद वे ट्रक पर नजर बनाए हुए थे।

ट्रक की जांच करने पर पाया गया कि उसमें करीब 16 टन गौमांस लदा हुआ था। इसके बाद स्थानीय पुलिस को सूचित किया गया और ट्रक को कब्जे में ले लिया गया। पुलिस ने ट्रक चालक और उसके सहायक को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस मामले की गहन जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि बजरंग दल ने इस कार्रवाई को गौ-रक्षा के तहत महत्वपूर्ण कदम बताया है। संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि गौमांस की तस्करी का मामला बेहद गंभीर है और इसे रोकने के लिए समाज को जागरूक होना चाहिए।

पुलिस द्वारा इस घटना की जांच जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह तस्करी का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।

सिवनी: पेंच टाइगर रिजर्व विस्थापन परियोजना, आदर्श ग्राम बनेगा नवीन कर्माझिरी ग्राम

Seoni News: पेंच टाइगर रिजर्व (Pench Tiger Reserve) अंतर्गत आने वाले कर्माझरी (Karmajhiri) वन ग्राम के विस्थापन परियोजना को लेकर कलेक्टर संस्कृति जैन (Seoni Collector Sanskriti Jain) ने वन विभाग के अधिकारियों के साथ विस्थापित होने वाले परिवारों से संवाद किया।

इसके पूर्व कलेक्टर जैन ने नवीन कर्माझरी ग्राम के लिए ग्राम जोगीवाड़ा के समीप प्रस्तावित भूमि का अवलोकन सम्बंधित विभागीय अधिकारियों के साथ किया।

कलेक्टर सुश्री संस्कृति जैन एवं फील्ड डारेक्टर श्री रजनीश सिंह ने उपस्थित ग्रामीणों को सम्पूर्ण विस्थापन परियोजना की विस्तृत जानकारी दी।

कलेक्टर जैन ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि नवीन कर्माझरी ग्राम को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जायेगा। ग्राम में बसने वाले ग्रामीणों की सुविधा के लिए पक्की सड़कें, बिजली,पानी, स्वास्थ्य केंद्र,आंगनवाड़ी केंद्र, स्कूल जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जायेगी।

इसके अतिरिक्त बेहतर कृषि गतिविधियों के लिए स्थानीय स्तर में उपलब्ध तालाब के माध्यम से सिंचाई परियोजना का कार्य जल संसाधन विभाग द्वारा किया जायेगा।

पात्रता समिति द्वारा होगा परिवार इकाई का निर्धारण

प्रस्तावित विस्थापन परियोजना में ग्राम में निवासरत 302 व्यक्ति को समान लाभ सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर सुश्री जैन द्वारा डिप्टी कलेक्टर श्रीमती पूर्वी तिवारी की अध्यक्षता में पात्रता समिति गठित की गई हैं।

समिति में वन, राजस्व, पंचायत, जनजाति कार्य विभाग के अतिरिक्त स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल किये गये हैं। समिति ग्राम के निवासियों का 18 वर्ष से अधिक आयु के आधार पर परिवार इकाई का निर्धारण करेंगे।

विस्थापित परिवारों के पास भूमि-आवास अथवा आर्थिक लाभ का रहेगा विकल्प

प्रस्तावित विस्थापन परियोजना में विस्थापित परिवारों को उनकी सहमति के आधार पर भूमि अथवा आर्थिक लाभ लेने का विकल्प रहेगा। परिवार इकाई द्वारा भूमि का विकल्प चयन करने पर कुल इकाई के अनुपात में पंचायत एवं सिंचाई विभाग द्वारा विकसित कृषि भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। वही प्रति परिवार इकाई के लिए कम से कम 3.75 लाख रुपये भवन निर्माण के दिये जायेंगे।

जिसे रहवासी क्षेत्र में बिजली, पानी, सड़क, स्कूल, आंगनवाडी, स्वास्थ्य केंद्र जैसी मूलभूत अधोसंरचना निर्माण के उपरांत शेष राशि के अनुपात में बढ़ाया जा सकेगा। इसी तरह जो परिवार इकाई आर्थिक लाभ का विकल्प चुनेगा उन्हें 15-15 लाख रुपये की राशि दी जायेगी।

सिवनी कलेक्टर संस्कृति जैन ने अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश

ग्रामीणों चर्चा उपरांत कलेक्टर सुश्री संस्कृति जैन ने पंचायत, जल संसाधन विभाग, विद्युत विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को प्रस्तावित नवीन कर्माझिरी ग्राम को सर्व सुविधायुक्त आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने विस्थापित परिवारों के लिए सर्व सुविधायुक्त रहवास के साथ-साथ उन्नत कृषि व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सभी व्यवस्थाओं की उपलब्धता प्रस्तावित प्लान में शामिल करने के निर्देश दिए।

सिवनी: राज्यपाल पुरस्कार के लिए नामांकित हुए शिक्षक संजय रजक

Seoni News: हमारे जीवन में शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। शिक्षक न केवल हमें पढ़ाते हैं, बल्कि हमें जीवन के सही मार्ग पर चलना भी सिखाते हैं। सही और गलत का भेद सिखाते हैं। एक जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में हमारा मार्गदर्शन करते हैं।

एक अच्छा शिक्षक अपने छात्रों में न केवल ज्ञान का बीज बोता है, बल्कि उन्हें जीवन के हर पहलू में सफल बनने के लिए तैयार करता है। एक बेहतर शिक्षक न केवल अपने छात्रों बल्की पूरी समाज के लिए आदर्श होते हैं। ऐसा ही उदाहरण सिवनी जिले के दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र घंसौर विकासखण्ड के ग्राम भिरा के शासकीय प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक संजय रजक द्वारा प्रस्तुत किया गया है।

उन्होंने अपने शिक्षक होने की भूमिका का बेहतर निर्वहन करने के साथ ही बच्चों को शिक्षित कर एक बेहतर नागरिक बनने के प्रयासों एवं नवाचार के लिए शिक्षक संजय रजक को राज्यपाल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है।

शिक्षक श्री संजय रजक को यह पुरूस्कार उनके शैक्षणिक प्रदर्शन, तथा नवाचारों, क्रियात्मक अनुसंधान एवं उनके परिणाम, शासन के विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रियता, शिक्षण-प्रशिक्षण में सहभागिता, छात्रों का श्रेष्ठ प्रदर्शन प्रगति शिक्षक के लिखे गए लेख- शिक्षा के क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य करने पर यह पुरस्कार शिक्षकों को 11 आयामों पर आधारित गतिविधियों के आधार पर दिया जाता जा रहा है।

जिसमें विगत पांच वर्षों की बोर्ड परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परिणाम, शाला में शत-प्रतिशत नामांकन के लिए किए गए प्रयास, शाला एवं कक्षाओं का व्यवस्थित संचालन राष्ट्रीय एकता आलेख या पुस्तक, शिक्षक के किए गए कार्य के लिए प्राप्त पुरस्कार, छात्रों के संस्कार एवं कर्तव्य बोध के लिए किए गए कार्य शामिल हैं।

सिवनी के बरघाट में रिटायर्ड फौजी की 10 एकड़ जमीन के साथ फर्जीवाडा

Seoni Barghat News: बरघाट जनपद के ग्राम धोबी सर्रा में हाल ही में भूदान में मिली जमीन की बिक्री का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। यह मामला तब सामने आया जब ग्रामीणों और सरपंच ने राजस्व विभाग पर गंभीर आरोप लगाए।

रिटायर्ड फौजी ए. के. क्रिश्चियन को कई दशक पहले भूदान के तहत दस एकड़ जमीन मिली थी। यह जमीन अब बंजर अवस्था में है, लेकिन हाल ही में इसका विक्रय किया गया है। सरपंच और ग्रामीणों का आरोप है कि फर्जी वारिस बनाकर इस जमीन की बिक्री की गई है, जबकि रिटायर्ड फौजी की दो संतानें ही थीं, जो अब लापता हैं।

फर्जी वारिस बनकर बेची गई जमीन

यह मामला इसलिए और भी गंभीर हो गया है क्योंकि फर्जी वारिसों के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री करवाई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि रिटायर्ड फौजी की मृत्यु के बाद उसके वास्तविक वारिसों का कोई अता-पता नहीं है, फिर भी राजस्व रिकॉर्ड में अन्य व्यक्तियों को वारिस के रूप में दर्ज कर दिया गया। ऐसे में यह सवाल उठता है कि यह फर्जी वारिस कहां से आ गए और किसकी मिलीभगत से यह सारा खेल हुआ?

दस एकड़ बंजर जमीन का है मामला

यह मामला दस एकड़ बंजर जमीन का है, जिसे भूदान के तहत रिटायर्ड फौजी को दिया गया था। फौजी ने इस जमीन का कभी उपयोग नहीं किया और यह जमीन वर्षों से बंजर स्थिति में पड़ी थी। इस जमीन पर महुआ और अन्य पेड़ों के साथ-साथ धान की खरीदी भी होती रही है। ग्रामीणों के अनुसार, इस जमीन के चारों ओर सरकारी रकबे भी मौजूद हैं, जो राजस्व रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। ऐसे में यह मामला और भी संदिग्ध हो जाता है।

सरपंच और ग्रामीणों की मांग

ग्राम धोबी सर्रा के सरपंच और ग्रामीणों ने इस मामले की गहन जांच की मांग की है। उन्होंने राजस्व विभाग से जमीन की बिक्री को निरस्त करने और फर्जी वारिसों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। इसके अलावा, इस मामले में न्यायालय में प्रकरण दर्ज करने की भी योजना बनाई जा रही है ताकि दोषियों को सजा मिल सके और जमीन की बिक्री को अवैध घोषित किया जा सके।

क्या भूमि बिक्री हेतु कलेक्टर से ली गई अनुमति?

सरकार के नियमों के अनुसार, भूदान में मिली या सरकार द्वारा आवंटित जमीन की बिक्री के लिए कलेक्टर की अनुमति लेना अनिवार्य है। लेकिन, इस मामले में यह साफ नहीं है कि क्या कलेक्टर से कोई अनुमति ली गई थी या नहीं। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन के विक्रय के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई और यह बिक्री पूरी तरह से अवैध है। इससे स्पष्ट होता है कि राजस्व विभाग की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं था।

शासकीय जमीन की खरीद-बिक्री पर भूमाफिया सक्रिय

बरघाट विकासखंड में भूमाफियाओं का मकड़जाल तेजी से फैल रहा है। शासकीय जमीनों पर अवैध कब्जे और उनकी बिक्री बड़े पैमाने पर जारी है। इस मामले में भी भूमाफियाओं का हाथ होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों का कहना है कि सिवनी-बालाघाट रोड से लगी शासकीय जमीनें भी निजी स्वामित्व में संशोधित कर महंगे दामों पर बेची जा रही हैं। इसके बावजूद प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं है, जिससे भूमाफियाओं के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल

इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। राजस्व रिकॉर्ड में फर्जी वारिसों के नाम दर्ज होना और बिना कलेक्टर की अनुमति के जमीन की बिक्री होना, यह स्पष्ट करता है कि प्रशासन की ओर से लापरवाही या मिलीभगत का मामला हो सकता है। ग्रामीणों और सरपंच का कहना है कि प्रशासन को इस मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

ग्राम धोबी सर्रा में भूदान में मिली जमीन की बिक्री का मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है। रिटायर्ड फौजी की मृत्यु के बाद फर्जी वारिसों के नाम पर जमीन की बिक्री, बिना कलेक्टर की अनुमति के विक्रय, और प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल इस मामले को और भी पेचीदा बनाते हैं। ग्रामीणों और सरपंच की मांग है कि इस मामले की गहन जांच हो और दोषियों को सजा मिले, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों की पुनरावृत्ति न हो।

लालबागचा राजा से चिंचपोकली चा चिंतामणि तक: गणेश उत्सव में मुंबई में देखने लायक TOP 5 प्रतिष्ठित पंडाल

Lalbaugcha Raja To Chinchpokli Cha Chintamani: जैसे-जैसे देश में गणेश चतुर्थी नजदीक आ रही है, अपने भव्य उत्सव के लिए मशहूर मुंबई, बप्पा के जन्मोत्सव पर उनके स्वागत के लिए तैयार हो रही है।

अपने जीवंत और भव्य उत्सवों के लिए मशहूर यह शहर भक्ति के केंद्र में तब्दील हो जाता है, जो देश भर से कई भक्तों को आकर्षित करता है।

लालबागचा राजा से लेकर चिंचपोकली चा चिंतामणि तक, मुंबई में कई प्रतिष्ठित गणपति पंडाल हैं, जिनमें से प्रत्येक शहर में एक अनूठा अनुभव और उत्सव की भावना प्रदान करता है। उत्सव के माहौल में डूबने के लिए मुंबई के पांच सबसे लोकप्रिय गणेश चतुर्थी पंडालों को देखें।

लालबागचा राजा –  Lalbaugcha Raja

लालबागचा राजा

लालबागचा राजा | आधिकारिक वेबसाइट

लालबागचा राजा मुंबई के सबसे प्रतिष्ठित गणेश चतुर्थी पंडालों में से एक है। खोली समुदाय द्वारा 1934 में स्थापित, यह स्थान हज़ारों भक्तों को आकर्षित करता है, जिनमें से प्रत्येक लालबागचा राजा की एक झलक पाने के लिए इंतज़ार करता है।

गणेश की मूर्ति लगभग 18-20 फीट ऊंची है, जिसे शानदार सोने और चांदी के सामान और फूलों की मालाओं से सजाया गया है। हर साल एक अनूठी थीम के साथ, “नवसाचा गणपति”, लालबागचा राजा का दूसरा नाम, भक्तों की इच्छाओं को पूरा करने के लिए पूजनीय है। आशीर्वाद लेने वालों और दूर से मूर्ति की प्रशंसा करने की इच्छा रखने वालों के लिए समर्पित कतारों के साथ, लालबागचा राजा वास्तव में एक यादगार अनुभव का वादा करता है।

स्थान: लालबाग, परेल, मुंबई

जीएसबी सेवा मंडलG.S.B Seva Mandal

जीएसबी सेवा मंडल

जीएसबी सेवा मंडल | आधिकारिक वेबसाइट

किंग्स सर्किल में जीएसबी सेवा मंडल मुंबई की सबसे भव्य गणेश प्रतिमाओं में से एक की मेजबानी के लिए प्रसिद्ध है, जिसे अक्सर शहर के सबसे अमीर गणपति के रूप में जाना जाता है। यहाँ की मूर्ति सोने और चांदी के आभूषणों की एक श्रृंखला से चमकती है, पिछले साल के आभूषणों की कीमत 300 करोड़ रुपये से अधिक थी।

हर साल, बहुत से भक्तगण भव्य गणेश प्रतिमा को देखने के लिए कतार में खड़े होते हैं। इसमें पारंपरिक वैदिक अनुष्ठान और प्रामाणिक सांस्कृतिक प्रदर्शन भी दिखाए जाते हैं। जो लोग परंपरा के साथ भव्यता का अनुभव करना चाहते हैं, उनके लिए जीएसबी सेवा मंडल एक ऐसा पंडाल है, जिसे आपको अवश्य देखना चाहिए।

स्थान: किंग्स सर्कल, माटुंगा, मुंबई

खेतवाड़ी गणराजKhetwadi Ganraj

खेतवाड़ी गणराज

खेतवाड़ी गणराज | आधिकारिक वेबसाइट

दक्षिण मुंबई के मध्य में स्थित खेतवाड़ी गणराज शहर का एक और प्रसिद्ध गणपति पंडाल है। ऊंची ऊंचाई और जटिल रूप से डिजाइन की गई गणपति प्रतिमा के साथ, यह स्थान कलात्मकता और भक्ति का केंद्र है।

हर साल कई गणेश भक्तों को आकर्षित करने वाला खेतवाड़ी गणराज पंडाल जीवंत सजावट और उत्सव के माहौल से भरा होता है। इस जगह के लुभावने दृश्य इसे उन लोगों के लिए ज़रूर देखने लायक बनाते हैं जो मुंबई में गणेश चतुर्थी की समृद्ध सांस्कृतिक और उत्सवी भावना का अनुभव करना चाहते हैं। 

स्थान: खेतवाड़ी, मुंबई

चिंचपोकली चा चिंतामणिChinchpokli Cha Chintamani

चिंचपोकली चा चिंतामणि मुंबई के सबसे पुराने गणेश पंडालों में से एक है, जिसकी स्थापना 1920 में हुई थी। इस स्थान पर एक क्लासिक बप्पा की मूर्ति है, जो कालातीत सामान और सुंदर सजावट से सुसज्जित है, जो शहर के कई स्थानीय और श्रद्धालु व्यक्तियों को आकर्षित करती है।

इस वर्ष, चिंचपोकली चा चिंतामणि का पहला प्रदर्शन 31 अगस्त को हुआ, जहां हजारों भक्त भगवान से आशीर्वाद लेने और आगमन सोहला की परम भावना का अनुभव करने के लिए एकत्र हुए।

स्थान: चिंचपोकली, मुंबई

मुंबईचा राजाMumbaicha Raja

मुंबईचा राजा

मुंबईचा राजा | इंस्टाग्राम

गणेश गली में मुंबईचा राजा को देखना न भूलें! 1928 में स्थापित, यह प्रतिष्ठित पंडाल हर साल अपनी अनूठी थीम के लिए प्रसिद्ध है। पिछले साल छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक की 350वीं वर्षगांठ मनाते हुए, सजावट रायगढ़ किले की तरह की गई थी।

लालबागचा राजा के पास स्थित, मुंबईचा राजा अपने जटिल डिजाइन और रचनात्मक शिल्प कौशल के लिए कई लोगों को आकर्षित करता है। अपने निरंतर विकसित होने वाले विषयों और समृद्ध सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के साथ, यह स्थान एक शानदार और मनमोहक गणेश चतुर्थी अनुभव प्रदान करता है जो देखने लायक है।

स्थान: गणेश गली, लालबाग, मुंबई

AIIMS Recruitment 2024: एम्स गुवाहाटी ने फैकल्टी के 11 पदों पर भर्ती, पढ़ें पूरी डिटेल

AIIMS Recruitment 2024: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), गुवाहाटी ने विभिन्न विभागों में सीधी भर्ती, प्रतिनियुक्ति और अनुबंध के आधार पर संकाय पदों के लिए भर्ती अभियान की घोषणा की है।

आधिकारिक वेबसाइट ( aiimsguwahati.ac.in ) पर उपलब्ध अधिसूचना में अतिरिक्त प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और सहायक प्रोफेसर के 11 रिक्त पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया, पात्रता मानदंड और चयन प्रक्रिया की रूपरेखा दी गई है।

आवेदन प्रक्रिया 23 अगस्त, 2024 को शुरू हुई और उम्मीदवार 13 सितंबर, 2024 तक ईमेल के माध्यम से अपने आवेदन जमा कर सकते हैं।

साक्षात्कार की तिथि 24 सितंबर, 2024 निर्धारित है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे भर्ती अधिसूचना को ध्यान से पढ़ें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे वांछित पद के लिए पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं।

  • – कुल रिक्तियां: 11
  • – आवेदन का तरीका: ऑनलाइन
  • – आवेदन प्रारंभ तिथि: 23 अगस्त, 2024
  • – आवेदन की अंतिम तिथि: 13 सितंबर, 2024
  • – साक्षात्कार की तिथि: 24 सितंबर, 2024
  • – भर्ती का तरीका: सीधी भर्ती/प्रतिनियुक्ति आधार/अनुबंध आधार
  • – चयन प्रक्रिया: साक्षात्कार, दस्तावेज़ सत्यापन

अभ्यर्थी वेबसाइट से आधिकारिक अधिसूचना पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं और दिए गए लिंक के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

पीडीएफ डाउनलोड करें

सामान्य/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 1500 रुपये है, जबकि एससी/एसटी/पीडब्ल्यूडी/महिला उम्मीदवारों को कोई शुल्क नहीं देना होगा।

पात्रता मानदंड में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • – शैक्षिक योग्यता: एमडी/एमएस डिग्री के साथ प्रासंगिक कार्य अनुभव
  • – आयु सीमा:
  • – प्रोफेसर/अतिरिक्त प्रोफेसर: 58 वर्ष
  • – एसोसिएट प्रोफेसर/असिस्टेंट प्रोफेसर: 50 वर्ष
  • आवेदन लिंक यहां क्लिक करें

अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे पात्रता मानदंड और चयन प्रक्रिया के बारे में अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक अधिसूचना देखें।