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आषाढ़ मास 25 जून से आरम्भ, सूर्य पूजा से दूर होती हैं बीमारियां और बढ़ती है उम्र

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डेस्क।भगवान श्री हरि को प्रिय आषाढ़ माह का वास्तु में विशेष महत्व है। इस माह को ऋतुओं का संधिकाल कहा जाता है। यह माह मौसम के परिवर्तन का समय होता है। वास्तु के अनुसार आषाढ़ माह में कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं आषाढ़ माह से जुड़े कुछ वास्तु उपायों के बारे में।आषाढ़ माह में भगवान विष्णु की उपासना करें।

जलदेव की पूजा करें। इस माह सूर्यदेव की पूजा का विशेष महत्व है। इस माह घर में समय समय पर हवन कराएं। घर में सुबह और शाम दोनों समय दीपक जलाएं। आषाढ़ माह में उगते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य देने की परंपरा है।

एक मान्यता है कि इस माह भगवान विष्णु और सूर्यदेव की उपासना से रोग दूर हो जाते हैं और आयु में वृद्धि होती है। इस माह सूर्यदेव को जल अर्पित करने से विरोधियों पर विजय प्राप्त होती है। आत्मविश्वास बढ़ता है। सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आषाढ़ माह में भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

संतान सुख प्राप्त होता है। जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं। इस माह अचार, दही और खट्टी चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए। इस माह बच्चे को भगवान वामन का रूप मानकर भोजन कराएं। इस माह की दोनों एकादशी पर भगवान वामन की पूजा के बाद अन्न और जल का दान करना चाहिए।

आषाढ़ माह में गुरु की उपासना सबसे फलदायी है। आषाढ़ माह में जल युक्त फल का सेवन करना चाहिए। आषाढ़ में बेल न खाएं। तेल वाली चीजों से परहेज करें।

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