मध्यप्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावों के बीच सिवनी जिले के बरघाट विकासखंड स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धारनाकला की तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है। यहां करीब 900 छात्र-छात्राएं केवल 8 कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जबकि कई कक्षाएं बरामदे, मंच और खुले स्थानों पर संचालित की जा रही हैं।
विद्यालय में जगह की कमी इतनी गंभीर हो चुकी है कि विद्यार्थियों और अभिभावकों ने अब आंदोलन की चेतावनी दे दी है।
मुख्य बातें (Highlights)
- धारनाकला हायर सेकेंडरी स्कूल में करीब 900 छात्र-छात्राएं दर्ज
- पूरे विद्यालय में मात्र 8 कक्ष उपलब्ध
- कई कक्षाएं बरामदे और खुले स्थानों पर संचालित
- एक डेस्क पर चार-चार छात्रों को बैठना पड़ रहा
- समस्या पिछले कई वर्षों से बनी हुई
- छात्र और अभिभावक आंदोलन की तैयारी में
8 कमरों में सिमटा 900 छात्रों का भविष्य
बरघाट विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धारनाकला में विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं उसी अनुपात में नहीं बढ़ पाई हैं।
जानकारी के अनुसार विद्यालय में लगभग 900 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जबकि उनके लिए केवल 8 कक्ष उपलब्ध हैं। जिन कमरों की क्षमता 40 से 50 विद्यार्थियों की है, उनमें मजबूरीवश 80 से 100 तक छात्रों को बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है।
एक डेस्क पर चार छात्र बैठने को मजबूर
विद्यालय में बैठने की समस्या भी गंभीर रूप ले चुकी है। जहां पहले एक डेस्क पर दो छात्र बैठते थे, वहीं अब एक ही डेस्क पर चार-चार विद्यार्थियों को बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
छात्रों का कहना है कि कई बार उन्हें समय से पहले स्कूल पहुंचना पड़ता है ताकि बैठने की जगह मिल सके।
बरामदे और खुले स्थानों में लग रही कक्षाएं
कमरों की कमी के कारण शिक्षकों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है। विद्यालय परिसर के बरामदों, मंच और पास स्थित शासकीय उन्नयन प्राथमिक शाला के खाली कमरों में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
शिक्षकों के अनुसार कई बार ऐसी स्थिति भी बन जाती है जब विद्यार्थियों को खड़े होकर पढ़ाई करनी पड़ती है।
कई वर्षों से बनी हुई है समस्या
स्थानीय शिक्षकों और ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या नई नहीं है। पिछले तीन से चार शैक्षणिक सत्रों से विद्यालय भवन के विस्तार की मांग लगातार की जा रही है।
शिक्षा विभाग और जनप्रतिनिधियों को कई बार इस संबंध में अवगत कराया गया, लेकिन अब तक भवन निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि सांसद और विधायक निधि से विभिन्न निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन शिक्षा जैसी बुनियादी आवश्यकता की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब जिले के कई स्कूल भवन जर्जर या क्षमता से कम हैं, तो शिक्षा सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही।
आंदोलन की तैयारी में छात्र और अभिभावक
विद्यालय के कई छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।
उनका कहना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पर्याप्त कक्षाएं और बैठने की व्यवस्था होना आवश्यक है, लेकिन वर्तमान हालात में पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों के कई सरकारी स्कूल आज भी आधारभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। कहीं भवनों की कमी है तो कहीं जर्जर कक्षाएं विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई हैं। धारनाकला विद्यालय का मामला भी इसी चुनौती को उजागर करता है।


