Seoni News: सिवनी जिले के बरघाट विकासखंड अंतर्गत आने वाली सहकारी समितियों में कथित तौर पर दैनिक वेतनभोगी भर्ती और कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने का बड़ा मामला सामने आया है। सहकारिता विभाग से जुड़ा यह मामला अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के भर्ती की गई और बाद में कुछ कर्मचारियों को विशेष लाभ भी पहुंचाए गए।
ताजा मामला सहकारी समिति धारनाकला से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां संचालक मंडल के प्रस्ताव के आधार पर एक कर्मचारी को दैनिक वेतनभोगी के रूप में नियुक्त किया गया। आरोप है कि कुछ ही समय में उसे नियमित कर्मचारी जैसी सुविधाएं और लाभ मिलने लगे। यही नहीं, उस कर्मचारी को दो-दो राशन दुकानों का प्रभार सौंपे जाने और अन्य कर्मचारियों की तुलना में अधिक वेतन दिए जाने की चर्चा भी अब जोरों पर है।
स्थायी पद नहीं, फिर भी नियुक्तियां सवालों के घेरे में
जानकारों के अनुसार सहकारी समितियों में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति सामान्यतः अस्थायी, आकस्मिक या मौसमी कार्यों के लिए की जाती है। यह नियुक्तियां किसी स्थायी रिक्त पद के स्थान पर नहीं होतीं और इनके लिए विभागीय अनुमति आवश्यक मानी जाती है। नियुक्ति के समय यह भी स्पष्ट किया जाता है कि सेवा पूरी तरह अस्थायी होगी और आवश्यकता समाप्त होने पर कभी भी खत्म की जा सकती है।
लेकिन बरघाट क्षेत्र की कई समितियों में जिस तरह भर्ती और लाभ का सिलसिला चला, उसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो भर्ती प्रक्रिया सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
2020 में भी उठ चुके थे फर्जी भर्ती के मुद्दे
यह मामला नया नहीं बताया जा रहा। वर्ष 2020 में भी कार्यालय उपायुक्त सहकारिता, जिला सिवनी द्वारा कृषि साख समितियों में कथित फर्जी भर्तियों को लेकर पत्र जारी किया गया था। उस पत्र में शिकायतों के आधार पर उल्लेख किया गया था कि जिले की कई समितियों में अधिकारियों और प्रबंधकों की मिलीभगत से लाखों रुपये लेकर नियुक्तियां की गईं।
कुछ मामलों में रिश्तेदारों को नियमों के विरुद्ध नियुक्त किए जाने और अपात्र व्यक्तियों को प्रबंधक पद पर बैठाने जैसे आरोप भी सामने आए थे।
क्या सेवा नियमों का पालन हुआ?
सहकारिता विभाग के सेवा नियमों के अनुसार समितियों में कर्मचारियों की भर्ती के लिए चयन समिति गठित होना जरूरी है। नियमों के मुताबिक:
- रिक्त पदों की समीक्षा की जानी चाहिए
- आवश्यक योग्यता और अनुभव की जांच होनी चाहिए
- चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित होना अनिवार्य है
- भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए
- विज्ञापन या सूचना जारी कर आवेदन आमंत्रित किए जाने चाहिए
लेकिन आरोप है कि कई समितियों में इन नियमों का पालन नहीं हुआ। धारनाकला समिति के मामले में भी बिना किसी विज्ञापन या निविदा के भर्ती किए जाने की बात सामने आई है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि रातों-रात नियुक्तियां कर दी गईं और लंबे समय से शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासक की ‘मेहरबानी’ से बढ़ा वेतन?
संचालक मंडल भंग होने के बाद वर्तमान में कई सहकारी समितियों का संचालन प्रशासकों के हाथों में है। जिले की दर्जनों समितियों में एक ही प्रशासक व्यवस्था संभाल रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने और वेतन निर्धारण में मनमानी के आरोप लग रहे हैं।
धारनाकला समिति में कार्यरत कर्मचारियों का आरोप है कि एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को विशेष लाभ देते हुए न केवल दो राशन दुकानों का प्रभार दिया गया बल्कि उसका वेतन भी अन्य कर्मचारियों से अधिक कर दिया गया। जब अन्य कर्मचारियों ने समान वेतन वृद्धि की मांग की तो संबंधित कर्मचारी को “नियमित” बताया गया।
दिलचस्प बात यह है कि समिति में अनुकंपा नियुक्ति के तहत कार्यरत कर्मचारी भी हैं, लेकिन उन्हें नियमित कर्मचारी की श्रेणी में नहीं माना जा रहा। वहीं दैनिक वेतनभोगी के रूप में भर्ती कर्मचारी को कथित रूप से नियमित जैसी सुविधाएं मिलने लगीं।
उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज
पूरा मामला अब सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो तो कई समितियों में भर्ती, वेतन और भत्तों से जुड़े बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।
वहीं इस मामले में जब संयुक्त आयुक्त जबलपुर राकेश पांडे से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा:
“इस संबंध में फिलहाल जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
अब देखने वाली बात होगी कि सहकारिता विभाग इस पूरे मामले में जांच कर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी कागजों तक सीमित रह जाएगा।

