Homeउत्तर प्रदेशUP धर्मांतरण मामला: सत्तर दशक पहले श्याम सिंह से बना उमर गौतम

UP धर्मांतरण मामला: सत्तर दशक पहले श्याम सिंह से बना उमर गौतम

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लखनऊ । मुक-बधिर बच्चों और महिलाओं को बरगला कर मुस्लिम बनाने वाले गिरोह का सदस्य उमर गौतम सत्तर दशक पहले हिन्दू था। उसका असली नाम श्याम सिंह गौतम है। वह मूलरूप से फतेहपुर का रहने वाला था। प्राथमिक पूछताछ में उमर गौतम ने पुलिस को बताया कि इस्लाम की दावत से खुश होकर उसने मुस्लिम धर्म को अपनाया था।

बाद में वह लोगों को दावत के नाम पर दूसरे धर्म के आगे मुस्लिम धर्म को बढ़ाकर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए उकसाता था। इसके लिए वह उनकी मदद के लिए पैसा भी देता था। इसी तरह आदित्य भी अब्दुल बन गया। इसके लिए उसके खाते में विदेश से पैसे आते थे।

कन्वर्जन माफिया का पोस्टर ब्वॉय बना उमर गौतम

आज से 70 दशक पहले फतेहपुर का रहने वाला श्याम सिंह गौतम इलाहाबाद में पढ़ाई करता था। इस बीच उसकी दोस्ती मुस्लिम युवक से हो गई। उस युवक की खातिरदारी और दावत से श्याम सिंह इतना खुश हो गया कि उसने भी मुस्लिम धर्म को अपनाकर अपना नाम उमर गौतम रख लिया। उसे यह समझ में आ गया था कि इस्लाम में दावत का अर्थ क्या होता है।

दावत मतलब इस्लाम का निमंत्रण। आओ! काफिरों। इस्लाम की तरफ आओ, जहां से जन्नत के रास्ते खुलते हैं। कब तक काफिर मुशरिक की मौत मरते रहोगे और जहन्नुम की आग में जलते रहोगे? ये बात गौतम ने आगे फैलाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते वह कन्वर्जन माफिया का पोस्टर ब्वॉय बन गया, जिसे दिखाकर मोमिन अपने जन्नती होने का सबूत देने लगे। दिल्ली के ओखला में इसने एक दावत सेन्टर की स्थापना की और घूम-घूमकर गैर मुस्लिमों को इस्लाम की दावत देने लगा।

चार दिन से हो रही पूछताछ, चलाया इस्लामिक सेंटर

रोहिंग्याओं के खिलाफ चलाये गए इस अभियान के तहत एटीएस ने धर्म परिवर्तन कराने के बड़े मामले का खुलासा किया है। दिल्ली के जामियानगर के मोहम्मद उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहांगीर आलम कासमी से एटीएस द्वारा करीब चार दिन से पूछताछ की जारी है। इसमें पता चला है कि यह लोग गरीब हिंदुओं, महिलाओं और मुकबधिर बच्चों को लालच देकर धर्म परिवर्तन करा लेते हैं। अबतक एक हजार लोगों का धर्मांतरण हो चुका है, मुकबधिर बच्चें भी शामिल हैं। दोनों मौलाना का दावा है कि वह तो इस्लामिक सेंटर के नाम से संस्था भी चलाते हैं।

आदित्य से अब्दुल बना अधिवक्ता का पुत्र

काकादेव पी-ब्लॉक निवासी पेशे से अधिवक्ता ने बताया कि उनका 24 वर्षीय मूक-बधिर बेटा आदित्य गुप्ता ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा है। पढ़ाई के सिलसिले में दिल्ली आने-जाने की बात कहता था, लेकिन मार्च को वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। काफी तलाश के बाद भी नहीं मिला तो अधिवक्ता ने कल्याणपुर थाने में बेटे की गुमशुदगी दर्ज कराई। काफी दिन बाद जब वह घर लौटा तो उसकी हरकतें बदल चुकी थी। वह छिपकर नमाज अता करने लगा। इस दौरान जब परिवार का शक गहराया तो उसके सामानों की जांच की। उसके पास से धर्म पविर्तरन कराये जाने को लेकर प्रमाण पत्र मिला था।

विदेश से आ रहा था पैसा

आदित्य के पिता का कहना है कि उसके बेटे आदित्य के बचत खाते में देश के बाहर से सात हजार रुपये प्रति माह आ रहा था। उन्होंने इस मामले में कल्याणपुर थाने में धर्म ​परिवर्तन का सर्टिफिकेट देने के साथ ही एक-एक बात बताई थी, लेकिन पुलिस ने कोई दिलचस्पी नहीं ली।

रविवार को लौटा घर

आदित्य की मां का कहना है कि जब उन्हें पता चला कि उनके बेटे ने धर्मांतरण कर लिया है तो काफी परेशान रहने लगी। इसके बाद उन्होंने चौकी, थाना और पुलिस के बड़े अधिकारियों से भी मिली, लेकिन किसी ने भी उनकी नहीं सुनी। इसके बाद उन्होंने बेटे को वीडियो कॉल के जरिये धीरे-धीरे समझाने का प्रयास किया तो वह कुछ दिन बाद घर लौट आया।

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