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Home सिवनी अब कौन सुनाएगा कड़वे पर सत्य वचन: विपिन शर्मा

अब कौन सुनाएगा कड़वे पर सत्य वचन: विपिन शर्मा

संदर्भ : राष्ट्र संत तरुण सागर जी का देवलोक गमन

तरुण सागर जी के कड़वे बोल सुनने का अवसर मुझे अनेक बार हासिल हुआ, शायद यह उनकी कृपा से ही सम्भव हुआ होगा, किंतु एक बार मुझे जबलपुर में उनका सानिध्य भी प्राप्त हुआ उनकी जो छवि मेरे जेहन में अंकित हुई वह आज भी ज्यों की त्यों है। उनके चेहरे का तेज उनकी वाणी के ओज से भी ज्यादा प्रकाशवान था। हजारों लोग यूं ही उनके अनुयायी नही थे। इसके पीछे उनका कठोर तप और साधना थी। संयम और परोपकार को जीवन का मूलमंत्र बना लेने वाले तरुण सागर जी ने आखिरी सांस तक सत्य को आभूषण की तरह धारण किये रखा।

वे समग्र मानव समाज के सामने ऐसा उदाहरण बनकर सामने आए जो ज्ञान और विज्ञान का ऐसा पुस्तकालय थे जिसकी हर किताब नैतिक और सैद्धांतिक शिक्षा से भरी पड़ी थी। आज के दौर में जब लोग चपलता, चापलूसी और चरणवन्दना को सफलता का आधार मानने लगे हैं ऐसे में तरुण सागर जी ने राह से भटकती मानवजाति को सच्चाई का रास्ता दिखलाया। उन्होंने कामयाबी के लिए शॉर्टकट की बजाए परिश्रम, कर्मपूजा और निजी ईमानदारी को अपनाने की सलाह दी। वे हमारे सामने स्याह सन्नाटे को चीरते हुए आशा की किरण बनकर सामने आए। लोग तो मीठा बोलकर समाज मे वो प्रतिष्ठा हासिल नही कर पाते लेकिन मुनि तरुणसागर जी ने कड़वे बोलों से संत समाज मे इतना ऊंचा स्थान हासिल किया जहां पहुंचना हर किसी के बस की बात नही। उनमे कबीर की उलटबांसी वाला फक्कड़पन भी नजर आता था और तुलसी का पावन भक्तिमार्ग भी। संत तो वैसे भी त्याग, तपस्या और सादगी की प्रतिमूर्ति होता है, लेकिन तरुण सागर जी के वैयक्तिक गुणों में उन आभूषणों के अलावा जो खास बात थी वो उनका चमत्कारिक सोच। अदभुत कल्पनाशक्ति और जीवन को सार्थक नजरिये के साथ जीने की उनकी दिनचर्या के इस भारतवर्ष में करोड़ों लोग कायल होंगे। संत समाज की परिभाषाओं को तो उन्होंने नए संदर्भों में गढ़ दिया।

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सारे भारत वर्ष इस बात का गर्व है कि मुनि तरुण सागर जी नइतनी बड़ी सख्सियत होने के बावजूद उनकी सरलता ने हर किसी के दिल में वो जगह बना ली जो चिरस्थायी हो चुकी है। आज उनका देवलोक गमन हुआ है। देवता भी उनका स्वर्गलोक में बड़े आदर के साथ प्रतीक्षा कर रहे होंगे, लेकिन अपार दुख का क्षण है कि इस धरती से सत्य का एक पुजारी विदा हो गया। अब कौन खरी- खरी सुनाएगा। कौन अंधेरों को चीरकर उजाला लाएगा। हमारी विनती है आपसे तरुण सागर जी- आप मानवरूप में फिर आओ। फिर भटके हुए समाज को रास्ता दिखलाओ।

आपके श्री चरणों मे सादर प्रणाम

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Editor In Chief : Shubham Sharma

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