SEONI: धान की ढुलाई में बड़ा घोटाला! सरकारी नियमों की धज्जियां, परिवहनकर्ता की मनमानी से सरकार को लाखों का चूना

SEONI: धान की ढुलाई में बड़ा घोटाला! सरकारी नियमों की धज्जियां, परिवहनकर्ता की मनमानी से सरकार को लाखों का चूना

SHUBHAM SHARMA
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SEONI: धान की ढुलाई में बड़ा घोटाला! सरकारी नियमों की धज्जियां, परिवहनकर्ता की मनमानी से सरकार को लाखों का चूना

SEONI DHAN GHOTALA। जिले में इन दिनों सरकारी नीतियों के तहत धान उपार्जन का कार्य जोरों पर है। किसान अपनी मेहनत की फसल को समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए उपार्जन केंद्रों तक पहुंच रहे हैं, लेकिन इसी बीच धान परिवहन में बड़ा खेल सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, परिवहनकर्ता शासकीय आदेशों और नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए अपनी मर्जी से धान का परिवहन कर रहे हैं। जबकि शासकीय अमले द्वारा न्यूनतम दूरी और न्यूनतम परिवहन व्यय के आधार पर गोदामों की विधिवत मैपिंग की गई है, इसके बावजूद नियमों का पालन नहीं किया जा रहा।

मैपिंग के बावजूद लंबी दूरी तक ढुलाई, मुनाफे की साजिश?

खवासा, पीपरवानी और पाटन खरीदी केंद्रों से पर्व वेयरहाउस कोदाझिरी (कुरई) की मैपिंग न्यूनतम दूरी के आधार पर की गई थी। लेकिन परिवहनकर्ता जानबूझकर इन गोदामों में धान खाली नहीं कर रहे, बल्कि उसे लंबी दूरी तय कर सिवनी के निजी गोदामों—जैन वेयरहाउस सोनादोंगरी और KKR वेयरहाउस—में पहुंचाया जा रहा है

सूत्रों की मानें तो इसका मकसद अधिक परिवहन व्यय दिखाकर ज्यादा मुनाफा कमाना और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाना है। यही नहीं, गोपालगंज और शिवगंगा वेयरहाउस हरहरपुर जैसे शासकीय गोदाम खाली पड़े हुए हैं, फिर भी वहां माल नहीं भेजा जा रहा।

दस्तावेजी सबूत मिले, आरोपों की हुई पुष्टि

उपार्जन समिति माँ दुर्गा स्वसहायता समूह, भंडारपुर केंद्र (दरासीकला) द्वारा शिवगंगा वेयरहाउस हरहरपुर के धर्मकांटे से तौल कर धान सौंपा जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी परिवहनकर्ता वहां माल खाली नहीं कर रहे और अनावश्यक रूप से लंबी दूरी तय कर रहे हैं

इस पूरे मामले की पड़ताल में महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे हैं, जिनसे नियमों के उल्लंघन और मनमानी परिवहन की पुष्टि होती है।

अब सवाल—कब होगी कार्रवाई?

यह मामला केवल नियमों की अनदेखी का नहीं, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग और सुनियोजित गड़बड़ी का संकेत देता है। अब देखना यह है कि प्रशासन और संबंधित विभाग कब तक इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हैं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई कब होती है।

यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह धान उपार्जन व्यवस्था पर भरोसे को गहरा झटका दे सकता है और किसानों के हितों को भी नुकसान पहुंच सकता है।

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