सिवनी जिला के बरघाट थाना क्षेत्र से सामने आया यह मामला न केवल घरेलू हिंसा की भयावह तस्वीर पेश करता है, बल्कि यह भी बताता है कि कानून देर से ही सही, लेकिन न्याय जरूर देता है।
यह दर्दनाक घटना वर्ष 2020 की है। दिनांक 23 जुलाई 2020 को बरघाट शासकीय अस्पताल से पुलिस को सूचना मिली कि प्रियंका चौहान (26 वर्ष) निवासी ग्राम कोड़िया को गंभीर जली अवस्था में भर्ती कराया गया है।
पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पीड़िता के मृत्युकालीन कथन (डाइंग डिक्लेरेशन) नायब तहसीलदार की उपस्थिति में दर्ज कराए।
पीड़िता ने क्या बताया?
अपने बयान में प्रियंका ने बताया:
- पति राहुल चौहान रोज झगड़ा करता था
- मारपीट और जान से मारने की धमकी देता था
- मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से वह बेहद परेशान थी
- घर में मिट्टी का तेल पति लाया था
- इसी तनाव में उसने खुद पर आग लगा ली
हालत बिगड़ने पर उसे जबलपुर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
पुलिस कार्रवाई और केस दर्ज
घटना के बाद पुलिस ने:
- पति राहुल चौहान
- सास निर्मला चौहान
- ससुर रामदास चौहान
के खिलाफ धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और धारा 498A (प्रताड़ना) के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया।
अदालत में क्या हुआ फैसला?
मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय सिवनी में हुई।
शासन की ओर से सहायक जिला अभियोजन अधिकारी मनोज कुमार सैयाम ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर मजबूत पैरवी की।
अदालत का निर्णय:
- सास व ससुर को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी
- पति राहुल चौहान दोषी करार
सजा:
- ✅ धारा 306 – 4 वर्ष का कठोर कारावास
- ✅ धारा 498A – 1 वर्ष कारावास + ₹3000 जुर्माना
💔 समाज के लिए बड़ा संदेश
यह मामला सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है। घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना भी अपराध है।
विशेषज्ञों का कहना है: “महिलाएं चुप न रहें, कानूनी मदद लें। कानून उनके साथ है।”
क्यों खास है यह फैसला?
- पीड़िता को मिला कानूनी इंसाफ
- 4 साल पुराने केस में न्याय
- डाइंग डिक्लेरेशन बना सबसे बड़ा सबूत
- घरेलू हिंसा के मामलों में कड़ा संदेश

