बरघाट जनपद पंचायत में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और जनपद अध्यक्ष आभा राहंगडाले के बीच चल रहे विवाद ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। इस मामले में एक जनपद सदस्य ने स्थानीय विधायक कमल मर्सकोले की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किए जाने से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
मुख्य बातें
- बरघाट जनपद पंचायत में CEO और अध्यक्ष के बीच विवाद चर्चा का विषय बना।
- जनपद सदस्य ने विधायक कमल मर्सकोले की भूमिका पर सवाल उठाए।
- आरोप है कि विधायक सामान्य सभा और सामान्य प्रशासन समिति की बैठकों में नियमित रूप से शामिल नहीं हुए।
- दावा किया गया कि आपसी समन्वय की कमी का असर विकास कार्यों पर पड़ रहा है।
- विधायक से विवाद सुलझाने के लिए पहल करने की अपील की गई।
बरघाट जनपद पंचायत विवाद में विधायक की भूमिका पर उठे सवाल
बरघाट जनपद पंचायत में CEO और जनपद अध्यक्ष आभा राहंगडाले के बीच पिछले कुछ समय से चल रहे विवाद के बीच अब जनप्रतिनिधियों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। एक जनपद सदस्य ने सार्वजनिक रूप से विधायक कमल मर्सकोले पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरे मामले में सबसे बड़ी कमी नेतृत्व और समन्वय की रही है।
उनका कहना है कि यदि समय रहते दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कराया जाता तो विवाद इस स्तर तक नहीं पहुंचता और विकास कार्यों में बाधा नहीं आती।
बैठकों में अनुपस्थिति का लगाया आरोप
सामान्य सभा और प्रशासनिक बैठकों का किया जिक्र
जनपद सदस्य ने आरोप लगाया कि बरघाट जनपद पंचायत में पिछले चार वर्षों से अधिक समय के दौरान विधायक कमल मर्सकोले सामान्य सभा तथा सामान्य प्रशासन समिति की बैठकों में शामिल नहीं हुए।
उनका कहना है कि विधायक के रूप में यह नैतिक जिम्मेदारी होती है कि वे जनपद की बैठकों में उपस्थित होकर 90 ग्राम पंचायतों से जुड़े विकास कार्यों की समीक्षा करें, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित करें तथा आवश्यक मार्गदर्शन दें।
नोट: इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और विधायक की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
CEO और अध्यक्ष के बीच विवाद का असर विकास कार्यों पर?
जनपद सदस्य का दावा है कि CEO और अध्यक्ष के बीच विवाद कई दिनों से जारी था और इसकी जानकारी स्थानीय स्तर पर थी। इसके बावजूद विवाद को सुलझाने के लिए प्रभावी पहल नहीं होने से विकास कार्यों की गति प्रभावित हुई।
उन्होंने कहा कि इसका असर केवल जनपद सदस्यों पर ही नहीं बल्कि क्षेत्र की आम जनता पर भी पड़ रहा है, क्योंकि कई विकास कार्यों में देरी की स्थिति बन सकती है।
विधायक से हस्तक्षेप की अपील
जनपद सदस्य ने विधायक कमल मर्सकोले से आग्रह किया है कि वे इस पूरे मामले में पहल करते हुए दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराएं और विवाद का समाधान निकालने का प्रयास करें। उनका कहना है कि जनपद पंचायत में बेहतर समन्वय स्थापित होने से विकास कार्यों को गति मिल सकेगी।
बरघाट जनपद पंचायत में हाल के दिनों में CEO और जनपद अध्यक्ष आभा राहंगडाले के बीच विवाद चर्चा का विषय रहा है। इस घटनाक्रम को लेकर स्थानीय राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में लगातार चर्चाएं हो रही हैं। अब इस विवाद को लेकर जनप्रतिनिधियों की ओर से भी सार्वजनिक बयान सामने आने लगे हैं।
यदि जनपद पंचायत में प्रशासन और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय मजबूत नहीं होता है, तो विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ सकता है। ऐसे मामलों में समय पर संवाद और समाधान स्थानीय विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
बरघाट जनपद पंचायत का विवाद अब केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसमें जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है। मामले का समाधान संवाद और समन्वय के जरिए निकलना क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण होगा।


