जन्मभूमि का मुझ पर है ऋण- प्रज्ञानान्द

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सिवनी। ज्ञान यज्ञ के आज समापन अवसर पर प्रवचन देते हुये राष्टÑसंत स्वामी प्रज्ञानानंद जी ने कहा कि यह उनके लिये बड़े गौरव की बात है कि आज जिस स्थान पर वे प्रवचन दे रहे हैं वह न केवल उनकी जन्म और कर्मभूमि है बल्कि आज वे जो कुछ भी हैं वैसा बनाने में इस धरती का और यहां के लोगों का विशेष योगदान है। मैं इस धरती और यहां के सभी लोगों का ऋणी हूं और चाहता हूं कि आप सब मुझे उस ऋण से मुक्त करें।

महाराज जी ने कहा कहा कि धरती बड़ी दयालू होती है, उसकी ही दया से न सिर्फ मानव बल्कि जीव-जन्तु जीवन प्राप्त कर अपनी गुजर बसर करते हैं। इस धरती की दयालुता का मैं जीवन पर्यन्त ऋणी रहूंगा।

कार्यक्रम में उपस्थित क्षेत्रीय विधायक ठाकुर रजनीश सिंह ने अपने संबोधन में महाराजश्री की उदारता और उनकी विद्वता का बखान करते हुये कहा कि यह आपकी महानता है कि आप अपने आपको यहां का ऋणी मानते हैं। वास्तव में आज आप अपने ज्ञान और तप से लोगों को जो धर्मोपदेश दे रहे हैं वह अपने आपमें अद्वितीय है इसके लिये वास्तव में हम यहां के लोग आपके ऋणी हैं। इतना ही नहीं आपने रक्तदान जैसा प्रेरणादायी काम लोगों के समक्ष रखा है। न केवल प्रतिवर्ष आप स्वयं जिले में रक्तदान शिविर आयोजित कर स्वयं रक्तदान करते हैं, बल्कि औरों को भी इसके लियेप्रेरित करते हैं यह आपकी दयालुता और दूसरों की जान बचाने के लिये औरों को प्रेरणा देने वाला कार्य है। इस अवसर पर आज पूर्व विधायक श्री नरेश दिवाकर भी महाराज जी के दर्शन और प्रवचन सुनने पहुंचे थे।

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वास्तव में आप हमारे लिये इस क्षेत्र की एक अद्वितीय धरोहर हैं, जिस पर हमें गर्व है। ठाकुर रजनीश सिंह ने कहा कि स्वामी जी ने मुझे अपने पिता की तरह ही जनसेवा करने की जो प्रेरणा दी है मेरी कोशिश होगी कि उस पर मैं पूरी तरह खरा उतरूं।

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