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MP राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन सिवनी में अनियमितताओं का आरोप: महिलाओं ने जिला पंचायत सीईओ से की शिकायत

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सिवनी। मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जिसे दीनदयाल अन्त्योदय राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के नाम से भी जाना जाता है, का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण गरीबों, विशेष रूप से महिलाओं को सशक्त बनाकर उन्हें स्वावलंबी बनाना है। इस मिशन के अंतर्गत स्व सहायता समूहों (SHGs) का गठन, वित्तीय समावेशन, आजीविका संवर्धन, संस्थागत विकास और प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर कार्य किया जाता है। परंतु सिवनी जिले में इस मिशन की कार्यप्रणाली को लेकर हाल ही में कई गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

ब्लॉक प्रबंधक पर महिला ने लगाए गंभीर आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम छुई, तहसील सिवनी निवासी सबा परवीन नामक महिला, जो स्वयं महिला स्व सहायता समूह से जुड़ी हैं, ने सिवनी जिले के ब्लॉक प्रबंधक सुभाष साहू के खिलाफ जिला पंचायत सीईओ से शिकायत की है। सबा परवीन ने अपने शिकायती पत्र में सुभाष साहू पर पद के दुरुपयोग और महिला संगठनों से जुड़े कार्यों में भेदभाव और मनमानी का आरोप लगाया है। उन्होंने एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है।

सूत्रों के अनुसार, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रारंभ कर दी है।

जिला प्रबंधक की मेहरबानी बनी चर्चा का विषय

मिशन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जिला प्रबंधक राजेन्द्र शुक्ला द्वारा सुभाष साहू का लंबे समय से स्थानांतरण नहीं किया गया है, जबकि अन्य विकासखंडों में सीएलएफ (CLF) नोडल पदों पर दर्जनों बदलाव किए गए हैं। सुभाष साहू पर जिला प्रबंधक की अनावश्यक मेहरबानी को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चा गर्म है।

राज्य स्तर के आदेशों की अनदेखी

विशेष रूप से यह भी उल्लेखनीय है कि भोपाल स्थित राज्य कार्यालय द्वारा जारी नेतृत्व परिवर्तन और पदाधिकारियों की नियुक्ति से संबंधित आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संजीव सिन्हा द्वारा जारी आदेशों के बावजूद सिवनी जिला प्रबंधक और ब्लॉक स्तर के प्रबंधकों द्वारा इन आदेशों की अवहेलना की जा रही है।

राज्य कार्यालय ने यह निर्देश दिए हैं कि संगठन के चुनावों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को वरीयता दी जाए और चुनाव पारदर्शी प्रक्रिया से संपन्न हों। लेकिन स्थानीय स्तर पर चुनावों को गिने-चुने लोगों तक सीमित रखकर पूरा किया जा रहा है, जिससे महिला सदस्यों में असंतोष की लहर देखी जा रही है।

महिला नेतृत्व की अनदेखी से ग्रामीण महिलाओं में आक्रोश

मिशन का एक बड़ा उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को नेतृत्व के अवसर देना है। लेकिन लगातार हो रही अनदेखी और मनमानी से महिला संगठन से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं का हक मारा जा रहा है। इसके विरोध में अब महिलाएं संगठित होकर आवाज उठाने लगी हैं।

कलेक्टर के हस्तक्षेप की आवश्यकता

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण महिलाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस पूरे मामले में जिला कलेक्टर को हस्तक्षेप करते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। अगर समय रहते पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं लाई गई, तो मिशन का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।

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