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सावन के अंतिम सोमवार पर आज करें 3 काम, हर मनोकामना होगी पूरी

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सावन का आखिरी और चौथा सोमवार 8 अगस्त 2022 को है. भोलेनाथ की आराधना के लिए सावन सोमवार की विशेष महत्ता है. सावन सोमवार का व्रत रखने वालों की शिव जी (shiv ji) मुरादें पूरी करते हैं।भोलेनाथ स्वभाव से बहुत भोले हैं, मात्र एक लौटा जल से प्रसन्न हो जाते हैं।

चंद्रमा मन का प्रतीक है. कुंडली में चंद्र दोष से व्यक्ति का मन अशांत रहता है. घर में तनाव की स्थिति पैदा होती है. ज्योतिषशास्‍त्र के अनुसार चंद्र दोष से मुक्ति पाने के लिए सावन के अंतिम सोमवार पर चंद्रशेखर स्‍तोत्र का पाठ करें.।

कार्य में बाधा( work)

चारों तरफ से निराशा हाथ लग रही हो, काम बनने से पहले ही बिगड़ जाए, कहीं तरक्की के आसार नजर न आए तो सावन सोमवार के दिन नमक का ये टोटका फलदायी साबित हो सकता है। शास्त्रों के अनुसार एक ग्‍लास पानी थोड़ा सा सेंधा नमक डालें और इसे उस स्थान पर रख दें जहां घर के सदस्यों की नजर पड़ती हो।

सावन के अंतिम सोमवार करें ये उपाय

1- मिट्टी या अन्य धातु के शिवलिंग को घर में (छोटे रूप में) या किसी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित कर स्थापित करने से व्यापार में वृद्धि और नौकरी में तरक्की होने लगेगी।

2- सावन मास में अंतिम सोमवार के दिन स्फटिक के शिवलिंग को शुद्धजल, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करने, धूप-दीप जलाकर शिव मंत्रों का जप करने से समस्त बाधाओं का नाश होता है।

3- सावन मास के अंतिम सोमवार भोलेनाथ के साथ माता पार्वती का षोडषोपचार पूजन करने पर घर परिवार में धन-धान्य की कभी भी कमी नहीं रहती।

4- शिवजी का पूरा परिवार, उनके गण पूरे सावन में प्रसन्न रहते हैं, शिव पूजा के साथ सभी की पूजा करने पर व्यक्ति को जीवन में किसी भी चीज का अभाव नहीं रहता।

5- प्राणघातक बीमारी से प्राणों की रक्षा के लिए सावन सोमवार को महामृत्युंजय मंत्र का जप रुद्राक्ष की माला से करने पर पीड़ित जातक को शीघ्र लाभ होने लगता है।

महामृत्युंजय मंत्र

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ।।

जप लें इनमें से कोई भी एक मंत्र शिवजी करेंगे कृपा, होगी हर इच्छा पूरी

1- ।।ॐ नमः शिवाय।।

2- ।।ॐ ऐं ह्रीं शिव गौरीमय ह्रीं ऐं ॐ।।

3- ।।ॐ ह्रीं नमः शिवाय ह्रीं ॐ।।

4- ।।ॐ श्रीं ऐं ॐ।।

5- ।।ॐ हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया।

तथा मां कुरु कल्याणी कान्तकांता सुदुर्लभाम।।

6- ।।ॐ साम्ब सदा शिवाय नम:।।

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