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हबीबगंज नहीं अब रानी कमलापति रेलवे स्टेशन कहिए, जानिए- कौन थीं रानी कमलापति

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भोपाल। देश का पहला वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन हबीबगंज अब रानी कमलापति के नाम से जाना जाएगा। मध्यप्रदेश सरकार के नोटिफिकेशन जारी होते ही स्टेशन का नाम बदल दिया गया है। हबीबगंज स्टेशन का नाम रानी कमलापति किए जाने के बाद रेलवे ने नया कोड भी जारी कर दिया है।

पश्चिम-मध्य रेलवे ने आदेश जारी कर नया अल्फा कोड RKMP दिया है। अभी तक हबीबगंज का कोड HBJ था। फिलहाल हबीबगंज स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 के आउटर और प्लेटफॉर्म नंबर एक पर ही यह नाम बदला गया है। अन्य प्लेटफार्म और सेकंड एंट्री पर अभी कोई बदलाव नहीं हुआ है। बाहर भी रानी कमलापति रेलवे स्टेशन नाम का बैनर लगा दिया है। साथ ही, हबीबगंज नाम को कपड़े से ढंक दिया गया है।

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मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म Koo पर पोस्ट कर कहा कि ये गर्व, आनंद व उत्साह का क्षण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त रेलवे स्टेशन तैयार करवाया और अब इसका नाम हबीबगंज से बदलकर अंतिम हिंदू रानी गोंड वंश की रानी कमलापति जी के नाम किया। हम सभी प्रधानमंत्री जी का हृदय से धन्यवाद करते हैं।

जानें- कौन हैं रानी कमलापति…

इतिहास पर गौर करें, तो रानी कमलापति भोपाल की अंतिम गोंड आदिवासी और हिंदू रानी थीं। अपनी आबरू की रक्षा के लिए उन्होंने जल समाधि ले ली थी। भोपाल में आर्च ब्रिज और कमला पार्क उन्हीं के नाम पर है। गोंड समुदाय का राजवंश गिन्नौरगढ़ से बाड़ी तक फैला था। राजा रायसिंह का वर्ष 1362 से 1419 तक 57 वर्ष का कार्यकाल रहा। रायसिंह ने रायसेन किला बनवाया था। 14वीं ईस्वी में जगदीशपुर (इस्लाम नगर) में गोंड राजाओं का आधिपत्य रहा। इस महल को भी गोंड राजाओं द्वारा बनवाया गया था।

बचपन से ही बुद्धिमान और साहसी थीं कमलापति

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बता दें कि16वीं ईस्वी में चैन सिंह बाड़ी जिला रायसेन के अंतिम शासक रहे। 16वीं सदी में सीहोर जिले की सलकनपुर रियासत के राजा कृपाल सिंह सरौतिया थे। उनके यहां एक कन्या का जन्म हुआ। उसकी सुंदरता को देखते हुए उसका नाम कमलापति रखा गया।

वह बचपन से ही बुद्धिमान और साहसी थीं। शिक्षा, घुड़सवारी, मलयुद्ध और तीर कमान चलाने में उन्हें महारत हासिल थी। अनेक कलाओं से पारंगत राजकुमारी सेनापति भी रहीं। वह पिता के सैन्य बल और महिला साथी दल के साथ युद्ध में शत्रुओं से लोहा लेती थीं। पड़ोसी राज्य अकसर खेत, खलिहान, धन संपत्ति लूटने के लिए आक्रमण किया करते थे। सलकनपुर रियासत की देखरेख करने की जिम्मेदारी राजा कृपाल सिंह सरौतिया और उनकी बेटी राजकुमारी कमलापति पर थी।

राजा निजाम शाह से हुआ था विवाह

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भोपाल से 55 किमी दूर 750 गांवों को मिलाकार गिन्नौरगढ़ राज्य बनाया गया जो देहलावाड़ी के पास आता है। इसके राजा सूराज सिंह शाह (सलाम) थे। इनके पुत्र निजाम शाह थे। निजाम शाह बहादुर, निडर और हर कार्यक्षेत्र में निपुण थे। उन्हीं से रानी कमलापति का विवाह हुआ था। राजा निजाम शाह ने रानी कमलापति को प्रेम स्वरूप 1700 ईस्वी में भोपाल में सात मंजिला महल का निर्माण करवाया, जो लखौरी ईंट और मिट्टी से बनवाया गया था। यह महल अपनी भव्यता, सुंदरता और खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध था। रानी कमलापति का वैवाहिक जीवन काफी खुशहाल व्यतीत हो रहा था। उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई, जिसका नाम नवल शाह था।

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ये गर्व, आनंद व उत्साह का क्षण है कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त रेलवे स्टेशन तैयार करवाया और अब इसका नाम हबीबगंज से बदलकर अंतिम हिंदू रानी गोंड वंश की रानी कमलापति जी के नाम किया। हम सभी प्रधानमंत्री जी का हृदय से धन्यवाद करते हैं। Shivraj Singh Chouhan (@chouhanshivraj) 13 Nov 2021

रिश्तेदार ने जहर देकर निजाम शाह को मार दिया था

सलकनपुर राज्य में बाड़ी किले के जमींदार का लड़का चैन सिंह राजकुमारी कमलापति की शादी होने के बाद भी उनसे विवाह करने की इच्छा रखता था। उसने कई बार राजा निजाम शाह को मारने की कोशिश की, जिसमें वह असफल रहा। एक दिन प्रेम पूर्वक उसने राजा निजाम शाह को भोजन पर आमंत्रित किया और भोजन में जहर देकर हत्या कर दी। राजा निजाम शाह की मौत की खबर ने पूरे गिन्नौरगढ़ में खलबली पैदा कर दी। इसके बाद रानी कमलापति को अकेले जानकर उन्हें पाने की नीयत से गिन्नौरगढ़ के किले पर उसने हमला कर दिया। रानी कमलापति ने उस समय अपने कुछ वफादारों और 12 वर्षीय बेटे नवल शाह के साथ भोपाल में बने इस महल में छिप जाने का निर्णय लिया। यह उस समय सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण महल था।

बदला लेने के लिए रानी ने ली थी अफगानियों की मदद

कुछ दिन भोपाल में समय बिताने के बाद रानी कमलापति को पता चला कि भोपाल की सीमा के पास कुछ अफगानी आकर रुके हुए हैं। इन्होंने जगदीशपुर (इस्लाम नगर) पर आक्रमण कर उसे अपने कब्जे में ले लिया था। इन अफगानों का सरदार दोस्त मोहम्मद खान था, जो पैसा लेकर युद्ध लड़ते थे। लोक मान्यता है कि रानी कमलापति ने दोस्त मोहम्मद को एक लाख मुहरें देकर चैन सिंह पर हमला करने को कहा था।

दोस्त मोहम्मद ने की थी चैन सिंह की हत्या

दोस्त मोहम्मद ने गिन्नौरगढ़ के किले पर हमला कर दिया था। जिसमें चैन सिंह मारा गया और किले को हड़प लिया। रानी कमलापति को अपने छोटे बेटे की परवरिश की चिंता थी। उन्होंने दोस्त मोहम्मद के इस कदम पर कोई आपत्ति नहीं जताई, लेकिन दोस्त मोहम्मद अब सम्पूर्ण भोपाल की रियासत पर कब्जा करना चाहता था। उसने रानी कमलापति को अपने हरम में शामिल होने और शादी करने का प्रस्ताव रखा।

रानी के बेटे से मोहम्मद के बीच हुआ था युद्ध

दोस्त मोहम्मद खान के नापाक इरादे को देखते हुए रानी कमलापति का 14 वर्षीय बेटा नवल शाह अपने 100 लड़ाकों के साथ लालघाटी में युद्ध करने चला गया। इस घमासान युद्ध में मोहम्मद खान ने नवल शाह को मार दिया। इस स्थान पर इतना खून बहा कि यहां की जमीन लाल हो गई और इस कारण इसे लालघाटी कहा जाने लगा। इस युद्ध में 2 लड़के बच गए थे, जो किसी तरह अपनी जान बचाते हुए मनुआभान की पहाड़ी पर पहुंच गए। उन्होंने वहां काला धुआं कर रानी कमलापति को संकेत दिया कि वे युद्ध हार गए हैं और आपकी जान को खतरा है।

रानी कमलापति ने ली जल समाधि

रानी कमलापति ने विषम परिस्थति को देखते हुए अपनी इज्जत को बचाने के लिए बड़े तालाब बांध का संकरा रास्ता खुलवाया। इससे बड़े तालाब का पानी रिसकर दूसरी तरफ आने लगा। जिसे आज छोटा तालाब के रूप में जाना जाता है। रानी कमलापति ने महल की समस्त धन, दौलत, जेवरात, आभूषण आदि इसमें डालकर स्वयं जलसमाधि ले ली। दोस्त मोहम्मद खान जब अपनी सेना को साथ लेकर लालघाटी से इस किले तक पहुंचा, उतनी देर में सब कुछ खत्म हो गया था। मोहम्मद खान को न रानी कमलापति मिली और न ही धन दौलत। रानी कमलापति ने जीते जी भोपाल पर परधर्मी को नहीं बैठने दिया। स्रोतों के अनुसार रानी कमलापति ने वर्ष 1723 में अपनी जीवनलीला खत्म की थी। उनकी मृत्यु के बाद दोस्त मोहम्मद खान के साथ ही नवाबों का दौर शुरू हुआ

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Shubham Sharma
Shubham Sharma is an Indian Journalist and Media personality. He is the Director of the Khabar Arena Media & Network Private Limited , an Indian media conglomerate, and founded Khabar Satta News Website in 2017.

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