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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में UP ने लगाई 12 पायदान की छलांग, निवेशकों की नजर में चढ़ गया उत्तर प्रदेश

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लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में प्रदेश हर क्षेत्र में रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहा है। इसी में एक है ईज ऑफ डूइंग बिजनेस। जिसमें उत्तर प्रदेश ने 12 पायदान की जोरदार छलांग लगाई है।

पर्याप्त संसाधन और संभावनाओं के बावजूद पिछड़ते रहे उत्तर ïप्रदेश के लिए औद्योगिकीकरण की नजरिए से तो ‘अच्छे दिन’ कहे ही जा सकते हैं। चीनी ड्रैगन की सतत चुनौतियों और इस बीच दुनिया भर की आर्थिक गतिविधियों पर कोरोना के प्रकोप के प्रदेश का आज का ‘रिपोर्ट कार्ड’ दाद देता है कि हां, यूपी वाले उद्यमशील हैं और योगी सरकार लगनशील।

बिजनेस रिफॉर्म्सएक्शन प्लान पर चार वर्ष लगातार हुए काम का ही नतीजा है कि देखते ही देखते उत्तर प्रदेश निवेशकों की नजर में चढ़ गया। भारत सरकार की जारी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में 2017 के मुकाबले यूपी का 12 पायदान की छलांग के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच जाना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण भी है।

उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2018 में लखनऊ में इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की। इसमें कुल 4.68 लाख करोड़ रुपये के निवेश करार (एमओयू) हुए। इसके बाद चुनौती थी इन करार-समझौतों को जमीन पर उतारने की।

नई औद्योगिक नीति लागू कर योगी आदित्यनाथ सरकार ने बिजनेस रिफॉर्म्स एक्शन प्लान पर काम शुरू किया। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए 21 नई नीतियां बनाई गईं। निवेश मित्र पोर्टल बनाकर उस पर 227 सेवाएं शामिल कर उद्यमियों को 97840 एनओसी ऑनलाइन जारी की गईं। सुधारों के फलस्वरूप न सिर्फ पुराने करार धरातल पर उतरते गए, बल्कि नए निवेश प्रस्ताव भी लगातार सरकार को मिले।

सरकार का आंकड़ा कहता है कि लगभग तीन लाख करोड़ रुपये की निवेश परियोजनाओं पर जमीन पर काम शुरू हो चुका है। इनमें पचास हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं में तो वाणिज्यिक उत्पादन शुरू भी हो चुका है। 2019 में भारत सरकार ने जब ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग जारी की तो यूपी 14वें पायदान से बढ़कर सीधे दूसरे स्थान पर पहुंच गया।

कोरोना काल में भी न रुका काम: उत्तर प्रदेश सरकार वर्ष 2020 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट करना चाहती थी, लेकिन कोरोना की वजह से नहीं हो सकी। ऐसे में औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना और सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने विदेशी राजदूत, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रतिनिधियों आदि से लगातार वर्चुअल बैठकें कीं। उन प्रयासों का ही नतीजा रहा कि कोरोना काल में भी उत्तर प्रदेश को 56 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव नए मिले। हाल ही में बंगलुरू में आयोजित एयरो इंडिया शो में भी उप्र डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में निवेश के लिए 4500 करोड़ रुपये के 13 नए प्रस्ताव सरकार को मिले। डिफेंस कॉरिडोर के लिए करीब 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव पहले ही मिल गए थे, जिससे रक्षा उत्पादन क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी संभावनाएं तैयार हो रही हैं।

ओडीओपी ने दिलाई दुनिया में पहचान: उद्योग के क्षेत्र में सरकार के नवाचार में एक जिला एक उत्पाद योजना बेहद अहम है। छोटे उद्यमियों, कारीगरों और शिल्पियों को प्रोत्साहित करने के लिए योगी सरकार ने आते ही एक जिला एक उत्पाद योजना शुरू की। हर जिले से एक विशेष उत्पाद को चुनकर उसकी मार्केटिंग एवं ब्रांडिंग के साथ ही करीब नौ हजार करोड़ रुपये ऋण की सुविधा सरकार ने उपलब्ध कराई। 50 लाख नई एमएसएमई इकाइयों की स्थापना का दावा है। इस योजना की वजह से प्रदेश के निर्यात में लगभग 38 फीसद की बढ़ोतरी हुई।

सुधार के कुछ कदम

– नए उद्योगों को विभिन्न लाइसेंस स्वीकृतियां 72 घंटे में देने की व्यवस्था।

– एक हजार दिन तक बिना किसी एनओसी के उद्योग स्थापित करने व चलाने की सुविधा।

– इन्वेस्ट यूपी के अंतर्गत हेल्प डेस्क की स्थापना।

– उद्यम सारथी एप बनाकर उसके जरिए उद्योग-कारोबार संबंधी सुविधा।

– नई डाटा सेंटर नीति और इलेक्ट्रॉनिक्स नीति।

– पिछड़े क्षेत्रों के लिए त्वरित निवेश प्रोत्साहन नीति।

– बुंदेलखंड और पूर्वांचल में निजी औद्योगिक पार्कों की पात्रता सीमा सौ एकड़ से घटाकर बीस एकड़ कर दी गई।

– लॉजिस्टिक क्षेत्र को उद्योग का दर्जा।

– हर जिले के लिए अलग मएमएसएमई एक्शन प्लान।

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खबर सत्ता डेस्क, कार्यालय संवाददाता

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