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MP के किसानों के लिए खुशखबरी: समर्थन मूल्य पर गेंहू खरीदी उपार्जन होगा 15 मार्च से 05 मई 2025 तक

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा रबी विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत किसानों को समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की सुविधा प्रदान की जा रही है। किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए गेहूं खरीदी उपार्जन प्रक्रिया के तहत पंजीयन की अंतिम तिथि 31 मार्च 2025 निर्धारित की गई है। इस लेख में हम आपको किसान पंजीयन प्रक्रिया, गेहूं खरीदी तिथि, समर्थन मूल्य, बोनस राशि, आवश्यक दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी विस्तार से बताएंगे।

गेहूं उपार्जन हेतु किसान पंजीयन प्रक्रिया

सरकार द्वारा गेहूं उपार्जन के लिए किसानों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। पंजीकरण के बिना किसान समर्थन मूल्य का लाभ नहीं उठा सकते। किसान पंजीयन की अंतिम तिथि 31 मार्च 2025 तक रखी गई है। सभी किसानों को इस अवधि के भीतर पंजीकरण कराना आवश्यक है।

पंजीयन करने के लिए आवश्यक दस्तावेज

किसान पंजीयन हेतु निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होगी:

  • आधार कार्ड (Aadhaar Card)
  • बैंक पासबुक की छायाप्रति (Bank Passbook)
  • भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र (Khasra-Khatauni या भू-अधिकार पत्र)
  • मोबाइल नंबर (Mobile Number)
  • सम्बंधित राजस्व विभाग से जारी भूमि अभिलेख

पंजीयन कहां करें?

किसान अपने नजदीकी कृषि कार्यालय, जनपद पंचायत, ग्राम पंचायत या ऑनलाइन किसान पोर्टल पर जाकर अपना पंजीयन कर सकते हैं। ऑनलाइन पंजीयन के लिए राज्य सरकार द्वारा आधिकारिक पोर्टल भी उपलब्ध कराया गया है, जहां किसान स्वयं या लोक सेवा केंद्र (CSC) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

सिवनी, मध्यप्रदेश में अदिकृत CSC सेंटर की जानकारी

सिवनी में किसान शुभम कंप्यूटर जाकर अपना गेहू उपार्जन के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते है जो कि एक अधिकृत CSC CENTER है. शुबहा कोम्पुतेर्स पहुँचने के लिए नीचे दिए MAP पर क्लिक करें

गेहूं खरीदी उपार्जन अवधि और स्थान

गेहूं खरीदी उपार्जन अवधि 15 मार्च 2025 से 05 मई 2025 तक निर्धारित की गई है। इस दौरान किसान अपनी उपज को सरकार द्वारा स्थापित गेहूं उपार्जन केंद्रों पर ले जाकर विक्रय कर सकते हैं।

किसान गेहूं की बिक्री कहां कर सकते हैं?

राज्य सरकार ने सभी जिलों में अधिकृत गेहूं उपार्जन केंद्र स्थापित किए हैं। प्रत्येक किसान को उनके नजदीकी उपार्जन केंद्र का निर्धारण किया जाएगा, जहां वे अपनी उपज का विक्रय कर सकते हैं।

गेहूं विक्रय हेतु आवश्यक प्रक्रियाएं

  1. पहले से पंजीकृत किसानों को ही गेहूं विक्रय की अनुमति होगी।
  2. किसानों को उपार्जन केंद्र पर अपने पंजीकरण नंबर एवं पहचान पत्र के साथ उपस्थित होना होगा।
  3. विक्रय की जाने वाली उपज गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।
  4. गेहूं की नमी 12% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  5. उपज की मात्रा सत्यापन के बाद भुगतान किसान के बैंक खाते में किया जाएगा।

गेहूं का समर्थन मूल्य और बोनस राशि

सरकार द्वारा रबी विपणन वर्ष 2025-26 के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य 2425 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इसके अतिरिक्त, सरकार द्वारा बोनस राशि 175 रुपये प्रति क्विंटल दी जाएगी, जिससे कुल मूल्य 2600 रुपये प्रति क्विंटल होगा।

समर्थन मूल्य और बोनस की संपूर्ण जानकारी:

विवरणमूल्य (रुपये प्रति क्विंटल)
समर्थन मूल्य (MSP)2425 रुपये
बोनस राशि175 रुपये
कुल प्राप्त मूल्य2600 रुपये

किसानों को भुगतान कैसे मिलेगा?

गेहूं विक्रय के बाद किसानों को भुगतान उनके बैंक खाते में सीधा ट्रांसफर किया जाएगा। भुगतान प्रक्रिया पूरी होने में 7-10 कार्य दिवस लग सकते हैं।

गेहूं उपार्जन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न

क्या पंजीकरण कराना अनिवार्य है?

हाँ, बिना पंजीकरण के किसान गेहूं उपार्जन केंद्रों पर अपनी उपज नहीं बेच सकते।

क्या सभी किसान लाभ उठा सकते हैं?

नहीं, केवल वे किसान जो पंजीकृत हैं और जिनके पास भूमि के प्रमाणित दस्तावेज हैं, वही इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

अगर समर्थन मूल्य से अधिक बाजार मूल्य मिले तो क्या करें?

किसान चाहें तो खुले बाजार में अपनी उपज को बेच सकते हैं, लेकिन समर्थन मूल्य से अधिक मूल्य मिलना तय नहीं है।

गेहूं विक्रय का भुगतान कितने दिनों में मिलेगा?

गेहूं विक्रय के बाद भुगतान 7 से 10 दिनों के भीतर किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस सिवनी में महान आंचलिक रचनाकार फणीश्वरनाथ रेणु की जयंती पर हुआ आयोजन

हिंदी साहित्य के महान कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु की 104वीं जयंती के अवसर पर पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के हिंदी विभाग में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लघु वृत्तचित्र और वक्तव्य के माध्यम से विद्यार्थियों और प्राध्यापकों ने रेणु के अमूल्य योगदान को याद किया। हिंदी साहित्य में आंचलिकता को स्थापित करने में रेणु की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सुभद्रा कुमारी चौहान कक्ष में फणीश्वरनाथ रेणु के छायाचित्र पर पुष्प अर्पण के साथ हुआ। हिंदी परिषद् के छात्र पदाधिकारी, शिक्षक और प्राध्यापक इस श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित रहे।

विशेष वक्ता प्रो. सत्येन्द्र कुमार शेन्डे ने अपने संबोधन में कहा कि फणीश्वरनाथ रेणु हिंदी और विश्व साहित्य के महान रचनाकारों में से एक हैं। वे भारतीय लोक जीवन के सबसे बड़े कथा गायक थे। उन्होंने साहित्य में आम बोलचाल की भाषा को प्रतिष्ठा दिलाई। रेणु का सबसे बड़ा योगदान हिंदी साहित्य में आंचलिकता की स्थापना करना रहा। उन्होंने अपने साहित्य में लोक जीवन की धड़कन को उकेरा।

उन्होंने यह भी बताया कि 1950 की नेपाल जनक्रांति और 1974 के जे.पी. आंदोलन में रेणु की भूमिका अग्रगण्य रही। उनके कालजयी उपन्यास ‘मैला आँचल’ को हिंदी साहित्य की एक अमूल्य धरोहर माना जाता है।

रेणु की साहित्यिक विरासत

विशेष वक्ता डॉ. सविता मसीह ने अपने उद्बोधन में कहा कि फणीश्वरनाथ रेणु आज भी हिंदी साहित्य के अत्यंत लोकप्रिय साहित्यकार हैं। उनकी रचनाएँ शोषण और जातिवाद के खिलाफ एक सशक्त आवाज़ के रूप में उभरीं। उन्होंने कहा कि कोसी नदी के अकाल और बाढ़ पर आधारित उनकी कृति ‘ऋण जल धन जल’ को अवश्य पढ़ना चाहिए। साथ ही उनकी प्रसिद्ध कहानियाँ ‘लाल पान की बेगम’, ‘ठेस’ और ‘तीसरी कसम उर्फ मारे गए गुलफाम’ भी हिंदी साहित्य की अनमोल धरोहर हैं।

वृत्तचित्र का प्रदर्शन

फणीश्वरनाथ रेणु के जीवन पर आधारित वृत्तचित्र को इस कार्यक्रम में प्रदर्शित किया गया, जिससे विद्यार्थियों को उनके साहित्यिक योगदान से परिचित कराया गया। वृत्तचित्र को डॉ. सविता मसीह के निर्देशन में दिखाया गया।

इसके साथ ही उनकी कालजयी कहानी ‘तीसरी कसम उर्फ मारे गए गुलफाम’ पर आधारित फिल्म ‘तीसरी कसम’ के भावुक दृश्यों को भी प्रदर्शित किया गया। यह फिल्म राज कपूर और वहीदा रहमान के अभिनय से सजी एक क्लासिक कृति है, जो सिनेमा और साहित्य के गहरे संबंधों को दर्शाती है।

रेणु के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा

जनभागीदारी शिक्षक अमितोष सनोडिया और छाया राय ने भी रेणु के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रेणु के साहित्य में ग्रामीण भारत की सच्ची झलक मिलती है। उनके पात्र समाज के हाशिए पर खड़े लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी कहानियों में गांव की संस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराएँ जीवंत रूप से उभरती हैं।

महत्वपूर्ण साहित्यिक योगदान

रेणु का साहित्य हिंदी साहित्य में सामाजिक यथार्थवाद को गहराई से प्रस्तुत करता है। उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं:

  • ‘मैला आँचल’ – हिंदी का पहला आंचलिक उपन्यास, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम, ग्रामीण जीवन और सामाजिक संघर्ष का चित्रण किया गया है।
  • ‘परती परिकथा’ – इसमें बिहार के किसानों के संघर्ष को दर्शाया गया है।
  • ‘कितने चौराहे’ – यह उपन्यास समाज की बदलती परिस्थितियों और संघर्ष को रेखांकित करता है।
  • ‘ठेस’ – एक संवेदनशील कहानी जो मानवीय भावनाओं को गहराई से प्रस्तुत करती है।
  • ‘तीसरी कसम’ – यह एक अमर प्रेम कहानी है, जिसे बाद में फिल्म के रूप में प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम में विशिष्ट जनों की उपस्थिति

कार्यक्रम में राजनीति विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. ज्योत्सना नावकर, हिंदी परिषद् के छात्र पदाधिकारी अंबिका मिश्रा, मेहुल सिंह बिसेन, मयंक सेन, निकिता पंचेश्वर, रानी पगारे सहित बड़ी संख्या में यूजी और पीजी के छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। इसके अलावा, कॉलेज स्टाफ के सदस्य सुनीता नागले भी इस विशेष अवसर पर उपस्थित रहीं।

फणीश्वरनाथ रेणु का साहित्य आज भी हिंदी साहित्य के प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणा स्रोत बना हुआ है। उनके साहित्य में ग्रामीण भारत की जीवंत झलक, सामाजिक समस्याओं का चित्रण और मानवीय संवेदनाओं की गहराई देखने को मिलती है। उनकी जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए प्रेरणादायक रहा और उनके साहित्य को गहराई से समझने का अवसर प्रदान किया।

सिवनी के कान्हीवाडा में अवैध शराब, गौ तस्करी, जुआ-सट्टा का आतंक: थाना प्रभारी ओमेश्वर की नाकामी का खौफनाक सच

Seoni, Kanhiwada News: सिवनी जिले के कान्हीवाड़ा थाना क्षेत्र में अवैध गतिविधियों का बोलबाला दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। अवैध शराब, गौ तस्करी, जुआ-सट्टा जैसे अपराध क्षेत्र में खुलेआम फल-फूल रहे हैं, लेकिन इन अपराधों पर अंकुश लगाने में पुलिस प्रशासन पूरी तरह असफल साबित हो रहा है।

थाना प्रभारी की भूमिका पर उठे सवाल

क्षेत्रीय जनता का कहना है कि थाना प्रभारी ओमेश्वर ठाकरे अपराध रोकने में पूरी तरह विफल रहे हैं। आठ महीने से अधिक समय से पदस्थ रहने के बावजूद, अपराधों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई है। चोरी, लूट, अवैध शराब बिक्री, गौ तस्करी और सट्टेबाजी जैसी गैरकानूनी गतिविधियां बेलगाम हो चुकी हैं, जिससे क्षेत्रवासियों में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है।

अवैध शराब कारोबार: पुलिस की मिलीभगत या लापरवाही?

ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब का कारोबार जोरों पर है। क्षेत्र के कई गांवों में अवैध शराब की भट्ठियाँ धड़ल्ले से संचालित की जा रही हैं, जहां से नशीले पदार्थों की सप्लाई हो रही है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पुलिस को इन अवैध गतिविधियों की पूरी जानकारी है, लेकिन थाना प्रभारी कोई ठोस कदम उठाने में नाकाम साबित हो रहे हैं

गौ तस्करी पर प्रशासन की चुप्पी चिंता का विषय

गौ तस्करी का नेटवर्क इस क्षेत्र में तेजी से फैलता जा रहा है। गौवंश की तस्करी कर उन्हें प्रदेश के बाहर भेजा जा रहा है, लेकिन पुलिस इस पर कार्रवाई करने से बच रही है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठनों ने इस मुद्दे पर कई बार विरोध प्रदर्शन किए हैं, लेकिन प्रशासन कान में तेल डाले बैठा है।

जुआ-सट्टा का काला कारोबार: कौन है जिम्मेदार?

कान्हीवाड़ा क्षेत्र में जुआ और सट्टा का नेटवर्क मजबूत हो चुका है। कुछ प्रभावशाली लोगों की शह पर यह अवैध धंधा तेजी से बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस के संरक्षण में ही सट्टा बाजार फल-फूल रहा है। सट्टेबाजी में युवा बड़ी संख्या में फंसते जा रहे हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो रहा है।

थाने से 100 मीटर दूर चोरी, लेकिन पुलिस बेखबर

कुछ दिन पहले थाने से महज 100 मीटर की दूरी पर एक बड़ी चोरी हो गई, लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर पाई। यह घटना थाना प्रभारी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर ऐसा कैसे हो सकता है कि थाने के पास ही अपराध हो और पुलिस को इसकी भनक तक न लगे?

जनता में आक्रोश, पुलिस अधीक्षक से की शिकायत

विश्व हिन्दू परिषद् और बजरंग दल ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर थाना प्रभारी ओमेश्वर ठाकरे को हटाने की मांग की है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि जल्द ही अपराधों पर लगाम नहीं लगाई गई तो वे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

क्या होगा प्रशासन की अगली कार्रवाई?

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पुलिस अधीक्षक थाना प्रभारी के खिलाफ कोई कार्रवाई करेंगे या फिर अपराधियों को संरक्षण देने का यह सिलसिला जारी रहेगा।

सिवनी: कान्हीवाडा थाना प्रभारी ओमेश्वर ठाकरे की गौ तस्करों से सांठगांठ, गौतस्करी की सूचना देने वाले गौरक्षकों पर दर्ज की FIR

सिवनी: सिवनी जिले के कान्हीवाडा थाना प्रभारी ओमेश्वर ठाकरे की गौ तस्करी के मामलों में निष्पक्षता पर संदेह दिखाई पड़ता है. मध्यप्रदेश के कन्हीवाड़ा थाना में पदस्थ पुलिस अधिकारी श्री ओमेश्वर ठाकरे पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल जैसे संगठनों ने उन पर गौ तस्करों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है। शिकायतों के अनुसार, ठाकरे पर गौ तस्करों को संरक्षण देने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने में लापरवाही बरतने का आरोप है।

स्थानीय संगठनों का आरोप: गौ तस्करों को मिल रहा संरक्षण

विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के अनुसार, जब उन्होंने गौ तस्करी की सूचना पुलिस को दी, तो तस्करों पर कठोर कार्रवाई करने के बजाय, पुलिस ने उल्टा संगठन के कार्यकर्ताओं के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर दिए। इससे स्थानीय हिंदू समुदाय में गहरी नाराजगी फैल गई है।

गौ रक्षा बनाम पुलिस प्रशासन की भूमिका

गौ रक्षा के मुद्दे पर पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता पहले भी सवालों के घेरे में रही है, लेकिन इस बार मामला पुलिस अधिकारी की संदिग्ध भूमिका से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि ठाकरे गौ तस्करी से जुड़े गिरोहों के साथ सांठगांठ कर रहे हैं और उनके विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई करने से बच रहे हैं।

सिवनी एसपी के पास शिकायत लेकर पहुंचा: विश्व हिन्दू परिषद् – बजरंग दल

इस मामले को लेकर विश्व हिन्दू परिषद् – बजरंग दल के पदाधिकारियों द्वारा सिवनी पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर सभी सबूत और जानकारी दी गयी और ओमेश्वर ठाकरे जैसे थाना प्रभारी जो गौ तस्करों का साथ देते है और गौरक्षकों पर फर्जी मामले दर्ज करते है ऐसे वर्दीधारियों पर सख्त से सख्त कार्यवाही की मांग की है.

हिंदू संगठनों और स्थानीय जनता की मांग

  1. श्री ओमेश्वर ठाकरे के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू की जाए।
  2. गौ तस्करी में शामिल सभी लोगों पर कठोर कानूनी कार्रवाई हो।
  3. पुलिस प्रशासन को निष्पक्ष और पारदर्शी कार्यप्रणाली अपनानी चाहिए।
  4. भविष्य में ऐसे मामलों में कार्रवाई में देरी न हो और गौ रक्षा से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जाए।

पुलिस विभाग की साख पर उठे सवाल

इस प्रकरण ने मध्यप्रदेश पुलिस विभाग की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अगर किसी पुलिस अधिकारी पर संगठित अपराधियों से मिलीभगत का आरोप लगता है और उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो यह कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह मामला न केवल न्याय व्यवस्था के लिए खतरा है, बल्कि समाज में अविश्वास और असुरक्षा की भावना को भी बढ़ावा देगा। इसलिए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए

सिवनी में हिन्दू नववर्ष पर भव्य वाहन रैली का आयोजन: 30 मार्च को मिशन स्कूल से निकलेगी वाहन रैली

Hindu Nav Varsh 2025: हर वर्ष हिन्दू नववर्ष के शुभ अवसर पर युवा हिन्दू उत्सव समिती द्वारा एक भव्य वाहन रैली का आयोजन किया जाता है। यह केवल एक आयोजन मात्र नहीं, बल्कि हिन्दू धर्म और संस्कृति के प्रचार-प्रसार का एक सशक्त माध्यम है। इस आयोजन के माध्यम से युवा पीढ़ी में धर्म के प्रति जागरूकता उत्पन्न की जाती है और उन्हें सनातन धर्म की महत्ता से अवगत कराया जाता है।

हिन्दू नववर्ष वाहन रैली की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इस भव्य आयोजन की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन जिला प्रचारक अखिलेश अमोली जी ने हिन्दू उत्सव समिति का गठन किया। इसी समिति के सफल संयोजन में प्रथम बार हिन्दू नववर्ष वाहन रैली निकाली गई थी। तब से लेकर अब तक यह आयोजन युवा हिन्दू उत्सव समिती के तत्वावधान में लगातार सफलतापूर्वक आयोजित किया जा रहा है।

आयोजन की मुख्य विशेषताएँ

समस्त हिन्दू संगठनों एवं राजनीतिक दलों के हिन्दू समाज का सहयोग – यह आयोजन किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि यह सम्पूर्ण हिन्दू समाज का आयोजन है। इसमें विभिन्न हिन्दू संगठन और धार्मिक संस्थाएँ मिलकर सहभागिता निभाते हैं। कोई अध्यक्ष नहीं, सभी सदस्य समान रूप से जिम्मेदार – इस समिति में कोई अध्यक्ष या पदाधिकारी नहीं है। सभी सदस्य समान रूप से इस आयोजन की जिम्मेदारी उठाते हैं।

धर्म और संस्कृति का प्रचार-प्रसार – इस रैली के माध्यम से सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का संदेश दिया जाता है। युवा पीढ़ी को धर्म से जोड़ने का प्रयास – इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवा वर्ग में हिन्दू धर्म के प्रति आस्था को मजबूत करना और उन्हें संस्कृति की रक्षा के लिए प्रेरित करना है।

यह समिती सर्व हिन्दू संगठन एवं राजनीतिक दलों के हिन्दुओ से मिलकर बनी है इस समिती का कोई अध्यक्ष नही है सभी सदस्य है और इस समिती के सदस्यों द्वारा पूर्ण जिम्मेदारी के साथ यह आयोजन किया जाता है इस वर्ष भी किया जायेगा..यह आयोजन एक ही होता है इसके बाद श्रीराम नवमी महापर्व को श्रीराम जन्मोत्सव समिती के नेतृव में किया जाता है..

आयोजन का महत्व

हिन्दू नववर्ष केवल तिथि या त्योहार मात्र नहीं है, बल्कि यह धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक भी है। यह आयोजन हिन्दू समाज की एकजुटता को दर्शाने का महत्वपूर्ण अवसर होता है।

144 वर्षों बाद महाकुंभ और इसकी प्रेरणा

इस वर्ष महाकुंभ का आयोजन भी 144 वर्षों बाद हुआ है, जिसने जातीय भेदभाव को समाप्त करने और समरसता का संदेश देने का कार्य किया। इसी प्रेरणा से युवा हिन्दू उत्सव समिती आप सभी सनातन धर्मावलम्बियों से अपील करती है कि हम सब इस भव्य आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लें और अपनी सनातनी एकता का परिचय दें।

हिन्दू नववर्ष वाहन रैली 2025 का कार्यक्रम

  • 📅 दिनांक: 30 मार्च 2025
  • 📍 स्थान: मिशन स्कूल ग्राउंड
  • ⏰ समय: दोपहर 2 बजे
  • 🎤 आयोजनकर्ता: युवा हिन्दू उत्सव समिती

रैली में भाग लेने की अपील

हम सभी हिन्दू भाइयों एवं बहनों से आग्रह करते हैं कि वे इस भव्य आयोजन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। यह आयोजन न केवल हमारी संस्कृति की रक्षा के लिए है, बल्कि हमारी एकता और शक्ति को भी दर्शाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

Kubereshwar Dham Sehore: प्रदीप मिश्रा के कुबेरेश्वर धाम में शिव महापुराण कथा महोत्सव में तीसरी मौत

Kubereshwar Dham Sehore: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सीहोर जिले के कुबेरेश्वर धाम (Kubereshwar Dham) में चल रहे शिव महापुराण कथा महोत्सव (Shiv Mahapuran Mahotsav) में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। यह धार्मिक आयोजन 25 फरवरी से प्रारंभ हुआ था और इसे लेकर भक्तों में गहरी आस्था देखी जा रही है। हालांकि, भीषण गर्मी और भीड़भाड़ के कारण स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें सामने आ रही हैं। इसी क्रम में गुजरात की 55 वर्षीय मंजू की मौत हो गई, जिससे तीन दिनों में मरने वालों की संख्या तीन हो गई

तीन दिनों में तीन मौतें, प्रशासन की तैयारियों पर सवाल

रविवार को जबलपुर निवासी 25 वर्षीय गोलू कोष्टा की तबीयत अचानक खराब हो गई, जिसके बाद उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
शनिवार को भी कानपुर निवासी विजेंद्र स्वरूप की कार्यक्रम स्थल पर ही मृत्यु हो गई थी।

सीहोर के सीएमएचओ डॉ. सुधीर डेहरिया ने इन दोनों घटनाओं की पुष्टि की है।

मृतकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि मेडिकल सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध कराई गई थीं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

10 लाख श्रद्धालुओं की भीड़, अव्यवस्था चरम पर

कुबेरेश्वर धाम में चल रहे इस शिव महापुराण कथा महोत्सव में रोजाना लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। रविवार को कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा सुनने के लिए हजारों लोग एकत्रित हो गए, जिससे कार्यक्रम स्थल पर भारी अव्यवस्था फैल गई

विशेष रूप से रविवार को भीषण गर्मी के कारण श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ गई
लोगों को पानी और चिकित्सा सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ा।

प्रशासन ने क्या किए थे इंतजाम?

सीहोर जिला प्रशासन ने पहले ही दावा किया था कि मेडिकल सुविधाएं पूरी तरह मुहैया कराई जाएंगी। कलेक्टर द्वारा सीएमएचओ को निगरानी के आदेश दिए गए थे
इसके तहत:
आपातकालीन स्थिति के लिए मिनी आईसीयू की व्यवस्था की गई थी
एंबुलेंस और मेडिकल स्टाफ मौके पर तैनात किए गए थे
भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई थी

इसके बावजूद तीन लोगों की मौत ने इन व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है।

श्रद्धालुओं को बरतनी चाहिए सावधानी

धार्मिक आयोजनों में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को अपनी स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। भारी भीड़ वाले आयोजनों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम अधिक होते हैं, इसलिए:

🔹 भरपूर पानी पिएं और हाइड्रेटेड रहें
🔹 अगर अस्वस्थ महसूस करें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें
🔹 भीड़ से बचने के लिए सुबह या दोपहर के समय आयोजन स्थल पर जाने से परहेज करें
🔹 धूप और गर्मी से बचने के लिए टोपी या छाता साथ रखें

कुबेरेश्वर धाम में शिव महापुराण कथा महोत्सव एक भव्य धार्मिक आयोजन है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। लेकिन भीषण गर्मी और अव्यवस्था के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है। प्रशासन को चाहिए कि स्वास्थ्य और सुरक्षा के उपाय और अधिक मजबूत बनाए जाएं ताकि इस तरह की अप्रिय घटनाएं न हों।

HOLI SPECIAL TRAIN: भोपाल, कोटा, जबलपुर, रीवा, रानी कमलापति और दानापुर के बीच चलेंगी 5 जोड़ी होली-स्पेशल ट्रेन

HOLI SPECIAL TRAIN: होली का पर्व नजदीक आते ही भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष ट्रेनों का संचालन करता है। इसी क्रम में पश्चिम मध्य रेलवे प्रशासन ने अतिरिक्त यात्री भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पांच जोड़ी विशेष ट्रेनें चलाने की घोषणा की है। ये ट्रेनें मुख्यतः रीवा (Rewa), रानी कमलापति (Rani Kamlapati), जबलपुर (Jabalpur), कोटा (Kota) और दानापुर (Danapur) के बीच संचालित की जाएंगी, जिससे यात्रियों को होली के दौरान आसान और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिल सके।

HOLI SPECIAL TRAIN का विवरण:

1. ट्रेन संख्या 02186/02185 रीवा-रानी कमलापति-रीवा सुपरफास्ट स्पेशल (02 ट्रिप)

  • ट्रेन संख्या 02186: रीवा से रानी कमलापति 08 मार्च और 12 मार्च को दोपहर 12:30 बजे प्रस्थान करेगी और रात 9:10 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगी।
  • ट्रेन संख्या 02185: रानी कमलापति से रीवा 08 मार्च और 12 मार्च को रात 10:15 बजे रवाना होगी और सुबह 7:30 बजे रीवा पहुंचेगी।

2. ट्रेन संख्या 01704/01703 रीवा-रानी कमलापति-रीवा स्पेशल (01 ट्रिप)

  • ट्रेन संख्या 01704: रीवा से रानी कमलापति 16 मार्च, 2025 को शाम 6:45 बजे रवाना होगी और सुबह 4:30 बजे रानी कमलापति पहुंचेगी।
  • ट्रेन संख्या 01703: रानी कमलापति से रीवा 17 मार्च, 2025 को सुबह 6:15 बजे रवाना होगी और शाम 5:10 बजे रीवा पहुंचेगी।

3. ट्रेन संख्या 01705/01706 जबलपुर-दानापुर-जबलपुर स्पेशल (01 ट्रिप)

  • ट्रेन संख्या 01705: जबलपुर से दानापुर 11 मार्च, 2025 को शाम 7:40 बजे प्रस्थान करेगी और सुबह 8:45 बजे दानापुर पहुंचेगी।
  • ट्रेन संख्या 01706: दानापुर से जबलपुर 12 मार्च, 2025 को सुबह 11:45 बजे रवाना होगी और अगले दिन सुबह 3:40 बजे जबलपुर पहुंचेगी।

4. ट्रेन संख्या 09817/09818 कोटा-दानापुर-कोटा स्पेशल (02 ट्रिप)

  • ट्रेन संख्या 09817: कोटा से दानापुर 08 मार्च और 15 मार्च को रात 9:05 बजे रवाना होगी और शाम 6:30 बजे दानापुर पहुंचेगी।
  • ट्रेन संख्या 09818: दानापुर से कोटा 09 मार्च और 16 मार्च को रात 9:15 बजे रवाना होगी और रात 10:25 बजे कोटा पहुंचेगी।

5. ट्रेन संख्या 01663/01662 रानी कमलापति-दानापुर-रानी कमलापति स्पेशल (02 ट्रिप)

  • ट्रेन संख्या 01663: रानी कमलापति से दानापुर 12 मार्च और 15 मार्च को दोपहर 2:25 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन सुबह 8:45 बजे दानापुर पहुंचेगी।
  • ट्रेन संख्या 01662: दानापुर से रानी कमलापति 13 मार्च और 16 मार्च को सुबह 11:45 बजे रवाना होगी और सुबह 9:50 बजे रानी कमलापति पहुंचेगी।

Holi Special train से होने वाले लाभ

  • होली की भीड़ में यात्रियों को सुगम और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।
  • अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन से भीड़भाड़ कम होगी और यात्रियों को अपनी सुविधा के अनुसार यात्रा करने का अवसर मिलेगा।
  • महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ने वाली ये ट्रेनें यात्रियों की सुविधा में वृद्धि करेंगी।
  • सीमित स्टॉपेज होने के कारण यात्रियों का यात्रा समय कम होगा और वे तेजी से अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।

यात्रियों के लिए विशेष सुझाव

  • आरक्षण शीघ्र कराएं ताकि सीट की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
  • रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट या नजदीकी स्टेशन से समय सारणी की पुष्टि करें।
  • जरूरी सामान और दस्तावेजों को संभालकर रखें।

इन विशेष ट्रेनों के संचालन से होली त्यौहार पर यात्रियों को बेहतर सुविधाएं और आसान यात्रा का अनुभव मिलेगा। भारतीय रेलवे द्वारा उठाया गया यह कदम लाखों यात्रियों को राहत प्रदान करेगा।

जबलपुर: सीलबंद पानी की बोतल में मच्छर मिलने से हड़कंप, खाद्य सुरक्षा विभाग ने शुरू की जांच

जबलपुर (मध्य प्रदेश) – जबलपुर में बोतलबंद पेयजल सप्लाई करने वाली कंपनी “प्योर” की सीलबंद पानी की बोतल में मच्छर मिलने का मामला सामने आया है। यह घटना तब उजागर हुई जब एक ग्राहक ने केशरवानी आइसक्रीम पार्लर से पानी की बोतल खरीदी और उसमें तैरता हुआ मच्छर देखा।

ग्राहक ने जताई नाराजगी, दुकानदार ने की शिकायत

ग्राहक ने पानी से बदबू आने और उसमें मच्छर होने की शिकायत तुरंत दुकानदार से की। इस पर दुकानदार ने संबंधित सप्लायर को सूचना दी, लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उसने खाद्य सुरक्षा विभाग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

क्या है पूरा मामला?

सोमवार दोपहर जबलपुर जिले के रामपुर क्षेत्र का एक व्यक्ति केशरवानी आइसक्रीम पार्लर पर गया और वहां से पानी की बोतल खरीदी। बोतल खोलने से पहले ही उसकी नजर उसमें तैरते हुए मच्छर पर पड़ी। इससे हैरान होकर उसने तुरंत दुकानदार को जानकारी दी।

दुकानदार ने तुरंत प्लांट संचालक से संपर्क कर शिकायत की, लेकिन संचालक ने बताया कि पानी की बोतलें थोक में सप्लाई की गई थीं, जिनमें से कुछ कार्टन विभिन्न कार्यालयों में भेजी गई थीं। संचालक ने शिकायत को गंभीरता से न लेते हुए फोन काट दिया।

खाद्य सुरक्षा विभाग ने लिया संज्ञान

प्लांट संचालक द्वारा लापरवाही बरते जाने पर दुकानदार ने खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराई। विभाग ने मामले का संज्ञान लेते हुए पानी की गुणवत्ता की जांच शुरू कर दी है। विभाग का कहना है कि अगर पानी की गुणवत्ता में कोई गंभीर खामी पाई जाती है, तो कंपनी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर सवाल

इस घटना ने बोतलबंद पानी की गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि सीलबंद बोतल में मच्छर पाया गया, तो यह उत्पादन प्रक्रिया में लापरवाही को दर्शाता है। खाद्य विभाग की जांच के नतीजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।