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सिवनी: ज्यारत नाका में निर्माणाधीन पुल के पास मिला अज्ञात शव; पुलिस जांच में जुटी

सिवनी: सिवनी कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ज्यारत नाका इलाके में उस समय सनसनी फैल गई जब स्थानीय लोगों ने निर्माणाधीन पुल के पास एक अज्ञात व्यक्ति का शव देखा। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच में जुट गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह शव ज्यारत नाका क्षेत्र में स्थित उस पुल के समीप मिला है, जिसका निर्माण कार्य वर्तमान में जारी है। शव की स्थिति देखकर प्रथम दृष्टया से यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि इसकी वजह क्या हो सकती है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक शव की पहचान सार्वजनिक नहीं की है।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि सुबह के समय जब वे पुल के पास से गुजर रहे थे, तब उन्होंने पुल में एक संदिग्ध अवस्था में शव देखा। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचित किया गया।

अधिक जानकारी की प्रतीक्षा है….

FASTag Annual Pass: ₹3000 में एक साल काम करेगा FASTag, 15 अगस्त शुरू होगी सुविधा; जानिए पूरी डिटेल

FASTag Annual Pass: देशभर के हाईवे यात्रियों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव सामने आया है। 15 अगस्त 2025 से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक नया FASTag आधारित वार्षिक पास शुरू करने की घोषणा की है, जिसकी कीमत ₹3,000 रखी गई है। यह पास केवल गैर-व्यावसायिक निजी वाहनों जैसे कार, जीप और वैन के लिए मान्य होगा। यह नई नीति न केवल टोल प्लाजा पर लगने वाले भीड़ को कम करेगी, बल्कि सफर को और अधिक सहज और सुगम बना देगी।

क्या है ₹3000 वाला FASTag Annual Pass?

यह FASTag आधारित वार्षिक पास एक साल तक मान्य रहेगा या फिर 200 ट्रिप पूरे होने तक, जो भी पहले हो। इस योजना के तहत एक बार भुगतान के बाद, वाहन मालिक देशभर के सभी नेशनल हाईवे पर आसानी से यात्रा कर सकते हैं। अब हर बार टोल पर पैसे देने की झंझट नहीं रहेगी।

किन वाहनों के लिए लागू होगा यह FASTag Annual Pass?

यह पास विशेष रूप से गैर-व्यावसायिक निजी वाहनों के लिए उपलब्ध कराया गया है, जैसे कि:

  • कार
  • जीप
  • वैन

व्यावसायिक वाहनों, ट्रकों, बसों आदि को इस योजना में शामिल नहीं किया गया है।

FASTag Annual Pass की वैधता और उपयोग की सीमा

यह योजना पूरी तरह से समय और ट्रिप आधारित है:

  • 1 वर्ष की वैधता, पास के एक्टिवेशन की तारीख से
  • अधिकतम 200 ट्रिप्स तक की अनुमति
  • जो भी पहले पूरी हो, वही इस पास की समाप्ति की तिथि होगी

इस प्रकार, उपयोगकर्ता जितना अधिक ट्रैवल करेंगे, उतना ही इस योजना का लाभ मिलेगा।

राजमार्ग यात्रा को कैसे बनाएगा यह पास सहज और किफायती?

NHAI और MoRTH का यह कदम उन लाखों वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो नियमित रूप से हाईवे का उपयोग करते हैं। इसके प्रमुख लाभों में शामिल हैं:

  • हर टोल पर रुकने की आवश्यकता नहीं
  • लंबी कतारों से छुटकारा
  • समय की बचत और ईंधन की खपत में कमी
  • सिंगल पेमेंट से पूरे साल का टोल कवर

60 किलोमीटर की सीमा विवादों का समाधान

अब तक टोल प्लाजा के 60 किलोमीटर दायरे में मौजूदगी को लेकर बहुत से विवाद और शिकायतें सामने आती रही हैं। यह वार्षिक पास उन सभी चिंताओं को खत्म करता है क्योंकि इसमें ट्रिप काउंट आधारित प्रणाली लागू की गई है। इसका अर्थ है कि वाहन चालक चाहे किसी भी टोल से यात्रा करें, उसे केवल ट्रिप गिनती में शामिल किया जाएगा, दूरी को लेकर कोई पेचीदगी नहीं होगी।

FASTag और पास एक्टिवेशन की प्रक्रिया

राजमार्ग यात्रा ऐप (Rajmarg Yatra App) और NHAI तथा MoRTH की आधिकारिक वेबसाइटों पर जल्द ही एक डेडिकेटेड लिंक उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे आप अपना पास:

  • खरीद सकते हैं
  • सक्रिय (Activate) कर सकते हैं
  • रिन्यू (Renew) कर सकते हैं

यह प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल और उपयोगकर्ता के अनुकूल होगी।

भविष्य में कैसा रहेगा टोल भुगतान का परिदृश्य?

इस योजना से संकेत मिलता है कि सरकार भविष्य में पूरी तरह से डिजिटल टोल प्रणाली की ओर बढ़ रही है। FASTag आधारित वार्षिक पास का उद्देश्य है:

  • कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देना
  • डिजिटल इंडिया मिशन को मजबूती देना
  • पर्यावरण संरक्षण द्वारा कार्बन फुटप्रिंट में कटौती

यह योजना किन यात्रियों के लिए सबसे उपयोगी है?

नियमित हाईवे यात्रियों के लिए यह योजना बेहद लाभकारी सिद्ध होगी, जैसे:

  • कार्यालय जाने वाले लोग
  • छोटे व्यवसायी और व्यापारी
  • परिवार के साथ यात्रा करने वाले
  • पर्यटन प्रेमी और लॉन्ग ड्राइव के शौकीन

अगर कोई व्यक्ति महीने में औसतन 15-20 बार हाईवे का उपयोग करता है, तो यह योजना उसकी टोल लागत को 50% तक घटा सकती है।

भारत में टोल नीति में बड़ा सुधार

यह वार्षिक पास भारत की टोल नीति में एक ऐतिहासिक सुधार माना जा सकता है। इससे न सिर्फ सड़कों पर ट्रैफिक दबाव कम होगा, बल्कि उपयोगकर्ता अनुभव में भी नाटकीय सुधार होगा।

एक राष्ट्र, एक पास की अवधारणा को साकार करते हुए यह योजना देशभर में टोल यात्रा को अधिक समन्वित और प्रौद्योगिकी-आधारित बनाती है।

आपको यह पास क्यों लेना चाहिए?

  • ₹3,000 की एकमुश्त राशि में पूरे साल की हाईवे यात्रा
  • अलग-अलग टोल दरों की उलझनों से मुक्ति
  • तेज, सुगम और विवादरहित यात्रा अनुभव
  • प्रत्येक यात्रा की गिनती ट्रिप से होगी, दूरी से नहीं

FASTag आधारित ₹3,000 वार्षिक पास एक ऐसा कदम है जो भारतीय हाईवे यात्रा को तकनीकी, किफायती और सुविधाजनक बनाता है। यदि आप नियमित रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों का उपयोग करते हैं, तो यह पास आपके समय, पैसे और मानसिक शांति – तीनों की बचत करेगा। आने वाले समय में यह पास हर निजी वाहन के लिए अनिवार्य विकल्प बन सकता है।

सिवनी: कुरई घाटी में रासायनिक टैंकर पलटा, NH-44 पर बड़ा हादसा टला

सिवनी । सिवनी जिले के कुरई घाटी क्षेत्र में मंगलवार की शाम एक बड़ा हादसा टल गया, जब एक ज्वलनशील रसायन से भरा टैंकर अनियंत्रित होकर पलट गया। घटना राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर शाम करीब 5:30 बजे की है, जब हरियाणा से हैदराबाद की ओर जा रहा टैंकर (नंबर HR 38 AC 1873) अचानक संतुलन खो बैठा और सड़क किनारे पलट गया।

हादसे के बाद टैंकर से रसायन का रिसाव शुरू हो गया, जिससे तेज गंध और आंखों में जलन की शिकायतें सामने आने लगीं। यह रसायन अत्यंत ज्वलनशील होने के कारण क्षेत्र में खतरे की आशंका बढ़ गई।

घटना की जानकारी मिलते ही कुरई थाना पुलिस मौके पर पहुंची और सावधानीपूर्वक यातायात को एकतरफा (वनवे) कर दिया गया, जिससे किसी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।

थाना प्रभारी कृपाल सिंह तेकाम ने बताया कि टैंकर में मौजूद रसायन को हटाना जोखिम भरा है, इसलिए मामले की जानकारी जिला कलेक्टर को दी गई। कलेक्टर द्वारा विशेषज्ञों की टीम को तत्काल मौके पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा के दृष्टिकोण से विशेषज्ञों की अनुमति मिलने के बाद ही टैंकर हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

हालांकि, टैंकर पलटने के कारण मार्ग पर आंशिक बाधा उत्पन्न हुई, फिर भी प्रशासन की तत्परता से जाम जैसी स्थिति नहीं बनी और यातायात धीरे-धीरे नियंत्रित किया गया।

सिवनी: समितियों के प्रशासक सड़कों पर खड़े खड़े कर देते है वित्तीय दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर

सिवनी, बरघाट: वर्षों से सहकारिता विभाग में चुनाव न होने की स्थिति ने व्यवस्थाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है। सहकारी समितियों में चुने हुए प्रतिनिधियों के अभाव ने प्रशासकों को संचालन की बागडोर सौंप दी है। स्थिति यह है कि एक ही प्रशासक के अधीन एकाधिक समितियों का संचालन किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

धारनाकला, आष्टा, लालपुर और खामी जैसी समितियों का संचालन एक ही प्रशासक दिलीप कुमार डहेरिया के हाथों में है। इन समितियों की कार्यप्रणाली का स्तर इस बात से आंका जा सकता है कि वित्तीय दस्तावेज़ों पर प्रशासक सड़कों पर खड़े होकर हस्ताक्षर कर देते हैं, जबकि नियम के अनुसार समिति कार्यालय में उपस्थित होकर निर्णय लेना चाहिए।

समिति प्रबंधकों पर निर्भर प्रशासक का कार्यशैली

यह भी सामने आया है कि समिति के दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर इस बात पर निर्भर करता है कि प्रबंधक, प्रशासक की सेवा में कितना तत्पर है। जो समिति प्रबंधक प्रशासक की सेवा करता है, उसके दस्तावेज़ों पर तत्काल हस्ताक्षर हो जाता है, चाहे वह सड़क हो, चौराहा हो या वाहन के अंदर। दूसरी ओर, जो प्रबंधक सेवा में अक्षम रहता है, उसे सिवनी बुलाकर कार्य करवाया जाता है।

इतना ही नहीं, सिवनी से समिति तक आने-जाने का भत्ता या खर्चा भी प्रशासक समिति प्रबंधक से वसूलने का प्रयास करते हैं, जबकि प्रशासक को सरकारी कर्मचारी होने के नाते यह सुविधा विभाग द्वारा मिलनी चाहिए। यह सब दर्शाता है कि समिति संचालन अब निजी संबंधों पर आधारित हो चला है, न कि नियमों और उत्तरदायित्वों पर।

प्रशासक की वित्तीय कार्यशैली और हस्ताक्षर प्रणाली पर प्रश्न

वर्तमान में समितियों के सभी वित्तीय दस्तावेजों, खाद्यान्न वितरण, बिल भुगतान, परमिट जारी करने आदि सभी प्रक्रियाओं में प्रशासक के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब एक प्रशासक चार समितियों का एक साथ संचालन करता है और वह भी एक स्थान धारनाकला से, तो शेष समितियों की पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित होगी?

ऐसे में यह देखा गया है कि कई बार वाजिब बिलों पर तो आपत्ति जताई जाती है, लेकिन लाखों के भुगतान पर हस्ताक्षर कर दिए जाते हैं। यह असंतुलन दर्शाता है कि वित्तीय निर्णयों में भी नियमों की बजाय व्यक्तिगत समीकरणों का असर है।

लालपुर समिति में बारदाना घोटाले की निष्क्रिय जांच

लालपुर समिति में हुए लाखों रुपए के बारदाना घोटाले की जांच भी इसी प्रशासक द्वारा की गई थी। लेकिन जिला कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद वसूली की कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे स्पष्ट होता है कि जांच प्रक्रिया महज औपचारिकता बनकर रह गई है। जनपद सदस्य लेखराम हरिनखेड़े ने भी इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से शिकायत की, परंतु आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

यह भी स्पष्ट करता है कि उप पंजीयक सहकारिता जैसे अधिकारी भी राजनीतिक या पद के दबाव में कार्रवाई करने से बचते हैं। इस मामले में जिला प्रशासन की निष्क्रियता भी सामने आती है।

दैनिक वेतन भोगी को विक्रेता बनाना – नियमों की खुली अवहेलना

एक और गंभीर मामला यह है कि समिति में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को राशन विक्रेता का कार्यभार सौंपा गया है। जबकि वर्ष पूर्व सहकारिता उपपंजीयक सिवनी द्वारा स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि केवल पूर्णकालिक कर्मचारी ही विक्रेता बन सकते हैं।

यह सब तब हो रहा है जब समिति स्तर पर पहले ही 89 दिनी अनियमित नियुक्तियां की गई हैं, जिन पर स्थानीय युवाओं द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए थे। यह संपूर्ण प्रक्रिया दर्शाती है कि समिति संचालन में नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और इसे रोकने वाला कोई नहीं है।

समिति प्रबंधन की स्थिति और किसान हितों की अनदेखी

जहां सहकारी समितियों का गठन किसानों के हित में सस्ती दरों पर खाद, बीज, ऋण, और अनाज वितरण के उद्देश्य से हुआ था, वहीं आज उनकी सुनवाई दूर-दूर तक नहीं होती। समिति संचालन प्रशासक के कार्यालय से दूर, कभी चौराहे पर, कभी सड़क पर, तो कभी सिवनी के किसी निजी ठिकाने से होता है।

प्रशासक को न तो समिति परिसर में नियमित रूप से उपस्थित देखा जाता है, न ही किसानों की समस्याओं को लेकर कोई गंभीरता दिखाई जाती है। परिणामस्वरूप, समितियों पर किसानों का विश्वास कम होता जा रहा है।

जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब यह आवश्यक है कि:

  • सहकारिता विभाग में चुनाव शीघ्र कराए जाएं ताकि प्रतिनिधित्व बहाल हो।
  • एक प्रशासक को एक से अधिक समितियों का प्रभार न दिया जाए।
  • प्रशासकों को निर्देशित किया जाए कि वे नियमित रूप से संबंधित समिति कार्यालय में उपस्थित रहें।
  • वित्तीय मामलों की निरपेक्ष जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी नियुक्त की जाए।
  • समितियों में नियमित, पारदर्शी और योग्यता आधारित नियुक्तियां हों।

वर्तमान समय में सहकारिता विभाग में चल रही प्रशासक आधारित व्यवस्था ने समितियों की स्वायत्तता और पारदर्शिता दोनों को प्रभावित किया है। किसानों के हितों को सुरक्षित रखने और व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि नियम आधारित संचालन, जवाबदेही और जवाबदेहीपूर्ण प्रशासन को तत्काल लागू किया जाए।

यदि सहकारिता को पुनः ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाना है, तो चुनाव, नियम पालन और पारदर्शिता अनिवार्य हैं।

सिवनी में कुएं की सफाई के दौरान 2 मजदूरों की दर्दनाक मौत, ऑक्सीजन की कमी बनी मौत की वजह

सिवनी (मध्य प्रदेश): सिवनी शहर के झूलेलाल कॉलोनी में सोमवार को एक दुखद घटना में दो मजदूरों की जान चली गई। ये हादसा एक घर के भीतर बने गहरे कुएं की सफाई के दौरान हुआ, जब दोनों मजदूर अचानक बेहोश हो गए और बाद में अस्पताल में मृत घोषित किए गए।

25 फीट गहरे कुएं में सफाई के दौरान बेहोश हुए मजदूर

यह घटना कोतवाली थाना क्षेत्र की है। पुलिस के अनुसार, दोनों मजदूर एक मकान की सीढ़ियों के नीचे बने करीब 25 से 30 फीट गहरे कुएं की सफाई कर रहे थे। इसी दौरान संभवतः ऑक्सीजन की कमी की वजह से वे बेहोश हो गए। मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने तुरंत पुलिस और आपातकालीन सेवाओं को सूचना दी।

मृतकों की पहचान सोनू उइके और अशोक धुर्वे के रूप में हुई

मृत मजदूरों की पहचान सोनू उइके (30 वर्ष) और अशोक धुर्वे (35 वर्ष) के रूप में हुई है। सोनू सिवनी जिले के लखनादौन तहसील स्थित भानेरी गांव का निवासी था, जबकि अशोक मंडला जिले के नैनपुर थाना अंतर्गत कोकीवाड़ा गांव से था।

एसडीईआरएफ की मदद से रेस्क्यू, अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित

सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस और एसडीईआरएफ (राज्य आपदा मोचन बल) की टीम मौके पर पहुंची और दोनों मजदूरों को कुएं से बाहर निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने कानूनी कार्रवाई करते हुए पंचनामा तैयार कर शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।

ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत की आशंका, मकान मालिक बाहर रहते हैं

कोतवाली थाना प्रभारी किशोर वामनकर ने बताया कि जिस कुएं की सफाई की जा रही थी, उसकी ऊपरी सतह पर कंक्रीट का लेंटर डला हुआ था। इसके चलते हवा का आवागमन बाधित हो रहा था, जिससे ऑक्सीजन की कमी हो गई और यह हादसा हुआ। दोनों मृतक एक ठेकेदार के अधीन कार्यरत थे। जिस मकान में यह घटना हुई, उसकी मालकिन अभिलाषा बघेल वर्तमान में बाहर निवास कर रही हैं। सफाई कार्य उनके रिश्तेदारों की देखरेख में किया जा रहा था। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

सिवनी में 7 जुलाई को होगा मतदान: सुभाष वार्ड के पार्षद पद के लिए होगा मतदान

सिवनी: मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मध्यप्रदेश के 9 नगरीय निकायों में एक-एक पार्षद के उप निर्वाचन का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। जिसमे सिवनी, बैरसिया, सांवेर, गौतमपुरा, ककरहटी, बिछिया, खांड, न्यूटन चिखली और भीकनगाँव शामिल है. ओं सभी 9 नगरीय निकायों में एक एक पार्षद पद के लिए उप निर्वाचन के लिये मतदान 7 जुलाई 2025 को होगा।

मध्यप्रदेश के 9 नगरीय निकायों उप निर्वाचन में 8 हजार 823 मतदाता मताधिकार का उपयोग करेंगे। निर्वाचन आयोग के अनुसार, इन सभी वार्डों में कुल 8,823 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव के दौरान लोकतांत्रिक प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से सम्पन्न कराने की पूरी तैयारी की जा रही है।

वार्डवार मतदाता संख्या

राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव अभिषेक सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि उपरोक्त 9 नगरीय निकायों के वार्डों में मतदाता इस प्रकार हैं:

  • बैरसिया (वार्ड-7): 1,486 मतदाता
  • सिवनी (वार्ड-11): 1,946 मतदाता
  • सांवेर (वार्ड-7): 1,386 मतदाता
  • गौतमपुरा (वार्ड-15): 758 मतदाता
  • ककरहटी (वार्ड-13): 389 मतदाता
  • बिछिया (वार्ड-13): 576 मतदाता
  • खांड (वार्ड-8): 375 मतदाता
  • न्यूटन चिखली (वार्ड-4): 512 मतदाता
  • भीकनगांव (वार्ड-5): 1,395 मतदाता

इन सभी वार्डों में पार्षद पद रिक्त होने के कारण उप-चुनाव कराया जा रहा है।

निर्वाचन कार्यक्रम का विवरण

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार:

  • नाम निर्देशन पत्र भरने की तिथि: 16 जून से 23 जून 2025 तक
  • नामांकन पत्रों की जांच: 24 जून 2025
  • नाम वापस लेने की अंतिम तिथि: 26 जून 2025
  • प्रतीक आवंटन की तिथि: 26 जून 2025
  • मतदान की तिथि: 7 जुलाई 2025 (प्रातः 7 बजे से सायं 5 बजे तक)
  • मतगणना एवं परिणाम की घोषणा: 10 जुलाई 2025, प्रातः 9 बजे से

COVID 19 UPDATE: पिछले 24 घंटो में 11 मौतें, कोविड के एक्टिव केस 7,264

भारत में कोविड-19 की स्थिति में एक बार फिर हल्का सुधार देखने को मिला है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, सोमवार (16 जून) को सक्रिय मामलों की संख्या घटकर 7,264 रह गई है, जो कि पिछले दिन की तुलना में 119 मामलों की गिरावट को दर्शाता है। हालांकि, इसी अवधि में 11 नई मौतों की पुष्टि भी की गई है।

भारत में कोविड-19 की मौजूदा स्थिति: भारत में सक्रिय मामलों की संख्या में गिरावट देखने को मिली है। रविवार को जहां 7,383 सक्रिय मामले थे, वहीं सोमवार को यह आंकड़ा घटकर 7,264 पर आ गया है। इसके साथ ही, पिछले 24 घंटे में 11 मरीजों की मौत हुई है, जिनमें से सबसे ज्यादा 7 मौतें केरल में दर्ज की गईं। इसके अलावा, दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से एक-एक मौत की सूचना मिली है।

मरने वालों की जानकारी: 33 वर्षीय युवक समेत बुज़ुर्ग शामिल

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मृतकों में एक 33 वर्षीय युवक केरल से था जबकि अन्य सभी बुजुर्ग थे जो पहले से श्वसन तंत्र और पुरानी बीमारियों से पीड़ित थे। यह डेटा दर्शाता है कि कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग अभी भी संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।

नए सबवैरिएंट्स से संक्रमण में हल्की वृद्धि

हाल ही में सामने आए कोविड-19 के नए सबवैरिएंट्स जैसे कि LF.7, XFG, JN.1, और NB.1.8.1 के कारण कुछ राज्यों में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। हालांकि संक्रमण की तीव्रता पहले जैसी नहीं है, फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि निगरानी और सतर्कता बनाए रखना अभी भी आवश्यक है।

राज्यवार रिपोर्ट: केरल में सबसे अधिक सक्रिय मामले

नीचे दी गई तालिका में 16 जून के अनुसार राज्यवार सक्रिय मामलों, नए मामलों और मौतों की संख्या दी गई है:

राज्यसक्रिय मामलेनए मामले (24 घंटे में)मौतें (24 घंटे में)
केरल1,920-877
गुजरात1,433-080
दिल्ली649-331
महाराष्ट्र540-381
कर्नाटक591+180
राजस्थान222+300
तमिलनाडु220-230

यह स्पष्ट है कि केरल और गुजरात जैसे राज्य अभी भी संक्रमण के उच्चतम स्तर पर हैं, हालांकि इनमें भी प्रतिदिन मामलों की संख्या में कमी देखी जा रही है।

विशेषज्ञों की राय: टारगेटेड बूस्टर की सिफारिश

कोविड-19 की हालिया स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि जनरल पब्लिक के लिए बड़े स्तर पर बूस्टर वैक्सीन अभियान चलाने की आवश्यकता नहीं है। इसके बजाय, यह सलाह दी गई है कि बूस्टर डोज़ केवल उन्हीं लोगों को दी जाए जो हाई रिस्क ग्रुप में आते हैं — जैसे कि बुजुर्ग, इम्यूनो-कॉम्प्रोमाइज़्ड व्यक्ति, और क्रॉनिक बीमारियों से ग्रसित लोग।

हाइब्रिड इम्युनिटी (जो कि वैक्सीनेशन और पूर्व संक्रमण दोनों से विकसित हुई है) भी इस निर्णय का एक महत्वपूर्ण कारण है।

एहतियाती उपायों पर ज़ोर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक बार फिर ज़ोर दिया है कि चाहे संक्रमण की दर कम हो रही हो, लेकिन मास्क पहनना, हाथों की सफाई और भीड़भाड़ से बचाव जैसे कोविड उपयुक्त व्यवहार अब भी उतने ही जरूरी हैं।

केंद्रीय सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी किए हैं, जिसमें सतर्कता बनाए रखने और स्वास्थ्य सेवाओं को तैयार रखने की सिफारिश की गई है।

समान लक्षणों वाले संक्रमणों से अंतर करना आवश्यक

विशेषज्ञों ने यह भी बताया है कि सीज़नल वायरल संक्रमणों और कोविड-19 के लक्षण काफी हद तक एक जैसे होते हैं — जैसे कि बुखार, थकान, खांसी, आदि। ऐसे में लोगों को किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए और लक्षण दिखने पर जल्द जांच कराना और इलाज शुरू करना जरूरी है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने पुनः लोगों से अपील की है कि वे रोकथाम के उपायों, खासकर मास्किंग और हाथ की सफाई पर विशेष ध्यान दें।

कोविड टेस्टिंग और हेल्पलाइन सेवाएं

यदि किसी व्यक्ति को कोविड-19 के लक्षण महसूस हों, तो वह नज़दीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या निजी अस्पताल में जाकर RT-PCR टेस्ट करवा सकता है। इसके अलावा, राष्ट्रीय कोविड हेल्पलाइन नंबर 1075 पर कॉल करके जरूरी सलाह प्राप्त की जा सकती है।

स्थिति नियंत्रण में लेकिन सतर्कता ज़रूरी

हालांकि वर्तमान आंकड़े राहत देने वाले हैं और संक्रमण की दर में कमी दर्शाते हैं, फिर भी नए वैरिएंट्स के चलते संक्रमण फिर से रफ्तार पकड़ सकता है। इसलिए हमें अपनी सतर्कता को कम नहीं करना चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्रालय और डॉक्टर्स की सलाह का पालन करते हुए, नियमित जांच, साफ-सफाई, मास्किंग और वैक्सीन अपडेट को बनाए रखना समय की मांग है।

सिवनी में भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा: 37 साल बाद भी नहीं बनी नहर, उल्टा किसानों को थमाए गए नोटिस

सिवनी (मध्यप्रदेश) – मध्यप्रदेश के जल संसाधन विभाग में जारी भ्रष्टाचार की बानगी इन दिनों अपने चरम पर है। सिवनी जिले के लखनादौन तहसील अंतर्गत गणेशगंज सहजपुरी ग्राम के डूंगरिया जलाशय से जुड़ी नहर का निर्माण आज तक नहीं हुआ, फिर भी किसानों को उसे क्षतिग्रस्त करने के नोटिस भेजे जा रहे हैं, जो अपने आप में एक शर्मनाक और चौंकाने वाली घटना है।

डूंगरिया जलाशय: जहां नहर का कोई अस्तित्व ही नहीं

साल 1987-88 में करोड़ों की लागत से बनाए गए डूंगरिया जलाशय का मुख्य उद्देश्य था – क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए नहरों के माध्यम से पानी पहुंचाना। लेकिन, 37 वर्षों के बाद भी एक इंच पक्की नहर का निर्माण नहीं हुआ। ऐसे में सवाल उठता है कि जब नहर बनी ही नहीं, तो किसानों ने उसे क्षतिग्रस्त कैसे किया?

कृषकों के साथ अन्याय की इंतहा

नहरों के नाम पर भ्रष्टाचार का खेल ऐसा खेला गया है, जहां हर साल मेंटेनेंस के नाम पर लाखों रुपए का फर्जीवाड़ा किया गया। मीडिया द्वारा की गई जमीनी हकीकत की पड़ताल में साफ हुआ कि जिस पक्की नहर का ज़िक्र किया जा रहा है, वह कागज़ों में ही मौजूद है। लेकिन किसानों को नोटिस भेज दिए गए कि उन्होंने इस नहर को नुकसान पहुंचाया है।

एसडीओ और सब इंजीनियर की मिलीभगत उजागर

भ्रष्टाचार की इस पूरी कहानी में दो प्रमुख नाम सामने आ रहे हैं – एसडीओ ऋषभ साहू और सब इंजीनियर शंकरलाल त्रिपाठी। दोनों अधिकारियों पर नहर निर्माण न होने के बावजूद मेंटेनेंस की राशि खर्च करने और किसानों पर दोष मढ़ने का आरोप है। यह अधिकारी मीडिया और आमजन से दूरी बनाकर अब जवाबदेही से बचते नजर आ रहे हैं।

नहर मरम्मत का बहाना, असल में फर्जीवाड़े की कहानी

हर वर्ष लाखों रुपये नहर मरम्मत के नाम पर स्वीकृत किए गए, लेकिन स्थल पर आज तक कोई पक्की नहर मौजूद नहीं। यह सब स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि विभागीय मिलीभगत से सरकारी धन का गबन हो रहा है। कृषकों को लाभ पहुंचाने के बजाय उन्हें दोषी बनाकर मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है।

किसानों की पीड़ा: एक बूंद पानी के लिए तरसते खेत

37 वर्षों में एक बार भी डूंगरिया जलाशय से नहर द्वारा पानी नहीं छोड़ा गया, जिससे सैकड़ों किसान अब तक सिंचाई के लिए वर्षा और टैंकरों पर निर्भर हैं। जब किसानों ने शासन से जवाब मांगा, तब उल्टा उन्हें नहर तोड़ने के झूठे आरोप में नोटिस थमा दिए गए।

“कागज़ों में नहर, जमीनी हकीकत में धोखा”

स्थानीय किसानों का कहना है कि नहर तो कभी बनी ही नहीं, लेकिन फिर भी विभाग की ओर से यह दिखाया जा रहा है कि पक्की नहरें बनी हैं और वे क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। सवाल यह भी उठता है कि यदि नहरें बनी होतीं, तो वे अब तक क्षतिग्रस्त कैसे हो जातीं?

कार्यपालन यंत्री पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश

जब इस मामले में संबंधित अधिकारियों से जानकारी मांगी गई, तो एसडीओ और सब इंजीनियर ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कार्यालय में पदस्थ कार्यपालन यंत्री वीपी चौधरी पर सारा दोष डाल दिया। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभागीय समन्वय से भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें जमाई जा रही हैं।

राज्य सरकार और शासन का मौन रहना चिंताजनक

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा भ्रष्टाचार मुक्त शासन के दावे किए जाते हैं, लेकिन इस प्रकार के गंभीर मामले पर शासन की चुप्पी सवाल खड़े करती है। आखिरकार करोड़ों की लागत से बना डूंगरिया जलाशय अब तक उपयोग में क्यों नहीं लाया गया?

सीएम हेल्पलाइन और जनसुनवाई में शिकायतें बेअसर

स्थानीय किसानों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, जनसुनवाई और कलेक्टर कार्यालय तक गुहार लगाई, लेकिन कहीं से कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे यह प्रतीत होता है कि शासन-प्रशासन का भरोसा अब किसानों की नजरों में टूटता जा रहा है।

इस भ्रष्टाचार से कौन बचाएगा किसानों को?

सवाल यह है कि जब नहर कभी बनी ही नहीं, तो मरम्मत किस चीज़ की हो रही है और पैसा कहां जा रहा है? आखिर किसानों को नोटिस थमाकर किस अपराध की सजा दी जा रही है?

भ्रष्टाचार पर त्वरित न्याय और कार्रवाई की आवश्यकता

हमारी मांग है कि:

  • इस पूरे मामले की सीबीआई या ईओडब्ल्यू से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
  • जिन किसानों को झूठे आरोपों में फंसाया गया, उनके खिलाफ नोटिस वापस लेकर उन्हें मानसिक शांति दी जाए।
  • डूंगरिया जलाशय की नहर का वास्तविक निर्माण कार्य कराया जाए, ताकि किसान आगामी वर्षों में सिंचाई से वंचित न रहें।

यह मामला केवल एक नहर या एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे राज्य के सिस्टम की विफलता और भ्रष्टाचार का प्रतीक है। यदि समय रहते कार्यवाही नहीं की गई, तो किसान हितैषी कहे जाने वाले प्रशासन की छवि को गहरा आघात पहुंचेगा।

सिवनी के उत्कर्ष अवधिया ने NEET UG 2025 में हासिल की ऑल इंडिया रैंक 2, जानिए उनकी तैयारी की पूरी कहानी

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET UG 2025) में मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के कान्हीवाड़ा के होनहार छात्र उत्कर्ष अवधिया ने 99.9999095 पर्सेंटाइल के साथ ऑल इंडिया रैंक (AIR) 2 प्राप्त कर पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है। मात्र कुछ अंकों के अंतर से वे टॉपर की रैंक से चूक गए, लेकिन उनकी उपलब्धि अपने आप में एक मिसाल है।

उत्कर्ष अवधिया की पृष्ठभूमि और पारिवारिक सहयोग

उत्कर्ष अवधिया, जो पिछले 10 वर्षों से इंदौर में रह रहे हैं, एक मध्यमवर्गीय सहायक परिवार से आते हैं। उनके पिता आलोक अवधिया, एचडीएफसी बैंक में शाखा प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं, जबकि उनकी माँ आशी अवधिया एक गृहिणी हैं। उनके परिवार में एक छोटा भाई भी है जो अभी स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रहा है।

परिवार ने न सिर्फ आर्थिक रूप से, बल्कि भावनात्मक रूप से भी उत्कर्ष को हर मोड़ पर सहयोग प्रदान किया। यही सहयोग उनकी लगातार तैयारी और मानसिक मजबूती का आधार बना।

कक्षा 11 से शुरू हुई NEET की केंद्रित तैयारी

उत्कर्ष ने बताया कि उन्होंने कक्षा 10 में ही कोचिंग क्लास जॉइन कर ली थी, लेकिन उनकी गंभीर और केंद्रित NEET तैयारी वास्तव में कक्षा 11 से शुरू हुई। उन्होंने साफ तौर पर कहा,

“मैंने अपनी तैयारी को NCERT पुस्तकों पर केंद्रित रखा। कोई भी विषय हो, उसका मूल NCERT से समझना मेरे लिए प्राथमिकता थी।”

उनकी यह रणनीति आज के प्रतिस्पर्धी माहौल में बेहद कारगर साबित हुई। जहां कई छात्र ढेर सारी किताबों में उलझ जाते हैं, उत्कर्ष ने सरलता, गहराई और नियमितता को अपनी रणनीति का मूल बनाया।

उत्कृष्ट अनुशासन और दैनिक दिनचर्या का पालन

NEET UG जैसे कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए अनुशासन अनिवार्य होता है। उत्कर्ष ने अपनी दिनचर्या को सटीकता के साथ निभाया। वे प्रत्येक दिन सुबह 5:30 से 6:00 बजे के बीच उठते थे और दिन की शुरुआत पढ़ाई से करते थे।

उनकी एक दिन की रूटीन इस प्रकार थी:

  • सुबह 5:30 – 6:00 बजे: उठना और 1-2 घंटे पढ़ाई
  • सुबह 8:00 – दोपहर 2:00 बजे: कोचिंग क्लास में गहन अध्ययन
  • दोपहर बाद: नोट्स की समीक्षा और विषयवार रिवीजन
  • शाम: मानसिक ताजगी के लिए वॉलीबॉल या बैडमिंटन खेलना
  • रात: मॉक टेस्ट एनालिसिस और अगले दिन की योजना बनाना

उनकी यह संतुलित जीवनशैली न केवल उन्हें मानसिक रूप से स्थिर बनाती थी, बल्कि तनावमुक्त पढ़ाई में भी मदद करती थी।

पढ़ाई में आनंद और आत्म-प्रेरणा

उत्कर्ष का कहना है कि उन्हें पढ़ाई से असली आनंद आता था। उनका पढ़ाई के प्रति ऐसा प्रवाह और समर्पण था कि उन्हें समय का अहसास ही नहीं होता। उन्होंने कहा,

“मैं अपने लक्ष्य को लेकर इतना समर्पित था कि किसी बाहरी दबाव की आवश्यकता नहीं थी। मेरी आत्म-प्रेरणा ही मेरी सबसे बड़ी ताकत बनी।”

मॉक टेस्ट और पिछले साल के पेपर का महत्व

उत्कर्ष ने अपनी सफलता का बड़ा श्रेय मॉक टेस्ट और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को दिया। नियमित रूप से मॉक टेस्ट देने से न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ा बल्कि उन्होंने अपनी कमजोरियों को समय रहते पहचान कर उन्हें दूर किया।

वे कहते हैं,

“मैं हर टेस्ट से पहले अपने कमजोर टॉपिक्स को चिन्हित करता था और उन्हें सॉल्व करने के लिए एक शेड्यूल बनाता था। यह नियमितता ही मुझे टॉप रैंक तक लेकर आई।”

रिवीजन की रणनीति और प्लानर की भूमिका

उत्कर्ष ने परीक्षा से पहले 2 से 3 बार सम्पूर्ण पाठ्यक्रम का रिवीजन किया। उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थान द्वारा दिए गए साप्ताहिक प्लानर और स्वयं बनाए गए रिवीजन शेड्यूल ने उन्हें हर विषय पर पकड़ बनाए रखने में मदद की।

उन्होंने NEET के इच्छुक उम्मीदवारों को सुझाव देते हुए कहा,

“यदि आपका संस्थान विस्तृत योजना नहीं देता है, तो खुद का एक रिवीजन प्लान तैयार करें और उसे सख्ती से फॉलो करें। यही आपकी नींव मजबूत करेगा।”

भविष्य के NEET उम्मीदवारों के लिए उत्कर्ष की सलाह

पहली बार परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए:

  • NCERT पर पकड़ मजबूत करें
  • कक्षा के लेक्चर में अधिकतम ध्यान दें
  • टॉपिक वाइज टेस्ट दें
  • समय का मैनेजमेंट सीखें

रीअटेम्प्ट करने वाले छात्रों के लिए:

  • पिछली गलतियों का गहन विश्लेषण करें
  • केवल आवश्यक टॉपिक्स पर फोकस करें
  • मेंटल ब्लॉक्स को दूर करें
  • अभ्यास और मॉक टेस्ट को गंभीरता से लें

उत्कर्ष अवधिया की सफलता की कुंजी

तत्वविवरण
मुख्य संसाधनNCERT पुस्तकें, मॉक टेस्ट, पिछले वर्ष के प्रश्नपत्र
अनुशासननियमित दिनचर्या, संतुलित जीवनशैली
समर्थन प्रणालीपरिवार, कोचिंग, आंतरिक प्रेरणा
टाइम मैनेजमेंटपढ़ाई और मनोरंजन के बीच संतुलन
फोकस क्षेत्ररिवीजन, टेस्ट एनालिसिस, आत्म-अवलोकन

उत्कर्ष अवधिया की सफलता की कहानी हमें यह सिखाती है कि दृढ़ निश्चय, योजना, अनुशासन और आत्म-प्रेरणा के बल पर कोई भी छात्र NEET जैसी कठिन परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त कर सकता है। उनके अनुभव और रणनीतियाँ हर उस छात्र के लिए अमूल्य हैं जो NEET UG 2026 या आगामी वर्षों की तैयारी में लगा हुआ है।

सिवनी पुलिस को बड़ी सफलता: 720 ग्राम गांजे के साथ तस्कर वेदप्रकाश झरिया गिरफ्तार

सिवनी: सिवनी जिले में अवैध मादक पदार्थों, सट्टा, जुआ और शराब के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत सिवनी पुलिस को एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हाथ लगी है।

पुलिस अधीक्षक सुनील मेहता के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गुरुदत्त शर्मा व नगर पुलिस अधीक्षक श्रीमती पूजा पांडे के मार्गदर्शन में कोतवाली पुलिस ने एक गांजा तस्कर को रंगे हाथ गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है।

सूचना पर तत्काल कार्रवाई, आरोपी गिरफ्तार

दिनांक 12 जून 2025 को पुलिस को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई थी कि निर्माणाधीन रेलवे स्टेशन ग्राउंड के पास एक संदिग्ध व्यक्ति मादक पदार्थ लेकर घूम रहा है। सूचना की पुष्टि होते ही थाना कोतवाली की टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और आरोपी को पकड़ लिया।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान व बरामद सामग्री

गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान वेदप्रकाश झारिया, पिता दुखीराम झारिया, उम्र 55 वर्ष, निवासी रेलवे स्टेशन रोड, तिलक वार्ड, सिवनी के रूप में की गई। उसकी तलाशी के दौरान सफेद थैले में रखा 720 ग्राम गांजा बरामद किया गया, जिसकी बाजार कीमत लगभग ₹7,000 आँकी गई है।

इसके अलावा आरोपी के पास से:

  • ₹1,510 नगद राशि
  • रेडमी कंपनी का एंड्रॉयड मोबाइल फोन (कीमत लगभग ₹12,000)
    भी जब्त किए गए हैं।

एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज

पूछताछ के दौरान आरोपी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके चलते एनडीपीएस एक्ट की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।

पुराने आपराधिक रेकॉर्ड की भी हो रही जांच

यह उल्लेखनीय है कि आरोपी वेदप्रकाश झारिया पर पूर्व में भी अवैध मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस अब उसकी पूर्ववर्ती गतिविधियों की भी बारीकी से जांच कर रही है।

एक्टिव टीम: जिनकी रही विशेष भूमिका

  • थाना प्रभारी: किशोर वामनकर
  • उप निरीक्षक: दयाराम शरणगत, राहुल काकोडिया
  • सहायक उप निरीक्षक: रामअवतार डहेरिया
  • आरक्षक: अमित रघुवंशी, विक्रम देशमुख, शिवम बघेल, सिद्धार्थ दुबे, अजेन्द्र पाल
  • महिला आरक्षक: फरहीन

पुलिस की आमजन से अपील

पुलिस विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि नशे के खिलाफ चल रही मुहिम में सक्रिय भागीदारी निभाएं और यदि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत निकटतम पुलिस थाने में सूचना दें।