सिवनी जिले के घंसौर उप स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियां सामने आई हैं। संदिग्ध परिस्थितियों में कीटनाशक सेवन करने वाली दो महिलाओं को प्राथमिक उपचार के बाद जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन समय पर 108 एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने से परिजनों को निजी वाहन से मरीजों को ले जाना पड़ा। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्य बातें (Highlights)
- घंसौर उप स्वास्थ्य केंद्र में सामने आई स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही
- दो महिलाओं ने संदिग्ध परिस्थितियों में किया कीटनाशक का सेवन
- डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद किया जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर
- 108 एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची, अस्पताल की एंबुलेंस भी खराब
- परिजनों ने निजी वाहन से मरीजों को पहुंचाया मेडिकल कॉलेज
- घटना के बाद ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, सिवनी जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित घंसौर उप स्वास्थ्य केंद्र में घंसौर थाना क्षेत्र के दो अलग-अलग गांवों की दो महिलाओं को गंभीर हालत में लाया गया। बताया गया कि दोनों ने संदिग्ध परिस्थितियों में कीटनाशक का सेवन कर लिया था।
ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत गंभीर देखते हुए दोनों को जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
घंटों इंतजार के बाद भी नहीं पहुंची 108 एंबुलेंस
परिजनों के अनुसार, रेफर किए जाने के बाद लगातार 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया गया, लेकिन काफी देर तक एंबुलेंस अस्पताल नहीं पहुंची। वहीं, अस्पताल परिसर में मौजूद एंबुलेंस पहले से ही खराब होने के कारण उसका उपयोग भी नहीं किया जा सका।
समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने से दोनों मरीजों को अस्पताल में इंतजार करना पड़ा।
मजबूरी में निजी वाहन से रवाना किए गए मरीज
जब काफी देर तक एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं हो सकी, तब परिजनों ने निजी वाहन का इंतजाम किया और गंभीर हालत में दोनों महिलाओं को उपचार के लिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज लेकर रवाना हुए।
स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल
घटना के बाद ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और आपातकालीन एंबुलेंस व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंभीर मरीजों के लिए समय पर एंबुलेंस उपलब्ध होना बेहद जरूरी है, क्योंकि ऐसी परिस्थितियों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।
घंसौर क्षेत्र सिवनी जिला मुख्यालय से काफी दूरी पर स्थित है। गंभीर मरीजों को अक्सर बेहतर इलाज के लिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। ऐसे में 108 एंबुलेंस सेवा और अस्पताल की एंबुलेंस की उपलब्धता ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है।
इस खबर का असर
यदि घटना में सामने आए तथ्यों की पुष्टि होती है, तो यह मामला ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की कार्यप्रणाली की समीक्षा का विषय बन सकता है। समय पर एंबुलेंस उपलब्ध न होना गंभीर मरीजों की जान के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
घंसौर उप स्वास्थ्य केंद्र की यह घटना ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करती है। गंभीर मरीजों को समय पर एंबुलेंस उपलब्ध न होने के कारण परिजनों को निजी वाहन का सहारा लेना पड़ा। अब आवश्यकता है कि संबंधित विभाग इस मामले की जांच कर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाए।


