मध्य प्रदेश की स्थानांतरण नीति लागू होने के बावजूद सिवनी के सहकारिता विभाग और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में वर्षों से एक ही शाखा में पदस्थ शाखा प्रबंधकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जानिए पूरा मामला।
सिवनी। मध्य प्रदेश शासन द्वारा घोषित स्थानांतरण नीति के तहत प्रदेश के अधिकांश सरकारी विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले पूरे हो चुके हैं। कई विभागों ने अपनी स्थानांतरण सूची भी जारी कर दी है, लेकिन सिवनी जिले का सहकारिता विभाग और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अब तक इस प्रक्रिया से लगभग अछूता दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि अब सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जब अन्य विभाग शासन की नीति का पालन कर चुके हैं, तब सहकारिता विभाग में स्थानांतरण प्रक्रिया लागू नहीं होना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। लोगों का कहना है कि यदि शासन ने स्पष्ट स्थानांतरण नीति बनाई है तो उसका पालन सभी विभागों में समान रूप से होना चाहिए।
रोटेशन नीति के बावजूद वर्षों से एक ही शाखा में पदस्थ शाखा प्रबंधक
सूत्रों के अनुसार जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की कई शाखाओं में शाखा प्रबंधक पिछले पांच से छह वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सामान्यतः रोटेशन नीति के तहत समय-समय पर अधिकारियों का स्थानांतरण किया जाता है, लेकिन जिले की कई शाखाओं में यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होती नजर नहीं आ रही है।
बताया जा रहा है कि कुछ शाखा प्रबंधकों के विरुद्ध कार्यशैली को लेकर शिकायतें भी जिला प्रशासन तक पहुंच चुकी हैं। हालांकि इन शिकायतों पर आधिकारिक रूप से क्या कार्रवाई हुई है, इसकी कोई सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है।
किसानों के हितों से जुड़ा है पूरा मामला
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक केवल बैंकिंग संस्था ही नहीं, बल्कि हजारों किसानों की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र भी है। किसानों के खाते, फसल भुगतान और सहकारी समितियों का अधिकांश वित्तीय लेन-देन इसी बैंक के माध्यम से संचालित होता है।
ऐसे में बैंक शाखाओं में लंबे समय तक एक ही अधिकारी की पदस्थापना को लेकर पारदर्शिता और प्रशासनिक निष्पक्षता के प्रश्न उठना स्वाभाविक माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि धान भुगतान सहित कई बैंकिंग कार्यों को लेकर समय-समय पर किसानों ने असंतोष भी जताया है।
‘राजनीतिक संरक्षण’ की चर्चाएं, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं
स्थानीय चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि कुछ अधिकारी राजनीतिक प्रभाव के कारण लंबे समय से एक ही शाखा में बने हुए हैं। हालांकि इस संबंध में किसी सक्षम प्राधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
कुछ कर्मचारियों ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर यह भी दावा किया कि लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारी सहकारी समितियों के प्रबंधकों के लिए भी प्रशासनिक चुनौती बने हुए हैं।
जिला कलेक्टर की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
सहकारी संस्थाओं में लंबे समय से संचालक मंडल के चुनाव नहीं होने के कारण वर्तमान में प्रशासनिक जिम्मेदारी जिला प्रशासन के माध्यम से संचालित हो रही है। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जब जिला प्रशासन के पास सहकारिता व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी है, तब स्थानांतरण और रोटेशन नीति का पालन सुनिश्चित क्यों नहीं कराया जा रहा।
स्थानीय नागरिकों और किसानों का मानना है कि यदि रोटेशन नीति समय पर लागू होती है तो बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत हो सकती हैं।
जनहित में कार्रवाई की मांग
जिले के कई नागरिकों और किसान संगठनों का मानना है कि सहकारिता विभाग एवं जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में शासन की स्थानांतरण एवं रोटेशन नीति का निष्पक्ष पालन कराया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों का नियमानुसार स्थानांतरण किया जाए तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी और किसानों का विश्वास भी मजबूत होगा।
फिलहाल जिला सहकारी केंद्रीय बैंक या सहकारिता विभाग की ओर से इस विषय में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि संबंधित विभाग अपना पक्ष जारी करता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


