उमेश श्रीवास्तव, लखनादौन । मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की लखनादौन नगर परिषद एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला किसी आम नागरिक की शिकायत का नहीं, बल्कि लखनादौन नगर परिषद की पूर्व मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) एवं छपारा नगर परिषद की वर्तमान मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) से जुड़ा है। हैरानी की बात यह है कि लोगों की समस्याओं का समाधान कराने वाली अधिकारी को ही अपनी मूलभूत समस्या के निराकरण के लिए CM हेल्पलाइन का सहारा लेना पड़ा।
जानकारी के अनुसार लखनादौन नगर परिषद की तत्कालीन सीएमओ गीता वाल्मीकि, जो वर्तमान में छपारा नगर परिषद में पदस्थ हैं, अपने लखनादौन स्थित निवास में लंबे समय से दूषित पेयजल की समस्या से जूझ रही थीं। उनका निवास नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 4 में स्थित है, जहां नलों के माध्यम से गंदे और दूषित पानी की आपूर्ति होने की शिकायत सामने आई है।
अधिकारियों को बताया, फिर भी नहीं हुआ समाधान
सूत्रों के मुताबिक गीता वाल्मीकि ने पहले नगर परिषद के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को मौखिक रूप से समस्या से अवगत कराया था। उम्मीद थी कि प्रशासनिक स्तर पर जल्द कार्रवाई होगी और समस्या का समाधान निकाला जाएगा। लेकिन जब लगातार शिकायत के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो उन्होंने अंततः CM हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई।
नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
यह मामला सामने आने के बाद नगर परिषद की कार्यप्रणाली और शिकायत निवारण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि नगर परिषद की पूर्व सीएमओ को ही अपनी समस्या के समाधान के लिए CM हेल्पलाइन तक पहुंचना पड़े, तो आम नागरिकों की शिकायतों के निराकरण की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वार्ड क्रमांक 4 में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिलती रही हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ऐसे में यह घटना नगर परिषद की जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लगा रही है।
दूषित पेयजल से बढ़ सकता है स्वास्थ्य संकट
विशेषज्ञों के अनुसार दूषित पानी के सेवन से डायरिया, टायफाइड, हैजा और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में नगर परिषद की जिम्मेदारी बनती है कि नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
CM हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज होने के बाद अब निगाहें जिला प्रशासन और नगर परिषद की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। स्थानीय नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न केवल शिकायत का समाधान किया जाएगा, बल्कि वार्ड क्रमांक 4 सहित पूरे नगर क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था की भी जांच कराई जाएगी।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब व्यवस्था का हिस्सा रह चुकी अधिकारी को भी शिकायत दर्ज कराने के लिए CM हेल्पलाइन का सहारा लेना पड़ा, तो आम जनता की समस्याओं का समाधान आखिर किस तरह हो रहा है?
