सिवनी, बरघाट, धारनाकला (एस. शुक्ला): देशभर में गरीबों के लिए चलाई जा रही मुफ्त राशन योजना अब कई जगह सवालों के घेरे में है। सिवनी जिले के बरघाट क्षेत्र से सामने आई स्थिति ने इस योजना की जमीनी हकीकत पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर गरीब परिवार राशन के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आते हैं, वहीं दूसरी ओर आर्थिक रूप से संपन्न लोग भी इस योजना का लाभ उठाते दिख रहे हैं।
नियमों के बावजूद अमीर उठा रहे लाभ
सरकारी नियमों के अनुसार जिन परिवारों के पास चार पहिया वाहन, ट्रैक्टर, 100 वर्ग मीटर से अधिक का मकान या प्लॉट, या जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक है, वे मुफ्त राशन योजना के पात्र नहीं होने चाहिए।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। गांवों में ऐसे कई परिवार हैं जिनके पास पक्के मकान, वाहन और लाखों की आय है, फिर भी वे सरकारी राशन का लाभ ले रहे हैं।
दबंगई के दम पर पहले मिलता है राशन
स्थानीय लोगों का आरोप है कि गांव के प्रभावशाली और संपन्न लोग राशन दुकान पर पहुंचते ही प्राथमिकता मांगते हैं।
- वे लाइन में लगना अपनी शान के खिलाफ मानते हैं
- राशन विक्रेताओं पर दबाव बनाकर पहले राशन लेते हैं
- यदि उनकी मांग पूरी न हो, तो विवाद की स्थिति बन जाती है
राशन विक्रेताओं का कहना है कि वे मजबूरी में ऐसे लोगों को पहले सेवा देते हैं, क्योंकि उन्हें शिकायतों और दबाव का सामना करना पड़ता है।
181 हेल्पलाइन का हो रहा दुरुपयोग
बताया जा रहा है कि कई संपन्न लोग 181 सीएम हेल्पलाइन का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए करते हैं।
कम कमीशन पर काम कर रहे राशन विक्रेता इस दबाव के चलते नियमों का पालन करने में असमर्थ हो जाते हैं।
वाहनों से पहुंचते हैं राशन लेने
हैरानी की बात यह है कि राशन दुकानों पर कई लाभार्थी टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर वाहनों से आते हैं, जबकि वे खुद को गरीब श्रेणी में दर्ज कराए हुए हैं।
PMGKAY योजना: गरीबों के लिए या सबके लिए?
भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत पात्र राशन कार्ड धारकों को 2028 तक मुफ्त गेहूं और चावल प्रदान किया जा रहा है।
- प्रति व्यक्ति 5 किलो राशन
- अंत्योदय (AAY) परिवारों को 35 किलो तक राशन
लेकिन अब यह योजना कई जगह अमीरों के लिए भी “फायदे का सौदा” बनती जा रही है।
समग्र परिवार ID में हेरफेर का खेल
जांच में यह भी सामने आया है कि कई परिवारों ने परिवार ID अलग-अलग बनवाकर योजना का लाभ कई हिस्सों में बांट लिया है।
जबकि वास्तविकता में पूरा परिवार एक साथ ही रहता है।
इसी तरह की गड़बड़ी प्रधान मंत्री आवास योजना में भी देखने को मिली है, जहां सक्षम लोगों ने भी सरकारी लाभ हासिल कर लिया।
90% गांव गरीब श्रेणी में? आंकड़े चौंकाने वाले
सबसे बड़ा सवाल यह है कि गांव के लगभग 90% लोग गरीबी रेखा में दर्ज हैं, जबकि उनके पास:
- महंगे वाहन
- बड़ी जमीन
- आलीशान मकान
फिर भी सरकारी रिकॉर्ड में वे गरीब हैं।
क्या समाधान है? सरकार से उठी नई मांग
स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि:
- नियमों में सख्ती लाई जाए
- अपात्र लोगों को सूची से हटाया जाए
- दबंग और संपन्न लोगों के लिए अलग व्यवस्था बनाई जाए
कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया है कि ऐसे प्रभावशाली लोगों को घर पहुंच राशन सेवा दी जाए, ताकि राशन दुकानों पर विवाद और दबाव की स्थिति खत्म हो सके।
क्या जिला प्रशासन करेगा कार्रवाई?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर सख्त कदम उठाएगा या फिर गरीबों का हक यूं ही छीना जाता रहेगा?यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकार की सबसे बड़ी जनकल्याणकारी योजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठना तय है।
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