सिवनी। न्याय की जीत और मासूमों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा संदेश देते हुए सिवनी की माननीय विशेष न्यायालय (पॉक्सो अधिनियम) ने एक जघन्य अपराध के आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला समाज के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है कि बच्चों के साथ अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
यह मामला वर्ष 2024 का है, जब थाना उगली अंतर्गत एक ग्राम में रहने वाली 5 वर्षीय मासूम बच्ची को आरोपी राजेन्द्र उर्फ बोरा ने उसके घर में अकेला पाकर डरा-धमकाकर उसके साथ घिनौना अपराध किया। घटना के बाद बच्ची के परिजनों ने तत्काल थाना उगली में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने बिना देरी किए मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।
जांच के दौरान पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया। साथ ही आरोपी का भी चिकित्सकीय परीक्षण कर उसका रक्त नमूना लिया गया और डीएनए जांच करवाई गई। फॉरेंसिक रिपोर्ट, वैज्ञानिक साक्ष्य और पीड़िता व उसके परिजनों के बयान ने आरोपी के खिलाफ मजबूत आधार तैयार किया। पुलिस ने पूरे मामले को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ हैंडल किया।
इस केस की विवेचना उपनिरीक्षक सदानंद गोदेवर द्वारा की गई, जिन्होंने निर्धारित समय सीमा में संपूर्ण साक्ष्यों के साथ अभियोग पत्र माननीय विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायालय में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक / सहायक जिला अभियोजन अधिकारी श्री नवल किशोर सिंह ने पूरे मामले को मजबूती से रखा। उन्होंने सभी गवाहों के कथन प्रभावी ढंग से कराए और ठोस प्रमाण प्रस्तुत किए, जिससे आरोपी का अपराध संदेह से परे सिद्ध हुआ।
सभी गवाहों, फॉरेंसिक रिपोर्ट, डीएनए साक्ष्य, अभियोजन एवं बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद माननीय विशेष न्यायाधीश ने आरोपी राजेन्द्र उर्फ बोरा को दोषी करार देते हुए कड़ा फैसला सुनाया।
न्यायालय ने आरोपी को –
- धारा 65(2) बीएनएस के अंतर्गत 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹1000 अर्थदंड,
- तथा धारा 5(एम)/6 पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹1000 जुर्माना
से दंडित किया।
यह फैसला यह साबित करता है कि न्याय व्यवस्था मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है। इस निर्णय से न केवल पीड़िता को न्याय मिला है, बल्कि समाज में यह भरोसा भी मजबूत हुआ है कि कानून अपराधियों के खिलाफ सख्ती से खड़ा है।
इस तरह के फैसले अपराधियों के लिए डर और आम जनता के लिए सुरक्षा का भरोसा बनते हैं। यह निर्णय आने वाले समय में ऐसे अपराधों को रोकने में एक मजबूत उदाहरण के रूप में देखा जाएगा।
सिवनी की अदालत का यह ऐतिहासिक फैसला पूरे जिले ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में एक सख्त संदेश देता है कि मासूमों की जिंदगी से खेलने वालों का अंजाम सिर्फ और सिर्फ जेल है।

