Thursday, March 4, 2021

उत्‍तर कोरिया के सर्वोच्‍च नेता किम जोंग उन सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया के महासचिव निर्वाचित

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Khabar Satta Deskhttps://khabarsatta.com
खबर सत्ता डेस्क, कार्यालय संवाददाता
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सियोल। उत्‍तर कोरिया ने देश के सर्वोच्‍च नेता किम जोंग उन को आठवीं कांग्रेस में सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया के महासचिव के रूप में निर्वाचित किया है। सोमवार को प्योंगयांग की आधिकारिक कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी ने रिपोर्ट में कहा कि चुनाव रविवार को राजधानी में कांग्रेस के छठे दिन के सत्र में हुआ, जिसके बाद 2016 में सचिवालय प्रणाली को बहाल करने के लिए पार्टी के नियमों में संशोधन किया गया।

सेना ने योनहाप समाचार एजेंसी ने केसीएनए रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि 8वीं कांग्रेस ने सर्वसम्मति से सभी प्रतिनिधियों और अन्य पार्टी सदस्यों की इच्‍छा से वर्कर्स पार्टी के महासचिव के रूप में किम जोंग को चुनने पर एक निर्णय लिया। इसके पूर्व महासचिव का खिताब किम के पिता किम जोंग-इल और दादा किम इल-सुंग के पास यह पद था। किम ने 2011 के अंत में अपने पिता की मृत्यु के बाद यह पद ग्रहण किया था, उत्तर ने किम जोंग-इल को पार्टी के स्‍थाई रूप से महासचिव के पद पर रहे।

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इसके पूर्व उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने दुनिया के देशों के साथ संबंधों को सुधारने का वादा किया। उन्होंने अंतर कोरियाई संबंधों के प्रति भी नया रवैया अपनाए जाने पर जोर दिया। उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी कोरिया सेंट्रल न्यूज एजेंसी ने बताया कि किम ने सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी के सम्मेलन को लगातार तीसरे दिन संबोधित किया। उन्होंने पड़ोसी प्रतिद्वंद्वी दक्षिण कोरिया के साथ संबंधों की समीक्षा भी की। किम ने अपने संबोधन में कहा कि उनके देश की विदेश नीति दूसरे देशों के साथ संबंधों को बढ़ाने और विकसित करने पर केंद्रित होगी।

प्रतिबंधों के चलते बदहाली से जूझ रहे उत्तर कोरियाई नेता ने सम्मेलन के पहले दिन माना था कि देश की आर्थिक स्थिति बुरी तरह चरमरा गई है। देश की आर्थिक नीति विफल हो गई है। सत्तारूढ़ पार्टी का यह अहम सम्मेलन पांच साल बाद हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह देश अमेरिका के नए बाइडन प्रशासन के साथ बातचीत से पहले दक्षिण कोरिया से संबंध बेहतर कर सकता है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और किम के बीच वर्ष 2018 और 2019 में वार्ता हुई थी, लेकिन प्रतिबंधों को हटाने की मांग पर वार्ता विफल हो गई थी। तब से दोनों देशों में बातचीत रुकी है।

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