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सिवनी: रावण दहन के नाम पर रामदल की लाखों की लूट की खबर सुर्खियों में

Seoni: The news of Ramdal's loot of lakhs in the name of Ravana Dahan is in the headlines

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सिवनी: सिवनी जिला मुख्यालय में रामदल समिति (Ramdal Samiti Seoni) द्वारा बीते कई वर्षों से किये जा रहे आयोजनों (Ravan Dahan) में बीते कई वर्षों से आमजनता से लूट की ख़बरें सुर्खियाँ बटोर रही है, मीडिया रिपोर्टस की माने तो वर्षों से रामदल समिति (Ramdal Samiti Seoni) द्वारा लोगों की जेबें ढीली कर अपनी गुट के स्वार्थ (जिसे समिति और समिति के मेम्बेर्स का स्वार्थ भी कहा जा सकता है) सिद्धि करने जैसा कृत्य किया है.

सिवनी जिले के समाचार पत्र प्रथ्वीटाइम्स की रिपोर्ट की माने तो रामदल समिति सिवनी द्वारा जिले की जनता को भृमित कर लम्बा चौड़ा सब्जबाग दिखाकर फुस्सी बम रावण के नाम पर फोड़ना इनका पेशा बन गया है इतना ही नही इन्होंने भोले भाले लोगों को बेवकूफ तो जरूर बनाया पर शहर के सम्भ्रांत डॉक्टर्स और नेताएँ को भी नही छोड़ा यहि कारण है कि आज तक इनकी यह परिपाटी चली आ रही है और फालतू में लोगों की जेब कट रही है

पैसे खर्च कर रावण दहन देखने पहुंचे लोग हुए अव्यवस्था का शिकार

रामदल समिति सिवनी द्वारा रावण दहन कार्यकर्म देखने के लिए अपनी जेब ढीली करके पहुंचे लोगों ने यह भी बताया की जब आयोजन देखने के लिए रामदल समिति द्वारा धन वसूला जा रहा था उस समय तक आयोजन समिति (रामदल समिति सिवनी) द्वारा यह जानकारी नही दी गई कि खुदकी गाड़ी पार्किंग की जिम्मेदारी और व्यवस्था रुपए कर्च कर आयोजन देखें आ रहे लोगों को ही स्वयं करनी होगी, और जब लोग गन्तव्य तक अपने परिवार के साथ पहुंचे तो इन्हें ठगा सा महसूस हुआ वहीं जिम्मेदार आयोजको का कोई भी व्यक्ति मौजूद नही था

रावण दहन तो सार्वजनिक कार्यक्रम, फिर पैसो की वसूली क्यों?

रामदल नामक संस्था जो रावण दहन दिखाने के लिए किसी से 50 तो किसी से 100 रु वसूली करती है तो इसका मतलब यह भी हो सकता है कि यह समिति रावण दहन और श्री राम की बुराई पर अच्छाई की जीत पर खुदका कॉपीराइट समझती हो, और जो भी यह आयोजन देखना चाहे उसे पैसे तो देने होंगे.

जब यह रामदल ही भूखा है तो औरों के क्या पेट भरेगा

खैर एक समय ऐसा भी था जब आज से कुछ वर्ष पहले सिवनी का दशहरा पूरे मध्यप्रदेश में प्रसिद्ध था वहीं ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को आयोजकों द्वारा ठहरने व भोजन की भी व्यवस्था की जाती थी लेकिन कहते हैं न जब यह रामदल ही भूखा है तो औरों के क्या पेट भरेगा इतना ही नही जब से रामदल नामक संस्था ने इस ओर अपना रुख किया है तभी से यह आयोजन फूहड़ता का प्रमाण बन निम्नस्तरीय हो गया है

रावण दहन में बड़े शहरों के बाउंसर की भी खबर

एक ऐसी समिति जो खुदको रामदल बताता है उसके इस रावण दहन आयोजन में बाहरी शहरों से बाउंसर को बुलाने की खबर भी मीडिया में गूँज रही है, अब इस बात पर मुद्दा यह है कि सिवनी जैसे शांतप्रिय शहर में बाहरी आयातित बाउंसरों को रोजगार देने की इस समिति को आखिर जरूरत क्या थी या फिर खुद समिति अपने आपको असुरक्षित महसूस करते हैं तभी इन्हें बाउंसर की जरूरत पड़ी, चलिए माना सुरक्षा की द्रष्टि से आपने बाउंसर को बुलाया भी तो क्या जिले के लोगों को रोजगार देने में समिति को तकलीफ कैसी.

बाउंसर द्वारा ग्रामीणों के साथ बत्तमीजी और धक्का मुक्की

विश्वसनीय सूत्रों की माने तो यह भी है कि इन बाउंसरों द्वारा चलते कार्यक्रम में बेचारे ग्रामीणों के साथ बत्तमीजी भी कर डाली इतना ही नही कुछ ग्रामीणों के साथ धक्का मुक्की भी की गई जो इस शहर के नेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और उपस्थित गणमान्य नागरिकों के हितों पर भी कुठाराघात है.

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