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सिवनी: जनपद की जमीन पर अमीरों का कब्जा, संसोधित जमीन मामले मे प्रशासन क्यो बना मूकदर्शक

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सिवनी, बरघाट, धारनाकला: ग्रामीण अंचलों मे शासकीय जमीन पर अवैध कबजाधारियो द्वारा काबिज होकर अपना अपना आधिपत्य जमाकर वर्षो से दबंगो ने शासकीय जमीन को अपने कब्जे मे कर रखा है तथा कब्जा कर लाभ भी कमाया जा रहा है किन्तु इस दिशा मे ठोस कार्रवाई सामने न आने से शासकीय जमीन पर अवैध कब्जो की संख्या बढते ही जा रही है.

जनपद की जमीन के संसोधन तथा अतिक्रमण मामले मे कार्यवाई नही

उल्लेखनीय है की धारनाकला बस स्टैंड मे स्थित जनपद की शासकीय जमीन पर जहा दबंगो ने अवैध कब्जा कर आलीशान दुकाने स्थापित कर ली है वही दूसरी तरफ जनपद की जमीन को गलत तरीके से राजस्व रिकार्ड मे निजी तौर पर अपने नाम संसोधित कराने का मामला भी प्रशासन के संज्ञान मे लम्बे समय है जिसकी ठोस कार्रवाई सिर्फ जांच मे सिमटकर रह गई है जबकि राजस्व की टीम के द्वारा जांच करते हुऐ स्पस्ट उललेख के साथ प्रतिवेदन बहूत पहले तहसीलदार बरघाट को सौपा जा चुका है जिस पर ठोस कार्रवाई का इन्तजार ग्रामीणो को लम्बे समय है.

संसोधित जमीन की बिक्री पर हो ठोस कार्रवाई

उल्लेखनीय है की जनपद सभा सिवनी का मुख्य हिस्सा जो की सिवनी बालाघाट मेन रोड से लगा हुआ को गलत तरीके से संसोधन के मामले मे जिला कलेक्टर तथा तहसील दार को आवेदन प्रस्तुत किया गया है साथ ही संसोधित शासकीय जमीन को जनहित मे वापस राजस्व रिकार्ड मे जनपद के नाम दर्ज करने के लिये आवेदक द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे है किन्तु प्रशासन द्वारा इस दिशा मे निस्पक्ष रूप से ध्यान न दिये जाने के कारण दबंगो के हौसले बढना लाजिमी है

जबकि जहा तक भू राजस्व संहिता की धारा 165(7_ख) मे स्पस्ट प्रावधान है की शासन से पट्टे पर दी गई भूमि भले ही धारा 158(3) के तहत भूमि स्वामी हक ही क्यो न प्राप्त हो ऐसी भूमि का अन्तरण कलेक्टर के बिना नही किया जा सकता वही दूसरी तरफ जनपद सभा सिवनी के नाम पर दर्ज भूमि का रकबा 1990_91 तक 59 आरे राजस्व रिकार्ड मे दर्ज है.

जो घटकर और संसोधित होकर 1992 मे कम हो जाता है और राजस्व रिकार्ड मे लाल स्याही से दर्ज जमीन महंगे दर मे बिक्री भी हो जाती है साथ ही सामने मेन रोड से लगी जनपद की जमीन पर एकाधिकार भी कर लिया जाता है किन्तु इस दिशा मे प्रशासन द्वारा ठोस कार्रवाई न किया जाना चिंतनीय विषय है.

भूमि खरीद बिक्री मे मजदूर बना करोडपति

यहा यह भी उल्लेखनीय है की जहा भूमि की खरीद बिक्री तथा राजस्व चोरी के मामले मे कल तक मजदूरी करने वाला आज करोडपति बनकर भूमि हथिया रहा है वर्तमान मे चर्चा का विषय बना हुआ है चूकि जनपद की शासकीय जमीन पर इसके द्वारा रोड के किनारे तक पैर पसार दिये गये है तथा अनेको प्लाट तथा खेतिहर जमीन की खरीदी बिक्री तथा राजस्व की चोरी मे नाम सबसे उपर है.

चूकि वर्तमान मे धारनाकला मे ही बस स्टेंड से लगी जमीन 4000 चार हजार रूपये वर्ग फिट मे तो बिक ही रही है किन्तु जहा तक राजस्व और स्टाम्प शुल्क की बात करे तो यह अलग ही बया कर रहा है ऐसी स्थिति मे जी एस टी और आयकर चोरी मे यह अब तक प्रशासन की नजरो से बचते चला आ रहा है जिला कलेक्टर इस दिशा मे ध्यान देगे ऐसी जना अपेक्षा है

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