सिवनी: कलयुगी पुत्र विनोद ने माँ को उतारा मौत के घाट, घरेलू विवाद बना हत्या की वजह

SHUBHAM SHARMA
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सिवनी: कलयुगी पुत्र विनोद ने माँ को उतारा मौत के घाट, घरेलू विवाद बना हत्या की वजह

सिवनी, बरघाट, धारनाकला: बरघाट थानांतर्गत ग्राम सालहेकला गोडी मोहल्ला में रहने वाली परमिला पति बीर सिंह की हत्या उसी के पुत्र विनोद अडपाचे के द्वारा कर दी गई। इस घटना ने पूरे गाँव को स्तब्ध कर दिया है और एक बार फिर घरेलू हिंसा के गंभीर परिणामों को उजागर किया है।

घटना के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक परमिला अपने बड़े पुत्र विनोद के साथ रहती थी। गलत संगत के चलते और कोई काम न करने के कारण घर में आये दिन लड़ाई-झगड़ा माँ और बेटे के बीच होता रहता था। पुलिस से प्राप्त जानकारी में यह भी बताया गया कि हत्या वाले दिन भी, 17 जुलाई को, माँ और बेटे के बीच घर का अनाज बेचने को लेकर विवाद हुआ और मारपीट हुई थी।

विवाद का आरंभ

दोपहर 1:30 बजे विवाद होने पर मृतक परमिला घर से निकलकर बाहर जा रही थी। तभी आरोपित विनोद ने बाल पकड़कर उसे घर वापस लाया और घर में रखे तख्त पर माँ का सिर पटककर मारपीट की, जिसके चलते माँ की मृत्यु हो गई।

हत्या के बाद का घटनाक्रम

हत्या के बाद से आरोपी पुत्र घर से फरार हो गया था। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी की तलाश शुरू कर दी। थाना प्रभारी मोहनीश बैस द्वारा आरोपी को पकड़ने की जिम्मेदारी उप निरीक्षक पी एस सययाम को सौंपी गई थी। 18 घंटे बाद आरोपी हिररीनदी के पास से गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तारी और आरोप

आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और परिवर्तित धारा 103 के तहत मामला दर्ज किया गया और जेल भेज दिया गया।

पुलिस की भूमिका और कार्रवाई

माँ के हत्यारे को 18 घंटे के अंदर गिरफ्तार करने में थाना प्रभारी मोहनीश बैस, उपनिरीक्षक पी एस सययाम, प्रधान आरक्षक संतोष मरशकोले, शोएब खान, और विमल डोगरे की विशेष भूमिका रही। इनकी त्वरित और समर्पित कार्रवाई ने इस जघन्य अपराध के आरोपी को पकड़ने में सफलता प्राप्त की।

घरेलू हिंसा के परिणाम

इस घटना ने एक बार फिर से घरेलू हिंसा के गंभीर परिणामों को उजागर किया है। यह स्पष्ट होता है कि घरेलू विवाद कैसे एक हद तक बढ़ सकते हैं कि वे हत्या जैसे गंभीर अपराध में बदल जाते हैं। परिवार के भीतर चल रहे तनाव और समस्याओं का समय पर समाधान न होने से ऐसे दुखद परिणाम सामने आते हैं।

समाज की भूमिका

समाज की भी यह जिम्मेदारी है कि वह ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करे और मदद के लिए आगे आए। घरेलू हिंसा के प्रति जागरूकता फैलाना और इससे संबंधित हेल्पलाइनों और सहायता सेवाओं का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। समाज को मिलकर ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे घरेलू हिंसा की घटनाओं में कमी आ सके।

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