Saturday, March 6, 2021

किसानों की हिंसक ट्रैक्टर परेड, हिंसा की वजह और उपद्रव के लिए कौन है जिम्मेदार, जाने सब कुछ

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Shubham Sharmahttps://khabarsatta.com
Editor In Chief : Shubham Sharma
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नए कृषि कानूनों (New Farm Laws) के खिलाफ 26 जनवरी को किसानों का ट्रैक्टर मार्च (Kisan Tractor March) बवाल में बदल गया। किसान नेताओं की सहमति से ट्रैक्टर परेड के लिए समय और अलग-अलग बॉर्डर से रूट तय किए गए थे, किसान नेताओं ने रैली में किसी तरह की अराजकता न होने की गारंटी भी ली थी, लेकिन इसके बावजूद रैली में अराजकता हुई। पुलिस पर पथराव हुआ, जवानों को लाठियों से पीटा गया, तलवार से हमला किया गया।इतना ही नहीं रूट को तोड़ किसान लाल किले के अंदर तक जा घुसे और प्राचीर में खड़े होकर हथियार और अपने झंडे लहराने लगे। इस दौरान कई जगहों से हिंसा और तोड़फोड़ की खबरें भी सामने आईं।

आखिर एक व्यवस्था बनने और सब कुछ पहले से तय होने के बावजूद हालात क्यों बिगड़े? और जब हालात बिगड़े तब ये जिम्मेदार किसान नेता क्या कर रहे थे? यह सवाल हर किसी के जहन में हैं। सवाल यह भी है कि जब खुफिया एजेंसियों को ट्रैक्टर परेड में यह सब होने की पहले से जानकारी थी तो फिर इसके लिए पहले से तैयारी क्यों नहीं की गई? आखिर सुरक्षा एजेंसियां और ग्रह मंत्रालय जब पहले से यह सब जानते थे तो क्यों लापरवाही बरती गई? 26 जनवरी जैसे महापर्व पर लाल किले की सुरक्षा में लापरवाही क्यों बरती गई, कैसे प्रदर्शनकारी लाल किले में घुस गए? कैसे लाल किले में झंडा फहरा दिया गया?

तय समय से पहले शुरू किया मार्च

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दरअसल किसानों को 12 बजे से ट्रैक्टर मार्च निकालने की इजाजत दी गई थी, लेकिन किसानों ने मार्च तय समय सीमा से पहले ही शुरू कर दिया। जिसे पुलिस रोक पाने में नाकाम रही। किसान नेताओं ने इन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने अपने नेताओं की भी नहीं सुनी। इसके बाद बवाल शुरू हो गया। पुलिस प्रशासन का कहना है कि किसानों ने बेरिकेडिंग तोड़ हंगामा शुरू कर दिया।

रूटों पर नियमों की उड़ाई गईं धज्जियां 

रूट नंबर 1 सिंघु बॉर्डर: किसानों को संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर से दाएं मुड़ना था, लेकिन किसान सीधा जाकर मुकरबा चौक से बाएं मुड़ना चाह रहे थे। बाएं मुड़ कर वो बुराड़ी चौक, वजीराबाद चौक की तरफ जाना चाहते थे। मुकरबा चौक पर पुलिस ने इन्हें रोकने की कोशिश की। मुकरबा चौक पर ही पुलिस के साथ किसानों की झड़प भी हुई। बैरिकेड तोड़ने के लिए किसानों ने निहंग को आगे किया जो घोड़े पर सवार थे। पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े, हालांकि आंसू गैस के गोले का किसानों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

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रूट नंबर 2 टिकरी बॉर्डर: किसानों को नांगलोई, नजफगढ़ होते हुए बहादुरगढ़ जाना था, जहां से उन्हें वापस आना था। किसानों को नांगलोई चौक से दाएं मुड़ना था, लेकिन कुछ किसान बैरिकेड तोड़कर सीधे पीरागढ़ी की तरफ जाने लगे। नांगलोई चौक पर ही किसानों और पुलिस के बीच टकराव हुआ।

रूट नंबर 3 अप्सरा बॉर्डर: किसानों को अप्सरा चौक से सीधा साहिबाबाद की तरफ जाना था, लेकिन किसान दिलशाद गार्डन फ्लाईओवर से यू टर्न लेकर सीलमपुर की तरफ मुड़ गए। सीलमपुर जाने वाले रास्ते पर ही बीकानेर वाली बत्ती के पास पुलिस ने इन्हें रोकने की कोशिश की जहां दोनों में विवाद छिड़ गया।

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चौथा रूट गाजीपुर: किसानों को गाजीपुर से आनंद विहार होते हुए अप्सरा बॉर्डर और वहां से दाएं मुड़ कर हापुड़ की तरफ जाना था, लेकिन किसान एनएच 24 पर सीधे चलते आए। 30 फीसदी किसान आनंद विहार की तरफ भी मुड़ गए, लेकिन अधिकांश किसान अक्षरधाम की तरफ बढ़ते गए।

गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस ने कंटेनर लगाकर किसानों को रोकने की कोशिश की लेकिन किसानों ने ट्रैक्टर की मदद से कंटेनर को हटा दिया और सीधे अक्षरधाम की तरफ बढ़ गए। अक्षरधाम मंदिर से ठीक पहले पुलिस ने आंसू गैस के गोले की मदद से उन्हें रोकने की कोशिश की, बैरिकेडिंग भी की। मगर किसान बैरिकेडिंग तोड़कर सीधे सरायकाले खां की तरफ बढ़ गए।

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वहीं, किसानों की भीड़ लाल किले में अंदर तक घुस आई और अपना झंडा फहराने लगी। कहा जा रहा है कि कई दशकों के बाद आज पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी आंदोलनकारी संगठन के लोगों की भीड़ लाल किले में घुसी हो। हालांकि पुलिस में बल प्रयोग करते हुए उन्हें वहां से खदेड़ दिया।

ट्रैक्टर रैली को लेकर किसान मजदूर संघर्ष समिति (KMSC) के अध्यक्ष सतनाम सिंह पन्नू ने खुलेआम कहा कि, हम दिल्ली पुलिस के रूट का नहीं, बल्कि अपने रूट पर ही मार्च निकालेंगे। हमने दिल्ली पुलिस को बताया है कि हम बाहरी रिंग रोड पर जाएंगे, अब दिल्ली पुलिस को देखना है कि वो इसके लिए क्या व्यवस्था करते हैं। रैली में बवाल होने के पीछे इस संगठन की मनमानी भी सामने है।

राकेश टिकैत बोले : तय रुट बंद कर दिए थे, इसीलिए दूसरे रुट पर जाना पड़ा

दिल्ली में हुए बवाल पर एक न्यूज चैनल से बात करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि यह सब प्रशासन की सोची समझी साजिश हैं। पहले रुट निर्धारित कर अनुमति दी गई, लेकिन बाद में उसी रुट पर बेरिकेडिंग कर दी गई। इसीलिए किसानों को मजबूरन दुसरा रुट लेना पड़ा। सरकार आंदोलन को खत्म करना चाहती है इसीलिए यह साजिश के तहत किया गया। उन्होंने कहा कि हिंसा में शामिल लोगों से हमारा कोई लेना देना नहीं है। हमारे सब लोग शांतिपूर्ण तरीके से जा रहे हैं। जो लोग गड़बड़ फैलाने की कोशिश कर रहे हैं वो चिन्हित हैं। वो राजनीतिक दल के लोग हैं और इस आंदोलन को खराब करना चाहते हैं।

यह शर्मिंदगी का विषय :योगेंद्र यादव

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने एक न्यूज़ चैनल से बात करते हुए कहा, ”यह बिना किसी संदेह के निंदनीय है और शर्मिंदगी का विषय है। यह गणतंत्र के लिए, देश के लिए शर्मिंदगी का विषय है। मैं किसान नेताओं और आंदोलन में शामिल लोगों से अपील करता हूं कि पुलिस के दिए रूट को ही मानें। जो लोग तय रूट से बाहर चले गए हैं उन्हें भी तय रूट पर ही वापस आ जाना चाहिए। अभी मैं यह भी नहीं जानता कि यह हमारे संगठन के लोग हैं या कौन है, लेकिन ऐसा जो लोग भी कर रहे हैं वो निंदनीय है। मुझे अभी यह नहीं पता कि आगे क्या होगा, लेकिन मैं सिर्फ एक बार और अपील करना चाहता हूं कि इससे आंदोलन और किसान की छवि खराब हो रही है। ऐसा ना करें, पुलिस के रूट पर ही रहें।’

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा : असामाजिक तत्व आंदोलन में घुस गए

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि हमारे सभी प्रयासों के बावजूद कुछ लोगों ने रूट का उल्लंघन किया और निंदनीय कृत्यों में लिप्त रहे। असामाजिक तत्व शांतिपूर्ण आंदोलन में घुस गए। हमने हमेशा माना है कि शांति हमारी सबसे बड़ी ताकत है और किसी भी उल्लंघन से आंदोलन को नुकसान होगा। किसान गणतंत्र दिवस परेड में अभूतपूर्व भागीदारी के लिए हम किसानों को धन्यवाद देते हैं। हम उन अवांछनीय और अस्वीकार्य घटनाओं की भी निंदा करते हैं, जो आज घटित हुई हैं। ऐसे कृत्यों में लिप्त होने वाले लोग हमारे सहयोगी नहीं हैं।

“हिंसा किसी समस्या का हल नहीं है. चोट किसी को भी लगे, नुकसान हमारे देश का ही होगा. देशहित के लिए कृषि-विरोधी क़ानून वापस लो!”

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा

“सबसे दुर्भाग्यपूर्ण. मैंने शुरू से ही किसानों के विरोध का समर्थन किया है लेकिन मैं अराजकता की निंदा नहीं कर सकता और #RepublicDay पर कोई झंडा नहीं बल्कि पवित्र तिरंगा लाल किले के ऊपर लहराना चाहिए.”

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा,

“अगर सरकार चाहती तो आजकी हिंसा रोक सकती थी. दिल्ली में जो चल रहा है उसका समर्थन कोई नही कर सकता. कुछ भी हो लाल किले और तिरंगे का अपमान सहन नही करेंगे. लेकिन माहौल क्यूं बिगड़ गया? सरकार किसान विरोधी कानून रद्द क्युं नही कर रही? क्या कोई अदृश्य हाथ राजनीति कर रहा है? जय हिंद “

शिव सेना नेता संजय राउत

Web Title: Who is responsible for the violent tractor parade of farmers, the cause of violence and the nuisance, everything

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