अप्रैल की गर्मी में रातों की नींद होगी मुश्किल | weather forecast

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भोपाल। इन दिनों पतझड़ शुरू हो गया है। मौसम थोड़ा ठंडा गर्म है परंतु आने वाला महीना परेशान करने वाला होगा। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल की गर्मी पसीने छुड़ा देगी। रात का तापमान भी इस कदर बढ़ेगा कि लोगों की नींद आसान नहीं रह जाएगी। पिछले साल अप्रैल में 29 तारीख को रात का तापमान 29.7 डिग्री दर्ज किया गया था। 39 साल बाद अप्रैल की यह सबसे ज्यादा तपने वाली रात थी।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मिल रहे ट्रेंड के अनुसार सुबह से ही तेज धूप चटकने लगेगी। चिलचिलाती धूप का असर सूरज ढलने के बाद भी बरकरार रहेगा। दिन के अलावा रात में भी तपिश बनी रहेगी। पिछले साल अप्रैल माह में दिन भी सात साल बाद सबसे ज्यादा गर्म रहे थे।28 अप्रैल को दिन का तापमान 42.7 डिग्री तक पहुंच गया था। मौसम वैज्ञानिक एके शुक्ला कहते हैं कि इस बार धूप की तीव्रता ज्यादा रहेगी। धूप के तीखेपन से तपिश भी अधिक महसूस होगी। मिल रहे ट्रेंड के अनुसार इस बार पारे की चाल भी कुछ ज्यादा ही तेज रहने का अनुमान है। दोपहर होने से पहले ही पारा तेजी से ऊपर चढ़ सकता है। सुबह सूरज उगने के साथ ही तीखी धूप असर दिखाएगी।
यह हैं कुछ खास वजह…
अप्रैल माह में नमी में लगातार कमी आ रही है। पिछले सालों की तुलना में इस बार यह 15% से भी कम रह सकती है।
उत्तर से ठंडी हवा आने का पैटर्न थम गया है। इसका असर इस बार जल्द पड़ेगा। अप्रैल में तापमान ज्यादा बढ़ने लगेगा।
उत्तर से आने वाली ठंडी हवा का प्रभाव कम हो रहा है। इसलिए इस वर्ष अप्रैल के माह में सामान्य के तापमान से अधिक गर्मी पड़ने की संभावना है।
पिछले साल की तुलना में इस बार नमी कम रही। दिसंबर से अप्रैल तक यही स्थिति बनी है। जब तापमान सामान्य से ज्यादा हो और नमी भी साथ में है तो यह स्थिति निर्मित हाेती है।
पिछले साल अप्रैल में दिन में पारे की चाल भी तेज थी…. पिछले साल अप्रैल में दिन में पारे की चाल भी बहुत तेज थी। 28 अप्रैल 2018 की सुबह 6.30 से दोपहर 12.30 बजे तक 6 घंटे में पारा 11 डिग्री ऊपर चढ़ गया था। शाम 5.30 बजे 41 डिग्री पर था। शाम ढलने के बाद 6.30 बजे भी तापमान 39 डिग्री था। इस बार पारे की चाल इससे ज्यादा ही रहने के आसार जताए जा रहे हैं।
ऐसे नापी जाती धूप की तीव्रता…
अरेरा हिल्स स्थित मौसम केंद्र में धूप की तीव्रता मापने के लिए एक इंस्ट्रूमेंट सन साइन रिकॉर्डर लगा है। इसमें कांच का स्फैरिकल ग्लास होता है, उसके नीचे कागज का चार्ट लगा होता है। सूर्य की किरणों के तीखेपन से यह चार्ट जलता रहता है। जितने घंटे तक कागज जलता है उससे धूप के तीखेपन काे मापा जाता है।

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