Tuesday, August 9, 2022
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Koo App Self Verification: कू एप्प बना सभी यूजर्स के लिए Self Verification शुरू करने वाला दुनिया का पहला Social Media Platform

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Koo App Self Verification: कू एप्प बना सभी यूजर्स के लिए Self Verification शुरू करने वाला दुनिया का पहला Social Media Platform

● यूजर की प्रोफ़ाइल पर हरे रंग के टिक के रूप में दिया जाता है स्वैच्छिक सेल्फ-वेरिफिकेशन (Self Verification)
● यह फीचर हर यूजर के सत्यापन (Verification) के साथ यूजर्स के बीच विश्वसनीयता और भरोसा बढ़ाने में सशक्त बनाएगा
● Koo App सोशल मीडिया पर पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए मध्यवर्ती दिशानिर्देशों के नियम 4 (7) का पालन करने वाला पहला ‘महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यवर्ती’ बन गया है

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देश के पहले बहुभाषी माइक्रो-ब्लॉगिंग मंच Koo App (कू ऐप) ने स्वैच्छिक सेल्फ-वेरिफिकेशन फीचर लॉन्च किया है और इसके साथ ही यह ऐसा करने वाला दुनिया का पहला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बन गया है।

कोई भी यूजर अब अपने सरकार द्वारा स्वीकृत पहचान पत्र का इस्तेमाल करके चुटकियों में प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रोफ़ाइल को सेल्फ-वेरिफाई कर सकता है।

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यह कदम यूजर्स को मंच पर अपने खातों की प्रामाणिकता साबित करने के लिए सशक्त बनाता है और इस तरह से उनके द्वारा शेयर किए गए विचारों और राय को विश्वसनीयता प्रदान करता है। स्वैच्छिक सेल्फ-वेरिफिकेशन असल आवाजों की दृश्यता को बढ़ावा देता है।

इस प्रक्रिया के बाद हरे रंग का टिक (Green Tick) यूजर के अकाउंट को सेल्फ-वेरिफाई होने के रूप में पहचान देगा। Koo App ऐसा पहला ‘महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यवर्ती’ है, जिसने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के नियम 4(7) के अनुसार इस फीचर को सक्षम किया है।

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इस फीचर के अंतर्गत यूजर्स सरकारी पहचान पत्र का नंबर दर्ज करते हैं, फिर फोन पर आने वाला ओटीपी दर्ज करते हैं और सफल प्रामाणीकरण पर अपनी प्रोफ़ाइल में एक हरे रंग की टिक के साथ सेल्फ-वेरिफाई हो जाते हैं।

यह सारी प्रक्रिया कुछ ही सेकेंड में पूरी हो जाती है। यह पूरी सत्यापन प्रक्रिया सरकार द्वारा अधिकृत थर्ड पार्टी द्वारा की जाती है। इस प्रक्रिया के दौरान Koo App इससे जुड़ी किसी भी जानकारी को स्टोर नहीं करता है।

प्लेटफ़ॉर्म पर यूजर्स को सशक्त बनाने के अलावा प्रामाणिकता को बढ़ावा देकर स्वैच्छिक सेल्फ-वेरिफिकेशन के जरिये ऑनलाइन गलत सूचना, अभद्र भाषा, दुर्व्यवहार और बदमाशी पर भी अंकुश लगाने की उम्मीद है।

Koo App के सह-संस्थापक और सीईओ अप्रमेय राधाकृष्ण ने कहा, “सोशल मीडिया पर विश्वास और सुरक्षा को बढ़ावा देने में Koo App सबसे आगे है। स्वैच्छिक सेल्फ-वेरिफिकेशन प्रणाली शुरू करने वाला दुनिया का पहला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म होने पर हमें बहुत गर्व है।

यूजर्स हमारी सुरक्षित सत्यापन प्रक्रिया के माध्यम से कुछ सेकेंड में सेल्फ-वेरिफिकेशन हासिल कर सकते हैं। यह यूजर्स को अधिक प्रामाणिकता देने और प्लेटफॉर्म पर जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

अधिकांश सोशल मीडिया मंच यह ताकत केवल कुछ खातों को देते हैं। Koo App ऐसा पहला मंच है जिसने अब हर यूजर को समान विशेषाधिकार प्राप्त करने का अधिकार दिया है।”

Koo Self Verification से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या Koo App यूजर की कोई जानकारी स्टोर करता है?

नहीं, Koo App यूजर से संबंधित कोई भी जानकारी स्टोर नहीं करता है। सरकार द्वारा स्वीकृत थर्ड पार्टी की सेवा का इस्तेमाल जानकारी के सत्यापन के लिए किया जाता है।

क्या प्रमाणीकरण के बाद मेरे पहचान पत्र का विवरण Koo App पर दिखाई देता है?

नहीं, इसका इस्तेमाल केवल यूजर्स की सत्यता को प्रमाणित करने के लिए किया जाता है।

क्या अन्य यूजर्स को मेरे नाम और पहचान पत्र की जानकारी प्राप्त होगी?

नहीं। यूजर के प्रोफाइल पर विवरण वही रहता है जो सत्यापन से पहले हुआ करता था।

क्या Koo App पर सरकार द्वारा स्वीकृत पहचान पत्र की जानकारी दर्ज करना सुरक्षित है?

हां। Koo App पर स्वैच्छिक सेल्फ-वेरिफिकशन प्रक्रिया सुरक्षित है। यह सत्यापन प्रक्रिया सरकार द्वारा अधिकृत थर्ड-पार्टी द्वारा की जाती है। Koo App यूजर्स के डेटा को स्टोर नहीं करता है।

यूजर को ऐसा क्यों करना चाहिए?

एक यूजर जो अपनी प्रोफ़ाइल को वेरिफाई करता है, उसकी पहचान एक प्रामाणिक यूजर के रूप में की जाती है, जो बदले में उनके विचारों और राय को अधिक विश्वसनीयता प्रदान करता है। स्वैच्छिक सेल्फ-वेरिफिकेशन, मंच पर असल आवाजों को बढ़ावा देता है। यह उन्हें सत्यापन का वही विशेषाधिकार भी देता है जो अन्य सोशल मीडिया पर केवल कुछ प्रतिष्ठित खातों के लिए उपलब्ध था।

कू स्वैच्छिक सेल्फ वेरिफिकेशन (Koo Self Verification) – Koo (kooapp.com)

Koo App के बारे में
Koo App की लॉन्चिंग मार्च 2020 में भारतीय भाषाओं के एक बहुभाषी, माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म के रूप में की गई थी, ताकि भारतीयों को अपनी मातृभाषा में अभिव्यक्ति करने में सक्षम किया जा सके। Koo App ने भाषा-आधारित माइक्रो-ब्लॉगिंग में नया बदलाव किया है।

Koo App फिलहाल हिंदी, मराठी, गुजराती, पंजाबी, कन्नड़, तमिल, तेलुगु, असमिया, बंगाली और अंग्रेजी समेत 10 भाषाओं में उपलब्ध है। Koo App भारतीयों को अपनी पसंद की भाषा में विचारों को साझा करने और स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्ति के लिए सशक्त बनाकर उनकी आवाज को लोकतांत्रिक बनाता है।

मंच की एक अद्भुत विशेषता अनुवाद की है जो मूल टेक्स्ट से जुड़े संदर्भ और भाव को बनाए रखते हुए यूजर्स को रीयल टाइम में कई भाषाओं में अनुवाद कर अपना संदेश भेजने में सक्षम बनाती है, जो यूजर्स की पहुंच को बढ़ाता है और प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रियता तेज़ करता है।

प्लेटफॉर्म 3 करोड़ डाउनलोड का मील का पत्थर छू चुका है और राजनीति, खेल, मीडिया, मनोरंजन, आध्यात्मिकता, कला और संस्कृति के 7,000 से ज्यादा प्रतिष्ठित व्यक्ति अपनी मूल भाषा में दर्शकों से जुड़ने के लिए सक्रिय रूप से मंच का लाभ उठाते हैं।

Koo Becomes the First Social Media Platform in the World to Launch Voluntary Self-Verification for All Users

● Voluntary Self-Verification is granted in the form of a green tick on a user’s profile
● The feature will empower every user to get verified and enhance user happiness, add credibility and trust among users
● Koo becomes the first ‘Significant Social Media Intermediary’ to comply with Rule 4(7) of the Intermediary Guidelines to enhance transparency and reliability on social media

The Koo App launches Voluntary Self-Verification, becoming the first social media platform in the world to do so. Any user can now self-verify their profile on the platform within seconds by using their Government-approved ID card. This move empowers users to prove the authenticity of their accounts on the platform, hence lending credibility to the thoughts and opinions that they share. Voluntary self-verification promotes visibility of genuine voices.

A visible marker in the form of a green tick will identify an account as being self-verified. Koo is the first ‘Significant Social Media Intermediary’ to enable this feature in accordance with Rule 4(7) the Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021.

Users enter the Government-ID number, enter the OTP, and on successful authentication, get self-verified with a green tick in their profile. The whole process is completed within a few seconds. The validation process is carried out by Government-authorized third-parties. Koo would not store any information during the process.

In addition to empowering users on the platform, voluntary self verification – by promoting authenticity – will also hopefully result in curbing online misinformation, hate speech, abuse and bullying.

Aprameya Radhakrishna, Co-founder & CEO Koo said, “Koo is at the forefront of promoting trust and safety on social media. We are very proud to be the first social media platform in the world to launch a Voluntary Self-Verification system. Users can get self-verified in less than 30 seconds through our safe and secure verification process. This is a huge step towards lending greater authenticity to users and promoting responsible behavior on the platform. Most social media only give this power to some accounts. Koo is the first platform that has now empowered every user to have the same privilege.”

Voluntary Self-Verification FAQs

Does Koo store any kind of user details?

No. Koo does not store any data related to users. A Government-approved third-party’s service is used to authenticate the details.

Will my ID card details show up on Koo after authentication?

No. ID details are only used to authenticate the veracity of the user.

Will other users get access to my name and ID card info?

No. The details on the profile of the user remain as it used to be before the verification.

Is it safe to enter my Government-approved ID card details on Koo?

Yes. The Voluntary Self Verification process on Koo is safe and secure. This verification process is carried out by a Government-authorized third-party. Koo does not store the user’s data.

Why should a user do this?

A user who verifies his/her profile is identified as an authentic user, which in turn lends more credibility to their thoughts and opinions. Voluntary self-verification promotes genuine voices on the platform. It also gives them the same privilege of verification that was only available to some eminent accounts on other social media.

Please find the link to our detailed FAQs on Voluntary Self-Verification
https://info.kooapp.com/koo-voluntary-verification/

About Koo

The Koo App was launched in March 2020 as a multi-lingual, micro-blogging platform to enable Indians to express themselves online in their mother tongue. Koo has been the innovator of language-based micro-blogging. Koo App is currently available in 10 languages – Hindi, Marathi, Gujarati, Punjabi, Kannada, Tamil, Telugu, Assamese, Bengali and English. Koo democratizes the voice of Indians by empowering them to share thoughts and express freely in a language of their choice. Among its innovative features, the platform’s translation feature enables the real-time translation of a post across the slew of Indian languages, while retaining the sentiment and context of the original text. This enhances reach and garners greater traction for a user. The Koo App has over 30 million downloads and is actively leveraged by over 7,000 people of eminence across politics, sports, media, entertainment, spirituality, and art & culture to connect with their followers in multiple languages.

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Rohit Kumar Sharma
Rohit Kumar Sharma
Indian Journalist and Media Personality
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