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Delhi Mumbai Expressway: 45 शहरों को जोड़ने वाले भारत के सबसे लंबे दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे के बारे में जानने लायक पांच बातें

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जिस क्षेत्र में भारत सरकार में अच्छा काम हो रहा है। सड़क परिवहन विभाग सबसे महत्वपूर्ण विभागों में से एक है। नितिन गडकरी इस विभाग के मंत्री हैं। भारत सरकार पूरे देश में अच्छी और बड़ी सड़कों का जाल बनाने का काम कर रही है।

आज हम दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के बारे में जानने जा रहे हैं। जिसके पहले भाग का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की कई विशेषताएं हैं। इस एक्सप्रेसवे ने दिल्ली और मुंबई के बीच की दूरी को कम कर दिया है। यह हाईटेक एक्सप्रेसवे है जो फिलहाल यूरोप और अमेरिका में एक्सप्रेसवे को टक्कर देता नजर आ रहा है। 

यह एक्सप्रेसवे दिल्ली और मुंबई के बीच की दूरी को कम करने के साथ ही देश के 45 शहरों को जोड़ेगा। आज हम दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के बारे में पांच बातें जानेंगे

1. नई दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, जैसा कि नाम से पता चलता है, देश की राजधानी को देश की वित्तीय राजधानी मुंबई से जोड़ता है । यह राजमार्ग दिल्ली में डीएनडी फ्लाईवे और महाराष्ट्र में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से शुरू होता है। साथ ही, यह राजमार्ग गुजरात के दौसा, कोटा, वडोदरा और सूरत शहरों से होकर गुजरता है।

2. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 1,350 किमी है। यह एक्सप्रेसवे दिल्ली (12 किमी), हरियाणा (129 किमी), राजस्थान (373 किमी), मध्य प्रदेश (244 किमी), गुजरात (429 किमी) और महाराष्ट्र (171 किमी) राज्यों से होकर गुजरता है। इन सभी को डीएनडी फरीदाबाद-केएमपी (59 किमी) और विरार जेएनपीटी (92 किमी) में जोड़कर इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 1,386 किमी है।

3. इस एक्सप्रेसवे के बिना दिल्ली से मुंबई के बीच के सफर में 24 घंटे लगते हैं। अब इस हाईवे के पूरा होने से दोनों शहरों के बीच की दूरी 12 घंटे कम हो गई है। इसका अर्थ है कि सड़क परिवहन एक दिन में दो शहरों के बीच माल का परिवहन कर सकता है।

4. यह नया राजमार्ग 8 लेन का राजमार्ग है। भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर इसे 12 लेन तक बढ़ाया जा सकता है। इन अतिरिक्त लेनों के लिए भूमि आरक्षित की जाएगी जिसमें वृक्षारोपण और सुविधाओं के लिए जगह होगी। इस पर टीएम, रिटेल शॉप्स, फूड कोर्ट, ईवी चार्जिंग स्टेशन और फ्यूल पंप जैसी 93 सुविधाएं दी जाएंगी। साथ ही दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे भारत का पहला राजमार्ग होगा जिसमें हर 100 किमी पर एक हेलीपैड और पूरी तरह से सुसज्जित ट्रॉमा सेंटर होगा।

5. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह 2019 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा किया गया था । 1,00,000 करोड़ रुपये की परियोजना लागत के साथ कुल 52 निर्माण पैकेजों के साथ कार्य को 4 खंडों में विभाजित किया गया था।

भोपाल आंगनबाड़ी के बच्चों को एक जैसे स्कूल बैग और पाठ्य सामग्री प्रदत्त की गई

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj SIngh Chouhan) के प्रदेश की आगनबाड़ी केंद्रों को समाज सेवी संगठनों की सहायता से प्ले स्कूल में बदलने के मिशन की कड़ी में गुरुवार को कर्मवीर ग्रुप द्वारा वल्लभ नगर दो की गोद ली गई दो आगनबाड़ी केंद्र पर पंजीकृत बच्चों को एक जैसे स्कूल बैग एवं पाठन सामग्री वितरित की गई।

इस मौके पर भोपाल जिले की रहने वाली एवं अग्निपथ मूवी से बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने वाली अदाकारा कनिका तिवारी एवं माय एफएम की आरजे हर्षा मौजूद थी।

समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित करने की इच्छा के साथ इन दोनों ने कर्मवीर ग्रुप द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों के बारे में जानकारी मिलते ही इस नेक कार्य से जुड़ने की अपनी इच्छा जाहिर की और यह आगनबाड़ी केंद्र पर इस कार्यक्रम में उपस्थित हुई।

उन्होंने इन जरूरतमंद बच्चों के चेहरों पर खुशी और मुस्कुराहट देखकर कहा कि हम सब को मिलकर अपने समाज के अलग – अलग वर्गों को सशक्त एवं शिक्षित करने की दिशा में सतत प्रयास करने चाहिए। उन्होंने सक्रिय सहयोग प्रदान करने की इच्छा जाहिर की।

ग्रुप के अध्यक्ष मुन्नवर खान ने बताया कि जनवरी महीने में ही यहां स्थित तीनों आगनबाड़ी के पंजीकृत एवं नियमित रूप से आ रहे बच्चों को यूनिफॉर्म वितरित किए। साथ ही समय – समय पर इन बच्चों के लिए शिक्षा सामग्री एवं पोषण आहार भी वितरित किया जाता है।

इस परिसर की प्ले स्कूल की तर्ज पर तैयार किए जाने का प्रयास ग्रुप द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा आगनबाड़ी केंद्रों को गोद लेने के आव्हान के बाद यह प्रदेश की पहली आगनबाड़ी है। भविष्य में जन सहयोग से इस केंद्र परिसर को प्ले स्कूल में परिवर्तित करने के प्रयास शुरू है।

सपनों सा खूबसूरत है सलमान खान का ‘पनवेल वाला फार्म हाउस’, सलमान ने बड़ी मेहनत से बनाया है फार्म

सलमान खान के फॉर्महाउस का एंट्री गेट:- इस तस्वीर में सलमान खान के पनवेल फॉर्महाउस का एंट्री गेट नज़र आ रहा है. इस गेट पर आप देख सकते हैं कि उनकी छोटी बहन अर्पिता खान का नाम लिखा हुआ है. साथ ही आस-पास ढेर सारे पेड़-पौधे लगे हुए हैं.

पनवेल फॉर्महाउस में हैं सारी सुविधा:-वहीं फॉर्महाउस में सलमान खान ने सभी सुविधाओं का प्रबंधं किया हुआ है. इस फॉर्महाउस में एक बड़ा जिम है. जिसमें सभी तरह की वर्कआउट मशीने लगाईं गई हैं. अक्सर लूलिया संग भी सलमान को वर्कआउट करते हुए देखा गया है.

घुड़सवारी के लिए बनाया है ट्रैक:-फॉर्महाउस में सलमान ने घोड़े भी रखे हैं. जिस पर अक्सर उन्हें घुड़सवारी करते हुए देखा जाता है. हाल ही में जब लॉकडाउन हुआ था. तब एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस संग वह घुड़सवारी संग करते हुए दिखाई दिए थे. उन्होंने बेहद ही शानदार ट्रेक भी बनाया है ।

खेतों में उगाते हैं धान:-सलमान अपने इस फॉर्महाउस पर खेती भी करते हैं. बीते साल जब सलमान अपने फॉर्महाउस पर रोके थे. तब उनकी कुछ तस्वीरें सामने आईं थीं. जिसमें वह धान उगाते हुए दिखाई दिए थे.

फॉर्महाउस में बड़ा सा गार्डन:-फॉर्महाउस के आस-पास खूब हरियाली भी है. जिसमें खूब सारे पेड़-पौेधे सलमान ने लगाए हुए हैं. साथ ही इस गार्डन में बैठने के लिए कई खूबसूरत इंतजाम किए हैं. जहां पर वह अपने परिवार संग आराम से बैठकर चाय-कॉफी पीते हैं । साथ ही उनके साथ वक्त गुजराते हैं।

साइकिलिंग के बनाया है ट्रैक:-सलमान के पनवेल फॉर्महाउस पर कई चीज़ों के इंतजाम है. साथ ही वह इस फॉर्महाउस पर साइकिल चलाते हुए भी दिखाई देते हैं.

बड़ा सा पूल:-इस फॉर्महाउस पर एक बड़ा सा पूल भी है. साथ ही अक्सर देखा गया है कि सलमान और उनकी फैमिली इस पूल का खूब लुफ्त उठाती है.

फॉर्महाउस का व्यू:-सलमान खान के पनवेल वाले फॉर्म हाउस का व्यू बेहद ही खूबसूरत है. जिसे देख हर किसी का दिल वहां वक्त गुज़राने का करेगा. सलमान खान के इस फॉर्म हाउस बड़े-बड़े तलाब भी हैं. जिसमें वह मछलियां भी पलाते हैं..

बीबीसी, हिण्डनबर्ग व जॉर्ज सोरोस के बाद अब क्या?

– राकेश सैन – एक जुलाई, 2021 को ‘न्यूयार्क टाइम्स’ ने दक्षिण एशिया व्यवसायी संवाददाताओं के लिए आवेदन मांगे। इसके लिए शर्तों में लिखा कि अभ्यर्थी ऐसा हो जो भारत सरकार के विरुद्ध लिखे और वहां सत्ता परिवर्तन में योगदान दे। विदेशी मीडिया के एक वर्ग में मोदी, भारत और हिन्दू विरोध का यह छोटा सा उदाहरण है।

इसी साल के आरम्भ में कुछ चिन्तकों ने आशंका जताई कि 2023 चुनावी वर्ष है और इसमें कई तरह के षड्यन्त्र सामने आ सकते हैं।

चेतावनी के एक-डेढ़ माह के भीतर ही जिस क्रम से बीबीसी लन्दन की गुजरात दंगों पर दस्तावेजी फिल्म, उद्योगपति गौतम अडानी पर हिण्डनबर्ग की रिपोर्ट और भारत में सत्ता परिवर्तन को लेकर अमेरिकी अरबपति जार्ज सोरोस की योजना सामने आई, उससे अब प्रश्न पूछा जाने लगा है कि इन तीनों के बाद, अब आगे क्या?

गत सप्ताह ‘द सण्डे गार्जियन’ समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को हटाने, चुनावों में सत्ता परिवर्तन को लेकर कुछ देसी-विदेशी शक्तियां पिछले तीन महीनों में लन्दन से लेकर दिल्ली तक अलग-अलग बैठकें कर चुकी हैं।

बैठकों में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई उनमें मोदी सरकार की कमजोरियों को सामने लाना, सरकार के विरुद्ध नकारात्मक विमर्श गढऩा, चुनाव से छह माह पहले सरकार के खिलाफ बड़ा अभियान चलाना शामिल हैं। रिपोर्ट अनुसार, इसमें मीडिया,सूचना तकनॉलोजी विशेषज्ञों, अभियानवादियों को साथ लेने, ऑनलाइन व पारम्परिक शैली से काम करने की जरूरत पर जोर दिया गया। रिपोर्ट का दावा है कि इसके लिए भारतीय मूल के लोगों और अन्य विदेशी संगठनों की तरफ से कोष उपलब्ध कराया जा रहा है।

सजग होने की बात है कि अब इस तरह के घटनाक्रम भी सामने आ रहे हैं, जो उक्त आशंका को बल प्रदान करते हैं। हाल ही में बीबीसी ने दो धारावाहिकों की एक दस्तावेजी फिल्म बनाई, इसमें साल 2002 के गुजरात दंगों के दौरान वहां के मुख्यमन्त्री के रूप में प्रधानमन्त्री मोदी के कार्यकाल पर निशाना साधा, जबकि वास्तविकता ये है कि लाख कोशिशों के बावजूद देश की न्यायिक प्रणाली उन्हें दोषमुक्त कर चुकी है।

दूसरे प्रकरण में अडानी समूह के खिलाफ हिण्डनबर्ग रिपोर्ट आई। पिछले कुछ सालों में अडानी समूह ने देश-विदेश में अपना प्रभाव जमाया और वैश्विक विस्तार अभियान को आगे बढ़ाया। यह समूह भारत की पहचान को दिनो-दिन और सुदृढ़ करने में आगे बढ़ रहा था। उस पर एक अमेरिकी कम्पनी हिण्डनबर्ग की रिपोर्ट आई और अडानी समूह की चूलें हिल गईं।

हाल के कुछ वर्षों सें दुनिया में जिस गति से भारत विरोधी विमर्श को फैलाया जा रहा है उसी की शृंखला के रूप में इस रिपोर्ट को देखा जा रहा है। तभी तो अमेरिका के वालस्ट्रीट जनरल ने इस प्रकरण पर अपनी रिपोर्ट में लिखा-हिण्डनबर्ग ने ‘हिन्दू राष्ट्रवादी प्रधानमन्त्री’ के आर्थिक विकास के गुजरात मॉडल से भरोसा हिला दिया है और ‘यह भारतीय उद्योग-जगत के बारे में बहुत कुछ कहता है।’ तीसरा सन्दिग्ध चरित्र के अमेरिकी अरबपती जॉर्ज सोरोस की भारत में सत्ता परिवर्तन की योजना सामने आना अपने आप में बहुत कुछ कहता है।

वर्तमान में भारत अपनी संस्कृति, विज्ञान और टेक्नोलॉजी के साथ जिस तरह से आगे बढ़ रहा है उससे कुछ शक्तियों को पेचिश होना स्वभाविक है। दुनिया की महाशक्तियों को लग रहा है कि आज का भारत उनकी हां में हां नहीं मिला रहा।

अमेरिका से हथियार खरीदने की जगह भारत ने रूस को चुना। आज भारत की डिजीटल भुगतान प्रणाली दुनिया में धूम मचा रही है। राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की नशीली दवाएं नष्ट कर चुका है तो परावर्तन निदेशालय भ्रष्ट लोगों से 1.2 लाख करोड़ रुपये का काला धन जब्त कर चुका है।

भारत ने फाइजर और मॉडर्न से कोरोना वैक्सीन आयात नहीं की बल्कि स्वदेशी टीके विकसित कर विदेशी कम्पनियों के व्यवसायिक एकाधिकार को चुनौती दी।  

भारत ने हथियार सौदागरों से खरीददारी बन्द कर सीधे फ्रांस से राफेल खरीदे। भारत में रक्षा उपकरण बनाने शुरू हुए और अब हमारा देश शस्त्र निर्यातक देशों में शामिल हो चुका है। प्रधानमन्त्री मोदी ने मध्य पूर्व से महंगा तेल खरीदना बन्द कर रूस से भारी मात्रा में सस्ती दर पर खरीदना शुरू कर दिया।

वर्तमान भारत की और भी अनेक विशेषताएं हैं जिन सभी का वर्णन कुछ कालमों में सम्भव नहीं। वर्तमान में देश में जिहादी, खालिस्तानी, नक्सली आतंक या तो अन्तिम सांसें ले रहा है, या कहीं सिर उठाने की कोशिश होती है तो उसको सख्ती से कुचला जा रहा है। ऐसे में विदेशी शक्तियों का 2024 के चुनावों में भारत व मोदी विरोध में सक्रिय होना कोई अनहोनी नहीं है।

तस्वीर का दूसरा पक्ष यह भी है कि, उक्त तथ्यों के आधार पर इन चुनावों में भाजपा के नेतृत्व में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठजोड़ सरकार, प्रधानमन्त्री व सहयोगियों को जनता से जुड़े मुद्दों पर बच कर निकल जाने की सुविधा भी नहीं दी जा सकती।

गरीबी, रोजगार, उच्च शिक्षा, शिक्षा के ढांचागत विकास, प्रतिभा पलायन, कृषि-किसान, स्वास्थ्य, प्रशासनिक भ्रष्टाचार, कुपोषण, अधूरी परियोजनाओं आदि अनेक विषय ऐसे यक्ष प्रश्न हैं जिनका उत्तर दिए बिना आगे नहीं बढ़ा जा सकता। इन चुनावों में जनता को अपने अनुभव,अपेक्षाओं, सरकार के कार्यों, नीतियों से सम्बन्धित विषयों पर निष्पक्ष हो मन्थन करना होगा।

सरकार की उपलब्धियों व असफलताओं को अपनी बुद्धि की कसौटी पर कसना होगा। सत्ताधीशों व विपक्ष से हर तरह के प्रश्न करने होंगे। अपने विवेक अनुसार किसी को सिंहासन या विपक्ष  में बैठाने का निर्णय लेना होगा परन्तु यह काम देश की जनता को करना है, षड्यन्त्रकारी शक्तियों को नहीं।

भारत का राजनीतिक भविष्य भारतीय तय करेंगे दूसरा कोई और नहीं। बीबीसी, हिण्डनबर्ग व जॉर्ज सोरोस जैसे षड्यन्त्रों से सावधान रहते हुए भारतीयों को लोकतान्त्रिक प्रणाली की पहरेदारी करनी होगी।

– राकेश सैन
32, खण्डाला फार्म कालोनी,
ग्राम एवं डाकखाना, लिदड़ां,
जालन्धर।

अयोध्या के संत श्री प्रेम भूषण महाराज से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सांवेर में सुनी राम-कथा

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर जिले के सांवेर में अयोध्या के संत श्री प्रेम भूषण महाराज द्वारा की जा रही राम-कथा का श्रवण किया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कथा श्रवण के बाद भक्ति भाव से भजन गाया, जिसे सुन श्रद्धालु झूम उठे। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘’राम भजन सुखदायी, जपो रे मेरे भाई’’ भजन बचपन में अपनी दादी माँ से सुना था, जो आज भी उन्हें प्रेरणा से भर देता है।  

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कथा स्थल में व्यास पीठ का पूजन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं पर पुष्प-वर्षा कर उनका अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि रोम-रोम में राम हैं, सकल विश्व में वही समाए हुए हैं। हर आत्मा में परमात्मा का अंश है। हमारा भारत देश विश्व के कल्याण की भावना में चलता है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ईश्वर प्राप्ति के भक्ति-मार्ग, ज्ञान-मार्ग के साथ कर्म-मार्ग की भी व्याख्या की। उन्होंने कहा कि हम सभी अपने निर्धारित दायित्वों का शुचिता से निर्वहन करें तो यह जगत सुंदर और कल्याण से परिपूर्ण हो जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि अच्छे कर्मों से भी ईश्वर मिलते हैं। उनके मन में लाड़ली लक्ष्मी के बाद लाड़ली बहना योजना बनाने और क्रियान्वित करने का विचार भी ईश्वर की प्रेरणा से आया है।

उन्होंने कहा कि बहनें कई बार आर्थिक दिक़्क़त में रहती हैं, उन्हें छोटी-सी राशि के लिए भी तरसना पड़ता है। राखी में भाई, बहन को उपहार देता है। उनके मन में भी ख़याल आया कि मुख्यमंत्री होते हुए भी वे प्रदेश की बहनों के भाई हैं और लाड़ली बहना योजना के रूप में वे अपने भाई होने का कर्त्तव्य निभा रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट और उनके परिवार को सांवेर में भक्तिमय वातावरण निर्मित करने के लिए साधुवाद भी दिया। मुख्यमंत्री श्री चौहान व्यास पीठ की आरती में भी शामिल हुए। कथा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री श्री ओमप्रकाश सखलेचा, सांसद श्री शंकर लालवानी और बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित थे।

एमपी विकास यात्रा का 19वाँ दिन: 8 हजार 463 करोड़ रूपये के विकास कार्यों का हुआ भूमि-पूजन और लोकार्पण

संत रविदास जयंती से शुरू हु ई विकास यात्रा मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में नित नये कीर्तिमान बना रही है। मध्यप्रदेश की जनता को निरंतर सौगातें मिल रही हैं।

अब तक प्रदेश में 8 हजार 463 करोड़ 69 लाख रूपये के विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान आज उज्जैन जिले के महिदपुर में विकास यात्रा में शामिल हुए और 1132 करोड़ रूपये के विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान प्रदेश के विकास और जनता के कल्याण के लिये प्रतिदिन 16 से 20 घंटे कार्य कर रहे हैं। जन-जन के प्रति उनकी सह्रदयता, संवेदना और सहिष्णुता ने उन्हें मामाजी के रूप में विशिष्ट सम्मान दिलाया है।

प्रदेश में निरंतर चल रही विकास यात्रा में अब तक 5,303 करोड़ 46 लाख रूपये के 25 हजार 686 विकास कार्यों के भूमि-पूजन और 3,160 करोड़ 23 लाख रूपये के 34 हजार 176 विकास कार्यों के लोकार्पण मुख्यमंत्री सहित मंत्रीगण और जन-प्रतिनिधियों द्वारा किये गये।

प्रदेश में जन-कल्याण के लिये जन-प्रतिनिधियों के साथ ही प्रशासनिक अमला भी पूरी शिद्दत के साथ जुटा हुआ है। सभी जिलों में अनेक नवाचारों द्वारा पात्र लोगों को शासकीय योजनाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। साथ ही विकास के लिए जन-सहभागिता भी जुटाई जा रही है।

एमपी में चल रही प्रदेशव्यापी विकास यात्रा: 26 फरवरी को बकतरा में होगा समापन – मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सीहोर जिले के ग्राम बकतरा में विकास यात्रा का समापन होगा। कार्यक्रम में विकास कार्यों के लिए 470 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी जायेगी।

विकास यात्रा का समापन कार्यक्रम व्यवस्थित और बेहतर हो। साथ ही स्थानीय नागरिकों की अधिक से अधिक उपस्थिति सुनिश्चित की जाये।

मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय समत्व भवन से विकास यात्रा की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समापन कार्यक्रम आनंद और प्रसन्नता के साथ हो।

मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टर ओर स्थानीय लोगों से समापन कार्यक्रम की तैयारियों संबंधी चर्चा भी की। ग्रामीणों ने बकतरा ग्राम के विकास संबंधी अनेक सुझाव भी रखे, जिसमें सीएम राईज स्कूल, अस्पताल खोलने और बकतरा को नगर पंचायत बनाने का सुझाव भी दिया। मुख्यमंत्री ने सभी सुझावों पर विचार कर निर्णय लेने की बात कही।

कलेक्टर सीहोर ने बताया कि बकतरा में 26 फरवरी को समापन कार्यक्रम में 66 ग्राम पंचायत शामिल होंगी। कार्यक्रम की सभी आवश्यक तैयारियाँ चल रही हैं। भोपाल संभाग के कमिश्नर श्री माल सिंह भी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशानुसार 5 फरवरी-संत रविदास जयंती से प्रदेश में विकास यात्राएँ प्रारंभ की गई थी।

विकास यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री जन-सेवा अभियान में विभिन्न केन्द्रीय एवं राज्य की योजनाओं में स्वीकृत-पत्रों का वितरण, योजनाओं के लाभ से वंचित हितग्राहियों का चिन्हांकन, विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन के साथ हितलाभ वितरण का कार्य किया जा रहा है। अनेक जिलों में जन-कल्याण और जन-सहभागिता के अनेक नवाचार भी किये जा रहे हैं। 

बिहार रेल हादसा: रोहतास में पहलेजा और करबंदिया रेलवे स्टेशन के बीच मालगाड़ी के 13 डिब्बे पटरी से उतरे

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रोहतास : बिहार के रोहतास में मालगाड़ी के 13 डिब्बे पटरी से उतर गये. घटना बुधवार रात की बताई जा रही है। हादसा करबंदिया और पहलेजा रेलवे स्टेशन के बीच हुआ। 

मालगाड़ी डीडीयू से गया की ओर जा रही थी। इसी बीच तेंदुआ दुसाढ़ी गांव के पास डाउन लाइन के 13 डिब्बे एक-एक कर पटरी से उतर गए. 

घटना के बाद रेलवे अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंच गई है। परिचालन सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कर्मचारी लाइन साफ ​​करने में लगे हैं।

मालगाड़ी के सभी डिब्बे खाली थे

इस घटना के कारण अप और डाउन दोनों लाइनों पर माल ढोने वाले डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का परिचालन बाधित हो गया। मालगाड़ी के सभी डिब्बे खाली थे। 

पटरी से उतरने के बाद कई डिब्बे इधर-उधर बिखर गए और कुछ गेहूं के खेत में गिर गए। कुछ ने अपना टेस्ट खो दिया है। बताया जा रहा है कि गुरुवार की शाम तक किसी तरह दोनों लाइनों को सामान्य कर दिया जाएगा।

रेलवे के मुख्य महाप्रबंधक पवन कुमार भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि 13 डिब्बे पटरी से उतर गए। चार-पांच क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कहा कि अब प्राथमिकता ट्रैक को फिट कर वाहन चलाने की है। 

रुकी हुई मालगाड़ी का परिचालन शुरू किया जा सकता है। अप लाइन पर दोपहर 2 बजे तक ट्रैक फिट हो जाएगा। डाउन लाइन पर ज्यादा नुकसान हुआ है। रात आठ बजे तक डाउन लाइन लगा दी जाएगी।

हादसा कैसे हुआ इसको लेकर अभी किसी का बयान सामने नहीं आया है। घटना से मेन लाइन प्रभावित नहीं हुई है। ऐसे में यात्री ट्रेनों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ मालगाड़ी का रूट प्रभावित हुआ है।

CR Kesavan resigns: कांग्रेस नेता सीआर केसवन ने पार्टी से दिया इस्तीफा, कहा पार्टी का रवैया ‘रचनात्मक’ नहीं

नई दिल्ली: भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल सी राजगोपालाचारी के पड़पोते और कांग्रेस नेता सीआर केसवन ने गुरुवार को कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया। 

उन्होंने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को संबोधित करते हुए भेजा है। केसवन ने अपने ट्विटर हैंडल पर इस्तीफे की कॉपी पोस्ट की है।

अपने इस्तीफे में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सीआर केसवन को संबोधित करते हुए सीआर केसवन ने लिखा है कि विदेश में सफल करियर को पीछे छोड़कर मैं अपने देश की सेवा के लिए भारत लौटा हूं.

इसके बाद मैं पार्टी की विचारधारा को देखते हुए 2001 में कांग्रेस में शामिल हो गया।

उसके बाद की यात्रा चुनौतीपूर्ण और आकर्षक थी। मुझे श्रीपेरंबदूर में राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान के उपाध्यक्ष [राज्य मंत्री के पद की क्षमता में], प्रसार भारती बोर्ड के सदस्य, भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय परिषद सदस्य और राष्ट्रीय मीडिया के रूप में सेवा करने का अवसर मिला।

सरकार और संगठन में वर्षों से मुझे सौंपी गई सभी जिम्मेदारियों के लिए मैं पार्टी और सोनिया गांधी को ईमानदारी से धन्यवाद देता हूं। मैंने यहां दोस्ती की है जो चलेगी।

केसवन ने त्याग पत्र में आगे लिखा है कि मुझे यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है कि पिछले कुछ समय से मुझे उन मूल्यों का कोई अवशेष नहीं मिला है, जो मुझे दो दशकों से अधिक समय से पार्टी के लिए समर्पण के साथ काम करने के लिए प्रेरित करते हैं। यही कारण है कि मैंने हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर एक संगठनात्मक जिम्मेदारी को अस्वीकार कर दिया और यहां तक ​​कि भारत जोड़ो यात्रा में भाग लेने से भी परहेज किया।

उन्होंने लिखा कि यह मेरे लिए एक नया रास्ता तय करने का समय है और इसलिए मैं तत्काल प्रभाव से कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं। मैंने तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी के रूप में उपयुक्त प्राधिकारी को अपना इस्तीफा भी सौंप दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी में किसी और के जाने की अटकलें हैं लेकिन मैंने किसी से बात नहीं की है और ईमानदारी से कहूं तो मुझे नहीं पता कि आगे क्या होगा.

मैं एक राजनीतिक मंच के माध्यम से अपने देश की सेवा करने के लिए नेक नीयत से प्रयास करूंगा, एक ऐसा मंच जहां मैं सार्वजनिक जीवन की अखंडता और आदर्शों को दृढ़ता से बनाए रख सकूं।

कांग्रेस कैसे चुनेगी उम्मीदवार ? MP Election 2023

MP Election 2023: मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने को हैं। 2018 में जनता ने कांग्रेस को चुना था, हालाँकि 2020 में कांग्रेसी विधायकों के बीजेपी में जाने के बाद सत्ता कांग्रेस से छीन ली गयी थी। अब ऐसे में 2023 के लिए कांग्रेस ने कमर कस ली है। राजनीतिक रणनीतिकार अतुल मलिकराम ने कहा कि कांग्रेस जानती है, इस जंग को जीतने के लिए उसे एक अचूक फॉर्मूले की ज़रूरत है।

एमपी की 230 सदस्यीय विधानसभा की अगर बात की जाए तो फिलहाल कांग्रेस के 96 विधायक हैं, जबकि बीजेपी 126 विधायक के साथ सत्ता में काबिज़ है। जबकि यहाँ मात्र 4 निर्दलीय विधायक हैं और दो बसपा व एक सपा से विधायक है।

हाथों में आयी सत्ता के जाने के बाद से ही कांग्रेस अब पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटना चाहती है और इसके लिए पार्टी अभी से ही उम्मीदवारों पर विचार करना शुरू कर चुकी है। कांग्रेस जानती है की गुटबंदी उसे कमज़ोर कर सकती है इसलिए कांग्रेस ने राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा के साथ ही, प्रदेश में कार्यकर्ताओं को जोड़ना और आगामी चुनाव की नीतियां बनाना शुरू कर दिया था।

2023 में कांग्रेस ने टिकट देने का फॉर्मूला तैयार कर लिया है। इस बार पार्टी नाम से नहीं शोहरत से उम्मीदवार चुनने जा रही है। जिस उम्मीदवार की जीत की अधिक संभावना होगी उस केंडिडेट को पार्टी प्राथमिकता देगी। कांग्रेस निकाय चुनाव के प्रदर्शन को भी आधार मान रही है बता दें जिन उम्मीदवारों का प्रदर्शन बेहतर रहा है, उन्हें प्राथमिकता मिलेगी।

भले ही कांग्रेस ने गुजरात में खराब प्रदर्शन किया हो लेकिन हिमाचल में मिली जीत से कांग्रेस बेहद उत्साहित है। और अब पार्टी मध्यप्रदेश में भी सत्ता में आने की रणनीति बना रही है। कांग्रेस एक साल पहले से ही तैयारियों में जुट गयी है।

कांग्रेस की टिकिट की रणनीति में सबसे अहम् है चर्चित नाम, इसलिए पार्टी अपने सिटिंग एमएलए को मौका ज़रूर देगी। इस हिसाब से मध्यप्रदेश में कांग्रेस के पास 96 विधायक हैं, जिनमें से लगभग 90 विधायकों को टिकिट मिलना तय माना जा रहा है क्योंकि ये पार्टी के लिए ईमानदार भी माने जा रहे हैं।

2020 में हुए जोड़तोड़ के बाद से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को जोड़ने और उत्साहित करने के लिए विधायकों को ही जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। आगामी चुनाव में अपने वफादार चेहरों के अलावा कांग्रेस नए और भरोसेमंद चेहरों को मैदान में उतारेगी। पार्टी इस बार टिकट देते समय जातिगत समीकरण का भी ध्यान ज़रूर रखेगी।