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सिवनी की कॉलोनियों में मुंह ढंके बाइकर्स पर सवाल: कहीं संदिग्ध गतिविधि का संकेत तो नहीं?

सिवनी: सिवनी शहर की विभिन्न कॉलोनी क्षेत्रों में मुंह पर कपड़ा बांधकर बाइक पर घूमने वाले लोगों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बन गई है। नागरिकों को यह समझ नहीं आ रहा कि सामान्य परिस्थितियों में इस तरह मुंह ढकने की क्या आवश्यकता है, खासकर तब जब शहर में कोई विशेष धूल भरी आंधी या प्रदूषण का स्तर इतना अधिक न हो। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे लोग संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हाल के दिनों में, शाम के समय और देर रात को कॉलोनी की सड़कों पर ऐसे बाइक सवारों की आवाजाही देखी गई है जो अपने चेहरे को पूरी तरह से कपड़े से ढके रहते हैं। कई निवासियों ने अपनी पहचान छिपाने के इस तरीके को लेकर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि अगर कोई व्यक्ति किसी वैध कारण से बाहर है, तो उसे अपना चेहरा छिपाने की क्या जरूरत है?

एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमने कई बार देखा है कि कुछ लड़के मुंह पर गमछा या रुमाल बांधकर हमारी कॉलोनी में घूमते रहते हैं। वे सिर्फ घूमते ही रहते हैं, किसी से बात नहीं करते और न ही किसी दुकान पर रुकते हैं। यह देखकर अजीब लगता है और मन में संदेह पैदा होता है कि कहीं ये लोग किसी गलत इरादे से तो नहीं घूम रहे।”

पुलिस प्रशासन से इस मामले में संज्ञान लेने और ऐसे संदिग्ध बाइक सवारों पर निगरानी रखने की अपील की जा रही है। नागरिकों का कहना है कि मुंह ढककर घूमने वाले लोग चोरी, लूटपाट या अन्य आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने से पहले अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर सकते हैं।

यह भी मांग की जा रही है कि पुलिस नियमित रूप से ऐसे क्षेत्रों में गश्त बढ़ाए जहां इस तरह की गतिविधियां देखी जा रही हैं। साथ ही, यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले और संदिग्ध तरीके से घूमने वाले लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि सिवनी की कॉलोनियों में सुरक्षा और शांति बनी रहे।

सिवनी: सोनु पारासर हत्याकांड में डूंडासिवनी पुलिस जल्द करेगी खुलासा, मुख्य संदिग्ध हिरासत में

सिवनी: सिवनी के डूंडासिवनी थाना क्षेत्र में पवन उर्फ सोनु पारासर की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब हत्या में बदल गया है। पुलिस ने इस मामले में मानेगांव निवासी घनश्याम प्रजापति (19) को मुख्य संदिग्ध के तौर पर हिरासत में लिया है, जिसने कथित तौर पर चाकू मारकर सोनु की हत्या की बात कबूल कर ली है। इस घटना में दो किशोरों की संलिप्तता भी सामने आई है, जिनसे पूछताछ जारी है।

घटनाक्रम का विवरण:

9 जुलाई 2025: थाना कोतवाली में पवन उर्फ सोनु पारासर के गुमशुदा होने की सूचना दर्ज कराई गई थी।

10 जुलाई 2025: गुमशुदा की स्कूटी मानेगांव रोड पर झाड़ियों में अस्त-व्यस्त हालत में मिली।

11 जुलाई 2025: मानेगांव में एक पानी से भरे गड्ढे में एक शव मिलने की सूचना मिली। डूंडासिवनी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव की पहचान सोनु पारासर के रूप में की। पंचनामे के दौरान मृतक के गले और सिर पर चाकू के घाव पाए गए, जिससे प्रथम दृष्टया यह हत्या का मामला प्रतीत हुआ।

घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। स्थानीय पुलिस थाना ने घटनाक्रम की सूक्ष्मता से जांच की और एक विशेषज्ञ टीम से भी परीक्षण कराया।

जांच और संदिग्धों की गिरफ्तारी:

पुलिस ने मृतक के साथ उठने-बैठने वाले कुछ युवकों को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान मानेगांव निवासी घनश्याम प्रजापति (उम्र 19 साल, पिता मदनपाल प्रजापति) ने चाकू से सोनु की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली है। इस हत्याकांड में दो अन्य नाबालिग किशोरों की संलिप्तता भी पाई गई है, जिनसे पुलिस गहन पूछताछ कर रही है।

मृतक सोनु पारासर का शव पोस्टमार्टम के बाद उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस का कहना है कि हत्या के कारणों का जल्द ही खुलासा किया जाएगा।

पुलिस हिरासत में संदिग्ध आरोपी:

घनश्याम प्रजापति पुत्र मदन पाल प्रजापति, उम्र 19 साल, निवासी मानेगांव, थाना डूंडासिवनी

दो नाबालिग किशोर (पहचान उजागर नहीं) डूंडासिवनी पुलिस ने आश्वासन दिया है कि इस मामले की पूरी सच्चाई जल्द ही सामने लाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सिवनी का लापरवाह विद्युत विभाग: खुला पड़ा फ्यूज बॉक्स दे रहा हादसे को दावत

सिवनी। नगर के हरिदर्शन नगर कॉलोनी, नागपुर रोड स्थित ट्रांसफार्मर के नीचे लगा फ्यूज बॉक्स विभाग की लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। खुला पड़ा यह फ्यूज बॉक्स न सिर्फ स्थानीय रहवासियों के लिए खतरा बना हुआ है, बल्कि राहगीरों और बच्चों के लिए भी गंभीर हादसे का कारण बन सकता है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि फ्यूज बॉक्स काफी समय से खुला हुआ है, लेकिन विद्युत विभाग की इस ओर कोई नजर नहीं है। हैरानी की बात तो यह है कि आज ही विद्युत ठेकेदार मौके पर आकर मीटर बॉक्स को फ्यूज बॉक्स के किनारे लगा कर चले गए, लेकिन फ्यूज बॉक्स की स्थिति को नजरअंदाज कर दिया।

फ्यूज बॉक्स के तारों को असावधानीपूर्वक जोड़ना खतरे को और बढ़ा रहा है। अब यह बॉक्स पहले से भी ज्यादा खुल चुका है। यह स्थिति कॉलोनीवासियों के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि यह बॉक्स रोड पर लगा हुआ है और उसके आस-पास बच्चे खेलते रहते हैं। साथ ही, कॉलोनी में लगातार लोगों की आवाजाही भी बनी रहती है।

अगर कोई बच्चा या राहगीर इस खुले फ्यूज बॉक्स से टकरा गया, तो गंभीर हादसा हो सकता है। क्षेत्रवासियों ने कई बार विभाग को इसकी जानकारी देने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

स्थानीय प्रशासन और विद्युत विभाग से मांग है कि जल्द से जल्द इस लापरवाही को दूर किया जाए और फ्यूज बॉक्स को सही ढंग से बंद किया जाए, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके।

एक छोटी सी लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है, प्रशासन समय रहते चेत जाए तो बेहतर होगा।

सिवनी: सोनू पाराशर की हत्या, संदिग्ध हालात में मिला शव; राजनीतिक परिवार से है संबंध

Murder In Seoni: शहर के बारापत्थर क्षेत्र के निवासी और राजनीतिक परिवार से जुड़े पवन उर्फ सोनू पाराशर का शव मानेगांव के समीप एक गड्ढे में संदिग्ध अवस्था में बरामद हुआ। दो दिन से लापता चल रहे सोनू का शव शुक्रवार दोपहर मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। प्रथम दृष्टया मामला हत्या का प्रतीत हो रहा है, जिस पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

डूंडासिवनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस मामले की जानकारी मिलते ही डूंडासिवनी थाना प्रभारी सतीश तिवारी और कोतवाली थाना प्रभारी किशोर बामनकर मौके पर पहुंच गए और जांच शुरू कर दी। घटनास्थल पर दोनों थानों की पुलिस टीम पहुंचकर आवश्यक साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।

दो दिन से थे लापता, स्कूटी पहले मिली, फिर शव

पुलिस सूत्रों के अनुसार, शास्त्री वार्ड निवासी सोनू पाराशर (उम्र लगभग 45 वर्ष) को आखिरी बार मंगलवार रात मानेगांव क्षेत्र में कुछ लोगों के साथ स्कूटी पर देखा गया था। इसके बाद से वह लापता हो गए। परिजनों और स्थानीय लोगों ने उनकी खोजबीन शुरू की लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।

गुरुवार को उनकी एक्टिवा स्कूटी मानेगांव की झाड़ियों के पास खड़ी मिली, जिससे आशंका और गहराने लगी। इसके बाद शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे पास के एक गड्ढे में भारी बारिश का पानी भरा होने के चलते तलाशी अभियान चलाया गया। जब गड्ढे से पानी बाहर निकाला गया, तब उसमें सोनू पाराशर का शव दिखाई दिया।

पत्थर बांधकर हत्या की आशंका

शव की स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट होता है कि सोनू की हत्या कर शव को गड्ढे में छिपाया गया। सूत्रों की मानें तो शरीर में पत्थर बांधकर उसे डुबोया गया था, ताकि शव बाहर न आ सके। पुलिस ने इस घटना को प्रथम दृष्टया हत्या मानते हुए मामला दर्ज कर लिया है।

परिजनों का बुरा हाल, इलाके में तनाव

सोनू पाराशर का शव मिलने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। पूरे क्षेत्र में तनाव और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोग इस घटना को लेकर स्तब्ध हैं और जल्द से जल्द हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और आसपास के CCTV फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल्स, और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर सुराग तलाशने में जुटी हुई है।

MP POLICE BHARTI 2025: पेपर में धांधली और लीक रोकने के लिए म.प्र. पुलिस का मंथन जारी

भोपाल (मध्य प्रदेश): कांस्टेबल भर्ती परीक्षा-2023 में हुए घोटाले के बाद, मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय इस बार की भर्ती प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में जुट गया है। परीक्षा में किसी भी तरह की धांधली या लीक को रोकने के लिए इस बार बेहद सख्त तैयारियाँ की जा रही हैं। यह जानकारी गुरुवार को अधिकारियों द्वारा दी गई।

सूत्रों के अनुसार, आगामी महीनों में विभिन्न संवर्गों और रैंकों के लिए लगभग 8,500 पदों पर भर्ती की जानी है। इसके लिए चयन और भर्ती से जुड़े अधिकारी एक विशेष चेकलिस्ट तैयार कर रहे हैं, जिसे मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (ESB) द्वारा आयोजित होने वाली परीक्षा में लागू किया जाएगा।

आधार विवरण और दस्तावेज़ों का होगा गहन सत्यापन

चेकलिस्ट में उम्मीदवारों के आधार अपडेट का पूरा इतिहास, लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षण और जॉइनिंग के समय का सत्यापन शामिल होगा। हालांकि, इन कड़े नियमों के कारण सत्यापन प्रक्रिया लंबी हो सकती है, जिससे उम्मीदवारों को थोड़ी परेशानी उठानी पड़ सकती है।

बता दें कि 2023 की कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में आधार कार्ड में भारी हेरफेर के मामले सामने आए थे। स्थिति इतनी गंभीर थी कि बायोमेट्रिक जांच और परीक्षा केंद्रों पर स्टाफ की मौजूदगी के बावजूद, एक व्यक्ति कथित तौर पर छह अलग-अलग उम्मीदवारों की जगह परीक्षा देने में सफल रहा।

एडीजी सोनाली मिश्रा ने दिए निर्देश

एडीजी (भर्ती एवं चयन) सोनाली मिश्रा ने बताया कि विभाग की योजना है कि ESB से उम्मीदवारों का पूरा डेटा लिया जाए और उसका वर्तमान एवं पूर्व परीक्षा डेटा से मिलान किया जाए। उन्होंने बताया, “कई बार ऐसा देखा गया है कि कोई उम्मीदवार एक परीक्षा में दिव्यांग श्रेणी में होता है और दूसरी परीक्षा में सामान्य श्रेणी में।”

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस यह भी जाँच कर रही है कि रैकेट चलाने वाले गिरोह दूसरे राज्यों और परीक्षाओं में कौन-कौन से हथकंडे अपनाते हैं।

UIDAI से मांगी गई अतिरिक्त सुरक्षा

चूंकि हालिया भर्ती घोटाले में आधार सुरक्षा की गंभीर चूक सामने आई है, इसलिए पुलिस ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) से संपर्क कर अधिक सुरक्षा उपायों और सख्त दिशा-निर्देशों की माँग की है। अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा प्रक्रिया में आधार सत्यापन को और मजबूत बनाने के लिए तकनीकी सहयोग और नई गाइडलाइन लागू करने की तैयारी है।

सिवनी: उपचुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद जिलाध्यक्ष खुराना के इस्तीफे की मांग तेज

सिवनी: सिवनी कांग्रेस में दशकों से अध्यक्ष पद पर काबिज राजकुमार खुराना के खिलाफ असंतोष और गुटबाजी अब अपने चरम पर पहुंच गई है। हाल ही में हुए नगर पालिका परिषद के उपचुनाव में एक वार्ड से मिली करारी हार के बाद कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग उनसे तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहा है, जिसके चलते पार्टी के भीतरखाने भूचाल आ गया है।

कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कांग्रेस की लगातार हार और संगठन में व्याप्त निष्क्रियता तथा गुटबाजी का सीधा परिणाम हालिया उपचुनाव की शर्मनाक हार है। एक युवा कार्यकर्ता ने तीखे शब्दों में अपनी भड़ास निकालते हुए कहा, “जब पार्टी लगातार हार रही हो और संगठन में असंतोष हो, तो नेतृत्व को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। खुराना जी को अब पद छोड़ देना चाहिए ताकि पार्टी नए सिरे से काम कर सके।”

सांगठनिक निष्क्रियता और गुटबाजी बनी हार का कारण

कार्यकर्ताओं का मानना है कि जिलाध्यक्ष खुराना की दशकों पुरानी “मोनोपोली” और गुटबाजी को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति ने पार्टी को आंतरिक रूप से खोखला कर दिया है। नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने बताया, “जिलाध्यक्ष सिर्फ अपने गुट के लोगों को तरजीह देते हैं, जिससे मेहनती और समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा होती है। इसका सीधा असर पार्टी के जनाधार पर पड़ रहा है।”

उपचुनाव में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष की पौत्र वधू के उस वार्ड से, जहां जय किशोर वर्मा जैसे दिग्गज लंबे समय तक पार्टी के स्तंभ रहे हैं, केवल दो-ढाई सौ वोट मिलने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह कांग्रेस पदाधिकारियों की मेहनत पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। “क्या कांग्रेस के पदाधिकारियों ने सिर्फ 200 वोट के लायक ही मेहनत की?” एक कार्यकर्ता ने सवाल उठाया।

समीक्षा बैठक की मांग और भविष्य की चुनौती

कार्यकर्ताओं द्वारा इस हार की समीक्षा बैठक बुलाने की भी पुरजोर मांग की जा रही है। उनका कहना है कि पार्टी को अपनी गलतियों से सीखना होगा और भविष्य की रणनीति पर काम करना होगा।

कार्यकर्ताओं द्वारा इस हार की समीक्षा बैठक बुलाने की भी पुरजोर मांग की जा रही है। उनका कहना है कि पार्टी को अपनी गलतियों से सीखना होगा और भविष्य की रणनीति पर काम करना होगा।

हालांकि, इस पूरे मामले पर जिलाध्यक्ष राजकुमार खुराना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सिवनी कांग्रेस में चल रही यह उठा-पटक पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस आलाकमान इस आंतरिक कलह से निपटने के लिए क्या कदम उठाता है और क्या खुराना पर इस्तीफे का दबाव और बढ़ता है या नहीं।

सिवनी: तबादला आदेश हवा-हवाई, न प्रशासन का चला जोर, न राजनीति का असर – रतन शाह उईके जमे बैठे हैं गद्दी में

मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में जारी प्रशासनिक संकट ने एक बार फिर सुर्खियाँ बटोरी हैं, जहाँ राजस्व निरीक्षक रतन शाह उईके का 17 जून 2025 को सिवनी से कुरई तबादला कर दिया गया, लेकिन हफ्तों बीतने के बावजूद वे अभी भी उसी पद पर जमे हुए हैं। यह मामला न केवल प्रशासनिक नियमों की अनदेखी को उजागर करता है, बल्कि राजनीतिक दखल और अफसरशाही की मिलीभगत को भी सामने लाता है।

15 वर्षों से एक ही जगह जमे रतन शाह उईके: तबादला नीति की उड़ रही धज्जियां

तबादला नीति का मुख्य उद्देश्य होता है कि सरकारी अधिकारियों को एक ही स्थान पर लंबे समय तक तैनात न किया जाए, जिससे भ्रष्टाचार और व्यक्तिगत स्वार्थ की गुंजाइश न बचे। लेकिन रतन शाह उईके पिछले 15 वर्षों से सिवनी में पदस्थ हैं। यह स्थिति केवल नीति के उल्लंघन का मामला नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि कैसे कुछ अधिकारी प्रशासनिक आदेशों को दरकिनार करते हुए स्वयं को “अपरिवर्तनीय” बना लेते हैं।

तबादला आदेश के बाद भी रिलीविंग नहीं: विभाग की चुप्पी रहस्यमयी

जिला प्रशासन द्वारा स्थानांतरण सूची में रतन शाह उईके का नाम स्पष्ट रूप से शामिल किया गया, फिर भी संबंधित विभाग द्वारा अब तक रिलीविंग आदेश जारी नहीं किया गया। ना कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है, और ना ही यह स्पष्ट किया गया है कि आदेश के बावजूद स्थानांतरण अमल में क्यों नहीं लाया गया।

यह चुप्पी प्रशासन की निष्क्रियता या अंदरूनी मिलीभगत का संकेत देती है।

तीन साल पहले भी हुआ था आदेश, तब भी रहे थे यथावत

यह कोई पहला मामला नहीं है। साल 2022 में भी रतन शाह उईके का स्थानांतरण आदेश जारी हुआ था, लेकिन तब भी वह केवल काग़ज़ों तक सीमित रह गया। प्रशासनिक सूत्रों और जनचर्चाओं के अनुसार, राजनीतिक संरक्षण और आंतरिक सेटिंग के चलते वे अपने पद पर बने रहे।

जनता के तीखे सवाल: क्या कुछ अफसर ‘सबसे ऊपर’ हैं?

इस पूरे प्रकरण ने जनता के मन में कई चुभते हुए प्रश्न खड़े कर दिए हैं:

  • क्या रतन शाह उईके को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है?
  • यदि तबादला अमल में नहीं लाना था, तो आदेश क्यों जारी किया गया?
  • क्या जिला कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक नहीं है?

जनता का विश्वास तभी बहाल हो सकता है जब इस मामले में खुली जांच और दोषियों पर कार्रवाई हो।

प्रशासनिक निष्क्रियता के दुष्परिणाम

यदि इस प्रकार की स्थिति सामान्य बनती गई, तो इसके दुष्परिणाम होंगे:

  • अन्य अधिकारी भी तबादला नीति की अनदेखी को आदत बना लेंगे।
  • ईमानदार अधिकारियों का मनोबल टूटेगा।
  • प्रशासनिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार और पक्षपात को बल मिलेगा।
  • जनता का प्रशासन पर से भरोसा उठ जाएगा।

कलेक्टर की भूमिका पर उठे सवाल

एक सक्रिय और सक्षम कलेक्टर की ज़िम्मेदारी होती है कि तबादलों को प्रभावी रूप से लागू किया जाए। यदि ऐसा नहीं हो रहा है, तो यह या तो प्रशासनिक कमजोरी है या फिर बाहरी दबावों का परिणाम। दोनों ही स्थितियाँ प्रशासन की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को चुनौती देती हैं।

राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका

स्थानीय चर्चाओं और सूत्रों से यह बात सामने आ रही है कि रतन शाह उईके को प्रभावशाली राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। यदि यह सत्य है, तो यह एक बेहद खतरनाक उदाहरण है, जहाँ प्रशासनिक निर्णयों पर राजनीतिक दबाव हावी हो जाता है, और लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है।

मीडिया और जनमत का दबाव: लेकिन क्या पर्याप्त है?

इस प्रकरण को मीडिया द्वारा उजागर किया गया, जिससे मामला जनता के सामने आया। हालांकि, केवल मीडिया दबाव पर्याप्त नहीं है। जब तक प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सरकारी हस्तक्षेप नहीं होता, तब तक ऐसे मामलों का समाधान संभव नहीं।

राज्य स्तरीय जांच की आवश्यकता

इस मामले की राज्य स्तर पर उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए:

  • संबंधित अधिकारियों से जवाब लिया जाए कि आदेश क्यों लागू नहीं हुआ।
  • राजनीतिक हस्तक्षेप की भूमिका की जांच की जाए।
  • दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

केवल कठोर और दृढ़ कदम ही प्रशासनिक ईमानदारी को बहाल कर सकते हैं।

नियमों से ऊपर कोई नहीं

रतन शाह उईके का मामला सिर्फ एक तबादले का नहीं है, यह प्रशासनिक लापरवाही, राजनीतिक हस्तक्षेप और नीति की अवहेलना का ज्वलंत उदाहरण है। जब तबादले जैसे सामान्य प्रशासनिक निर्णय भी लागू नहीं हो पाते, तो यह पूरी शासन व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

सिवनी जिलेवासियों के लिए चेतावनी: लबालब भरा भीमगढ़ बाँध, 2 गेट खोलकर बैनगंगा नदी में छोड़ा जा रहा पानी

सिवनी। भीमगढ़ बांध में लगातार बढ़ रहे जल स्तर को देखते हुए जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। कार्यपालन यंत्री पी. एन. नाग ने जानकारी दी है कि 8 जुलाई 2025 को भीमगढ़ बांध का जलस्तर 515.75 मीटर तक पहुंच गया है।

जल स्तर को नियंत्रित करने और बांध की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दोपहर 12:00 बजे गेट क्रमांक 5 और 6 को खोले गए । इन गेट्स के माध्यम से 8692 क्यूसेक (घन फीट प्रति सेकंड) की दर से पानी को बैनगंगा नदी में प्रवाहित किया जा रहा है।

प्रशासन ने आशंका जताई है कि गेट खुलने के बाद बैनगंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा जनमानस से अपील की गई है कि वे नदी के घाटों और किनारों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और किसी भी प्रकार की असावधानी न बरतें।

जल संसाधन विभाग एवं प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमें अलर्ट पर हैं। जनहित में जारी – जिला प्रशासन, सिवनी

सिवनी में भारी बारिश: जिले के सभी स्कूलों में 8 जुलाई को अवकाश घोषित

सिवनी: सिवनी जिले में लगातार हो रही मूसलधार बारिश को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियातन बड़ा फैसला लिया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने जिले के सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में 8 जुलाई 2025 (मंगलवार) को अवकाश घोषित कर दिया है। इस आदेश में सीबीएसई, आईसीएसई, माध्यमिक शिक्षा मंडल सहित सभी मान्यता प्राप्त बोर्डों से संबद्ध स्कूल शामिल हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि यह निर्णय विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। जिले के कई क्षेत्रों से भारी बारिश के कारण जलभराव, सड़कें बाधित होने और यातायात में परेशानियों की खबरें मिल रही हैं। ऐसे में बच्चों का स्कूल आना-जाना जोखिम भरा हो सकता है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा और संबंधित सभी स्कूलों को इसका कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे बच्चों को घर पर सुरक्षित रखें और मौसम की स्थिति सामान्य होने तक सतर्कता बरतें।

उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से जिले में लगातार बारिश हो रही है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई गांवों और शहरी क्षेत्रों में निचले इलाकों में पानी भर गया है, जिससे स्कूल पहुंचना मुश्किल हो गया है।

प्रशासन द्वारा हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर आगे के लिए भी निर्णय लिया जाएगा।

👉 अवकाश की तिथि: 8 जुलाई 2025
👉 लागू क्षेत्र: सिवनी जिले के सभी सरकारी एवं निजी स्कूल
👉 कारण: भारी बारिश, जलभराव एवं विद्यार्थियों की सुरक्षा

सिवनी: छपारा में बिना मान्यता के चल रहा विद्यालय, सैकड़ो बच्चों का भविष्य खतरे में

सिवनी: छपारा नगर मुख्यालय का मामला। 3 माह बाद भी शिक्षा विभाग नहीं कर पाया कार्यवाही, सैकड़ो बच्चों का भविष्य खतरे में

जनपद शिक्षा केंद्र मुख्यालय में ही शिक्षा अधिकार अधिनियम की खुलेआम धज्जिया उड़ाई जा रही हैं। दरअसल नगर के महावीर वार्ड स्थित शीशगर वार्ड में बिना मान्यता के मां शारदा शिशु संस्कार विद्यालय पिछले तीन महीनों से संचालित हो रहा हैं और जिम्मेदार अधिकारी आंख बंद कर तमाशा देख रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि नवीन मान्यता हेतु सत्र 2025-26 हेतु उक्त विद्यालय प्रबंधन द्वारा नवीन मान्यता हेतु आवेदन किया गया था। निरीक्षण उपरांत बीआरसी कार्यालय छपारा के द्वारा 14 बिंदुओं पर मान्यता नहीं दिए जाने के लिए जिला शिक्षा केंद्र को अभिमत दिया गया था। इसी अनुशंसा का हवाला देते हुए जिला शिक्षा केंद्र के परियोजना समन्वयक के द्वारा भी उक्त विद्यालय को मान्यता प्रधान नहीं की गई थी।

नियमों को ताक पर रख चल रहा विद्यालय

निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 18 के प्रयोजन के लिए निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा के अधिकार का अधिनियम 2011 के नियम 11के उपनियम 4 के अधीन स्कूल को मान्यता में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि विद्यालय में उपयुक्त संसाधन नहीं होने की दशा में मान्यता नहीं प्रदान की जा सकेगी किंतु उक्त विद्यालय प्रबंधन के द्वारा लापरवाही पूर्वक और सैकड़ो छात्रों के भविष्य को ताक पर रख बिना मान्यता के विद्यालय का संचालन किया जा रहा हैं।

जिला शिक्षा केंद्र के अधिकारियों ने क्यों नहीं बंद कराया विद्यालय ?

छपारा मुख्यालय में संचालित बिना मान्यता के विद्यालय की जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को नहीं है उक्त बिना मान्यता के चल रहे विद्यालय में लगभग तीन सैकड़ा से अधिक छात्रों का भविष्य दाव पर लगा हुआ है , यदि उक्त विद्यालय के संचालन की खबर अधिकारियों को है तो क्या यह अधिकारियों का खुला संरक्षण नहीं है?

बिना मान्यता के चल रहे विद्यालयों को टी सी जारी करने का दिया गया था नोटिस

जिला शिक्षा अधिकारी के नोटिस क्रमांक 388/मान्यता/2025 दिनांक 17/06/ 2025 में जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा आदेश किया गया था कि जिन विद्यालयों की मान्यता नहीं प्रदान की गई है वे अपने अध्ययनरत छात्रों की टी सी और दाखिल खारिज रजिस्टर नजदीकी संकुल केंद्र में तत्काल जमा करवाए। किंतु उक्त विद्यालय प्रबंधन के द्वारा मान्यता नहीं मिलने के बाद भी टी सी नजदीकी संकुल केंद्र में जमा नहीं कराई गई बल्कि कक्षाएं भी लगाई जा रही है जिससे उक्त विद्यालय में अध्ययनरत लगभग 3 सैकड़ा अधिक छात्रों का भविष्य खराब होने की कगार पर पहुंच गया हैं।