सिवनी/आष्टा (धारनाकला)। चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर आष्टा क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक काली मंदिर में इस वर्ष आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। तेरहवीं शताब्दी के इस प्राचीन मंदिर में 1931 ज्योति कलशों की रोशनी से पूरा परिसर जगमगा उठा है, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया है।
नवरात्र के पहले ही दिन से मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दराज के गांवों और जिलों से पहुंचे भक्तों ने माता रानी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में “जय माता दी” के जयकारों से माहौल गूंजता रहा।
भक्तों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं
हर वर्ष की तरह इस बार भी मंदिर समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।
- सुरक्षित दर्शन व्यवस्था
- पूजन सामग्री की उपलब्धता
- भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम
समिति के सदस्यों ने बताया कि नवरात्र के पूरे दस दिनों तक श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी रहेगी और सभी को सुगम दर्शन कराए जाएंगे।
पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है ऐतिहासिक मंदिर
आष्टा का यह काली मंदिर न केवल धार्मिक बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यह मंदिर पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है, जो इसकी सुरक्षा और देखरेख का जिम्मा संभालता है।
हालांकि, नवरात्र के दौरान मंदिर की व्यवस्थाओं और धार्मिक कार्यक्रमों की जिम्मेदारी स्थानीय समिति निभाती है, जो वर्षों से इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है।
श्रीमद् भागवत कथा से गूंज रहा दरबार
नवरात्र के पहले दिन से ही मंदिर परिसर में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन भी शुरू हो गया है। कथा वाचक कुमारी शिरी दीक्षित अपने मधुर वाणी से भक्तों को कथा का रसपान करा रही हैं।
उन्होंने अपने प्रवचन में कहा:
“धन्य है यह भूमि, जहां माता भगवती साक्षात विराजमान हैं और उनके दरबार में कथा वाचन का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है।”
भक्तगण बड़ी संख्या में कथा श्रवण कर धर्म लाभ अर्जित कर रहे हैं।
पांच दिनों तक लगेगा भव्य मेला
चैत्र नवरात्र के अवसर पर आष्टा में लगातार पांच दिनों तक विशाल मेला आयोजित किया जा रहा है।
इस मेले में:
- स्थानीय और बाहरी जिलों से लोग पहुंच रहे हैं
- पूजा-अर्चना के साथ मनोरंजन का भी आनंद ले रहे हैं
मेला क्षेत्र में दुकानों, झूलों और धार्मिक गतिविधियों की भरमार देखने को मिल रही है।
धारना में भी हुई माता भगवती की स्थापना
धारनाकला के राधा-कृष्ण मंदिर प्रांगण में भी श्रद्धा और विश्वास के साथ माता भगवती की स्थापना की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर नवरात्र पर्व की शुरुआत की।
आस्था, परंपरा और भक्ति का अद्भुत संगम
आष्टा का यह काली मंदिर हर वर्ष नवरात्र के दौरान श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बन जाता है। 1931 ज्योति कलशों की दिव्यता, कथा, मेला और भक्तों की भीड़ इस आयोजन को और भी विशेष बना देती है।
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