बरघाट, सिवनी – शिक्षा के मंदिर में ‘आइटम डांस’ का मंच! बरघाट (जिला सिवनी) में स्थित चेतना पैरामेडिकल इंस्टिट्यूट इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। वजह है – शिक्षा और संस्कार की बात करने वाले इस संस्थान में आयोजित एक कार्यक्रम, जहाँ स्वागत और विदाई समारोह ‘संस्कृति उत्सव’ कम और ‘आइटम सॉन्ग शो’ ज्यादा नजर आया।
कार्यक्रम में छात्र-छात्राएँ ‘चिकनी चमेली’ और ‘छम्मक छल्लो’ जैसे गानों पर ठुमके लगाते दिखाई दिए, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं – क्या यही है चिकित्सा शिक्षा का नया मॉडल?
शिक्षा की जगह ‘एंटरटेनमेंट’ का इंजेक्शन?
सूत्रों के मुताबिक, समारोह में जहाँ डॉक्टरी पेशे की गरिमा, सेवा भावना और प्रेरणादायक भाषणों की उम्मीद थी, वहाँ मंच पर लाइट्स, डीजे और आइटम डांस का माहौल छाया रहा। गरीब और ग्रामीण छात्रों को स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में प्रशिक्षित करने का दावा करने वाला संस्थान, खुद ही संस्कार और अनुशासन के मूल्यों से दूर होता दिखा।
स्थानीय अभिभावकों का कहना है:
“हम बच्चों को डॉक्टर बनने भेजते हैं, डांसर नहीं।”
‘चाल, चरित्र और चेहरा’ पर उठे सवाल
बताया जा रहा है कि संस्थान का संचालन भारती रजक के परिवार से जुड़ा है। ऐसे में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी असहजता बढ़ गई है। विडंबना यह कि संस्कार और संस्कृति की दुहाई देने वाले कई स्थानीय नेता कार्यक्रम की अग्रिम पंक्ति में मौजूद रहे, लेकिन किसी ने भी आपत्ति नहीं जताई।
लोगों ने तंज कसा —
“संस्कृति बचाने वाले ही संस्कृति के ‘आइटम शो’ के दर्शक बन गए।”
सोशल मीडिया पर वायरल, जनता में गुस्सा
कार्यक्रम के वीडियो सामने आते ही Facebook, Instagram और WhatsApp ग्रुप्स पर जमकर शेयर किए जा रहे हैं।
यूजर्स के कमेंट्स:
- “यह कॉलेज है या डांस एकेडमी?”
- “बेटी पढ़ाओ या बेटी नचाओ?”
- “शिक्षा के नाम पर मज़ाक!”
चिकित्सा शिक्षा या ‘मंचीय मनोरंजन’?
चिकित्सा क्षेत्र को हमेशा ‘सेवा’ और ‘संवेदनशीलता’ का पेशा माना जाता है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि:
- क्या पैरामेडिकल छात्रों को यही सिखाया जा रहा है?
- क्या यह कार्यक्रम संस्थान की छवि पर दाग नहीं है?
- क्या प्रशासन इस पर कोई कार्रवाई करेगा?
स्थानीय समाजसेवियों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में सांस्कृतिक कार्यक्रम हों, लेकिन गरिमा और मर्यादा के साथ।
प्रशासन और नेतृत्व की चुप्पी
अब निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं।
क्या इसे सिर्फ “मनोरंजन” कहकर टाल दिया जाएगा या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?
बरघाट की जनता कह रही है –
“अगर शिक्षा मंदिर में ही संस्कारों का चीरहरण होगा, तो भविष्य कैसा बनेगा?”
चेतना इंस्टिट्यूट का यह कार्यक्रम शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान बनकर उभरा है।
जहाँ ‘चेतना’ जगाने की जरूरत थी, वहाँ ‘चमेली’ की धुन गूंज रही थी।
अब देखना यह है कि संस्थान और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं या यह मामला भी वायरल वीडियो की तरह कुछ दिनों में ठंडा पड़ जाएगा।

