Seoni News: स्थानीय शिक्षा संस्थानों में इन दिनों माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। मामला तब और तूल पकड़ गया जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफ़ा देने वाले नेता नितिन शुक्ला ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र में एक तथाकथित छात्र नेता लगातार स्कूलों और कॉलेजों को निशाना बना रहा है और शिक्षकों पर दबाव बनाकर ब्लैकमेलिंग कर रहा है।
नितिन शुक्ला के अनुसार, यह छात्र नेता खुद को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने का दावा करता है और सामान्य वर्ग के लोगों को चुन-चुनकर प्रताड़ित कर रहा है।
‘ब्लैकमेलर छात्र नेता’ का नाम आया सामने
जानकारी के मुताबिक, नितिन शुक्ला ने सीधे तौर पर धनंजय सिंह पर आरोप लगाते हुए उन्हें “ब्लैकमेल छात्र नेता” बताया है।
उनका कहना है कि बीते कई महीनों से धनंजय सिंह लगातार शिक्षण संस्थानों में जाकर विवाद खड़ा कर रहे हैं और छोटी-छोटी बातों को सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर वायरल कर रहे हैं।
शुक्ला का आरोप है कि इन वीडियो का इस्तेमाल दबाव बनाने और बदनाम करने के लिए किया जा रहा है।
नेताजी सुभाष चंद्र विद्यालय के शिक्षक परेशान
मामले का सबसे ज्यादा असर नेताजी सुभाष चंद्र बोस विद्यालय में देखने को मिल रहा है।
बताया जा रहा है कि यहां के ब्राह्मण शिक्षकों को पिछले 3–4 महीनों से लगातार टारगेट किया जा रहा है।
शिक्षकों का आरोप है कि:
- बिना अनुमति स्कूल परिसर में प्रवेश
- वीडियो रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पर पोस्ट
- बेबुनियाद आरोप
- मानसिक दबाव और बदनामी
इन घटनाओं के कारण स्टाफ में भय और असुरक्षा का माहौल है।
विधायक के समर्थन का भी दावा
नितिन शुक्ला ने यह भी दावा किया कि इस छात्र नेता को स्थानीय विधायक रजनीश का समर्थन प्राप्त है, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हो पा रही।
हालांकि विधायक या संबंधित पक्ष की ओर से अभी तक इस आरोप पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप
कांग्रेस से इस्तीफा देने के तुरंत बाद इस तरह के आरोपों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- शिक्षा संस्थानों में राजनीति का दखल खतरनाक है
- सोशल मीडिया का दुरुपयोग बढ़ रहा है
- शिक्षक वर्ग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
क्षेत्र के अभिभावकों और शिक्षकों ने कहा है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो शिक्षा का माहौल प्रभावित होगा।
उनका कहना है कि स्कूलों को राजनीति और दबाव की संस्कृति से मुक्त रखना जरूरी है।
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति या संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की सुरक्षा और गरिमा से जुड़ा है।
अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच और आने वाले कदमों पर टिकी हैं।

