Seoni News : मध्यप्रदेश के छोटे से गांव सुकतरा में आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया, जब विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक अशोक श्रीवास्त्री ने 42 वर्षों की निरंतर, ईमानदार और समर्पित सेवा के बाद सेवानिवृत्ति ली।
इस अवसर पर गांव के हर वर्ग—बुजुर्ग, युवा, छात्र, अभिभावक और विद्यालय परिवार—ने जिस भावुकता और सम्मान के साथ उन्हें विदाई दी, वह किसी उत्सव से कम नहीं था।
42 वर्षों का समर्पण: सिर्फ नौकरी नहीं, एक मिशन
अशोक श्रीवास्त्री जी ने अपने कार्यकाल के दौरान हजारों छात्रों को शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार भी दिए।
गांव के कई युवा आज सरकारी अधिकारी, शिक्षक, पुलिसकर्मी और इंजीनियर बन चुके हैं—और वे अपनी सफलता का श्रेय अपने “गुरुजी” को देते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि:
“गुरुजी ने कभी समय नहीं देखा, हमेशा बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता दी। बारिश हो या धूप, वे रोज समय पर स्कूल पहुंचे।”
भव्य समारोह में हुआ सम्मान
विद्यालय परिसर में आयोजित विदाई समारोह में:
- शॉल और श्रीफल से सम्मान
- माल्यार्पण
- स्मृति चिन्ह भेंट
- छात्रों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम
- भावुक भाषण
जब छात्रों ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। कई छात्रों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं।
गांव बोला – “आप हमारे दिलों में हमेशा रहेंगे”
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में जहां लोग नौकरी को सिर्फ वेतन से जोड़ते हैं, वहीं अशोक श्रीवास्त्री जी ने शिक्षा को सेवा और समाज निर्माण का माध्यम बनाया।
विद्यालय परिवार ने उन्हें “जीवन पर्यंत प्रेरणा स्रोत” की उपाधि दी।
📚 शिक्षक का संदेश
सेवानिवृत्ति के अवसर पर उन्होंने कहा:
“मैंने हमेशा बच्चों को अपने परिवार की तरह माना। अगर मेरे पढ़ाए छात्र आगे बढ़ रहे हैं, तो यही मेरी सबसे बड़ी कमाई है।”
उनके इस संदेश ने सभी के दिलों को छू लिया।
क्यों खास है यह विदाई?
आज के दौर में किसी शिक्षक को ऐसा जनसम्मान मिलना दुर्लभ है।
यह विदाई साबित करती है कि सच्ची निष्ठा और समर्पण का सम्मान समाज हमेशा करता है।
समाज के लिए मिसाल
यह आयोजन केवल एक शिक्षक की रिटायरमेंट नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत मिसाल बन गया।
सुकतरा गांव ने दिखा दिया कि असली नायक वही हैं जो चुपचाप समाज का भविष्य गढ़ते हैं।

