सर्वेयर साइडलाइन, वेयरहाउस मालिक ऑन ड्यूटी!” सिवनी में धान खरीदी का खेल: शासन के नियम ताक पर, गोदाम मालिक बने खुद के जज और जूरी

"Surveyors sidelined, warehouse owners on duty!" The paddy procurement scam in Seoni: Government rules ignored, warehouse owners become their own judges and jury.

SHUBHAM SHARMA
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Shubham Sharma – Indian Journalist & Media Personality | Shubham Sharma is a renowned Indian journalist and media personality. He is the Director of Khabar Arena...
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सिवनी में धान खरीदी का खेल: शासन के नियम ताक पर, गोदाम मालिक बने खुद के जज और जूरी | सिवनी जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी अब अपने अंतिम चरण में है, लेकिन इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया पर वेयरहाउस मालिकों की मनमानी भारी पड़ती नजर आ रही है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि शासन द्वारा नियुक्त अधिकृत सर्वेयर की भूमिका लगभग खत्म होती जा रही है और उनकी जगह वेयरहाउस मालिक व उनके परिवार के सदस्य खुद ही “सर्वेयर” बनकर फैसले सुना रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, सर्वेयर द्वारा गुणवत्ता जांच कर “पास” की गई धान की बोरियों को भी वेयरहाउस स्तर पर अलग कर दिया जा रहा है। इससे न केवल धान खरीदी प्रभारी परेशान हो रहे हैं, बल्कि समितियों पर अनावश्यक दबाव और ब्लैकमेलिंग जैसी स्थिति भी बनती जा रही है। यह पूरा मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

जब सर्वेयर की मुहर भी बेअसर हो जाए

शासन के दिशा-निर्देश स्पष्ट हैं कि धान की गुणवत्ता की अंतिम जांच अधिकृत सर्वेयर द्वारा की जाएगी। सर्वेयर की रिपोर्ट के बाद ही धान का भंडारण केंद्रों में किया जाना है। लेकिन सिवनी जिले में हालात उलट हैं।

यहां वेयरहाउस मालिक और उनके परिजन खुद ही गुणवत्ता जांच के नाम पर धान को रिजेक्ट कर रहे हैं, वह भी तब जब अधिकृत सर्वेयर पहले ही उसे मानक के अनुरूप घोषित कर चुका हो। यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि धान खरीदी प्रभारी और समितियों के लिए गंभीर परेशानी का कारण भी बन रहा है।

गोदामों के बाहर “रिजेक्ट धान” की कतार

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिले के कई गोदामों के बाहर सर्वेयर द्वारा रिजेक्ट की गई धान की बोरियां लंबे समय से पड़ी हुई हैं।

हैरानी की बात यह है कि धान खरीदी समितियों को अब तक यह भी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई कि उनकी बोरियां रिजेक्ट कर दी गई हैं।

इससे साफ संकेत मिलता है कि प्रशासन की नाक के नीचे वेयरहाउस मालिक किस तरह अपने तरीके से सिस्टम चला रहे हैं। अंतिम समय में इसका खामियाजा सीधे धान खरीदी प्रभारी और समितियों को भुगतना पड़ सकता है।

ब्लैकमेलिंग का खतरा, प्रशासन मौन

धान खरीदी प्रभारी अब यह मानने लगे हैं कि उन्हें जानबूझकर मानसिक दबाव में रखा जा रहा है।

कई मामलों में सही और मानक धान को भी गलत साबित करने के प्रयास हो रहे हैं, ताकि केंद्र प्रभारियों को ब्लैकमेल किया जा सके।

जबकि नियम साफ कहते हैं कि वेयरहाउस मालिक या उनके परिवार के सदस्य को परिवहन में आए ट्रकों की परखी लगाकर जांच करने का कोई अधिकार नहीं है। फिर भी सिवनी जिले की उपार्जन समिति की आंखों के सामने यह सब खुलेआम चल रहा है।

कलेक्टर के लिए बड़ी चुनौती

सिवनी जैसे संवेदनशील जिले में इस तरह का खुला खेल जिला प्रशासन और विशेष रूप से जिला कलेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

यदि समय रहते गोदामों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह मामला बड़े घोटाले का रूप भी ले सकता है।

“गोदामों की जांच हो तो काला सच सामने आएगा”

स्थानीय लोगों और धान खरीदी से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अगर सभी गोदामों की जमीनी स्तर पर जांच हो जाए, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

राजनीतिक प्रभाव से जुड़े कुछ वेयरहाउस मालिकों पर आरोप है कि उन्होंने सर्वेयर की अनदेखी कर अमानक धान का भंडारण भी अपने गोदामों में कर रखा है।

जब इस विषय में एक गोदाम मालिक से बात की गई तो उन्होंने माना कि

“मिलर्स को धान देने के समय गुणवत्ता हमारी जिम्मेदारी होती है। सर्वेयर के अलावा हम भी धान की जांच करते हैं।”

यह बयान ही साबित करता है कि अब सर्वेयर की भूमिका को वेयरहाउस मालिक खुद ही चुनौती दे रहे हैं।

सवाल जो जवाब मांगते हैं

  • क्या शासन द्वारा नियुक्त सर्वेयर सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं?
  • क्या वेयरहाउस मालिकों को कानून से ऊपर मान लिया गया है?
  • क्या प्रशासन इस मनमानी पर लगाम लगाएगा या फिर आंखें मूंदे रहेगा?

जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिलेगा, तब तक धान खरीदी व्यवस्था पर सवालिया निशान बना रहेगा।

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Shubham Sharma – Indian Journalist & Media Personality | Shubham Sharma is a renowned Indian journalist and media personality. He is the Director of Khabar Arena Media & Network Pvt. Ltd. and the Founder of Khabar Satta, a leading news website established in 2017. With extensive experience in digital journalism, he has made a significant impact in the Indian media industry.
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