St. Francis School Seoni: शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूल से एक चौंकाने वाली और शर्मनाक घटना सामने आई है, जिसने न केवल अभिभावकों को बल्कि पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। सेंट फ्रांसिस स्कूल सिवनी (St. Francis School Seoni) में छात्र के माथे पर तिलक लगाने को लेकर शिक्षक द्वारा की गई पिटाई का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है और स्कूल प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सेंट फ्रांसिस स्कूल सिवनी (St. Francis School Seoni) में कक्षा सातवीं के एक छात्र के साथ यह घटना हुई। छात्र रोज़ की तरह पढ़ने स्कूल पहुंचा था, लेकिन उसके माथे पर तिलक लगा हुआ था। इसी बात पर खेल शिक्षक फिरोज खान ने आपत्ति जताई और छात्र के साथ मारपीट कर दी। अचानक हुई इस घटना से छात्र घबरा गया और घर पहुंचने पर उसने अपने परिजनों को पूरी बात बताई।
घटना की जानकारी मिलते ही छात्र के पिता, जो पेशे से अधिवक्ता बताए जा रहे हैं, तुरंत कोतवाली पहुंचे और शिक्षक के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आज भी बच्चों को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ स्कूल जाने की आज़ादी नहीं है? तिलक भारतीय संस्कृति और परंपरा का प्रतीक माना जाता है, ऐसे में इसे लेकर हिंसा करना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि सामाजिक रूप से भी बेहद निंदनीय है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्कूल के खिलाफ पहले भी कई बार शिकायतें सामने आ चुकी हैं। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन मनमानी करता है और छात्रों पर अनावश्यक प्रतिबंध लगाता है। कुछ अभिभावकों ने यह भी बताया कि फीस को लेकर पारदर्शिता नहीं है और स्कूल में कई तरह की अनियमितताएं लंबे समय से चल रही हैं।
घटना के बाद से अभिभावकों में गुस्सा साफ देखा जा सकता है। कई लोगों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है और जिला प्रशासन से स्कूल की मान्यता और प्रबंधन की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों का काम बच्चों को ज्ञान देने के साथ-साथ उनके संस्कारों और आत्मविश्वास को मजबूत करना होता है, न कि उनकी पहचान को दबाना। यदि किसी बच्चे की वेशभूषा या धार्मिक प्रतीक से किसी को आपत्ति है, तो उसका समाधान संवाद से होना चाहिए, न कि हिंसा से।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और स्कूल प्रबंधन से भी जवाब तलब किया जा सकता है। यह घटना न सिर्फ एक छात्र के साथ हुई ज्यादती है, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र के लिए चेतावनी है कि बच्चों के अधिकारों और उनकी गरिमा की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

