Seoni Dhan Kharidi News: सिवनी। खरीफ उपार्जन 2025-26 के बीच सिवनी जिले में धान की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भंडारण केंद्रों पर अमानक (नॉन-FAq) धान के पहुंचने और उसे जबरन स्वीकार कराने के आरोप सामने आने लगे हैं। नियमों के तहत रिजेक्ट की जा रही धान की बोरियों को लेकर न सिर्फ विवाद गहराया है, बल्कि राजनीतिक दबाव और भारी हस्तक्षेप के चलते कुछ भंडारण केंद्रों में कार्यरत सर्वेयरों पर कार्रवाई तक हो चुकी है।
सूत्रों के अनुसार, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा खरीफ उपार्जन के लिए सर्वेयर और उनके मार्गदर्शन हेतु सुपरवाइजर नियुक्त किए गए थे, ताकि खरीदी केंद्रों पर केवल पूरी तरह सूखी, FAq गुणवत्ता वाली धान ही स्वीकार हो।
नियमों के मुताबिक धान में नमी, मिट्टी, कुस्सी, सिकुड़े, टूटे, बदरंग और क्षतिग्रस्त दानों की मात्रा निर्धारित सीमा से कम होना अनिवार्य है। बावजूद इसके, अमानक धान को दबाव बनाकर भंडारण केंद्रों में थोपने के प्रयासों की शिकायतें बढ़ रही हैं।
सर्वेयर हटे, निष्पक्षता पर सवाल
विवाद के बीच कुछ सर्वेयरों को भंडारण केंद्रों से हटाया गया है। हटाए गए सर्वेयरों ने सुपरवाइजर को आवेदन देकर अपना पक्ष भी रखा, लेकिन निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर जिला स्तर पर हस्तक्षेप के आरोप सामने आए हैं। ज़मीनी सच्चाई यह भी बताई जा रही है कि कुछ केंद्रों पर बाहर से लाई गई अमानक धान को स्वीकार कराने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे गुणवत्ता नियंत्रण की पूरी प्रक्रिया सवालों में है।
उत्पादन कम, पंजीयन पूरा करने बाहर से धान
इस वर्ष किसानों के धान उत्पादन में पिछले सत्र की तुलना में भारी कमी दर्ज की गई है। ऐसे में पंजीयन लक्ष्य पूरे करने के लिए व्यापारी वर्ग द्वारा बाहर से पुरानी/अमानक धान मंगाकर खरीदी केंद्रों में डाली जा रही है। यही वजह है कि यह धान जांच में रिजेक्ट श्रेणी में आ रही है।
कई खरीदी केंद्रों से यह भी सामने आया है कि धान की बोरियां घर से भरकर लाई जा रही हैं, और केंद्रों पर बिना विधिवत भराई-तुलाई के सिलाई तक की जा रही है। ऐसी प्रक्रियाओं में FAq मानकों का पालन होना लगभग असंभव है—जिसका सीधा असर गुणवत्ता पर पड़ता है।
कमीशन की दौड़ में गुणवत्ता से समझौता?
आरोप यह भी हैं कि कमीशन राशि बढ़ाने के चक्कर में कुछ खरीदी प्रभारी, धान व्यापार से जुड़े लोगों को अनुचित सुविधाएं देकर उन्हें आकर्षित कर रहे हैं। इसका खामियाजा मजदूर हम्मालों के अधिकारों पर पड़ रहा है, वहीं शासन से मिलने वाली प्रशासनिक राशि के दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी सुविधाएं अमानक धान को बढ़ावा देती हैं—जिस पर तत्काल ध्यान और सख्त कार्रवाई जरूरी है।
यदि गुणवत्ता नियंत्रण में ढील और दबाव की राजनीति पर रोक नहीं लगी, तो न केवल सरकारी भंडारण की साख पर असर पड़ेगा, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं—दोनों का नुकसान तय है। जिले में पारदर्शी जांच, निष्पक्ष कार्रवाई और FAq मानकों का सख्त पालन ही इस संकट का समाधान है।

