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वन्यजीवों की मौत पर WWF की चुप्पी: क्या सिवनी में सिर्फ दिखावे तक सीमित है संरक्षण का प्रयास?

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सिवनी, मध्य प्रदेश। जंगलों की चुप्पी कई बार चीख बन जाती है, लेकिन जब यह चीख भी अनसुनी रह जाए तो सवाल उठते हैं – और इस बार सवाल उठ रहे हैं एक ऐसी संस्था पर, जो खुद को प्राकृतिक संरक्षण की वैश्विक प्रहरी मानती है। जी हां, बात हो रही है वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) की, जिसकी सिवनी ज़िले में भूमिका पर अब गहराते संदेह की छाया पड़ने लगी है।

दावों से हटकर हकीकत: WWF की चुप्पी पर सवाल

सिवनी के जंगलों में बीते कुछ वर्षों में बाघ, तेंदुआ, हिरण और अन्य वन्य प्राणियों की संदिग्ध या दुर्भाग्यपूर्ण मौतें लगातार सुर्खियों में रहीं। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि WWF जैसी बड़ी संस्था, जो वन्यजीवों की सुरक्षा को अपनी पहली प्राथमिकता बताती है, इन घटनाओं पर मौन साधे हुए नजर आ रही है।

पिछले दिनों पेंच टाइगर रिजर्व में चुनिंदा मीडियाकर्मियों के लिए आयोजित एक कार्यशाला ने इस मौन को और मुखर बना दिया। कार्यशाला में पेंच टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर रजनीश सिंह और WWF के प्रतिनिधि मौजूद थे, लेकिन चर्चा उन मुद्दों पर कम और छवि निर्माण पर ज़्यादा केंद्रित रही।

जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ता WWF?

स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, WWF अब संरक्षण कार्यों से ज़्यादा वन विभाग के साथ सांठगांठ और सुविधाभोगी रवैये में उलझा दिखाई देता है। सवाल उठ रहे हैं कि जब सिवनी में वन्यजीव खुले कुओं में गिरकर मर रहे हैं, जब तस्करी और शिकार की घटनाएं हो रही हैं – तब WWF कहां है?

ग्राम हरदुआ में बाघिन और सूअर के खुले कुएं में गिरने की घटना अभी भी लोगों के ज़ेहन में ताज़ा है। स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की मदद से रेस्क्यू तो हो गया, लेकिन सवाल यह है – क्या यह हादसा रोका नहीं जा सकता था?

बाघ की मौत: जवाब कौन देगा?

सबसे सनसनीखेज मामला 19 दिसंबर 2024 का है, जब ग्राम भीमलटोला के पास एक बाघ खुले कुएं में गिरकर मौत के हवाले हो गया। WWF से अब तक यह नहीं बताया गया कि इस घटना में किसकी जवाबदेही तय की गई? इसके अलावा 16 दिसंबर को एक और बाघ की मौत और 13 व 17 नवंबर को दो शावकों के शव मिलने की घटनाएं भी WWF की निष्क्रियता को उजागर करती हैं।

इन घटनाओं के बाद WWF से यह पूछा जा रहा है – “आपने इन प्राणियों की जान बचाने के लिए क्या किया?”

कार्यशालाएं बनाम ज़मीनी हकीकत

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि WWF अपने मूल उद्देश्य से भटक चुका है। बजाय इसके कि वह मृत्यु के कारणों की जांच करे, संरक्षण नीति बनाए या जनजागरूकता फैलाए, वह कार्यशालाओं और फोटो सेशन तक सीमित हो गया है। कार्यशालाएं यदि केवल दिखावा बन जाएं, तो उनका उद्देश्य कहीं खो जाता है।

स्थानीयों की मांग: जवाब चाहिए, कार्रवाई भी

सिवनी के नागरिक, पत्रकार, और पर्यावरण कार्यकर्ता अब WWF से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। यह मांग सिर्फ संस्था की नीयत पर नहीं, बल्कि पूरे वन्यजीव संरक्षण मॉडल पर सवाल खड़ा कर रही है।

जब जंगल की निगरानी करने वाला ही आंखें मूंद ले, तो शिकारी नहीं – सिस्टम जिम्मेदार होता है।

अब वक्त है कि WWF और वन विभाग मिलकर केवल छवि सुधार की कोशिश न करें, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं।

WWF की भूमिका पर उठते ये सवाल सिर्फ सिवनी के जंगलों तक सीमित नहीं हैं, ये उस सोच पर भी प्रहार करते हैं जो संस्थाओं को दिखावे की दिशा में ढकेल रही है। यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं हुई, तो आने वाला कल इन जंगलों और इनके निवासियों के लिए और भी भयावह हो सकता है।

SHUBHAM SHARMA
SHUBHAM SHARMAhttps://shubham.khabarsatta.com
Shubham Sharma – Indian Journalist & Media Personality | Shubham Sharma is a renowned Indian journalist and media personality. He is the Director of Khabar Arena Media & Network Pvt. Ltd. and the Founder of Khabar Satta, a leading news website established in 2017. With extensive experience in digital journalism, he has made a significant impact in the Indian media industry.

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