सिवनी (मध्य प्रदेश): एक ओर सरकार आपातकालीन सेवाओं को प्राथमिकता देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। सिवनी ज़िले के खवासा टोल प्लाज़ा पर घटी एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे ज़िले को झकझोर कर रख दिया है। टोल कर्मियों की कथित गुंडागर्दी और लापरवाही के चलते एंबुलेंस को जबरन आधे घंटे तक रोके रखा गया, और इसी बीच इलाज के अभाव में एक मरीज ने दम तोड़ दिया।
❝टोल पर मची अफरा-तफरी, ड्राइवर से धक्कामुक्की❞
मृतक के परिजनों ने रोते हुए जो आपबीती सुनाई, वह किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को अंदर से हिला दे। उनका कहना है कि जब एंबुलेंस खवासा टोल नाके पर पहुंची, तो टोल कर्मियों ने उसे रोक दिया।
टोल पर मौजूद कर्मचारियों ने न सिर्फ एंबुलेंस को रोका, बल्कि उसके ड्राइवर से बदसलूकी और मारपीट भी की। इस दौरान मरीज अंदर दर्द से तड़पता रहा, लेकिन टोल नाके की बेरुखी और अमानवीयता के सामने उसकी सांसें हार गईं।
“अगर बस कुछ मिनट पहले अस्पताल पहुंच जाते, तो शायद जान बच जाती…”
मरीज के बेटे की ये बातें आंखें नम कर देती हैं। “पिताजी को सीने में तेज दर्द था। हमने तत्काल एंबुलेंस बुलाई और सीधे अस्पताल निकल पड़े। लेकिन टोल वालों ने मानो हमारी किस्मत ही रोक दी। अगर वो नहीं रोकते, तो शायद आज पिताजी हमारे साथ होते।”
मृतक था कलेक्टर कार्यालय का पूर्व कर्मचारी
जानकारी के अनुसार, मृतक व्यक्ति जिला कलेक्टर कार्यालय में चपरासी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। अब उनकी असामयिक मौत ने पूरे परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। एकमात्र कमाने वाले सदस्य के चले जाने से पूरा परिवार बेसहारा हो गया है।
FIR दर्ज, चार टोलकर्मियों के खिलाफ शिकायत
घटना के बाद परिजनों ने कुरई थाने में चार टोलकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन जनता का गुस्सा अब चरम पर है। सोशल मीडिया से लेकर ज़िले के कोने-कोने तक एक ही सवाल गूंज रहा है —
“आपातकालीन सेवा को भी नहीं बख्शा गया, अब और क्या बाकी है?”
टोल प्लाज़ा पर पहले भी हो चुके हैं ऐसे मामले
यह कोई पहली बार नहीं है जब टोल कर्मियों की मनमानी जानलेवा साबित हुई हो। पहले भी देशभर में कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड जैसी सेवाओं को रोका गया और उसका खामियाजा किसी की जान देकर चुकाना पड़ा। सवाल यही है कि क्या टोल कर्मचारियों को अब भी कानून और संवेदनशीलता की समझ नहीं?
जनता की मांग: जिम्मेदारों पर हो कड़ी कार्रवाई
लोगों का साफ कहना है कि सिर्फ जांच से बात नहीं बनेगी, सख्त और सार्वजनिक कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई और जिंदगी इस तरह की लापरवाही का शिकार न बने। शासन और प्रशासन को अब यह तय करना होगा कि टोल प्लाज़ा सिर्फ पैसे वसूलने की मशीन न बनें, बल्कि इंसानियत और कर्तव्य की पहचान भी बनें।