क्या POP प्रतिमाओं पर लगेगा प्रतिबंध ?

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कलाकारों के हुनर को बर्बाद कर रहा पीओपी

सिवनी । विघ्नहर्ता, बुद्धि विनायक भगवान गणेश का पूजन अगले माह की शुरुआत में प्रांरभ होने वाला है। जिले में गणपति प्रतिमा स्थापित किए जाने हेतु तैयारियां आरंभ हो गई हैं। जिले में भगवान गणेश की लगभग एक हजार से ज्यादा प्रतिमाएं लोगों के घरों और सार्वजनिक पण्डालों में स्थापित की जाती हैं।

ऐसे में मूर्तिकारों ने महीना भर पहले से ही उत्सव की तैयारी शुरु कर दी है। वहीं प्रशासन ने अबतक पीओपी याने प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाओं पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। ऐसे में आशंका है कि आखिरी वक्त में फिर पीओपी की प्रतिमाएं शहर में आएंगी और जल स्त्रोत प्रदूषण का शिकार होंगे।

तहसील मुख्यालय केवलारी में भी प्रतिमाओं के निर्माण का सिलसिला शुरु हो गया है। बाजार वार्ड में रहने वाले कुम्हार परिवारों ने काम शुरु कर दिया है और इन दिनों प्रतिमाओं का आकार दिया जा रहा है। कलाकारों का कहना है कि बड़ी प्रतिमाओं के निर्माण में कम से कम एक पखवाड़े का वक्त लगता है।

मूर्तिकारों ने बताया कि बड़ी प्रतिमाएं ऑर्डर पर ही बनाई जाती हैं। वहीं घरों में स्थापना के लिए छोटी प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं। क्षेत्र में कई परिवार पिछली कई पीढिय़ों से प्रतिमाओं का निर्माण करते चले आ रहे हैं। गणपति प्रतिमाओं के निर्माण के बाद दुर्गा प्रतिमाओं का निर्माण भी शुरु कर दिया जाएगा।

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मूर्तिकार दिनेश ठाकुर का कहना है कि इस साल मंहगाई में काफी इजाफा हुआ है। गणपति प्रतिमा निर्माण के लिए मिट्टी उगली से आती है। यह मिट्टी पिछले साल मात्र ढाई हजार रुपए प्रति ट्राली आती थी वह अब साढ़े तीन हजार रुपए में आने लगी है। इसके साथ ही लकड़ी के फट्टे, भूसा, पैरा आदि के दामों में भी इजाफा हुआ है। प्रतिमाओं का रंग अमरावती और नागपुर से आता है, उसके दामों में भी इजाफा हुआ है लेकिन ग्राहक पिछले साल के दामों में ही प्रतिमाओं की मांग करता है।

प्लास्टर ऑफ पेरिस या पीओपी मूर्तिकला को तबाह कर रहा है। मूर्तिकार दिनेश ठाकुर का कहना है कि पीओपी की एक बोरी से दो तीन प्रतिमाओं का निर्माण हो जाता है। इसके साथ ही उसमें सांचे और सस्ते सिंथेटिक रंगों के कारण चमक भी आ जाती है। कलाकार मिट्टी की मूर्ति में अपना हुनर दिखाता है। ऐसे में पीओपी कला को मार रहा है। पीओपी की सस्ती, हल्की मूर्तियों के कारण लोग उनकी ओर आकर्षित होते हैं।

पीओपी पर लगे प्रतिबंध : मूर्तिकार दिनेश ठाकुर , विधान ठाकुर और साथियों का कहना है कि जहां पीओपी की एक मूर्ति चंद मिनट में तैयार हो जाती है वहीं मिट्टी से मूर्ति तैयार करने में अच्छा खासा पसीना बहाना पड़ता है। मिट्टी लाने से लेकर मूर्ति भेजने तक में लोग लगते हैं। आजकर मजदूर भी मंहगे मिलते हैं।

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मूर्तिकारों का कहना है कि पीओपी की मूर्ति कई महीनों तक नहीं घुलती है। इससे जलाशय दूषित होते हैं। प्रशासन हर साल आखिरी दिनों में पीओपी पर प्रतिबंध की घोषणा करता है लेकिन तब तक मूर्तियां लोगों के घरों तक पहुंच जाती हैं। ऐसे में समय रहते प्रशासन को प्रतिबंध का ऐलान कर कार्रवाई शुरु कर देनी चाहिए। जिससे लोग जागरूक हों और मूर्तिकारों की कला का भी सम्मान हो।

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