सिवनी (धारना कलां): प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और ग्रामीणों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के दावे भले ही बड़े-बड़े किए जाते हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। सिवनी जिले की ग्राम पंचायत धारना कलां में इन दिनों अव्यवस्था और लापरवाही का आलम ऐसा है कि पंचायत भवन में अक्सर ताला लटका रहता है।
सचिव सिवनी से करते हैं अपडाउन, पंचायत रहती है बंद
जानकारी के अनुसार, पंचायत में पदस्थ सचिव महोदय सिवनी शहर से अपडाउन करते हैं, जिसके कारण पंचायत कार्यालय नियमित रूप से नहीं खुल पाता।
ग्रामीणों का कहना है कि:
- कई बार जरूरी कार्यों के लिए पंचायत पहुंचने पर कार्यालय बंद मिलता है
- प्रमाण पत्र, योजनाओं के आवेदन और अन्य कामों के लिए लोगों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं
- समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है
5–6 कर्मचारी होने के बावजूद नहीं मिल रही सुविधा
चौंकाने वाली बात यह है कि ग्राम पंचायत में 5 से 6 कर्मचारी पदस्थ हैं और नियमित वेतन भी ले रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार:
- कर्मचारियों की मौजूदगी कागजों तक सीमित है
- समस्याओं के समाधान में कोई गंभीरता नहीं दिखाई देती
- पंचायत व्यवस्था पूरी तरह लचर नजर आ रही है
बिल भुगतान में तेजी, समस्याओं में देरी
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि जहां एक ओर विकास कार्यों के बिलों के भुगतान में तेजी दिखाई जाती है, वहीं दूसरी ओर आम लोगों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जाता है।
बताया जा रहा है कि:
- सचिव के हस्ताक्षर से बिलों का भुगतान समय पर हो जाता है
- लेकिन ग्रामीणों के जरूरी कामों में देरी या अनदेखी होती है
यह स्थिति प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
ग्रामीणों में नाराजगी, कार्रवाई की मांग
लगातार हो रही इस लापरवाही से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत करने को मजबूर होंगे।
👉 ग्रामीणों की मुख्य मांगें:
- पंचायत कार्यालय नियमित रूप से खुले
- सचिव और कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए
- आम जनता के कार्यों को प्राथमिकता दी जाए
क्या पंचायत सिर्फ कागजों तक सीमित?
धारना कलां पंचायत की यह स्थिति बताती है कि योजनाओं और दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रशासनिक ढांचा कमजोर पड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक संज्ञान लेता है और क्या ग्रामीणों को उनकी समस्याओं से राहत मिल पाती है या नहीं।

