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सुनिए सुनिए कलेक्टर महोदया और DEO साहब: इतना संवेदनहीन मत बनिए, सिवनी के स्कूली बच्चों पर रहम कीजिए

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सिवनी (Seoni News): मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में गर्मी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। दिन-ब-दिन तापमान बढ़ता जा रहा है जो कि 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की कगार पर है। यह स्थिति न सिर्फ आम नागरिकों बल्कि मासूम स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।

वर्तमान में जिले के कई हिस्सों में जल संकट की स्थिति बनी हुई है। और इसके बावजूद, अब तक स्चूलों के समय ना तो परिवर्तन किया गया है और ना ही छुट्टियों का एलान किया गया है जो कि सिवनी जिला प्रशासन और सिवनी कलेक्टर की संवेदनहीनता को दर्शाती है।

प्रशासन की भूमिका पर उठते सवाल

जैसे-जैसे पारा चढ़ता जा रहा है, सड़कों पर गर्मी की लपटें चल रही हैं, लेकिन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अब भी इस झुलसती गर्मी में शिक्षा ग्रहण करने के लिए मजबूर हैं। क्या यही प्रशासन की जवाबदेही है? कलेक्टर महोदय, यह स्थिति अब सामान्य गर्मी से बढ़कर जनस्वास्थ्य संकट बन चुकी है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि जिले को इस हालात तक पहुंचाने में कहीं न कहीं प्रशासन की लापरवाही भी जिम्मेदार है।

बच्चों पर पड़ रहे भयंकर असर

इतनी गर्मी में बच्चों का स्कूल जाना और स्कूल से लौटना, क्लासरूम में बैठना, और गर्म हवाओं से जूझना, मानवता के खिलाफ एक तरह का अपराध प्रतीत होता है। सिवनी जिले के कई सरकारी स्कूलों में न तो पर्याप्त पंखे हैं, न ही शुद्ध पेयजल, और न ही बच्चों के लिए तापमान से बचने के उपाय। कई सरकारी स्कूल तो ऐसे है जो कच्चे है.

बढ़ती गर्मी में बच्चों में निम्नलिखित लक्षण देखने को मिल रहे हैं:

  • डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण)
  • हीट स्ट्रोक (लू लगना)
  • अत्यधिक थकान और कमजोरी
  • चक्कर और सिरदर्द
  • स्किन एलर्जी और जलन

यह हालात किसी भी जिम्मेदार प्रशासन के लिए चेतावनी से कम नहीं है।

एमपी के कई जिलों में स्कूल के समय में हुआ परिवर्तन

जहां एक ओर मध्यप्रदेश एक कई जिलों में भीषण गर्मी क इवाझ से स्चूलों के समय में परिवर्तन कर दिया गया है जिससे बच्चे सुबह सुबह स्कूल पहुंचकर धुप के तेज होने तापमान बढ़ने से पहले वापस अपने घर लौट सके और भीषण गर्मी से होने वाली समस्याओं से बाख सकें सिवनी जिला अब भी इस निर्णय से वंचित है। यह साफ़ दर्शाता है कि यहां के प्रशासनिक निर्णयों में लचीलापन और मानवीयता की कमी है।

जनता की मांग — सभी स्कूलों को 30 जून तक किया जाए बंद

सिवनी जिले के मासूम बच्चों के माता पिता कलेक्टर महोदय, जिला शिक्षा अधिकारी की संवेदनहीनता को समझ पा रहे है. मासूम बच्चों के माता पिता के साथ साथ खबर सत्ता सिवनी कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारी से मांग करते है कि सिवनी जिले के सभी सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों को तत्काल प्रभाव से 30 जून 2025 तक बंद किया जाए। यह निर्णय न केवल बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि यह प्रशासन की संवेदनशीलता का भी प्रतीक होगा।

जिला शिक्षाधिकारी और स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी

जिला शिक्षाधिकारी और सभी विद्यालय प्रबंधन समितियों की यह सांवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा करें। अगर किसी स्कूल में बच्चा हीट स्ट्रोक का शिकार होता है, तो इसकी सीधी ज़िम्मेदारी प्रशासन और स्कूल प्रबंधन पर होगी।

जल संकट की ओर बढ़ता सिवनी — क्या है प्रशासन का जवाब?

सिवनी में पेयजल स्रोत सूख चुके हैं। हैंडपंपों और नलों में पानी नहीं आ रहा, टैंकरों से जल आपूर्ति हो रही है। ऐसे में स्कूलों में पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना लगभग असंभव है। बच्चों को घर से पानी लाना पड़ता है, जो तेज़ गर्मी में और ज़्यादा खतरनाक हो सकता है।

बच्चों के भविष्य की रक्षा हमारा नैतिक कर्तव्य

हमारी अपील है कि कलेक्टर महोदय, आप अपनी प्रशासनिक शक्ति का प्रयोग करते हुए जनहित में शीघ्र निर्णय लें। यह केवल एक छुट्टी की मांग नहीं है, यह बच्चों की जान बचाने की मांग है। सिवनी की जनता, अभिभावक और सामाजिक कार्यकर्ता अब इस मुद्दे को लेकर जागरूक हो चुके हैं, और वे चाहते हैं कि जल्द से जल्द एक संवेदनशील और कारगर कदम उठाया जाए।

प्रशासन को अब मौन नहीं रहना चाहिए

सिवनी की गर्मी अब जानलेवा हो चुकी है। बच्चों को इसकी चपेट में आने से रोकना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। हम प्रशासन से यह अपील करते हैं कि वह इस गंभीर स्थिति को समझे और तत्काल छुट्टियों की घोषणा कर बच्चों को राहत दे। अगर यह कदम अब नहीं उठाया गया, तो प्रशासन को भविष्य में इसके गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।

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